BP हाई और लो होने पर क्या करें? ब्लड प्रेशर बढ़ने और घटने की स्थिति में जरूरी सावधानियां

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ब्लड प्रेशर यानी रक्तचाप शरीर में रक्त के प्रवाह से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतक है। जब रक्तचाप सामान्य सीमा से लगातार ऊपर रहता है तो इसे हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) कहा जाता है, जबकि बहुत कम रक्तचाप को लो ब्लड प्रेशर (हाइपोटेंशन) कहा जाता है। दोनों स्थितियों में लक्षण और कारण अलग हो सकते हैं, इसलिए केवल एक बार की रीडिंग देखकर घबराना या स्वयं दवा लेना सही नहीं है।

ब्लड प्रेशर क्या होता है?

ब्लड प्रेशर की रीडिंग दो संख्याओं में लिखी जाती है, जैसे 120/80 mmHg। ऊपर की संख्या सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर और नीचे की संख्या डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर होती है। रक्तचाप दिनभर गतिविधि, तनाव और अन्य परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है।

आम तौर पर 90/60 mmHg से कम रीडिंग को लो ब्लड प्रेशर माना जाता है, हालांकि यदि किसी व्यक्ति में कोई लक्षण नहीं हैं तो कम रक्तचाप हमेशा बीमारी का संकेत नहीं होता। दूसरी ओर, लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

BP हाई होने पर क्या करें?

हाई BP की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कई लोगों में इसके स्पष्ट लक्षण नहीं होते। इसी कारण इसे कई बार “साइलेंट” समस्या कहा जाता है। लंबे समय तक अनियंत्रित हाई BP हृदय, मस्तिष्क, किडनी और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है तथा हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकता है।

अगर घर पर BP की रीडिंग सामान्य से अधिक आती है, तो सबसे पहले शांत होकर कुछ मिनट आराम करें और सही तरीके से दोबारा BP मापें। मापते समय कुर्सी पर सीधे बैठें, पैर जमीन पर रखें, हाथ को आराम दें और जांच के दौरान बात न करें। कुछ मिनट के अंतर से दूसरी रीडिंग लेना उपयोगी हो सकता है।

यदि BP बार-बार बढ़ा हुआ आ रहा है, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। केवल एक रीडिंग के आधार पर खुद से BP की दवा शुरू करना, बंद करना या उसकी मात्रा बदलना उचित नहीं है।

हाई BP को नियंत्रित रखने के उपाय

हाई BP को नियंत्रित करने में जीवनशैली की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भोजन में नमक की मात्रा कम रखना, संतुलित आहार लेना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, धूम्रपान से बचना और अत्यधिक कैफीन तथा शराब से बचना मददगार हो सकता है। डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार दवाएं भी लिख सकते हैं।

यदि किसी व्यक्ति को पहले से BP की दवा दी गई है, तो उसे डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए। BP सामान्य आने पर भी दवा अपने आप बंद नहीं करनी चाहिए।

BP बहुत ज्यादा हो जाए तो?

यदि BP बहुत अधिक आता है, विशेषकर 180/120 mmHg या उससे ऊपर, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय सलाह जरूरी है। यदि इसके साथ सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, अचानक कमजोरी, बोलने में परेशानी, भ्रम या अन्य गंभीर लक्षण हों तो तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। बहुत अधिक BP के साथ गंभीर लक्षण होने पर अस्पताल जाने में देरी नहीं करनी चाहिए।

BP लो होने पर क्या करें?

लो BP में चक्कर, कमजोरी, धुंधला दिखाई देना, मतली, भ्रम या बेहोशी जैसे लक्षण हो सकते हैं। 90/60 mmHg से कम BP को सामान्यतः लो BP कहा जाता है, लेकिन इसका महत्व व्यक्ति के लक्षण और परिस्थिति पर भी निर्भर करता है।

अगर अचानक चक्कर या कमजोरी महसूस हो तो तुरंत बैठ जाएं या सुरक्षित जगह पर लेट जाएं। अचानक खड़े होने से बचें। पर्याप्त पानी पीना भी मदद कर सकता है, खासकर जब पानी की कमी इसकी वजह हो। बार-बार ऐसे लक्षण होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

अचानक खड़े होने पर चक्कर क्यों आता है?

कुछ लोगों में बैठने या लेटने के बाद अचानक खड़े होने पर रक्तचाप गिर सकता है। इसे पोस्टुरल या ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन कहा जाता है। इसलिए बिस्तर से उठते समय पहले कुछ देर बैठना और फिर धीरे-धीरे खड़ा होना उपयोगी हो सकता है।

लो BP के संभावित कारण

लो BP कई कारणों से हो सकता है। शरीर में पानी की कमी, कुछ दवाएं, कुछ चिकित्सकीय स्थितियां और अचानक शरीर की स्थिति बदलना इसके कारणों में शामिल हो सकते हैं। इसलिए लगातार कम BP रहने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय कारण की जांच कराना जरूरी है।

विशेष रूप से यदि बार-बार बेहोशी, बहुत अधिक चक्कर, कमजोरी या भ्रम की स्थिति हो रही है तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

BP मापते समय इन बातों का रखें ध्यान

घर पर BP मापते समय सही तकनीक अपनाना बहुत जरूरी है। कुछ मिनट आराम करने के बाद कुर्सी पर बैठें, पैर जमीन पर रखें और हाथ को उचित सहारे पर रखें। मशीन लगाते समय कपड़े के ऊपर से माप लेने के बजाय सही तरीके से कफ लगाना चाहिए। रीडिंग लेते समय बात करने से बचें। जरूरत पड़ने पर कुछ मिनट बाद दोबारा रीडिंग ली जा सकती है।

एक ही दिन की एक रीडिंग को देखकर निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रिकॉर्ड रखना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

कब तुरंत डॉक्टर की मदद लें?

हाई या लो BP के साथ गंभीर लक्षण दिखाई दें तो इंतजार नहीं करना चाहिए। खासकर सीने में दर्द, सांस लेने में गंभीर परेशानी, बेहोशी, अचानक भ्रम या शरीर में अचानक कमजोरी जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए। सीने में दबाव या दर्द के साथ सांस फूलना, पसीना या दर्द का हाथ, गर्दन या जबड़े तक फैलना हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं और ऐसी स्थिति में तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता आवश्यक है।

निष्कर्ष

हाई और लो दोनों तरह का BP ध्यान देने योग्य स्थिति है, लेकिन हर असामान्य रीडिंग का अर्थ गंभीर बीमारी नहीं होता। सबसे जरूरी है कि BP को सही तरीके से मापा जाए, बार-बार असामान्य रीडिंग आने पर डॉक्टर से सलाह ली जाए और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा शुरू या बंद न की जाए।

हाई BP को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित खान-पान, कम नमक, नियमित गतिविधि और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का पालन महत्वपूर्ण है। वहीं लो BP में पर्याप्त पानी, धीरे-धीरे उठना और बार-बार होने वाले लक्षणों की चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है।

महत्वपूर्ण: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है, व्यक्तिगत चिकित्सा निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। यदि किसी बच्चे या किशोर का BP असामान्य आ रहा है, तो वयस्कों के मानकों से उसका अर्थ निकालने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ/डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

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