भोपाल में शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी, पदवृद्धि की मांग पर मंगलवार के फैसले का इंतजार

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शिक्षक भर्ती से जुड़े चयनित अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी लंबे समय से रिक्त पदों की संख्या बढ़ाने यानी पदवृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। नीलम पार्क में चल रहे इस आंदोलन को कई दिन बीत चुके हैं और अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली होने के बावजूद भर्ती के अवसर सीमित रखे गए हैं।

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग है कि वर्ग-2 के लिए 33 हजार और वर्ग-3 के लिए 25 हजार अतिरिक्त पदों पर भर्ती की जाए। अभ्यर्थियों का दावा है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 1.15 लाख से अधिक पद रिक्त हैं। ऐसे में उनका तर्क है कि उपलब्ध रिक्तियों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया का विस्तार किया जाना चाहिए, जिससे योग्य उम्मीदवारों को रोजगार का अवसर मिल सके और सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी भी दूर हो।

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16 दिनों से जारी है आंदोलन

शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का कहना है कि वे अपनी मांग को लेकर करीब 16 दिनों से भोपाल में प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान कई अभ्यर्थियों ने भूख हड़ताल का भी सहारा लिया। उनका कहना है कि लंबे समय तक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के बावजूद जब अपेक्षित निर्णय सामने नहीं आया तो उन्हें कठोर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

प्रदर्शन स्थल पर मौजूद अभ्यर्थियों के बीच भविष्य को लेकर चिंता साफ दिखाई देती है। कई उम्मीदवार शिक्षक बनने के लिए आवश्यक परीक्षाएं और चयन प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं तथा अब नियुक्ति के अवसर बढ़ाए जाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनके मुताबिक सीमित पदों के कारण बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थी रोजगार से वंचित रह सकते हैं।

वर्ग-2 और वर्ग-3 में पद बढ़ाने की मांग

आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग पदवृद्धि को लेकर है। अभ्यर्थी वर्ग-2 में 33 हजार तथा वर्ग-3 में 25 हजार अतिरिक्त पदों की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि विभाग में बड़ी संख्या में पद खाली हैं तो भर्ती प्रक्रिया में इन रिक्तियों को शामिल किया जाना चाहिए।

अभ्यर्थियों के अनुसार सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में कई विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। आंदोलनकारी मानते हैं कि नई भर्ती के जरिए एक तरफ युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी कम की जा सकती है।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पहुंचकर जताया समर्थन

आंदोलन के बीच मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी नीलम पार्क पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों से मुलाकात की और उनकी मांगों को समझने का प्रयास किया। इस दौरान उन्होंने अभ्यर्थियों की ओर से सरकार तक उनकी बात पहुंचाने में सहयोग का आश्वासन दिया।

दिग्विजय सिंह की मौजूदगी से आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिला। उन्होंने अभ्यर्थियों और सरकार के बीच बातचीत का रास्ता बनाने की कोशिश की। इसके बाद शिक्षा मंत्री के साथ बातचीत की स्थिति बनी और आंदोलनकारियों को सरकार की ओर से जल्द निर्णय लिए जाने का भरोसा मिला।

मंगलवार के फैसले का इंतजार

अभ्यर्थियों के अनुसार शिक्षा मंत्री के साथ बातचीत के बाद उन्हें आश्वासन दिया गया है कि उनकी मांग पर आगामी मंगलवार को निर्णय की घोषणा की जा सकती है। इस आश्वासन के बाद आंदोलन में फिलहाल कुछ राहत दिखाई दी है। कुछ अभ्यर्थियों ने अपनी भूख हड़ताल अस्थायी रूप से रोक दी है।

हालांकि आंदोलनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि मंगलवार को उनकी मांगों के पक्ष में ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो वे दोबारा आंदोलन और भूख हड़ताल शुरू कर सकते हैं। इसलिए अब सभी की निगाह सरकार के आगामी निर्णय पर टिकी हुई है।

लंबे आंदोलन ने बढ़ाई अभ्यर्थियों की परेशानी

लगातार कई दिनों से चल रहे आंदोलन का असर अभ्यर्थियों के व्यक्तिगत जीवन पर भी पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ अभ्यर्थी अपने बच्चों को भी आंदोलन स्थल पर लेकर पहुंचे हैं। लंबे समय तक घर से दूर रहना, रहने-खाने की व्यवस्था करना और आर्थिक दबाव झेलना उनके लिए मुश्किल साबित हो रहा है।

कई उम्मीदवारों के लिए शिक्षक भर्ती केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने की उम्मीद भी है। चयन प्रक्रिया में समय और मेहनत लगाने के बाद नियुक्ति के अवसर बढ़ाने की मांग को लेकर वे राजधानी में डटे हुए हैं। आंदोलन लंबा खिंचने के कारण उनके सामने आर्थिक और पारिवारिक चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।

रिक्त पदों को लेकर अभ्यर्थियों का तर्क

शिक्षक अभ्यर्थियों का कहना है कि जब सरकारी स्कूलों में हजारों पद खाली हैं, तब उन पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने की जरूरत है। उनका दावा है कि राज्य में शिक्षकों के कुल रिक्त पदों की संख्या 1.15 लाख से अधिक है। इसी आधार पर वे सरकार से वर्ग-2 और वर्ग-3 के पदों में पर्याप्त वृद्धि करने की मांग कर रहे हैं।

अभ्यर्थियों का मानना है कि पदों की संख्या बढ़ने से बड़ी संख्या में योग्य युवाओं को सरकारी सेवा में आने का अवसर मिल सकता है। इसके साथ ही स्कूलों में शिक्षक उपलब्धता बढ़ने से विद्यार्थियों की पढ़ाई को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

सरकार के निर्णय पर टिकी निगाहें

फिलहाल आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने सरकार के आश्वासन के बाद मंगलवार तक इंतजार करने का फैसला किया है। हालांकि उन्होंने यह संकेत भी दिया है कि यदि उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं होता है तो आंदोलन फिर तेज हो सकता है।

आंदोलन की अगली दिशा सरकार के फैसले पर निर्भर करेगी। अभ्यर्थियों के लिए मंगलवार का दिन इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसी दिन उन्हें पदवृद्धि को लेकर स्पष्ट स्थिति मिलने की उम्मीद है।

शिक्षक भर्ती से जुड़े युवाओं का यह आंदोलन रोजगार, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और भर्ती प्रक्रिया के विस्तार जैसे मुद्दों को सामने ला रहा है। अब देखना होगा कि सरकार अभ्यर्थियों की मांगों पर क्या निर्णय लेती है और क्या वर्ग-2 तथा वर्ग-3 में प्रस्तावित अतिरिक्त पदों को लेकर कोई ठोस घोषणा सामने आती है।

फिलहाल भोपाल के नीलम पार्क में जुटे अभ्यर्थी सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। लंबे आंदोलन के बावजूद उनकी मुख्य मांग वही है—रिक्त पदों के अनुरूप शिक्षक भर्ती का दायरा बढ़ाया जाए और योग्य उम्मीदवारों को नियुक्ति का अधिक अवसर दिया जाए।

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