बिहार में बाढ़ का विकराल रूप, आठ जिलों में अलर्ट; गंगा के बढ़ते जलस्तर से पटना समेत कई इलाके प्रभावित

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पटना, 5 सितंबर 2026: बिहार में गंगा और अन्य नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति को गंभीर बना दिया है। राज्य के कई हिस्सों में नदी का पानी निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में फैल चुका है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने आठ जिलों में अलर्ट जारी किया है। कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न हो गई हैं और आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है।

पटना और उसके आसपास गंगा का जलस्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। गांधी घाट और दीघा घाट जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर नदी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार गांधी घाट पर जलस्तर 50.36 मीटर और दीघा घाट पर 51.68 मीटर तक पहुंच गया है। लगातार बढ़ते पानी के कारण प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। मौजूदा स्थिति की तुलना वर्ष 2016 में आई भीषण बाढ़ के दौरान दर्ज किए गए जलस्तर से भी की जा रही है।

Flood AI Generated syemboli photo

पटना के निचले इलाकों में पानी का दबाव

गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर नदी के किनारे बसे निचले इलाकों पर दिखाई दे रहा है। पटना के आसपास के कई दियारा क्षेत्रों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल गया है। दियारा इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए स्थिति विशेष रूप से कठिन हो गई है, क्योंकि कई रास्ते पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं।

दानापुर क्षेत्र के मनास इलाके में बाढ़ का प्रभाव बेहद गंभीर बताया जा रहा है। यहां कई हिस्से पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। जिन रास्तों से कुछ समय पहले तक लोग पैदल या वाहनों से आते-जाते थे, वहां अब नाव ही आवागमन का प्रमुख साधन बन गई है। पानी चारों तरफ फैल जाने के कारण स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है।

घरों में घुसा बाढ़ का पानी

बिहार के कई अन्य जिलों में भी बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राघोपुर और बेगूसराय के कुछ क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवारों के घरों में पानी प्रवेश कर गया है। बाल्हारपुर, महेंद्रपुर और सिंहपुर जैसे इलाकों में लोगों को अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

कई परिवार जरूरी सामान लेकर ऊंचे स्थानों या सुरक्षित इलाकों में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। घरों में पानी भरने के कारण भोजन, पीने के पानी, कपड़े और दूसरी आवश्यक वस्तुओं को सुरक्षित रखना भी चुनौती बन गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना भी प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी समस्या है।

सरकार ने तेज किए राहत और बचाव के प्रयास

बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। सर्वेक्षण के दौरान बाढ़ से प्रभावित इलाकों, जलमग्न क्षेत्रों और लोगों के सामने मौजूद समस्याओं की स्थिति को समझने का प्रयास किया गया।

प्रशासन को प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविरों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इन शिविरों में पीने का साफ पानी, भोजन, जरूरी दवाइयां और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता ऐसे परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है, जिनके घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है।

SDRF की टीमें राहत कार्य में जुटीं

बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव कार्य के लिए राज्य आपदा मोचन बल यानी SDRF की टीमें सक्रिय हैं। बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों की मदद कर रहे हैं और जरूरत के अनुसार उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं।

मनास इलाके में एक युवक के लापता होने की सूचना के बाद खोज अभियान भी चलाया गया। बाढ़ की तेज धारा और जलभराव वाले क्षेत्रों में तलाशी अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बचाव दल स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अभियान चला रहे हैं।

लगातार बढ़ता जलस्तर बढ़ा रहा चिंता

गंगा समेत दूसरी नदियों में पानी बढ़ने का सिलसिला जारी रहने से आने वाले दिनों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर नए इलाकों में पानी पहुंचने की आशंका रहती है। ऐसे में प्रशासन को संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी करनी पड़ रही है।

बाढ़ का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है। खेतों में पानी भरने से कृषि गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। ग्रामीण सड़कों और संपर्क मार्गों के डूबने से बाजार, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच मुश्किल हो जाती है। कई जगहों पर नावों के जरिए ही लोगों और आवश्यक सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की जरूरत पड़ रही है।

लोगों से सतर्क रहने की अपील

प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित और नदी के आसपास रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है। लोगों को जलमग्न रास्तों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

राहत शिविरों में पहुंचाए जा रहे परिवारों के लिए भोजन और पेयजल के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। बाढ़ के दौरान दूषित पानी से बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए साफ पानी और स्वच्छता की व्यवस्था राहत अभियान का अहम हिस्सा बनी हुई है।

2016 जैसी स्थिति की आशंका ने बढ़ाई चिंता

पटना में गंगा का मौजूदा जलस्तर वर्ष 2016 की बाढ़ के दौरान बने गंभीर हालात की याद दिला रहा है। हालांकि किसी भी स्थिति का अंतिम आकलन नदी के जलस्तर और मौसम समेत कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है, लेकिन मौजूदा हालात ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है।

आठ जिलों में अलर्ट, निचले इलाकों में जलभराव और बड़ी संख्या में परिवारों के प्रभावित होने के बीच राहत एवं बचाव एजेंसियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। आने वाले समय में नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखना और प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

फिलहाल बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन, SDRF और स्थानीय स्तर पर काम कर रही टीमें राहत पहुंचाने में जुटी हैं। लोगों की सुरक्षित निकासी, राहत शिविरों की व्यवस्था और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गंगा के जलस्तर में आगे होने वाला बदलाव ही यह तय करेगा कि स्थिति कितनी जल्दी सामान्य होती है या बाढ़ का प्रभाव और क्षेत्रों तक फैलता है।

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