नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद बड़ी राहत: त्रिशूली-3ए हाइड्रोपावर सुरंग से दो लोग जिंदा निकाले गए
काठमांडू, 4 सितंबर 2026: नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच राहत एवं बचाव अभियान से एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे दो लोगों को नेपाली सेना और बचाव दल ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। कई दिनों से सुरंग के भीतर फंसे इन लोगों के जिंदा मिलने की खबर ने बचाव अभियान में जुटी टीमों के साथ-साथ उनके परिवारों को भी बड़ी राहत दी है।
बताया गया है कि दोनों लोगों की पहचान संजय साह और कबीर महर्जन के रूप में हुई है। संजय साह परियोजना में मैकेनिकल फोरमैन के तौर पर काम करते हैं, जबकि कबीर महर्जन मैकेनिकल सुपरवाइजर हैं। दोनों को बचाए जाने के बाद हेलीकॉप्टर के जरिए काठमांडू ले जाया गया, जहां उनका उपचार किया जा रहा है।

कई दिनों तक सुरंग में फंसे रहे कर्मचारी
नेपाल में 26 अगस्त को भारी बारिश और बाढ़ के कारण कई इलाकों में गंभीर स्थिति पैदा हुई थी। इसी प्राकृतिक आपदा का असर त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना पर भी पड़ा। परियोजना की सुरंग में अचानक पानी भर जाने के कारण वहां मौजूद कुछ कर्मचारियों के फंसने की आशंका जताई गई थी।
बाढ़ के कारण सुरंग का संपर्क बाहरी क्षेत्र से प्रभावित हो गया था। ऐसे कठिन हालात में बचाव दल के लिए अंदर पहुंचना आसान नहीं था। पानी, मलबे और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों ने अभियान को चुनौतीपूर्ण बना दिया। इसके बावजूद नेपाली सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने अभियान जारी रखा।
कई दिनों की कोशिशों के बाद बचाव दल को सुरंग के अंदर मौजूद लोगों से संपर्क स्थापित करने में सफलता मिली। यह संपर्क अभियान के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। सुरंग के भीतर से आवाजें सुनाई देने के बाद बचाव दल को उम्मीद जगी कि वहां कुछ लोग अभी भी जीवित हो सकते हैं।
बातचीत के बाद बढ़ी बचाव की उम्मीद
बचाव अभियान के दौरान सुरंग के भीतर से एक से अधिक लोगों की आवाज सुनाई देने की जानकारी सामने आई। इसके बाद बचावकर्मियों ने अंदर मौजूद लोगों को घबराने के बजाय धैर्य बनाए रखने के लिए कहा।
बचाव दल ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उन्हें बाहर निकालने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है। इस दौरान अंदर मौजूद लोगों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की बात सामने आई। इसके बाद अभियान में जुटे कर्मियों ने सुरंग तक पहुंचने के प्रयास और तेज कर दिए।
प्राकृतिक आपदा के बाद इतने लंबे समय तक किसी व्यक्ति के सुरक्षित मिलने की संभावना बचाव दल के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण थी। सुरंग के भीतर परिस्थितियां कठिन होने के बावजूद टीमों ने योजनाबद्ध तरीके से काम किया।
नेपाली सेना की महत्वपूर्ण भूमिका
इस पूरे अभियान में नेपाली सेना की भूमिका अहम रही। सेना के जवानों और बचाव विशेषज्ञों ने सुरंग तक पहुंचने तथा अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए संयुक्त प्रयास किया।
बचाव अभियान में सुरंग की स्थिति का आकलन करना, मलबे और पानी से निपटना तथा सुरक्षित रास्ता तैयार करना जैसी कई चुनौतियां थीं। किसी भी जल्दबाजी से सुरंग के भीतर फंसे लोगों और बचावकर्मियों दोनों के लिए खतरा पैदा हो सकता था। इसलिए अभियान को सावधानीपूर्वक आगे बढ़ाया गया।
नेपाली सेना की ओर से सोशल मीडिया पर भी बचाव अभियान की जानकारी साझा की गई। तस्वीरों में बचावकर्मी सुरंग के भीतर अभियान चलाते और लोगों को बाहर निकालने की कोशिश करते दिखाई दिए।
दोनों लोगों को काठमांडू लाया गया
सुरंग से बाहर निकाले जाने के बाद संजय साह और कबीर महर्जन को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। दोनों को एयरलिफ्ट कर काठमांडू पहुंचाया गया।
जानकारी के अनुसार, संजय साह को बीरेन्द्र आर्मी अस्पताल, छाउनी में उपचार के लिए ले जाया गया, जबकि कबीर महर्जन को नेशनल ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में रहने के बाद दोनों की चिकित्सकीय जांच और आवश्यक उपचार किया जाना जरूरी माना गया।
परिवारों के लिए भी दोनों के सुरक्षित मिलने की खबर बेहद भावुक क्षण रही होगी। प्राकृतिक आपदा के बाद लंबे समय तक किसी अपने की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी रहना बेहद कठिन होता है। ऐसे में दोनों कर्मचारियों के जीवित बचाए जाने की खबर राहत देने वाली है।
बाढ़ ने नेपाल में पैदा की गंभीर चुनौती
नेपाल पहाड़ी और हिमालयी भौगोलिक क्षेत्र वाला देश है। यहां मानसून के दौरान भारी बारिश के साथ अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना रहता है। पहाड़ी नदियों में जलस्तर तेजी से बढ़ने पर आसपास के इलाकों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है।
26 अगस्त की घटना में भी बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ने से कई स्थान प्रभावित हुए। भोतेकोशी नदी से जुड़े क्षेत्र में आई बाढ़ का असर त्रिशूली-3ए परियोजना की सुरंग तक पहुंचा। ऐसी स्थिति में सुरंग जैसे सीमित और बंद स्थान में फंसे लोगों तक राहत पहुंचाना बेहद कठिन हो जाता है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि प्राकृतिक आपदाओं की आशंका वाले क्षेत्रों में बड़े निर्माण और जलविद्युत परियोजनाओं के लिए आपदा प्रबंधन की तैयारियां कितनी मजबूत होनी चाहिए।
राहत अभियान से मिली उम्मीद
त्रिशूली-3ए सुरंग से दो लोगों का जिंदा निकलना नेपाल में जारी राहत एवं बचाव अभियानों के बीच उम्मीद की एक महत्वपूर्ण किरण है। जिस परिस्थिति में बचाव दल ने काम किया, उसमें धैर्य, तकनीकी क्षमता और टीमवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि आपदा के दौरान शुरुआती घंटों के साथ-साथ बाद के बचाव प्रयास भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। किसी व्यक्ति के बारे में तुरंत जानकारी न मिलने का अर्थ हमेशा यह नहीं होता कि बचाव की संभावना खत्म हो गई है। सही रणनीति, संसाधनों और लगातार प्रयासों से मुश्किल परिस्थितियों में भी लोगों तक पहुंचा जा सकता है।
आगे भी जारी रह सकता है खोज और राहत कार्य
त्रिशूली-3ए परियोजना की घटना के बाद राहत एजेंसियों के सामने चुनौती केवल दो लोगों को बाहर निकालने तक सीमित नहीं है। प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान का आकलन, संपर्क व्यवस्था बहाल करना तथा प्रभावित लोगों तक आवश्यक सहायता पहुंचाना भी महत्वपूर्ण है।
बचाव एजेंसियों को ऐसे इलाकों में विशेष सावधानी बरतनी होगी जहां दोबारा भूस्खलन या अचानक जलस्तर बढ़ने का खतरा हो सकता है। प्रभावित बुनियादी ढांचे की सुरक्षा जांच के बाद ही सामान्य गतिविधियों को पूरी तरह बहाल किया जा सकेगा।
निष्कर्ष
नेपाल की त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग से संजय साह और कबीर महर्जन को जिंदा बाहर निकाला जाना विनाशकारी बाढ़ के बीच एक बेहद राहत भरी खबर है। कई दिनों तक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच चले बचाव अभियान ने दिखाया कि कठिन से कठिन हालात में भी लगातार प्रयास और समन्वित कार्रवाई जीवन बचाने में निर्णायक साबित हो सकती है।
दोनों कर्मचारियों को काठमांडू लाकर अस्पताल में उपचार उपलब्ध कराया जाना फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों में राहत, खोज और पुनर्वास का काम भी आगे बढ़ाना जरूरी है। यह घटना प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मजबूत पूर्व तैयारी, आधुनिक बचाव तकनीक और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।