नीदरलैंड में साइबर अपराध का बढ़ता खतरा, 2025 में करीब 25 लाख लोग हुए प्रभावित
एम्स्टर्डम। डिजिटल तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के साथ साइबर अपराध दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। नीदरलैंड भी इस समस्या से अछूता नहीं है। डच पुलिस और लोक अभियोजन सेवा (OM) की नई रिपोर्ट ने देश में तेजी से बदल रहे साइबर अपराध के स्वरूप को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में नीदरलैंड में लगभग 25 लाख लोग ऑनलाइन अपराध, धोखाधड़ी, ठगी, धमकी या साइबर उत्पीड़न जैसी गतिविधियों के शिकार हुए।
नीदरलैंड की पुलिस और अभियोजन सेवा द्वारा जारी Cybercrimebeeld Nederland 2026 में बताया गया है कि साइबर अपराध अब केवल कुछ तकनीकी रूप से बेहद कुशल अपराधियों तक सीमित नहीं रह गया है। अपराधी अलग-अलग देशों में बैठे लोगों और समूहों की मदद लेकर हमलों को अंजाम दे रहे हैं। तैयार साइबर टूल, चोरी किया गया डेटा और ऑनलाइन उपलब्ध आपराधिक सेवाओं ने ऐसे अपराधों की बाधाएं कम कर दी हैं। इससे कम तकनीकी जानकारी रखने वाले अपराधी भी अपेक्षाकृत जटिल साइबर हमले कर पा रहे हैं।

25 लाख लोगों का प्रभावित होना चिंता का विषय
नीदरलैंड के केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CBS) के अनुसार 2025 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की आबादी के लगभग 16.8 प्रतिशत लोग ऑनलाइन अपराध के किसी न किसी रूप से प्रभावित हुए। यह संख्या करीब 25 लाख लोगों के बराबर है। ऑनलाइन धोखाधड़ी और ठगी सबसे सामान्य समस्याओं में शामिल रही, जबकि हैकिंग तथा ऑनलाइन धमकी और उत्पीड़न के मामले भी सामने आए।
आंकड़ों के मुताबिक ऑनलाइन धोखाधड़ी और फ्रॉड से लगभग 10.3 प्रतिशत लोगों को प्रभावित होना पड़ा। इनमें खरीदारी से जुड़ी धोखाधड़ी का हिस्सा सबसे बड़ा रहा। कई मामलों में लोगों ने ऑनलाइन किसी वस्तु या सेवा के लिए भुगतान किया, लेकिन उन्हें सामान या सेवा प्राप्त नहीं हुई। इसके अलावा भुगतान संबंधी धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और फिशिंग भी साइबर अपराध के महत्वपूर्ण रूप रहे।
हैकिंग भी एक महत्वपूर्ण खतरा बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार 2025 में लगभग 5.5 प्रतिशत लोगों ने हैकिंग का सामना किया। इनमें अकाउंट हैकिंग के मामले डिवाइस हैकिंग की तुलना में अधिक रहे। इसका मतलब है कि ईमेल, सोशल मीडिया या दूसरे ऑनलाइन खातों की सुरक्षा को लेकर लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
चोरी हुए डेटा से बढ़ रहे लक्षित हमले
डच अधिकारियों के अनुसार साइबर अपराधियों की रणनीति भी बदल रही है। अपराधी पुराने डेटा लीक से प्राप्त जानकारी को नए तरीके से हासिल किए गए डेटा के साथ जोड़ रहे हैं। इससे उन्हें संभावित पीड़ितों के बारे में अधिक जानकारी मिल जाती है और वे ज्यादा विश्वसनीय तरीके से लोगों को निशाना बना सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर अपराधी बैंक, वित्तीय संस्थान या क्रिप्टो प्लेटफॉर्म का नाम इस्तेमाल करके लोगों से संपर्क कर सकते हैं। संदेश या बातचीत इस तरह तैयार की जाती है कि सामने वाला व्यक्ति दबाव में आकर संवेदनशील जानकारी साझा कर दे या किसी वित्तीय कार्रवाई के लिए तैयार हो जाए। इस तरह साइबर अपराध में तकनीक के साथ-साथ मानव व्यवहार का फायदा उठाने की रणनीति भी महत्वपूर्ण बन गई है।
‘साइबर क्राइम ऐज ए सर्विस’ से बढ़ी चुनौती
डच अधिकारियों ने साइबर अपराध की दुनिया में एक और महत्वपूर्ण बदलाव की ओर ध्यान दिलाया है। अब अपराधियों को हर तकनीकी काम खुद करने की आवश्यकता नहीं होती। इंटरनेट आधारित आपराधिक नेटवर्क के माध्यम से चोरी का डेटा, तकनीकी उपकरण और दूसरी सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
इस व्यवस्था को अक्सर ‘साइबर क्राइम ऐज ए सर्विस’ कहा जाता है। इसके कारण साइबर अपराध का तकनीकी स्तर रखने वाले और कम तकनीकी क्षमता वाले अपराधियों के बीच का अंतर कम हो रहा है। अपराधी जरूरत के मुताबिक अलग-अलग विशेषज्ञों या समूहों की सेवाएं लेकर किसी हमले को तैयार कर सकते हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने बढ़ाई गति
रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को भी साइबर अपराध के बदलते परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण कारक बताया गया है। अधिकारियों के अनुसार AI साइबर अपराध की मूल प्रकृति को पूरी तरह नहीं बदल रहा, लेकिन यह अपराधियों को अधिक तेजी और बड़े पैमाने पर काम करने में सक्षम बना सकता है।
AI की मदद से धोखाधड़ी वाले संदेशों को अधिक विश्वसनीय बनाया जा सकता है और अलग-अलग संभावित लक्ष्यों के लिए सामग्री तेजी से तैयार की जा सकती है। इससे सामान्य उपयोगकर्ता के लिए असली और नकली संदेश के बीच अंतर करना पहले की तुलना में कठिन हो सकता है।
युवाओं के साइबर अपराध नेटवर्क पर भी नजर
डच पुलिस ने साइबर अपराध में युवाओं की बढ़ती भागीदारी को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। अधिकारियों के अनुसार पश्चिमी देशों में कम उम्र के कुछ युवा ऐसे ऑनलाइन नेटवर्क का हिस्सा बन रहे हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य आर्थिक लाभ और सामाजिक प्रतिष्ठा हासिल करना है। इनमें डेटा और क्रिप्टोकरेंसी की चोरी जैसी गतिविधियों का उल्लेख किया गया है।
पुलिस का कहना है कि कुछ युवाओं को ऑनलाइन गेमिंग और चैट प्लेटफॉर्म के माध्यम से आपराधिक नेटवर्क की ओर आकर्षित किया जा सकता है। शुरुआत छोटी ऑनलाइन शरारतों से हो सकती है, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर साइबर अपराध की दिशा में बढ़ सकती है। इस कारण अधिकारियों के लिए केवल कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि युवाओं में डिजिटल जागरूकता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण हो गया है।
साइबर अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा का संबंध
डच अधिकारियों ने साइबर अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच बढ़ते संबंध को भी रेखांकित किया है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ मामलों में राज्य-समर्थित गतिविधियों, साइबर हमलों, दुष्प्रचार और अन्य प्रकार की हाइब्रिड गतिविधियों के बीच अंतर करना कठिन होता जा रहा है। इससे साइबर सुरक्षा केवल व्यक्तिगत कंप्यूटर या ऑनलाइन खातों की सुरक्षा का विषय नहीं रह गई है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ गई है।
इस बदलते वातावरण में सरकारी संस्थानों, कंपनियों और आम नागरिकों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बढ़ गई है। साइबर अपराधियों के लिए देश की सीमाएं बड़ी बाधा नहीं हैं, इसलिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग करना पड़ता है।
केवल पुलिस के भरोसे नहीं रुक सकता साइबर अपराध
डच पुलिस और अभियोजन सेवा का मानना है कि साइबर अपराध से निपटने के लिए केवल जांच और गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होगी। रोकथाम, समय पर चेतावनी, संदिग्ध गतिविधियों को बाधित करना और संभावित पीड़ितों तक तेजी से सूचना पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। सार्वजनिक संस्थानों और निजी कंपनियों की भूमिका भी इस प्रयास में महत्वपूर्ण बताई गई है।
नीदरलैंड में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग के प्रयास भी किए जा रहे हैं। फिशिंग और धोखाधड़ी वाली वेबसाइटों को रोकने के लिए एक सार्वजनिक-निजी पहल के परीक्षण में बड़ी संख्या में संदिग्ध वेबसाइटों तक पहुंच को अवरुद्ध किया गया था। यह संकेत देता है कि साइबर अपराध से मुकाबले में तकनीकी सुरक्षा और संस्थागत सहयोग दोनों की जरूरत है।
आम नागरिकों के लिए बढ़ी जिम्मेदारी
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच आम इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की जागरूकता भी महत्वपूर्ण है। संदिग्ध संदेशों पर तुरंत भरोसा न करना, संवेदनशील जानकारी साझा करने से पहले स्रोत की पुष्टि करना और ऑनलाइन खातों की सुरक्षा को गंभीरता से लेना जोखिम कम करने में मदद कर सकता है।
विशेषज्ञों और अधिकारियों के लिए चुनौती यह है कि साइबर अपराध लगातार अपना स्वरूप बदल रहा है। एक तरीका रोकने के बाद अपराधी नई तकनीक और नए माध्यमों का इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं। इसलिए डिजिटल सुरक्षा को एक बार की प्रक्रिया के बजाय लगातार चलने वाली जिम्मेदारी के रूप में देखना जरूरी है।
आगे की राह
नीदरलैंड में लगभग 25 लाख लोगों का ऑनलाइन अपराध से प्रभावित होना इस बात का संकेत है कि डिजिटल दुनिया के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ रही है।
AI, चोरी हुए डेटा, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और तैयार साइबर सेवाओं ने अपराधियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। ऐसे में आने वाले समय में सरकारों, पुलिस एजेंसियों, तकनीकी कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और नागरिकों के बीच सहयोग और अधिक महत्वपूर्ण होगा।
डच अधिकारियों की चेतावनी का व्यापक संदेश यही है कि साइबर अपराध को केवल तकनीकी समस्या मानकर नहीं देखा जा सकता। यह आर्थिक सुरक्षा, व्यक्तिगत गोपनीयता, सामाजिक विश्वास और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ विषय है। बदलती तकनीक के साथ अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को भी लगातार विकसित करना होगा।