रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए फिर बातचीत, पुतिन से मिले अमेरिकी दूत विटकॉफ और जेरेड कुशनर

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मॉस्को। रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध को समाप्त कराने की कोशिशों को एक बार फिर कूटनीतिक गति देने का प्रयास शुरू हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने 5 सितंबर 2026 को मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए संभावित शांति समझौते का रास्ता तलाशना बताया जा रहा है।

अमेरिकी प्रतिनिधियों की मॉस्को यात्रा ऐसे समय हुई है जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को लेकर सैन्य तनाव लगातार बना हुआ है और पहले की वार्ताओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है। अमेरिकी पक्ष की नई पहल को बातचीत को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि विटकॉफ और कुशनर युद्ध समाप्त करने की योजना लेकर जा रहे हैं। हालांकि, प्रस्ताव के विस्तृत बिंदुओं को सार्वजनिक नहीं किया गया है।

पुतिन ने बताया स्थिति को जटिल

क्रेमलिन में बैठक की शुरुआत के दौरान पुतिन ने यूक्रेन की स्थिति को कठिन और जटिल बताया। उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि मॉस्को और वॉशिंगटन के बीच संपर्क उपयोगी रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि रूस अमेरिकी मध्यस्थों के साथ काम करने को तैयार है और वार्ता में संघर्ष से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।

वहीं, स्टीव विटकॉफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पुतिन के लिए शुभकामनाएं पहुंचाईं। रिपोर्टों के अनुसार, बातचीत का केंद्र युद्ध को रोकने और दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावनाएं तलाशने पर रहा। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले कुछ समय में रूस और यूक्रेन के बीच प्रत्यक्ष शांति प्रयासों में ठहराव देखा गया था।

क्षेत्रीय विवाद सबसे बड़ी चुनौती

रूस-यूक्रेन शांति प्रक्रिया में सबसे कठिन मुद्दों में से एक यूक्रेन के उन क्षेत्रों का भविष्य है, जिन पर रूस अपना दावा करता है। मॉस्को की मांगों और कीव की स्थिति में अभी भी बड़ा अंतर है। रूस ने पूर्व में यूक्रेन के कई क्षेत्रों को लेकर अपनी मांगें स्पष्ट की हैं, जबकि यूक्रेन अपनी क्षेत्रीय अखंडता से समझौता करने के प्रति लगातार असहमति जताता रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, क्रेमलिन की स्थिति में अभी तक कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है। रूस की ओर से पहले रखी गई क्षेत्रीय मांगों को महत्वपूर्ण शर्तों में शामिल किया जाता रहा है। यही कारण है कि अमेरिकी मध्यस्थों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान तैयार करना है।

NATO सदस्यता का मुद्दा भी अहम

क्षेत्रीय विवाद के साथ यूक्रेन की NATO सदस्यता का सवाल भी संभावित शांति समझौते की राह में बड़ी बाधा है। रूस लंबे समय से यूक्रेन के NATO में शामिल होने का विरोध करता रहा है। मॉस्को का कहना है कि यूक्रेन की पश्चिमी सैन्य गठबंधन से नजदीकी रूस की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाती है।

दूसरी ओर, यूक्रेन अपनी सुरक्षा के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय गारंटी चाहता है। ऐसे में किसी भी संभावित समझौते में यूक्रेन की भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था, पश्चिमी देशों की भूमिका और NATO से जुड़े प्रश्नों पर सहमति बनाना बेहद कठिन हो सकता है। रूस और यूक्रेन की सुरक्षा संबंधी प्राथमिकताएं अलग होने के कारण यह मुद्दा बातचीत को प्रभावित कर सकता है।

युद्ध के बीच कूटनीति की नई कोशिश

अमेरिकी प्रतिनिधियों की मॉस्को यात्रा की खास बात यह है कि कूटनीतिक प्रयास उस समय शुरू हुए हैं जब दोनों देशों के बीच हवाई हमले भी जारी हैं। हाल के दिनों में रूस और यूक्रेन दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ लंबी दूरी के हमलों को तेज किया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बातचीत और सैन्य गतिविधियां फिलहाल समानांतर रूप से चल रही हैं।

हालांकि, अमेरिकी प्रतिनिधियों की यात्रा के दौरान मॉस्को और कीव के बीच राजधानी क्षेत्रों पर हमले रोकने की अस्थायी व्यवस्था की बात सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, रूस और यूक्रेन ने बातचीत की अवधि में एक-दूसरे की राजधानियों पर हवाई हमले रोकने पर सहमति जताई। इसे बातचीत के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित माहौल तैयार करने की कोशिश माना जा रहा है।

बातचीत के बाद कीव जाने की तैयारी

मॉस्को में पुतिन के साथ मुलाकात के बाद विटकॉफ और कुशनर के यूक्रेन की राजधानी कीव जाने की योजना भी सामने आई है। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों की स्थिति को समझना और किसी संभावित प्रस्ताव पर आगे चर्चा करना है। अमेरिकी प्रतिनिधियों के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि रूस और यूक्रेन की मांगों के बीच ऐसे बिंदु तलाशे जाएं, जिन पर समझौते की गुंजाइश बन सके।

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भी अमेरिकी प्रतिनिधियों की संभावित यात्रा की पुष्टि की है। यूक्रेन की ओर से यह संकेत दिया गया है कि वह अमेरिकी पहल को गंभीरता से देख रहा है, लेकिन रूस की ओर से ठोस कदम की अपेक्षा भी रखता है।

क्या इस बार बनेगा शांति समझौता?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ताजा अमेरिकी पहल वास्तव में युद्ध समाप्त कराने में सफल हो पाएगी। फिलहाल इसका निश्चित उत्तर देना मुश्किल है। एक ओर अमेरिका बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर रूस और यूक्रेन के बीच मूलभूत मतभेद अभी भी कायम हैं।

क्षेत्रीय नियंत्रण, सुरक्षा गारंटी, NATO, युद्ध के बाद की व्यवस्था और प्रतिबंधों जैसे कई मुद्दों पर दोनों पक्षों की स्थितियां अलग हैं। इसलिए केवल उच्चस्तरीय बैठक से तत्काल शांति समझौता होना आसान नहीं माना जा सकता। बातचीत को सफल बनाने के लिए लगातार कई दौर की वार्ता और दोनों पक्षों की ओर से समझौते की इच्छा जरूरी होगी।

राष्ट्रपति पुतिन ने हाल में युद्ध समाप्त करने के लिए समझौते की संभावना की बात की थी, जबकि अमेरिकी प्रशासन भी कूटनीतिक रास्ते को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इससे यह उम्मीद जरूर बनी है कि लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के बीच बातचीत का एक नया अवसर पैदा हो सकता है।

दुनिया की नजरें शांति प्रयासों पर

रूस-यूक्रेन युद्ध का प्रभाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। इस संघर्ष ने यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था, वैश्विक कूटनीति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी प्रभावित किया है। इसलिए किसी भी शांति समझौते का असर व्यापक स्तर पर पड़ सकता है।

मॉस्को में पुतिन और अमेरिकी प्रतिनिधियों की बैठक को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। यदि बातचीत आगे बढ़ती है और रूस तथा यूक्रेन किसी साझा आधार तक पहुंचते हैं, तो यह युद्ध समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। लेकिन यदि क्षेत्रीय और सुरक्षा संबंधी मतभेद बने रहते हैं, तो शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संवाद का रास्ता फिर खुला है। विटकॉफ और कुशनर की मॉस्को यात्रा तथा उसके बाद कीव में प्रस्तावित बातचीत आने वाले दिनों में यह तय कर सकती है कि रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर कूटनीति वास्तव में नई दिशा पकड़ती है या फिर वार्ता एक बार फिर गतिरोध में फंस जाती है।

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