अफ्रीका में ऑनलाइन ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 651 गिरफ्तार; 43 लाख डॉलर से अधिक की संपत्ति बरामद
अफ्रीका: ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध के तेजी से बढ़ते खतरे के बीच अफ्रीकी देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी कार्रवाई की है। इंटरपोल के सहयोग से चलाए गए ऑपरेशन Red Card 2.0 के दौरान 16 अफ्रीकी देशों में ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े नेटवर्क पर शिकंजा कसा गया। इस अभियान में कुल 651 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि जांच एजेंसियों ने 43 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की संपत्ति और अवैध धन बरामद किया।
इंटरपोल के अनुसार यह अभियान केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि साइबर अपराध के लिए इस्तेमाल किए जा रहे डिजिटल ढांचे को भी निशाना बनाया गया। कार्रवाई के दौरान 2,341 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए और 1,442 दुर्भावनापूर्ण आईपी एड्रेस, डोमेन और सर्वर को बंद या निष्क्रिय किया गया। जांच में ऐसे ऑनलाइन घोटालों का भी पता चला जिनसे जुड़ा वित्तीय नुकसान 4.5 करोड़ डॉलर से अधिक आंका गया।

16 देशों ने मिलकर चलाया अभियान
ऑपरेशन Red Card 2.0 का संचालन 8 दिसंबर 2025 से 30 जनवरी 2026 के बीच किया गया था। इसमें अफ्रीका के 16 देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियां शामिल रहीं। अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसे संगठित साइबर अपराध नेटवर्क को कमजोर करना था जो अलग-अलग देशों में बैठे लोगों को डिजिटल माध्यमों से निशाना बना रहे थे।
इस अभियान में अंगोला, बेनिन, कैमरून, चाड, कोट द’ईवोआर, गैबॉन, गाम्बिया, घाना, केन्या, नामीबिया, नाइजीरिया, रवांडा, सेनेगल, युगांडा, जाम्बिया और जिम्बाब्वे की एजेंसियों ने भाग लिया। इंटरपोल ने इन देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने, रीयल-टाइम सूचनाओं के आदान-प्रदान और डिजिटल फोरेंसिक से संबंधित प्रशिक्षण में सहयोग दिया।
निवेश के नाम पर ठगी का बड़ा नेटवर्क
जांच में सामने आया कि साइबर अपराधी लोगों को जल्दी और अधिक मुनाफे का लालच देकर फर्जी निवेश योजनाओं में फंसाते थे। सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए पीड़ितों से संपर्क किया जाता था। शुरुआत में छोटी रकम निवेश करने के लिए कहा जाता और बाद में उन्हें बड़े रिटर्न का भरोसा दिलाकर अधिक पैसा जमा करवाया जाता था।
कई मामलों में पीड़ितों को नकली ऑनलाइन डैशबोर्ड या फर्जी बैंक स्टेटमेंट दिखाए जाते थे। इन डिजिटल स्क्रीन पर ऐसा प्रतीत होता था कि उनका निवेश लगातार बढ़ रहा है। जब पीड़ित अपना पैसा वापस निकालने की कोशिश करते थे, तो निकासी रोक दी जाती थी या उनसे अतिरिक्त शुल्क मांगा जाता था।
केन्या में ऐसी ही निवेश धोखाधड़ी से जुड़े मामले सामने आए, जिनमें 27 लोगों को गिरफ्तार किया गया। जांच के अनुसार अपराधी सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और झूठे प्रशंसापत्रों के जरिए लोगों को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में निवेश का झांसा देते थे।
मोबाइल लोन ऐप भी बने ठगी का माध्यम
ऑपरेशन के दौरान मोबाइल लोन से जुड़े फर्जीवाड़े के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। कोट द’ईवोआर में पुलिस ने ऐसे नेटवर्क के खिलाफ अभियान चलाकर 58 लोगों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई में 240 मोबाइल फोन, 25 लैपटॉप और 300 से अधिक सिम कार्ड बरामद किए गए।
इन फर्जी लोन योजनाओं में लोगों को बिना किसी कठिन प्रक्रिया के तुरंत ऋण देने का दावा किया जाता था। इसके बाद उनसे विभिन्न प्रकार के शुल्क वसूले जाते थे। कुछ मामलों में इन ऐप और मैसेजिंग सेवाओं के माध्यम से लोगों की व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी भी हासिल करने की कोशिश की जाती थी।
यह मामला इस बात को दर्शाता है कि डिजिटल तकनीक के विस्तार के साथ साइबर अपराधी लोगों की आर्थिक जरूरतों का फायदा उठाने के लिए नए तरीके भी अपना रहे हैं।
नाइजीरिया में फिशिंग और पहचान चोरी पर कार्रवाई
नाइजीरिया में भी साइबर अपराध के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई हुई। वहां अधिकारियों ने ऐसे गिरोह का पता लगाया जो फिशिंग, पहचान चोरी और सोशल इंजीनियरिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को धोखा दे रहा था।
जांच के दौरान अपराधियों से जुड़े एक हजार से अधिक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट हटाए गए। अधिकारियों को एक ऐसी आवासीय संपत्ति का भी पता चला जिसे कथित तौर पर नेटवर्क के प्रमुख ने आपराधिक गतिविधियों के संचालन के लिए तैयार कराया था।
नाइजीरियाई अधिकारियों ने एक अलग मामले में ऐसे साइबर अपराध नेटवर्क को भी निशाना बनाया जिसने एक बड़ी दूरसंचार कंपनी के आंतरिक प्लेटफॉर्म तक कर्मचारियों के समझौता किए गए लॉगिन क्रेडेंशियल के जरिए पहुंच बनाने की कोशिश की थी। इस मामले में छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया।
1,247 पीड़ितों की हुई पहचान
ऑपरेशन Red Card 2.0 की जांच में कम से कम 1,247 पीड़ितों की पहचान की गई। इनमें अधिकतर लोग अफ्रीकी देशों से थे, लेकिन दूसरे क्षेत्रों के लोग भी इन साइबर अपराधों से प्रभावित हुए।
जांच से यह भी पता चला कि इन अपराधों से जुड़ी वित्तीय क्षति 4.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक हो सकती है। यह आंकड़ा बताता है कि ऑनलाइन ठगी अब केवल व्यक्तिगत स्तर की धोखाधड़ी नहीं रह गई है, बल्कि इसके पीछे संगठित और सीमा-पार आपराधिक नेटवर्क काम कर सकते हैं।
डिजिटल अपराध का बदलता स्वरूप
अफ्रीका में साइबर अपराध को लेकर इंटरपोल की चिंता लगातार बढ़ रही है। अगस्त 2026 में जारी इंटरपोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अफ्रीका में रिपोर्ट किए गए साइबर अपराधों में 55 प्रतिशत मामलों में किसी न किसी रूप में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी तकनीकों का इस्तेमाल पाया गया। रिपोर्ट में ऑनलाइन ठगी को क्षेत्र में सबसे अधिक रिपोर्ट किए जाने वाले साइबर अपराधों में शामिल बताया गया।
इससे स्पष्ट होता है कि अपराधी तकनीक के साथ तेजी से अपने तौर-तरीके बदल रहे हैं। नकली पहचान, फर्जी वेबसाइट, सोशल मीडिया प्रोफाइल, स्वचालित संदेश और अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल लोगों को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग क्यों है जरूरी?
साइबर अपराध की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अपराधी और पीड़ित अलग-अलग देशों में हो सकते हैं। किसी एक देश की पुलिस के लिए पूरे नेटवर्क तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ऐसे मामलों में अलग-अलग देशों की एजेंसियों के बीच सूचना साझा करना और संयुक्त जांच महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इंटरपोल ने Red Card 2.0 के दौरान इसी तरह के अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत किया। संगठन ने जांच एजेंसियों को डिजिटल फोरेंसिक उपकरणों के इस्तेमाल और सूचनाओं के विश्लेषण से संबंधित सहायता भी दी।
इंटरपोल के साइबर अपराध निदेशालय के निदेशक नील जेटन ने कहा कि संगठित साइबर अपराध नेटवर्क व्यक्तियों, कारोबारों और समुदायों को आर्थिक तथा मानसिक नुकसान पहुंचाते हैं। उनके अनुसार Red Card 2.0 जैसे अभियान सीमा-पार साइबर अपराध से निपटने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अहमियत दिखाते हैं।
आगे भी जारी रह सकती है कार्रवाई
अफ्रीका में ऑनलाइन ठगी के खिलाफ यह अभियान इस बात का संकेत है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां अब साइबर अपराध को अधिक गंभीरता से ले रही हैं। केवल अपराधियों को गिरफ्तार करने के बजाय उनके डिजिटल नेटवर्क, आर्थिक संसाधनों और तकनीकी बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया जा रहा है।
हालांकि साइबर अपराधी लगातार नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए तकनीकी क्षमता बढ़ाना भी जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय सूचना साझेदारी, डिजिटल फोरेंसिक, वित्तीय निगरानी और लोगों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाकर ऐसे अपराधों को रोकने की क्षमता मजबूत की जा सकती है।
ऑपरेशन Red Card 2.0 की कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि ऑनलाइन ठगी के पीछे काम करने वाले संगठित नेटवर्क अब केवल किसी एक देश की समस्या नहीं हैं। सीमा-पार सहयोग और आधुनिक तकनीकी जांच के माध्यम से ऐसे नेटवर्क पर लगातार दबाव बनाया जा सकता है। 651 गिरफ्तारियां, हजारों उपकरणों की जब्ती और लाखों डॉलर की बरामदगी इस व्यापक कार्रवाई के महत्वपूर्ण परिणाम हैं।