मनिया में रेलवे ट्रैक बना बच्चों और ग्रामीणों के लिए खतरा, सुरक्षित अंडरपास की मांग तेज

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धौलपुर, राजस्थान: राजस्थान के धौलपुर जिले के मनिया कस्बे में रेलवे लाइन स्थानीय लोगों के लिए सुविधा के बजाय लगातार बढ़ते खतरे का कारण बनती जा रही है। दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर स्थित इस कस्बे में स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और ग्रामीणों को रोजमर्रा की आवाजाही के लिए व्यस्त रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है। स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इस मार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है और आने वाले समय में रेलवे लाइन को चार लाइन तक विस्तारित किए जाने की बात कही जा रही है।

मनिया के निवासियों का कहना है कि रेलवे ट्रैक ने कस्बे को लगभग दो हिस्सों में बांट दिया है। एक तरफ रहने वाले लोगों को दूसरी तरफ स्थित स्कूलों, बाजारों और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। ऐसे में कई लोग समय बचाने के लिए सीधे रेलवे ट्रैक पार करने का जोखिम उठाते हैं।

Railway AI Generated syemboli photo

पुराना रेलवे फाटक हटने के बाद बढ़ी परेशानी

स्थानीय लोगों के मुताबिक, पहले रेलवे लाइन पार करने के लिए एक रेलवे फाटक मौजूद था। इस रास्ते से कस्बे के लोगों को आवागमन में अपेक्षाकृत आसानी होती थी। बाद में रेलवे ओवरब्रिज यानी ROB बनाए जाने के बाद पुराने रेलवे फाटक को हटा दिया गया। उम्मीद थी कि ओवरब्रिज लोगों के लिए सुरक्षित विकल्प साबित होगा, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था उनकी रोजमर्रा की जरूरतों के अनुरूप नहीं है।

ओवरब्रिज तक पहुंचने के लिए कई लोगों को करीब दो से तीन किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। स्कूली बच्चों के लिए रोज इतनी दूरी तय करना मुश्किल है। यही वजह है कि कुछ बच्चे और स्थानीय निवासी शॉर्टकट के तौर पर रेलवे ट्रैक का इस्तेमाल करने लगते हैं।

ओवरब्रिज होने के बावजूद क्यों नहीं मिल रहा समाधान?

मनिया के लोगों का कहना है कि ओवरब्रिज तकनीकी रूप से मौजूद जरूर है, लेकिन वह स्थानीय आबादी के लिए व्यावहारिक विकल्प नहीं बन पाया है। लोगों के अनुसार, पुल तक पहुंचने वाला रास्ता काफी लंबा है और कई स्थानों पर सीढ़ियां भी परेशानी का कारण बनती हैं।

बुजुर्गों, छोटे बच्चों और ऐसे लोगों के लिए जिन्हें पैदल चलने में कठिनाई होती है, ओवरब्रिज का इस्तेमाल करना और भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ हिस्सों में पर्याप्त रेलिंग जैसी सुविधाओं का अभाव भी चिंता बढ़ाता है।

इसके अलावा, स्थानीय लोगों ने ओवरब्रिज के आसपास बंदरों की मौजूदगी की समस्या भी उठाई है। उनका कहना है कि बंदरों के कारण बच्चों और राहगीरों को पुल का इस्तेमाल करते समय असुरक्षा महसूस होती है। इन तमाम कारणों से लोग सुविधाजनक और सुरक्षित वैकल्पिक रास्ते की मांग कर रहे हैं।

स्कूली बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चिंता स्कूली बच्चों को लेकर है। बच्चों को स्कूल आने-जाने के दौरान रेलवे लाइन के आसपास से गुजरना पड़ता है। ट्रेन आने पर उन्हें ट्रैक के पास रुककर उसके गुजरने का इंतजार करना पड़ता है। कई बार ट्रेनों की आवाजाही के बीच रेलवे ट्रैक पार करना बेहद जोखिमपूर्ण हो सकता है।

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल जाना जरूरी है, लेकिन उनके आने-जाने का सुरक्षित रास्ता उपलब्ध नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है। परिवारों को हर दिन इस बात की चिंता रहती है कि बच्चे रेलवे लाइन पार करते समय सुरक्षित रहें।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि समस्या केवल स्कूल जाने वाले बच्चों तक सीमित नहीं है। कस्बे के लोगों को बाजार, धार्मिक स्थलों और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने के लिए भी रेलवे लाइन पार करनी पड़ती है।

अंतिम संस्कार के लिए भी करनी पड़ती है जोखिम भरी आवाजाही

मनिया में रेलवे लाइन से जुड़ी परेशानी का एक और संवेदनशील पहलू स्थानीय मुक्तिधाम यानी अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचने का रास्ता है। ग्रामीणों के मुताबिक, रेलवे लाइन के कारण मुक्तिधाम तक पहुंचना भी कई बार मुश्किल हो जाता है।

ऐसे समय में जब किसी परिवार को अंतिम संस्कार के लिए जाना होता है, रेलवे ट्रैक के कारण उत्पन्न बाधा स्थिति को और कठिन बना देती है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी जगहों तक भी सुरक्षित और सुगम संपर्क होना आवश्यक है।

ग्रामीण कई बार उठा चुके हैं मांग

स्थानीय लोगों के अनुसार, सुरक्षित रास्ते की मांग नई नहीं है। ग्रामीणों, अभिभावकों और विद्यार्थियों की ओर से अधिकारियों को कई बार ज्ञापन और प्रार्थना पत्र दिए जा चुके हैं। लोगों की मुख्य मांग रेलवे लाइन के नीचे अंडरपास या फिर स्थानीय जरूरत के अनुरूप किसी छोटे सुरक्षित पुल के निर्माण की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि रेलवे और प्रशासन स्थानीय आबादी की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए उचित स्थान पर अंडरपास बना दें तो बच्चों समेत हजारों लोगों को राहत मिल सकती है। इससे रेलवे ट्रैक पर सीधे आवागमन की आवश्यकता भी कम होगी।

चार लाइन की रेलवे व्यवस्था से बढ़ सकती है चुनौती

स्थानीय निवासियों की चिंता इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि रेलवे लाइन के विस्तार के साथ ट्रैक की संख्या बढ़ने की संभावना है। वर्तमान में जिस रेलवे ट्रैक को पार करना ही लोगों के लिए जोखिमपूर्ण है, भविष्य में चार लाइन होने पर स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

ग्रामीणों का मानना है कि ट्रैक की संख्या और ट्रेनों की आवाजाही बढ़ने के साथ सीधे रेलवे लाइन पार करना और अधिक खतरनाक हो जाएगा। इसलिए उनका कहना है कि समस्या का समाधान भविष्य को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए, न कि केवल वर्तमान जरूरत के आधार पर।

सुरक्षित कनेक्टिविटी की जरूरत

मनिया की स्थिति यह सवाल उठाती है कि बड़े रेलवे प्रोजेक्ट और स्थानीय नागरिकों की दैनिक जरूरतों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। रेलवे सुरक्षा के लिए पुराने क्रॉसिंग को बंद करना जरूरी हो सकता है, लेकिन उसके स्थान पर ऐसा वैकल्पिक मार्ग भी होना चाहिए जो स्थानीय लोगों के लिए वास्तव में उपयोगी और आसानी से पहुंच योग्य हो।

ग्रामीणों की मांग है कि रेलवे और प्रशासन मौके का निरीक्षण कर वास्तविक परिस्थितियों का आकलन करें और आबादी की जरूरत के अनुसार सुरक्षित अंडरपास या छोटा पुल बनाने की दिशा में कदम उठाएं।

फिलहाल मनिया के लोगों की नजर प्रशासन और रेलवे की अगली कार्रवाई पर है। अभिभावक चाहते हैं कि उनके बच्चे बिना किसी डर के स्कूल जा सकें, जबकि ग्रामीण चाहते हैं कि कस्बे के दोनों हिस्सों के बीच सुरक्षित संपर्क बहाल हो। लोगों का कहना है कि विकास का उद्देश्य तभी पूरा माना जाएगा, जब उसके साथ आम नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा भी सुनिश्चित हो।

मनिया की यह समस्या केवल एक रास्ते की मांग नहीं है, बल्कि यह बच्चों की सुरक्षा, ग्रामीणों की रोजमर्रा की आवाजाही और कस्बे की बेहतर कनेक्टिविटी से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुकी है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग इस मांग को गंभीरता से लेते हुए स्थायी और सुरक्षित समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएं।

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