दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG भवन ढहा, 6 की मौत; 11 लोगों को मलबे से निकाला गया
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के आसपास स्थित सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक पांच मंजिला पेइंग गेस्ट (PG) भवन के अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में अब तक छह लोगों की मौत की सूचना है, जबकि राहत और बचाव दलों ने मलबे में फंसे 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में बचावकर्मी मौके पर पहुंच गए।

20 घंटे से अधिक समय तक चला बचाव अभियान
भवन गिरने के बाद राहत एवं बचाव अभियान तत्काल शुरू किया गया। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), दिल्ली फायर सर्विस और स्थानीय पुलिस की टीमें लगातार मलबे को हटाने और उसमें फंसे लोगों की तलाश में जुटी रहीं। रिपोर्ट के अनुसार, अभियान 20 घंटे से अधिक समय तक जारी रहा।
मलबे में किसी व्यक्ति के दबे होने की आशंका को देखते हुए बचाव दलों ने बेहद सावधानी से अभियान चलाया। भारी मलबे के बीच संभावित जीवित लोगों तक पहुंचने के लिए विभिन्न उपकरणों की मदद ली गई। 11 लोगों को सुरक्षित निकालना अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही, हालांकि छह लोगों की मौत ने इस हादसे को बेहद गंभीर बना दिया।
करीब 40 साल पुराना था भवन
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में ढहा भवन लगभग 40 वर्ष पुराना था। बताया जा रहा है कि इमारत में निर्माण या मरम्मत से जुड़ा काम भी चल रहा था। ऐसे में जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि भवन की संरचनात्मक स्थिति कैसी थी और क्या निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था।
पुरानी इमारतों में समय के साथ उनकी संरचनात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे भवनों में किसी भी तरह का अतिरिक्त निर्माण, तोड़फोड़ या बड़े स्तर पर नवीनीकरण करने से पहले विशेषज्ञों से संरचनात्मक जांच कराना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सत्य निकेतन हादसे के बाद इसी पहलू को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
मालिक के खिलाफ FIR, तलाश तेज
हादसे के बाद पुलिस ने भवन के मालिक हरि राम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, मामले में भवन की स्थिति, कथित निर्माण गतिविधियों और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस भवन मालिक की तलाश कर रही है। जांच एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि भवन में किस प्रकार का काम चल रहा था, उसकी अनुमति किस स्तर पर थी और क्या संबंधित सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था।
हालांकि अंतिम जिम्मेदारी और हादसे के वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। प्रशासन की जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
छात्रों की सुरक्षा पर उठे सवाल
सत्य निकेतन क्षेत्र में बड़ी संख्या में छात्र और युवा किराये के कमरों तथा PG में रहते हैं। हादसे के बाद छात्र संगठनों ने दिल्ली में छात्रों के रहने वाले भवनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई।
ABVP और NSUI से जुड़े छात्रों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए दिल्ली के छात्रावासों और PG आवासों का सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि छात्रों के रहने वाले भवनों की संरचनात्मक मजबूती, अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन निकासी व्यवस्था की नियमित जांच होनी चाहिए।
छात्र संगठनों ने यह भी मांग उठाई कि यदि किसी भवन में गंभीर सुरक्षा खामी पाई जाती है तो प्रशासन को समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना की नौबत न आए।
मुख्यमंत्री ने घटनास्थल का किया दौरा
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे के बाद घटनास्थल का दौरा किया और राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने AIIMS ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर घायलों की स्थिति के बारे में भी जानकारी ली।
सरकार की ओर से पुराने भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर अनिवार्य ऑडिट की दिशा में कदम उठाने की बात कही गई है। इसके साथ ही सार्वजनिक उपयोग वाली पुरानी संरचनाओं के लिए नियमों को और सख्त करने की योजना पर भी जोर दिया गया।
इस घोषणा के बाद दिल्ली में पुराने भवनों की सुरक्षा जांच को लेकर उम्मीद बढ़ी है। यदि नियमित निरीक्षण और संरचनात्मक ऑडिट प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो कमजोर इमारतों की पहचान पहले ही की जा सकती है।
पुराने भवनों के लिए जरूरी है नियमित निरीक्षण
दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में हजारों पुरानी इमारतें मौजूद हैं। इनमें कई भवनों का इस्तेमाल आवास, PG, हॉस्टल, कार्यालय और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जाता है। ऐसी परिस्थितियों में भवन की उम्र बढ़ने के साथ उसकी संरचनात्मक स्थिति की निगरानी जरूरी हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी पुराने भवन में बड़े स्तर पर बदलाव या नवीनीकरण करने से पहले उसकी संरचना का मूल्यांकन किया जाना चाहिए। इसके अलावा बिजली व्यवस्था, अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन रास्ते और भवन की भार वहन क्षमता जैसी व्यवस्थाओं की भी जांच महत्वपूर्ण है।
सत्य निकेतन की घटना ने यह सवाल फिर सामने ला दिया है कि क्या पुराने और छात्र-बहुल इलाकों में स्थित भवनों का पर्याप्त सुरक्षा निरीक्षण नियमित रूप से किया जाता है।
हादसे की विस्तृत जांच से सामने आएगा सच
फिलहाल प्रशासन और जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाना है। यह निर्धारित करना होगा कि भवन अचानक क्यों गिरा और क्या इसमें निर्माण या मरम्मत कार्य की कोई भूमिका थी।
जांच के दौरान भवन के नक्शे, निर्माण की अनुमति, मरम्मत से संबंधित दस्तावेज, संरचनात्मक रिपोर्ट और मौके पर चल रहे कार्यों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा सकती है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि भवन मालिक और संबंधित एजेंसियों ने निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन किया था या नहीं।
सुरक्षा व्यवस्था पर व्यापक सबक
सत्य निकेतन का हादसा केवल एक इमारत के गिरने की घटना नहीं है, बल्कि यह शहरी क्षेत्रों में भवन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चेतावनी भी है। खासकर उन इलाकों में जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी और युवा रहते हैं, प्रशासन के लिए नियमित सुरक्षा जांच और आपातकालीन तैयारियां बेहद महत्वपूर्ण हो जाती हैं।
छह लोगों की मौत ने परिवारों को गहरा दुख दिया है, जबकि 11 लोगों को सुरक्षित बचाया जाना राहत की बात है। अब लोगों की नजर जांच के नतीजों और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है।
यदि हादसे की जांच में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के साथ-साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाना आवश्यक होगा। पुराने भवनों का अनिवार्य संरचनात्मक ऑडिट, निर्माण गतिविधियों की निगरानी और छात्र आवासों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।