सड़क हादसा नहीं, साजिश थी ई-रिक्शा चालक की मौत: पत्नी के प्रेम संबंध ने रची हत्या की खौफनाक कहानी

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सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले से सामने आया एक सनसनीखेज हत्या का मामला पुलिस की जांच में पूरी तरह उलट गया। जिस घटना को शुरुआती तौर पर एक सड़क हादसा समझा जा रहा था, वह दरअसल एक सुनियोजित हत्या निकली। पुलिस जांच में सामने आया कि ई-रिक्शा चालक हरिश्चंद्र की मौत दुर्घटना में नहीं हुई थी, बल्कि उसकी हत्या की साजिश रची गई थी। इस मामले में पुलिस ने 8 सितंबर 2026 को चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, मामले की जड़ में घरेलू विवाद और मृतक की पत्नी माया देवी के कथित प्रेम संबंध बताए जा रहे हैं। जांच के दौरान पुलिस को ऐसे साक्ष्य मिले, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि हरिश्चंद्र को रास्ते से हटाने के लिए योजना बनाई गई थी। इस साजिश को अंजाम देने के लिए कथित तौर पर बाहरी लोगों की मदद ली गई।

Death AI Generated photo

हादसे की सूचना ने खड़े किए सवाल

हरिश्चंद्र ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उसकी मौत के बाद शुरुआती परिस्थितियां ऐसी थीं कि घटना को सड़क दुर्घटना से जोड़कर देखा गया। हालांकि, पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ घटनास्थल और शव की स्थिति को लेकर कई सवाल सामने आने लगे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत को सामान्य दुर्घटना का परिणाम न मानकर हत्या की आशंका मजबूत हुई। इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले को नए सिरे से खंगालना शुरू किया।

जांचकर्ताओं ने मृतक के पारिवारिक संबंधों, उसके संपर्क में रहने वाले लोगों और घटना से पहले की गतिविधियों की जानकारी जुटाई। इसी दौरान पुलिस की जांच कथित तौर पर माया देवी और नियाज अहमद तक पहुंची।

प्रेम संबंध और घरेलू विवाद बना साजिश का आधार

जांच में पुलिस ने दावा किया कि माया देवी और नियाज अहमद के बीच संबंध थे। पुलिस के मुताबिक, हरिश्चंद्र और उसकी पत्नी के बीच इस वजह से घरेलू तनाव भी चल रहा था। आरोप है कि इसी विवाद के बीच हरिश्चंद्र को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई।

किसी भी हत्या के मामले में केवल आरोप या संबंध अपने आप अपराध साबित नहीं करते। अपराध की पुष्टि के लिए पुलिस को घटनाक्रम, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, गवाहों और अन्य भौतिक प्रमाणों को अदालत के सामने रखना होता है। इस मामले में भी पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ-साथ उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाया।

1.10 लाख रुपये में हत्या की कथित सुपारी

पुलिस के मुताबिक, नियाज अहमद ने कथित तौर पर हरिश्चंद्र की हत्या के लिए इरशाद और अब्दुल्ला नाम के दो लोगों से संपर्क किया। आरोप है कि हत्या के लिए कुल 1.10 लाख रुपये की रकम तय हुई थी।

जांच के अनुसार, इस रकम में से 60 हजार रुपये अग्रिम दिए गए थे। इसके बाद आरोपियों ने हरिश्चंद्र को निशाना बनाने की योजना तैयार की। पुलिस का दावा है कि हत्या को इस तरह अंजाम देने की कोशिश की गई कि पूरी घटना दुर्घटना जैसी दिखाई दे।

यह तथ्य सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया, क्योंकि इससे पुलिस को कथित रूप से यह संकेत मिला कि घटना अचानक नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे पहले से तैयारी की गई थी।

ई-रिक्शा बुक कर सुनसान स्थान पर ले गए

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने हरिश्चंद्र का ई-रिक्शा बुक किया और उसे एक अपेक्षाकृत सुनसान इलाके की ओर ले गए। आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद हरिश्चंद्र पर हमला किया गया और उसकी हत्या कर दी गई।

जांच में यह भी सामने आया कि वारदात के बाद शव को बूढ़ी राप्ती नदी में फेंक दिया गया। कथित तौर पर इसका उद्देश्य घटना को दुर्घटना का रूप देना था, ताकि पुलिस और परिवार को यह लगे कि ई-रिक्शा से जुड़े हादसे में हरिश्चंद्र की जान चली गई।

हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की आगे की जांच ने इस कथित योजना को बेनकाब कर दिया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनी जांच का अहम आधार

किसी संदिग्ध मौत की जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस मामले में भी रिपोर्ट से पुलिस को मौत की वास्तविक परिस्थितियों को समझने में मदद मिली। हत्या की आशंका सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया।

पुलिस ने मृतक के मोबाइल फोन, संपर्कों और घटना से जुड़े लोगों की गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया। पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों को जोड़ते हुए पुलिस कथित साजिश तक पहुंची।

जांचकर्ताओं ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि हरिश्चंद्र आखिरी बार किन लोगों के संपर्क में था, उसे कहां ले जाया गया और उसकी मौत से पहले तथा बाद में संदिग्ध लोगों की गतिविधियां क्या थीं। इसी क्रम में पुलिस ने चारों आरोपियों को चिह्नित किया।

चार आरोपियों की गिरफ्तारी

पुलिस ने 8 सितंबर 2026 को इस मामले में चार आरोपियों—माया देवी, नियाज अहमद, इरशाद और अब्दुल्ला—को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।

जांच एजेंसी ने वारदात में इस्तेमाल किए गए कथित हथियार और मोबाइल फोन को भी बरामद करने का दावा किया है। इन बरामद वस्तुओं को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस अब यह भी देख रही होगी कि उपलब्ध साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच से आरोपियों के खिलाफ मामले को कितना मजबूत किया जा सकता है।

दुर्घटना का रूप देने की कोशिश हुई नाकाम

इस घटना की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कथित तौर पर हत्या के बाद इसे दुर्घटना जैसा दिखाने की कोशिश की गई। यदि पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को गंभीरता से नहीं देखती, तो मामला दुर्घटना के रूप में दर्ज होकर आगे बढ़ सकता था।

लेकिन संदिग्ध परिस्थितियों ने जांचकर्ताओं को गहराई से पड़ताल करने के लिए प्रेरित किया। पोस्टमार्टम निष्कर्ष, आरोपियों से पूछताछ और अन्य साक्ष्यों को जोड़ने के बाद पुलिस ने इसे हत्या की साजिश के रूप में जांचना शुरू किया।

अदालत में तय होगी आरोपियों की भूमिका

चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पुलिस द्वारा बरामद हथियार और मोबाइल फोन सहित अन्य साक्ष्यों की जांच की जाएगी। साथ ही आरोपियों के बयानों की स्वतंत्र रूप से उपलब्ध साक्ष्यों से पुष्टि भी महत्वपूर्ण होगी।

किसी भी आपराधिक मामले में गिरफ्तारी का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं होता। अंतिम निर्णय अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

परिवार के लिए बड़ा सदमा

हरिश्चंद्र की मौत ने उसके परिवार को गहरा आघात पहुंचाया है। जिस मौत को पहले हादसा समझा गया, उसके पीछे कथित साजिश का खुलासा होने से मामले ने नया मोड़ ले लिया। परिवार के लिए यह घटना इसलिए भी बेहद पीड़ादायक है क्योंकि जांच में कथित तौर पर परिचित लोगों की भूमिका सामने आई है।

सिद्धार्थनगर का यह मामला एक बार फिर बताता है कि संदिग्ध मौत के मामलों में शुरुआती धारणा के बजाय वैज्ञानिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट कितनी महत्वपूर्ण होती है। पुलिस ने दुर्घटना के नजरिए से शुरू हुई जांच को हत्या की दिशा में मोड़ा और कथित साजिश में शामिल चार लोगों तक पहुंचने का दावा किया।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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