महिला पत्रकारों से कथित मारपीट के विरोध में राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

0

अमरेश त्रिपाठी ब्यूरो चीफ, कानपुर देहात हिट एंड हॉट न्यूज़ कानपुर देहात, माती। दिल्ली के…

अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ, कानपुर देहात

कानपुर देहात, माती। दिल्ली के साकेत थाना क्षेत्र में महिला पत्रकारों के साथ कथित अभद्रता और मारपीट के मामले को लेकर राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद की कानपुर देहात इकाई ने कड़ा विरोध जताया है। संगठन के पदाधिकारियों और पत्रकारों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।

राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि पत्रकार लोकतंत्र में जनता और शासन-प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण सेतु का काम करते हैं। ऐसे में समाचार संकलन के दौरान किसी पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार अथवा मारपीट की घटना गंभीर चिंता का विषय है। संगठन ने विशेष रूप से महिला पत्रकारों के साथ हुई कथित घटना को लेकर नाराजगी जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

कवरेज के दौरान कथित दुर्व्यवहार का आरोप

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली में एक कार्यक्रम की कवरेज करने पहुंची स्वतंत्र महिला पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान के साथ पुलिस कर्मियों द्वारा अभद्र व्यवहार किया गया। संगठन के अनुसार दोनों पत्रकार एक कार्यक्रम की रिपोर्टिंग कर रही थीं। इसी दौरान कथित तौर पर उनके साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें उनकी गाड़ी से साकेत पुलिस स्टेशन ले जाया गया।

परिषद की ओर से दिए गए ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि थाने में महिला पुलिस अधिकारियों सहित अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा पत्रकारों के साथ मारपीट की गई। संगठन का दावा है कि घटना से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। हालांकि, घटना के सभी तथ्यों और आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

पत्रकार सुरक्षा परिषद ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकें और यदि किसी पुलिसकर्मी की भूमिका कानून के विरुद्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो।

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सुरक्षा पर जोर

राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। पत्रकारों का काम जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी गतिविधियों और सामाजिक घटनाओं को सामने लाना है। ऐसे में पत्रकारों को अपना काम करने के दौरान भय या दबाव का सामना न करना पड़े, यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है।

संगठन ने कहा कि पत्रकारों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। विशेष रूप से महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट के आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। परिषद ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करते हुए संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किए जाने की मांग की है।

राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा

कानपुर देहात के माती मुख्यालय में जिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन के दौरान राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे। संगठन के जिला अध्यक्ष अनूप गौड़ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपते हुए पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

संगठन के संरक्षक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेन्द्र कुमार मिश्रा के नेतृत्व में परिषद ने कहा कि पत्रकारों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर संगठन लगातार आवाज उठाता रहेगा। परिषद ने मांग की कि घटना की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए।

पत्रकार सुरक्षा को लेकर संगठन की चिंता

परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि पत्रकारों को समाचार संकलन और रिपोर्टिंग के दौरान विभिन्न परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। यदि किसी पत्रकार के साथ पुलिस या किसी अन्य संस्था द्वारा कथित तौर पर दुर्व्यवहार होता है तो उसकी शिकायत की निष्पक्ष सुनवाई होनी चाहिए।

संगठन ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन इसी के साथ पत्रकारों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों का सम्मान किया जाना भी आवश्यक है। यदि किसी घटना को लेकर पुलिस और पत्रकार के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है तो उसका समाधान कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए, न कि कथित मारपीट या दबाव के जरिए।

बड़ी संख्या में पत्रकार रहे मौजूद

ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन से जुड़े कई पदाधिकारी और पत्रकार उपस्थित रहे। इनमें वरिष्ठ जिला संरक्षक सुशील त्रिवेदी, विपिन कोहली, सुमित गुप्ता, अशोक चौहान, राजा संखवार, नितेश कुमार, सौरभ तिवारी, विमल कुमार गुप्ता, राकेश मिश्रा, मोहन कुमार, मुकेश केशवानी, फूलचंद कुमार, विनोद, सौरभ और मोनू सहित अन्य पत्रकार शामिल रहे।

इसके अलावा जिला अध्यक्ष अनूप गौड़, उपाध्यक्ष रिजवान अहमद, पुष्पेन्द्र कुमार, संगठन मंत्री ज्ञान सिंह, मुन्ना भदौरिया, मोनू सिंह, विनोद सिंह एडवोकेट, मोहन कुमार, विमल किशोर गुप्ता, जिला आईटी प्रभारी सचिन शुक्ला, राजेश कुमार, राजू सोनकर, बाबू सोनी, वाई.सी. मीडिया प्रभारी अलोक, अनुज कुमार, विपिन कोहली और प्रशांत श्रीवास्तव सहित कई सदस्य मौजूद रहे।

निष्पक्ष जांच की मांग

राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद ने ज्ञापन के माध्यम से स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराना है। संगठन का कहना है कि जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

परिषद ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि महिला पत्रकारों की सुरक्षा और पत्रकारों के सम्मान से जुड़े इस मामले को गंभीरता से लिया जाए। साथ ही भविष्य में पत्रकारों के साथ ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न न हों, इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाने की मांग भी की गई।

कानपुर देहात में ज्ञापन सौंपे जाने के बाद पत्रकार संगठनों ने उम्मीद जताई कि संबंधित प्रकरण में निष्पक्ष जांच होगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। संगठन ने यह भी कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्र पत्रकारिता के अधिकारों की रक्षा के लिए वह आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा।

नोट: इस रिपोर्ट में दिल्ली की घटना से जुड़े आरोप संगठन द्वारा दिए गए ज्ञापन के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और अंतिम जिम्मेदारी संबंधित जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें