प्रयागराज में TGT-PGT अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन अनशन, B.Ed अनिवार्यता के खिलाफ तेज हुआ आंदोलन

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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे TGT और PGT अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। नए भर्ती नियमों में B.Ed डिग्री को अनिवार्य किए जाने के विरोध में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नियमों में अचानक किए गए बदलाव से उन लाखों युवाओं के सामने संकट खड़ा हो गया है, जो वर्षों से पुराने नियमों के आधार पर शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे थे।

प्रयागराज के पत्थर गिरजाघर के पास चल रहे इस आंदोलन में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर सरकार से हस्तक्षेप की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से पहले पात्रता के नियमों में बदलाव किया जाना उन उम्मीदवारों के लिए अन्यायपूर्ण है, जिन्होंने पुरानी व्यवस्था के मुताबिक अपनी तैयारी और शैक्षणिक योग्यता पूरी की है।

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B.Ed अनिवार्यता को लेकर नाराजगी

आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का मुख्य विरोध TGT और PGT पदों के लिए B.Ed की अनिवार्यता को लेकर है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, करीब सात लाख ऐसे अभ्यर्थी इस बदलाव से प्रभावित हो सकते हैं, जिन्होंने पहले से लागू नियमों के आधार पर शिक्षक भर्ती की तैयारी की है।

अभ्यर्थियों का तर्क है कि किसी प्रतियोगी भर्ती की तैयारी में उम्मीदवार वर्षों का समय और आर्थिक संसाधन लगाते हैं। ऐसे में अचानक पात्रता की शर्त बदल जाने से उनकी वर्षों की मेहनत प्रभावित हो सकती है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि सरकार नई योग्यता को भविष्य की भर्तियों के लिए लागू करना चाहती है तो उसे पहले से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए संक्रमणकालीन व्यवस्था या पुराने नियमों के अनुसार अवसर देना चाहिए।

उनका कहना है कि B.Ed जैसी अतिरिक्त डिग्री हासिल करने में समय लगता है। इसलिए भर्ती प्रक्रिया के बीच या उसके ठीक पहले पात्रता में बदलाव से मौजूदा अभ्यर्थियों को नया पाठ्यक्रम पूरा करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाएगा।

पत्थर गिरजाघर पर पांचवें दिन भी जारी रहा अनशन

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, उनका अनिश्चितकालीन अनशन पांचवें दिन में प्रवेश कर चुका है। अभ्यर्थी अपनी मांगों पर कायम हैं और उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी समस्या पर गंभीरता से विचार नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा।

धरने में शामिल उम्मीदवारों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यवस्था का विरोध करना मात्र नहीं है, बल्कि वे अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आवाज उठा रहे हैं। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने शिक्षक बनने के लक्ष्य के साथ लंबे समय तक पढ़ाई की और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। अब नियमों में बदलाव के कारण उन्हें अपनी मेहनत का परिणाम अनिश्चित दिखाई दे रहा है।

आंदोलन स्थल पर अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की कि मौजूदा भर्ती प्रक्रिया को पुराने नियमों और पहले से निर्धारित पैटर्न के आधार पर आगे बढ़ाया जाए।

संजय सिंह ने पहुंचकर सुनी अभ्यर्थियों की समस्याएं

आंदोलन के बीच आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी प्रयागराज पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से मुलाकात की। उन्होंने आंदोलनकारियों की बातें सुनीं और उनकी मांगों के प्रति समर्थन जताया।

अभ्यर्थियों के साथ बातचीत के दौरान कई उम्मीदवारों ने अपनी परेशानियां साझा कीं। इसी दौरान प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी प्रवीण यादव अपनी बात रखते हुए भावुक हो गए। उन्होंने नियमों में हुए बदलाव से पैदा हुई कठिनाइयों और अपने भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की।

संजय सिंह ने सरकार की नई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे ‘तुगलकी फरमान’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जिन उम्मीदवारों ने पहले से लागू नियमों के अनुसार अपनी तैयारी की है, उनके हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार को निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।

पुराने नियमों के आधार पर भर्ती की मांग

अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग है कि वर्तमान भर्ती प्रक्रिया को उन नियमों के आधार पर संचालित किया जाए, जिनके तहत उन्होंने अपनी तैयारी शुरू की थी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पात्रता मानदंड में बदलाव का प्रभाव उन उम्मीदवारों पर नहीं पड़ना चाहिए, जिन्होंने पहले से निर्धारित व्यवस्था के तहत वर्षों तक मेहनत की है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि भविष्य की भर्तियों के लिए B.Ed को अनिवार्य बनाया जाता है तो उम्मीदवारों को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही वर्तमान भर्ती में पुराने नियमों के आधार पर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को अवसर मिलना चाहिए।

उनका मानना है कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों की स्थिरता और पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उम्मीदवारों के अनुसार, पात्रता संबंधी शर्तों में अचानक बदलाव से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं में असमंजस और असुरक्षा की स्थिति पैदा होती है।

वर्षों की तैयारी पर संकट का दावा

आंदोलन में शामिल कई अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने शिक्षक भर्ती को अपना करियर लक्ष्य बनाया है। इसके लिए उन्होंने लंबे समय तक पढ़ाई की, कोचिंग और अध्ययन सामग्री पर खर्च किया तथा अन्य रोजगार विकल्पों को भी पीछे रखा।

अब B.Ed की अनिवार्यता उनके लिए अतिरिक्त शैक्षणिक आवश्यकता बन गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सभी उम्मीदवारों के लिए तुरंत नई डिग्री हासिल करना संभव नहीं है। यही वजह है कि वे सरकार से मौजूदा उम्मीदवारों के लिए राहत की मांग कर रहे हैं।

अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि उनका आंदोलन केवल व्यक्तिगत नौकरी पाने की मांग तक सीमित नहीं है। वे भर्ती प्रक्रिया में स्पष्टता, समान अवसर और पहले से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के हितों की रक्षा की मांग कर रहे हैं।

सरकार से तत्काल समाधान की अपील

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से बातचीत कर समस्या का समाधान निकालने की अपील की है। उनका कहना है कि लंबे समय तक आंदोलन और भूख हड़ताल किसी के हित में नहीं है, लेकिन जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त करने की स्थिति में वे नहीं हैं।

अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो संघर्ष को आगे भी जारी रखा जाएगा। आंदोलनकारी अपने भविष्य और शिक्षक भर्ती में मिलने वाले अवसरों को लेकर चिंतित हैं।

प्रदर्शन स्थल पर अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार को नई व्यवस्था लागू करने से पहले उन उम्मीदवारों के बारे में भी विचार करना चाहिए, जिन्होंने पुरानी पात्रता के आधार पर अपनी तैयारी की है। उनका आग्रह है कि वर्षों से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को अचानक नई शैक्षणिक शर्त के कारण प्रतियोगिता से बाहर न किया जाए।

आंदोलन के आगे बढ़ने के संकेत

प्रयागराज में चल रहा यह आंदोलन शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों के बीच बढ़ती नाराजगी को सामने ला रहा है। एक तरफ प्रदर्शनकारी पुराने नियमों के आधार पर भर्ती की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर B.Ed अनिवार्यता को लेकर सरकार के फैसले पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

फिलहाल अभ्यर्थियों ने अपना अनशन जारी रखने का फैसला किया है। आंदोलनकारियों की निगाह अब सरकार की अगली कार्रवाई और संभावित वार्ता पर टिकी है। यदि दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए कोई समाधान निकलता है तो आंदोलन समाप्त होने की संभावना बन सकती है, लेकिन मांगों पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में प्रदर्शन और तेज हो सकता है।

प्रयागराज में शिक्षक भर्ती को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है। बड़ी संख्या में प्रभावित होने का दावा कर रहे अभ्यर्थी इसे अपने भविष्य और रोजगार के अवसरों से जुड़ा विषय बता रहे हैं। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती है कि वह नियमों में बदलाव को लेकर अभ्यर्थियों की चिंताओं को सुने और ऐसी व्यवस्था तैयार करे, जिससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ-साथ पहले से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के हितों पर भी उचित विचार हो सके।

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