गुजरात में 5 लाख से अधिक फर्जी Gmail खातों का खुलासा, कथित बम-धमकी नेटवर्क की जांच तेज

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नई दिल्ली/गांधीनगर, 21 सितंबर 2026: गुजरात पुलिस की साइबर अपराध जांच में एक ऐसा कथित डिजिटल नेटवर्क सामने आया है, जिसने जांच एजेंसियों का ध्यान बड़े पैमाने पर बनाए गए फर्जी ईमेल खातों की ओर खींच दिया है। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान 5,13,847 Gmail आईडी और उनसे जुड़े पासवर्ड की जानकारी बरामद हुई है। यह नेटवर्क कथित तौर पर सरकारी संस्थानों को झूठी बम धमकी वाले ईमेल भेजने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। मामले में अब तक दो लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है।

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इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू नेटवर्क का आकार है। पुलिस के अनुसार, बरामद डिजिटल जानकारी में शामिल ईमेल खातों का इस्तेमाल वर्ष 2022 से किया जा रहा था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन खातों को किस तरह तैयार किया गया, उन्हें किसे उपलब्ध कराया गया और इनमें से कितने खातों का वास्तविक रूप से धमकी भरे संदेश भेजने में इस्तेमाल हुआ।

एक धमकी वाले ईमेल से शुरू हुई जांच

रिपोर्टों के मुताबिक, गुजरात सरकार को 10 सितंबर 2026 को एक बम धमकी वाला ईमेल मिला था। संदेश में गुजरात के सरकारी प्रतिष्ठानों के अलावा नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन से जुड़े देशों को भी निशाना बनाने की धमकी दी गई थी। सुरक्षा एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लिया और ईमेल के डिजिटल स्रोतों की जांच शुरू की। बाद में धमकी को फर्जी पाया गया।

हालांकि, इस एक मामले की जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को एक बड़े ईमेल नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली। जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर ऐसे खातों और उनके लॉगिन विवरण से संबंधित एक बड़ा डेटाबेस बरामद किया। इसके बाद मामला केवल एक फर्जी धमकी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े पैमाने पर डिजिटल पहचान तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने की जांच में बदल गया।

दो लोगों की गिरफ्तारी

गुजरात पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस का आरोप है कि आरोपियों में से एक वर्ष 2022 से ईमेल आईडी और पासवर्ड तैयार करने तथा उन्हें दूसरे लोगों तक पहुंचाने की गतिविधि में शामिल था। जांच में बिहार और झारखंड के कुछ स्थानों तक कार्रवाई किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

पुलिस अब यह समझने का प्रयास कर रही है कि नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका क्या थी। बरामद खातों के संबंध में भी डिजिटल फोरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि उनके निर्माण, संचालन और संभावित इस्तेमाल की कड़ियों को जोड़ा जा सके।

5,13,847 खातों का आंकड़ा क्यों महत्वपूर्ण है?

513,847 का आंकड़ा इस जांच का सबसे बड़ा और सबसे अधिक चर्चा में आया हिस्सा है। पुलिस के मुताबिक, इतनी बड़ी संख्या में Gmail आईडी और पासवर्ड का रिकॉर्ड मिला है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इन सभी खातों से बम धमकी भेजी गई थी।

जांचकर्ताओं को अब प्रत्येक खाते की गतिविधि का विश्लेषण करना होगा। कौन-से खाते सक्रिय थे, किन खातों से संदेश भेजे गए, किन उपकरणों या इंटरनेट कनेक्शनों से उनका इस्तेमाल हुआ और क्या कुछ खातों को दूसरे लोगों को बेचा या उपलब्ध कराया गया—इन सभी सवालों के जवाब डिजिटल जांच से सामने आने की उम्मीद है।

यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी डेटाबेस में बड़ी संख्या में क्रेडेंशियल मिलना और उन सभी खातों के आपराधिक गतिविधि में इस्तेमाल होने की बात अलग-अलग चीजें हैं।

Google से जानकारी मांगने की तैयारी

मामले की जांच अब तकनीकी स्तर पर Google तक भी पहुंच सकती है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात पुलिस Google से इस बारे में सवाल करने की तैयारी कर रही है कि इतनी बड़ी संख्या में खाते किस तरह बनाए और संचालित किए गए। पुलिस अधिकारी विवेक भेड़ा ने कहा है कि जांच के दौरान सामने आए सवालों को लेकर कंपनी से संपर्क किया जाएगा और सुरक्षा नीतियों में संभावित बदलाव पर भी चर्चा की जाएगी।

पुलिस की दिलचस्पी इस बात में भी है कि कथित तौर पर इन फर्जी खातों में दो-स्तरीय प्रमाणीकरण यानी 2FA का इस्तेमाल किया गया था। इतनी बड़ी संख्या में खातों के मामले में यह प्रक्रिया कैसे पूरी हुई, यह जांच का एक महत्वपूर्ण तकनीकी सवाल बन गया है।

हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे Gmail के पूरे प्लेटफॉर्म के बड़े पैमाने पर हैक होने का प्रमाण नहीं कहा जा सकता। जांच का केंद्र कथित तौर पर फर्जी खातों के निर्माण और उनके दुरुपयोग से जुड़ा नेटवर्क है।

सीमा पार कनेक्शन की भी जांच

जांच में कथित तौर पर बांग्लादेश से जुड़े कुछ संपर्कों की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस का आरोप है कि नेटवर्क से जुड़े एक व्यक्ति का संपर्क बांग्लादेश में मौजूद एक खरीदार से था। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि कुछ भुगतान क्रिप्टोकरेंसी के जरिए किए जाने की आशंका है।

फिलहाल इन दावों की जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित विदेशी संपर्कों की भूमिका क्या थी और क्या भारत के बाहर बैठे लोगों ने ईमेल खातों की खरीद या उनके इस्तेमाल में सहायता की।

सरकारी संस्थानों की सुरक्षा पर सवाल

फर्जी बम धमकी वाले ईमेल सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। ऐसे संदेशों के बाद किसी सरकारी कार्यालय, स्कूल, अदालत या अन्य सार्वजनिक संस्थान में सुरक्षा जांच बढ़ानी पड़ सकती है। इससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने के साथ-साथ सुरक्षा संसाधनों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

गुजरात की जांच में सामने आए नेटवर्क का आकार इस समस्या के एक अलग पहलू को सामने लाता है। यदि अपराधी बड़ी संख्या में अलग-अलग डिजिटल पहचान तैयार कर लेते हैं, तो उनके लिए जांच एजेंसियों से बचने के प्रयास करना आसान हो सकता है। इसलिए पुलिस अब केवल धमकी भेजने वाले व्यक्ति की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पूरे डिजिटल ढांचे को समझने पर जोर दे रही है।

जांच में आगे क्या होगा?

आने वाले चरण में पुलिस कई स्तरों पर जांच आगे बढ़ा सकती है। बरामद ईमेल क्रेडेंशियल्स की फोरेंसिक जांच, संबंधित उपकरणों और डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण, ईमेल भेजने के समय और स्रोत की तुलना तथा आरोपियों के संपर्कों की पड़ताल इस प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है।

इसके साथ यह भी पता लगाया जाना जरूरी होगा कि 5,13,847 खातों में से कितने वास्तविक रूप से सक्रिय थे और कितने खातों का इस्तेमाल किसी आपराधिक गतिविधि में हुआ। जांच से यह भी स्पष्ट हो सकता है कि क्या यह नेटवर्क केवल बम धमकी वाले संदेशों तक सीमित था या अन्य प्रकार के साइबर अपराधों में भी इन खातों का इस्तेमाल किया गया।

बड़े साइबर अपराध नेटवर्क की ओर संकेत

यह मामला बताता है कि साइबर अपराध अब केवल किसी एक व्यक्ति द्वारा भेजे गए संदिग्ध संदेश तक सीमित नहीं रह गया है। बड़े पैमाने पर डिजिटल खातों की व्यवस्था, उनके लॉगिन विवरण और अलग-अलग स्थानों पर उनका संभावित इस्तेमाल जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां पैदा करता है।

गुजरात पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच का अगला चरण इस कथित नेटवर्क की पूरी संरचना समझने पर केंद्रित है। दो गिरफ्तारियों के बाद अन्य संभावित सहयोगियों की पहचान, खातों के वास्तविक उपयोग और कथित सीमा पार संपर्कों की भूमिका जैसे सवालों के जवाब आने बाकी हैं।

फिलहाल 5,13,847 Gmail खातों से जुड़ी जानकारी इस जांच का सबसे बड़ा सुराग बनी हुई है। पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञों की आगे की जांच यह निर्धारित करेगी कि इन खातों का वास्तविक इस्तेमाल किस पैमाने पर हुआ और इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग या समूह सक्रिय थे। Google से मांगी जाने वाली जानकारी भी इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि उससे खातों के निर्माण और सुरक्षा प्रक्रियाओं से जुड़े तकनीकी सवालों पर अतिरिक्त जानकारी मिलने की संभावना है।

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