कानपुर देहात में सर्पदंश से 9वीं की छात्रा की मौत, परिवार में पसरा मातम

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अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

कानपुर देहात। रसूलाबाद क्षेत्र के मनावा गांव में मंगलवार की रात एक दर्दनाक हादसे में कक्षा 9 की 14 वर्षीय छात्रा अंशिका की सर्पदंश से मौत हो गई। घटना के बाद पूरे परिवार में मातम का माहौल है। बेटी की अचानक हुई मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं गांव में भी घटना को लेकर शोक की स्थिति बनी हुई है।

बताया जा रहा है कि अंशिका मंगलवार रात अपने घर में सो रही थी। रात करीब डेढ़ बजे उसकी नींद खुली। इसी दौरान उसे सांप ने काट लिया। सर्पदंश के बाद छात्रा ने शोर मचाया। उसकी चीख सुनकर घर में सो रहे परिजन तत्काल जाग गए और उसे संभालने का प्रयास किया।

सपेरे की मदद से पकड़ा गया सांप

घटना के बाद परिवार के लोगों ने आसपास के लोगों को सूचना दी। सांप के घर में मौजूद होने की जानकारी मिलने पर उसे पकड़ने के लिए एक सपेरे की मदद ली गई। काफी प्रयास के बाद सांप को पकड़कर एक डिब्बे में बंद कर दिया गया।

परिजनों के सामने उस समय सबसे बड़ी चिंता अंशिका की बिगड़ती हालत थी। परिवार के लोग बिना देर किए उसे उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) रसूलाबाद लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने छात्रा की स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार शुरू किया।

हालत गंभीर होने पर कानपुर किया गया रेफर

सीएचसी रसूलाबाद में प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने अंशिका की हालत गंभीर बताई। बेहतर इलाज और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं के लिए उसे कानपुर रेफर कर दिया गया। इसके बाद परिजन उसे लेकर कानपुर के हैलट अस्पताल पहुंचे।

हालांकि अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने अंशिका को मृत घोषित कर दिया। इस खबर के सामने आते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस बेटी को बचाने की उम्मीद लेकर परिजन अस्पताल पहुंचे थे, वहां उसकी मौत की सूचना मिलने से सभी लोग सदमे में आ गए।

पढ़ाई में जुटी थी अंशिका

अंशिका नरेश चंद्र इंटर कॉलेज, खरकपुर में कक्षा 9 की छात्रा थी। परिवार के अनुसार वह अभी पढ़ाई कर रही थी और उसके सामने भविष्य को लेकर कई सपने थे। अचानक हुई इस घटना ने परिवार की खुशियों को गहरे दुख में बदल दिया।

अंशिका की मौत की खबर गांव में पहुंचते ही बड़ी संख्या में लोग शोक जताने के लिए परिवार के घर पहुंचे। ग्रामीणों ने परिजनों को ढांढस बंधाया। घर में चीख-पुकार के बीच परिजनों के लिए इस दुख को स्वीकार करना बेहद कठिन हो गया।

अंशिका की मां रमाकांती बेटी की मौत से गहरे सदमे में हैं। पिता राजू भी इस घटना से टूट गए हैं। बहनों रीतिका, रागिनी और विनीता तथा भाई नैतिक का भी रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के लिए यह घटना ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

रात के समय सर्पदंश की घटनाएं बढ़ाती हैं चिंता

ग्रामीण क्षेत्रों में बरसात और उमस के मौसम के दौरान सांपों के घरों और आबादी वाले इलाकों में पहुंचने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। खेतों, झाड़ियों, लकड़ी या घर के आसपास मौजूद सामान में सांप छिपे होने की आशंका रहती है। रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण इनके संपर्क में आने का खतरा बढ़ सकता है।

कानपुर देहात में भी हाल के महीनों में सर्पदंश से जुड़ी कई घटनाएं सामने आने की बात कही जा रही है। मनावा गांव की घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में सांपों से सुरक्षा और समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत को सामने रखा है।

सर्पदंश के बाद समय पर उपचार जरूरी

सर्पदंश की स्थिति में घबराने के बजाय पीड़ित को जल्द से जल्द नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना महत्वपूर्ण होता है। सांप के काटने के बाद झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय गंवाने से स्थिति गंभीर हो सकती है। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटी-स्नेक वेनम समेत आवश्यक उपचार अस्पताल में ही उपलब्ध कराया जाता है।

विशेषज्ञों द्वारा आम तौर पर यह सलाह दी जाती है कि सर्पदंश के बाद पीड़ित को अनावश्यक रूप से चलाने-फिराने से बचाया जाए और उसे जल्द चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाया जाए। सांप को पकड़ने के प्रयास में व्यक्ति को दोबारा काटे जाने का जोखिम भी रहता है, इसलिए अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।

परिवार के लिए कभी न भूलने वाला हादसा

अंशिका के परिवार के लिए मंगलवार की रात सामान्य रात की तरह शुरू हुई थी, लेकिन कुछ ही समय में सब कुछ बदल गया। रात में अचानक हुई घटना के बाद परिजनों ने अपनी बेटी को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाए और उसे पहले रसूलाबाद सीएचसी तथा बाद में कानपुर के हैलट अस्पताल पहुंचाया। इसके बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।

14 वर्षीय छात्रा की मौत ने परिवार के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी झकझोर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे मामलों में गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता और आपात स्थिति में त्वरित चिकित्सा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है।

यह घटना ग्रामीण परिवारों के लिए भी एक गंभीर संदेश छोड़ती है कि बरसात के मौसम में घर और आसपास के स्थानों की नियमित सफाई, रात में पर्याप्त रोशनी और सावधानी बरतना जरूरी है। विशेषकर सोने से पहले बिस्तर, कपड़ों और घर के आसपास के स्थानों को देख लेना उपयोगी हो सकता है।

फिलहाल अंशिका की मौत से मनावा गांव और उसके परिवार में शोक की लहर है। एक होनहार छात्रा की असमय मौत ने उसके माता-पिता, भाई-बहनों और परिचितों को गहरे दुख में डाल दिया है। परिवार जिस बेटी को भविष्य में आगे बढ़ते देखना चाहता था, वह अब उनके बीच नहीं रही। घटना के बाद गांव में भी लोग परिवार के दुख में शामिल होकर उन्हें सांत्वना दे रहे हैं।

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