जालौन में जिला स्तरीय एमसीएमसी का गठन, चुनावी प्रचार सामग्री की निगरानी पर जोर

0

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

जालौन, 24 सितंबर। विधान परिषद स्नातक निर्वाचन-2026 को लेकर जालौन जिला प्रशासन ने चुनावी प्रक्रिया में मीडिया माध्यमों की भूमिका और निगरानी को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में जिला स्तरीय मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी समीर ने की।

बैठक में निर्वाचन के दौरान विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए प्रसारित होने वाली प्रचार सामग्री की निगरानी, राजनीतिक विज्ञापनों के पूर्व प्रमाणीकरण और पेड न्यूज जैसे मामलों की पहचान से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने समिति से निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पूरी गंभीरता से पालन करने को कहा।

सभी प्रमुख मीडिया माध्यमों पर नजर रखने के निर्देश

जिलाधिकारी ने कहा कि चुनाव के दौरान मतदाताओं तक राजनीतिक दलों, प्रत्याशियों और अन्य चुनावी गतिविधियों से जुड़ी सूचनाएं कई माध्यमों से पहुंचती हैं। इनमें समाचार पत्र, टेलीविजन चैनल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वेबसाइट, इंटरनेट और अन्य डिजिटल माध्यम शामिल हैं। ऐसे में निर्वाचन संबंधी सामग्री की निगरानी एक व्यवस्थित और निष्पक्ष तरीके से किया जाना जरूरी है।

उन्होंने समिति के सदस्यों को निर्देश दिया कि विभिन्न माध्यमों पर प्रकाशित या प्रसारित होने वाली चुनावी सामग्री पर नियमित नजर रखी जाए। निगरानी के दौरान किसी भी राजनीतिक विज्ञापन या प्रचार सामग्री को केवल उसके स्वरूप के आधार पर नहीं, बल्कि निर्वाचन नियमों और निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप भी देखा जाए।

प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि मीडिया मॉनिटरिंग का उद्देश्य निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और निर्धारित नियमों के अनुरूप चुनावी प्रचार सुनिश्चित करना है।

राजनीतिक विज्ञापनों के प्री-सर्टिफिकेशन पर विशेष जोर

बैठक में राजनीतिक विज्ञापनों के प्री-सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को महत्वपूर्ण विषय के रूप में रखा गया। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि राजनीतिक विज्ञापनों के पूर्व प्रमाणीकरण से जुड़ी निर्धारित प्रक्रिया का सख्ती से पालन कराया जाए।

उन्होंने कहा कि निर्वाचन अवधि में प्रसारित या प्रकाशित होने वाले राजनीतिक विज्ञापनों की निगरानी करते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि संबंधित सामग्री निर्धारित नियमों के अनुरूप हो। किसी राजनीतिक विज्ञापन को प्रकाशित या प्रसारित किए जाने से पहले आवश्यक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

जिलाधिकारी ने समिति से कहा कि इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही न हो और प्राप्त होने वाले मामलों का निर्धारित मानकों के आधार पर परीक्षण किया जाए।

पेड न्यूज के मामलों पर रहेगी नजर

बैठक के दौरान पेड न्यूज से जुड़े संभावित मामलों पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने समिति के सदस्यों को निर्देश दिया कि समाचार के स्वरूप में प्रस्तुत ऐसी सामग्री, जो वास्तव में किसी प्रत्याशी या राजनीतिक गतिविधि के प्रचार से संबंधित हो सकती है, उसकी जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाए।

उन्होंने कहा कि संदिग्ध मामलों को नजरअंदाज करने के बजाय उनका समयबद्ध परीक्षण किया जाना चाहिए। प्रत्येक मामले से संबंधित आवश्यक जानकारी, उपलब्ध सामग्री और जांच से जुड़े दस्तावेजों का व्यवस्थित अभिलेखीकरण भी किया जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर पूरे प्रकरण का रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।

प्रशासन का जोर इस बात पर रहा कि किसी सामग्री को पेड न्यूज मानने से पहले निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के आधार पर तथ्यात्मक परीक्षण किया जाए। इससे निगरानी व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री पर कार्रवाई

जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि यदि निगरानी के दौरान ऐसी कोई सामग्री सामने आती है, जो निर्वाचन नियमों के विपरीत हो, भ्रामक हो या निर्धारित मानकों का उल्लंघन करती हो, तो उसके संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

उन्होंने समिति के सदस्यों से कहा कि किसी भी मामले में जल्दबाजी के बजाय निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाए। संबंधित सामग्री का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के साथ उसके स्रोत और स्वरूप की जांच की जाए तथा आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रकरण को सक्षम स्तर पर प्रस्तुत किया जाए।

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि चुनावी अवधि में मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सूचनाओं का प्रसार तेजी से होता है। ऐसे में पारंपरिक मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया और इंटरनेट आधारित माध्यमों की निगरानी भी प्रभावी ढंग से किए जाने की आवश्यकता है।

निर्वाचन प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखने पर जोर

जिला प्रशासन की ओर से एमसीएमसी की भूमिका को निर्वाचन प्रक्रिया की निगरानी के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। समिति के माध्यम से चुनाव से संबंधित विज्ञापनों, प्रचार सामग्री और संदिग्ध पेड न्यूज की निगरानी की जाती है। इसका उद्देश्य निर्वाचन से जुड़े नियमों के पालन को सुनिश्चित करना और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार मीडिया गतिविधियों का परीक्षण करना है।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समिति के स्तर पर सामने आने वाले प्रत्येक मामले को गंभीरता से लेते हुए उसका रिकॉर्ड तैयार किया जाए और आवश्यक कार्रवाई में अनावश्यक देरी न हो।

बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद

एमसीएमसी की बैठक में जिला निर्वाचन व्यवस्था से जुड़े कई अधिकारी और समिति के सदस्य उपस्थित रहे। इनमें उप जिला निर्वाचन अधिकारी एवं एडीएम वित्त एवं राजस्व राजीव राज, एडीएम न्यायिक शत्रुहन पाठक, एसडीएम न्यायिक कालपी संजय कुमार, अपर जिला सूचना अधिकारी एवं सदस्य सचिव पंकज कुमार तथा स्वतंत्र पत्रकार एवं समिति सदस्य संजय कुमार गुप्ता सहित संबंधित अधिकारी शामिल रहे।

बैठक के दौरान अधिकारियों और समिति के सदस्यों ने निर्वाचन संबंधी मीडिया मॉनिटरिंग से जुड़े दायित्वों पर चर्चा की और निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य करने पर सहमति व्यक्त की।

डिजिटल युग में बढ़ी मीडिया निगरानी की जिम्मेदारी

वर्तमान समय में चुनावी सूचनाएं केवल समाचार पत्र और टेलीविजन तक सीमित नहीं हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, न्यूज वेबसाइट, ऑनलाइन वीडियो, डिजिटल विज्ञापन और अन्य इंटरनेट माध्यम भी चुनावी प्रचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में निर्वाचन के दौरान मीडिया मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी पहले की तुलना में अधिक व्यापक हो गई है।

जालौन में जिला स्तरीय एमसीएमसी की बैठक इसी व्यापक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए आयोजित की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन अवधि में मीडिया और प्रचार सामग्री से जुड़े मामलों की निगरानी निर्धारित नियमों के तहत की जाएगी।

कुल मिलाकर, विधान परिषद स्नातक निर्वाचन-2026 को लेकर जालौन जिला प्रशासन ने मीडिया मॉनिटरिंग व्यवस्था को सक्रिय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राजनीतिक विज्ञापनों के पूर्व प्रमाणीकरण, पेड न्यूज के संभावित मामलों की जांच और निर्वाचन नियमों के विपरीत सामग्री पर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देशों के जरिए प्रशासन ने चुनावी प्रचार व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें