कौशांबी में NHM संविदा कर्मचारियों का तीन दिवसीय धरना शुरू, नियमितीकरण समेत 8 मांगों को लेकर बुलंद की आवाज

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प्रभाकांत मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता कौशांबी

कौशांबी, 8 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर तीन दिवसीय धरना शुरू कर दिया है। जिला मुख्यालय में आयोजित इस आंदोलन के माध्यम से कर्मचारियों ने नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, वर्तमान मानदेय में बढ़ोतरी, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, महंगाई भत्ता, स्थानांतरण नीति सहित कई मांगें सरकार के सामने रखी हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान सेवा सुरक्षा और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के बैनर तले शुरू हुए इस आंदोलन में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों और विभागीय इकाइयों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने भाग लिया। संघ की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, धरना 8 से 10 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करना नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित मांगों की ओर शासन का ध्यान आकर्षित करना है।

वर्षों से स्वास्थ्य विभाग में दे रहे सेवाएं

संघ का कहना है कि कौशांबी जनपद में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत बड़ी संख्या में NHM संविदा कर्मचारी अलग-अलग पदों पर कार्यरत हैं। इनमें चिकित्सकीय सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के साथ-साथ पैरामेडिकल, तकनीकी और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मी भी शामिल हैं।

कर्मचारियों का दावा है कि ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने में संविदा कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी NHM कर्मचारियों ने जोखिम के बीच अपनी सेवाएं जारी रखीं। महामारी के अलावा नियमित टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, रोग नियंत्रण, गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में भी इन कर्मचारियों की जिम्मेदारी रही है।

संघ का कहना है कि इतनी लंबी अवधि तक सेवाएं देने के बावजूद संविदा कर्मचारियों के भविष्य को लेकर स्थायित्व की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसी वजह से अब कर्मचारी संगठित होकर अपनी मांगों को शासन तक पहुंचा रहे हैं।

नियमितीकरण को बताया प्रमुख मांग

आंदोलन की प्रमुख मांगों में NHM संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण शामिल है। संघ का कहना है कि जो कर्मचारी लंबे समय से लगातार विभाग को अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उनके अनुभव और सेवा अवधि को ध्यान में रखते हुए नियमितीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाया जाना चाहिए।

कर्मचारियों ने मांग की है कि लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मियों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे उन्हें भविष्य की नौकरी को लेकर अनिश्चितता से राहत मिल सके। संघ का तर्क है कि स्वास्थ्य विभाग में वर्षों का अनुभव रखने वाले कर्मचारियों की सेवाओं का बेहतर उपयोग विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने में भी किया जा सकता है।

समान काम के लिए समान वेतन की मांग

संविदा कर्मचारियों की दूसरी प्रमुख मांग समान कार्य के लिए समान वेतन है। संघ ने कहा कि जब कर्मचारी नियमित स्वास्थ्य सेवाओं में समान प्रकार की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, तो उनके वेतन और सेवा सुविधाओं को लेकर भी न्यायपूर्ण व्यवस्था होनी चाहिए।

कर्मचारियों ने यह भी मांग रखी है कि नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी होने तक उनके वर्तमान मानदेय में सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाए। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और लंबे समय से सेवाएं देने की स्थिति को देखते हुए मौजूदा भुगतान की समीक्षा आवश्यक है।

कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा की मांग

आंदोलन के दौरान NHM कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। संघ का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत कर्मचारियों को स्वयं और परिवार के सदस्यों के इलाज के समय आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े, इसके लिए पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा अथवा कैशलेस चिकित्सा व्यवस्था जरूरी है।

इसके साथ ही कर्मचारियों ने महंगाई भत्ता, EPF, HRA और अन्य सेवा संबंधी लाभों को लागू करने की मांग भी रखी है। संघ के अनुसार, लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों के लिए सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

स्थानांतरण और अनुकंपा नियुक्ति की मांग

NHM संविदा कर्मचारियों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी स्थानांतरण नीति बनाने की मांग भी आंदोलन में शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि दूरदराज के क्षेत्रों में तैनाती की स्थिति में स्थानांतरण की उचित व्यवस्था होने से कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।

संघ ने अनुकंपा नियुक्ति की व्यवस्था की भी मांग की है। कर्मचारियों के अनुसार, सेवा अवधि के दौरान किसी संविदा कर्मी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में पात्र आश्रित को नियमों के तहत रोजगार उपलब्ध कराने की नीति बनाए जाने की मांग की गई है।

आउटसोर्स कर्मचारियों के समायोजन पर भी जोर

आंदोलनकारियों ने आउटसोर्स कर्मचारियों के समायोजन का मुद्दा भी उठाया है। संघ की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से कार्य कर रहे पात्र आउटसोर्स कर्मियों को उनकी सेवा और अनुभव के आधार पर उचित अवसर दिया जाए।

इसके अलावा नियमित पदों की भर्ती में NHM संविदा कर्मचारियों के लिए निर्धारित कोटा तय करने की मांग भी रखी गई है। संघ का कहना है कि वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में कार्य कर चुके अनुभवी कर्मचारियों को नियमित पदों की भर्ती में प्राथमिकता या उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

12 अक्टूबर से बड़े आंदोलन की चेतावनी

संघ की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार 8 से 10 अक्टूबर तक जिला मुख्यालय पर शांतिपूर्ण धरना और विरोध कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। संगठन ने कहा है कि यदि निर्धारित अवधि तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है और शासन स्तर पर सार्थक वार्ता नहीं होती, तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

संघ ने 12 अक्टूबर से प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी है। संगठन के अनुसार, इस चरण में बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी लखनऊ पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाएंगे। हालांकि कर्मचारियों ने कहा है कि उनका आंदोलन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।

सरकार से शीघ्र निर्णय की उम्मीद

NHM संविदा कर्मचारियों का कहना है कि वे स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और ग्रामीण तथा दूरस्थ इलाकों में लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में लगातार योगदान दे रहे हैं। ऐसे में उनकी सेवा सुरक्षा, वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर शासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि उनकी समस्याओं पर जल्द वार्ता कर व्यावहारिक समाधान निकाला जाए। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे टकराव नहीं चाहते, बल्कि लंबे समय से लंबित मांगों पर न्यायपूर्ण और सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा कर रहे हैं।

कौशांबी में शुरू हुआ यह तीन दिवसीय धरना अब NHM संविदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों और भविष्य से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में शासन की प्रतिक्रिया और संघ के साथ होने वाली संभावित वार्ता से तय होगा कि आंदोलन आगे किस दिशा में बढ़ता है।

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कौशांबी में NHM संविदा कर्मचारियों का तीन दिवसीय धरना शुरू, नियमितीकरण समेत 8 मांगों को लेकर बुलंद की आवाज

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 8, 2026

प्रभाकांत मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता कौशांबी

कौशांबी, 8 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर तीन दिवसीय धरना शुरू कर दिया है। जिला मुख्यालय में आयोजित इस आंदोलन के माध्यम से कर्मचारियों ने नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, वर्तमान मानदेय में बढ़ोतरी, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, महंगाई भत्ता, स्थानांतरण नीति सहित कई मांगें सरकार के सामने रखी हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान सेवा सुरक्षा और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के बैनर तले शुरू हुए इस आंदोलन में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों और विभागीय इकाइयों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने भाग लिया। संघ की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, धरना 8 से 10 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करना नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित मांगों की ओर शासन का ध्यान आकर्षित करना है।

वर्षों से स्वास्थ्य विभाग में दे रहे सेवाएं

संघ का कहना है कि कौशांबी जनपद में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत बड़ी संख्या में NHM संविदा कर्मचारी अलग-अलग पदों पर कार्यरत हैं। इनमें चिकित्सकीय सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के साथ-साथ पैरामेडिकल, तकनीकी और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मी भी शामिल हैं।

कर्मचारियों का दावा है कि ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने में संविदा कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी NHM कर्मचारियों ने जोखिम के बीच अपनी सेवाएं जारी रखीं। महामारी के अलावा नियमित टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, रोग नियंत्रण, गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में भी इन कर्मचारियों की जिम्मेदारी रही है।

संघ का कहना है कि इतनी लंबी अवधि तक सेवाएं देने के बावजूद संविदा कर्मचारियों के भविष्य को लेकर स्थायित्व की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसी वजह से अब कर्मचारी संगठित होकर अपनी मांगों को शासन तक पहुंचा रहे हैं।

नियमितीकरण को बताया प्रमुख मांग

आंदोलन की प्रमुख मांगों में NHM संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण शामिल है। संघ का कहना है कि जो कर्मचारी लंबे समय से लगातार विभाग को अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उनके अनुभव और सेवा अवधि को ध्यान में रखते हुए नियमितीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाया जाना चाहिए।

कर्मचारियों ने मांग की है कि लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मियों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे उन्हें भविष्य की नौकरी को लेकर अनिश्चितता से राहत मिल सके। संघ का तर्क है कि स्वास्थ्य विभाग में वर्षों का अनुभव रखने वाले कर्मचारियों की सेवाओं का बेहतर उपयोग विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने में भी किया जा सकता है।

समान काम के लिए समान वेतन की मांग

संविदा कर्मचारियों की दूसरी प्रमुख मांग समान कार्य के लिए समान वेतन है। संघ ने कहा कि जब कर्मचारी नियमित स्वास्थ्य सेवाओं में समान प्रकार की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, तो उनके वेतन और सेवा सुविधाओं को लेकर भी न्यायपूर्ण व्यवस्था होनी चाहिए।

कर्मचारियों ने यह भी मांग रखी है कि नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी होने तक उनके वर्तमान मानदेय में सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाए। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और लंबे समय से सेवाएं देने की स्थिति को देखते हुए मौजूदा भुगतान की समीक्षा आवश्यक है।

कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा की मांग

आंदोलन के दौरान NHM कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। संघ का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत कर्मचारियों को स्वयं और परिवार के सदस्यों के इलाज के समय आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े, इसके लिए पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा अथवा कैशलेस चिकित्सा व्यवस्था जरूरी है।

इसके साथ ही कर्मचारियों ने महंगाई भत्ता, EPF, HRA और अन्य सेवा संबंधी लाभों को लागू करने की मांग भी रखी है। संघ के अनुसार, लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों के लिए सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

स्थानांतरण और अनुकंपा नियुक्ति की मांग

NHM संविदा कर्मचारियों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी स्थानांतरण नीति बनाने की मांग भी आंदोलन में शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि दूरदराज के क्षेत्रों में तैनाती की स्थिति में स्थानांतरण की उचित व्यवस्था होने से कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।

संघ ने अनुकंपा नियुक्ति की व्यवस्था की भी मांग की है। कर्मचारियों के अनुसार, सेवा अवधि के दौरान किसी संविदा कर्मी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में पात्र आश्रित को नियमों के तहत रोजगार उपलब्ध कराने की नीति बनाए जाने की मांग की गई है।

आउटसोर्स कर्मचारियों के समायोजन पर भी जोर

आंदोलनकारियों ने आउटसोर्स कर्मचारियों के समायोजन का मुद्दा भी उठाया है। संघ की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से कार्य कर रहे पात्र आउटसोर्स कर्मियों को उनकी सेवा और अनुभव के आधार पर उचित अवसर दिया जाए।

इसके अलावा नियमित पदों की भर्ती में NHM संविदा कर्मचारियों के लिए निर्धारित कोटा तय करने की मांग भी रखी गई है। संघ का कहना है कि वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में कार्य कर चुके अनुभवी कर्मचारियों को नियमित पदों की भर्ती में प्राथमिकता या उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

12 अक्टूबर से बड़े आंदोलन की चेतावनी

संघ की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार 8 से 10 अक्टूबर तक जिला मुख्यालय पर शांतिपूर्ण धरना और विरोध कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। संगठन ने कहा है कि यदि निर्धारित अवधि तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है और शासन स्तर पर सार्थक वार्ता नहीं होती, तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

संघ ने 12 अक्टूबर से प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी है। संगठन के अनुसार, इस चरण में बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी लखनऊ पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाएंगे। हालांकि कर्मचारियों ने कहा है कि उनका आंदोलन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।

सरकार से शीघ्र निर्णय की उम्मीद

NHM संविदा कर्मचारियों का कहना है कि वे स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और ग्रामीण तथा दूरस्थ इलाकों में लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में लगातार योगदान दे रहे हैं। ऐसे में उनकी सेवा सुरक्षा, वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर शासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि उनकी समस्याओं पर जल्द वार्ता कर व्यावहारिक समाधान निकाला जाए। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे टकराव नहीं चाहते, बल्कि लंबे समय से लंबित मांगों पर न्यायपूर्ण और सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा कर रहे हैं।

कौशांबी में शुरू हुआ यह तीन दिवसीय धरना अब NHM संविदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों और भविष्य से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में शासन की प्रतिक्रिया और संघ के साथ होने वाली संभावित वार्ता से तय होगा कि आंदोलन आगे किस दिशा में बढ़ता है।