कालपी में स्वास्थ्य एवं बाल श्रम जागरूकता शिविर, 50 से अधिक लोगों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण
देव पटेल
हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता जालौन
कालपी (जालौन)। श्रमिकों और स्थानीय नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा समाज में बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से बुधवार को कालपी के औद्योगिक क्षेत्र में विशेष स्वास्थ्य एवं बाल श्रम जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। श्रम प्रवर्तन विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में बड़ी संख्या में श्रमिकों, दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने भाग लिया। शिविर के दौरान 50 से अधिक लोगों का चिकित्सकीय परीक्षण किया गया और चिकित्सकों ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बारे में आवश्यक परामर्श दिया।

औद्योगिक क्षेत्र परिसर में लगाए गए निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कालपी की चिकित्सकीय टीम ने लोगों की स्वास्थ्य जांच की। शिविर में फिजिशियन डॉ. दिलीप कुमार और डॉ. हरिचरण सिंह के साथ फार्मासिस्ट विनोद सचान मौजूद रहे। चिकित्सकों ने शिविर में पहुंचे लोगों की सामान्य स्वास्थ्य जांच करने के साथ उनकी विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को सुना और आवश्यक सलाह दी।
शिविर में कई लोगों की आंखों की भी जांच की गई। चिकित्सकीय टीम ने जरूरत के अनुसार लोगों को उपचार संबंधी सुझाव दिए। जांच के बाद आवश्यक दवाओं का निःशुल्क वितरण भी किया गया। इससे श्रमिकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को काफी लाभ मिला। स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चिकित्सकों ने लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, साफ-सफाई रखने तथा बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित किया।
श्रमिकों और स्थानीय लोगों ने लिया हिस्सा
औद्योगिक क्षेत्र में आयोजित स्वास्थ्य शिविर को लेकर श्रमिकों में भी उत्साह देखने को मिला। कामकाज में व्यस्त रहने वाले कई श्रमिकों ने शिविर का लाभ उठाकर अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराया। स्थानीय नागरिकों ने भी चिकित्सकीय टीम से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर परामर्श प्राप्त किया।
शिविर का उद्देश्य केवल तत्काल स्वास्थ्य जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग बनाने पर भी जोर दिया गया। चिकित्सकों ने लोगों को बताया कि समय-समय पर स्वास्थ्य की जांच कराने से कई बीमारियों की पहचान शुरुआती स्तर पर की जा सकती है। वहीं, जरूरतमंद लोगों को उपलब्ध कराई गई दवाओं से उन्हें तत्काल राहत पहुंचाने का प्रयास किया गया।
बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता अभियान
स्वास्थ्य शिविर के साथ ही श्रम प्रवर्तन विभाग की टीम ने बाल श्रम उन्मूलन को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाया। श्रम प्रवर्तन अधिकारी रविंद्र मोहन ने औद्योगिक क्षेत्र के साथ-साथ टरननगंज बाजार का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने दुकानदारों, श्रमिकों और अभिभावकों से बातचीत कर बाल श्रम से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी।
अभियान के दौरान लोगों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि बच्चों का स्थान कार्यस्थल नहीं, बल्कि विद्यालय है। बच्चों को कम उम्र में रोजगार में लगाने से उनके शिक्षा के अधिकार और भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। अधिकारियों ने अभिभावकों से अपील की कि वे आर्थिक कठिनाइयों के कारण बच्चों को काम पर भेजने के बजाय संबंधित विभाग को अपनी समस्या से अवगत कराएं।
आर्थिक परेशानी होने पर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की अपील
जागरूकता अभियान के दौरान श्रम प्रवर्तन अधिकारी रविंद्र मोहन ने कहा कि यदि किसी परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और इसी वजह से बच्चे को काम पर भेजने की मजबूरी पैदा हो रही है, तो परिवार को संबंधित विभाग से संपर्क करना चाहिए। सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पात्र परिवारों और बच्चों को सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पात्र बच्चों के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता का प्रावधान है। विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार पात्रता के आधार पर एक लाख रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर उनका लाभ उठाएं और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में सहयोग करें।
शिक्षा को बताया बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला
अधिकारियों ने कहा कि किसी भी बच्चे का भविष्य शिक्षा से जुड़ा होता है। यदि छोटी उम्र में बच्चे काम करने लगते हैं तो उनकी पढ़ाई बाधित होती है और आगे चलकर रोजगार के बेहतर अवसरों से भी वे वंचित रह सकते हैं। इसलिए समाज के प्रत्येक वर्ग की जिम्मेदारी है कि बच्चों को स्कूल भेजने के लिए परिवारों को प्रोत्साहित किया जाए।
जागरूकता अभियान में दुकानदारों और प्रतिष्ठान संचालकों को भी समझाया गया कि वे नाबालिग बच्चों से काम न कराएं। साथ ही अभिभावकों से कहा गया कि वे बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि बाल श्रम की रोकथाम केवल सरकारी विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी से ही इस दिशा में स्थायी सफलता हासिल की जा सकती है।
विभागीय टीम ने क्षेत्र में किया भ्रमण
बाल श्रम विरोधी जागरूकता अभियान के दौरान श्रम प्रवर्तन अधिकारी रविंद्र मोहन के साथ अनुसेवक इंद्रपाल सिंह, रंजीत पाल सहित विभागीय टीम के अन्य सदस्य मौजूद रहे। टीम ने औद्योगिक क्षेत्र और बाजार के विभिन्न हिस्सों में जाकर लोगों से संपर्क किया और बाल श्रम उन्मूलन से संबंधित जानकारी साझा की।
अधिकारियों ने लोगों को सरकारी योजनाओं, बच्चों की शिक्षा और जरूरतमंद परिवारों के लिए उपलब्ध सहायता के बारे में जानकारी दी। इस दौरान लोगों से अपील की गई कि यदि कहीं नाबालिग बच्चों से काम कराया जा रहा हो अथवा किसी बच्चे की शिक्षा आर्थिक कारणों से प्रभावित हो रही हो, तो इसकी सूचना संबंधित विभाग को दी जाए।
स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता का मिला संदेश
कालपी में आयोजित इस संयुक्त अभियान के माध्यम से एक ओर जहां श्रमिकों और स्थानीय नागरिकों को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिली, वहीं दूसरी ओर बाल श्रम के खिलाफ सामाजिक जागरूकता बढ़ाने का प्रयास भी किया गया। स्वास्थ्य परीक्षण और दवा वितरण से लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता मिली, जबकि बाल श्रम विरोधी अभियान ने बच्चों की शिक्षा और उनके अधिकारों को लेकर लोगों को जागरूक किया।
ऐसे शिविर और जागरूकता अभियान ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जरूरतमंद लोगों तक सरकारी सुविधाओं की जानकारी पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। स्थानीय लोगों ने भी इस पहल में सहभागिता करते हुए स्वास्थ्य जांच कराई और बाल श्रम को समाप्त करने के अभियान में सहयोग का भरोसा दिया।
श्रम विभाग की ओर से लोगों को यह संदेश दिया गया कि आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद बच्चों को शिक्षा से दूर नहीं किया जाना चाहिए। सरकारी योजनाओं और विभागीय सहायता के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास जारी है। अधिकारियों ने समाज के सभी वर्गों से बाल श्रम की रोकथाम और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करने की अपील की।