उरई में NHM संविदा कर्मचारियों का तीन दिवसीय धरना समाप्त, मांगें पूरी न होने पर 12 अक्टूबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता जालौन

उरई, जालौन। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे तीन दिवसीय धरना-प्रदर्शन को शनिवार दोपहर दो बजे समाप्त कर दिया। उरई स्थित मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय परिसर में आयोजित इस आंदोलन के समापन से पहले कर्मचारियों ने रैली निकालकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सीएमओ के माध्यम से भेजा गया।

धरना समाप्त करने के साथ ही कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार को दो दिन का समय देते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 12 अक्टूबर से राजधानी लखनऊ में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। कर्मचारियों के इस ऐलान से स्वास्थ्य विभाग में हलचल बढ़ने की संभावना है। यदि प्रस्तावित हड़ताल शुरू होती है, तो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।

तीन दिनों तक जारी रहा विरोध प्रदर्शन

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सीएमओ कार्यालय परिसर में लगातार तीन दिनों तक धरना-प्रदर्शन किया। आंदोलन में शामिल कर्मचारियों ने सरकार से सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान करने और लंबे समय से उठाई जा रही मांगों पर ठोस निर्णय लेने की अपील की।

कर्मचारियों का कहना है कि वे कई वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारियों के समान सुविधाएं और सेवा सुरक्षा नहीं मिल पा रही हैं। इसी असमानता को दूर करने के उद्देश्य से कर्मचारी संगठन आंदोलन कर रहे हैं।

शनिवार को धरने के अंतिम दिन कर्मचारियों ने रैली निकालकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। रैली के माध्यम से उन्होंने सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की गई।

कर्मचारियों ने साफ किया कि धरना समाप्त करने का अर्थ आंदोलन से पीछे हटना नहीं है। उनके अनुसार, सरकार को मांगों पर विचार करने का अवसर दिया गया है। यदि निर्धारित समय के भीतर कोई ठोस पहल नहीं होती है, तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर और व्यापक किया जाएगा।

नियमितीकरण और समान काम-समान वेतन की प्रमुख मांग

NHM संविदा कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग सेवा का नियमितीकरण है। कर्मचारी चाहते हैं कि लंबे समय से विभाग में कार्य कर रहे संविदा कर्मियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रभावी नीति बनाई जाए। उनका कहना है कि वर्षों तक लगातार सेवाएं देने के बाद भी भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहना कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय है।

इसके अलावा कर्मचारियों ने समान काम-समान वेतन की मांग भी प्रमुखता से उठाई। उनका तर्क है कि स्वास्थ्य सेवाओं में जिम्मेदारियों का निर्वहन करने वाले कर्मचारियों को उनके काम और दायित्वों के अनुरूप वेतन एवं सुविधाएं मिलनी चाहिए।

वेतन वृद्धि भी आंदोलन की प्रमुख मांगों में शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वेतन व्यवस्था में सुधार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि बेहतर वेतन और सेवा सुरक्षा मिलने से कर्मचारियों का मनोबल मजबूत होगा तथा वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन अधिक स्थिरता के साथ कर सकेंगे।

एक लाख से अधिक कर्मचारियों के भविष्य का सवाल

कर्मचारी संगठन के अनुसार, उत्तर प्रदेश में एक लाख से अधिक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी पिछले 15 से 18 वर्षों से विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दे रहे हैं। इन कर्मचारियों की भूमिका स्वास्थ्य विभाग के अलग-अलग कार्यक्रमों और संस्थानों में महत्वपूर्ण बताई जाती है।

संगठन का कहना है कि लंबे समय से काम करने के बावजूद संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान सभी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इसी वजह से कर्मचारी अपने अधिकारों, सेवा शर्तों और भविष्य की सुरक्षा को लेकर लगातार मांग उठाते रहे हैं।

कर्मचारियों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाए रखने के लिए मानव संसाधन का सुरक्षित और संतुष्ट होना भी जरूरी है। यदि कर्मचारियों को नौकरी की स्थिरता, उचित पारिश्रमिक और सामाजिक सुरक्षा मिलती है, तो इससे कार्यस्थल पर उनका भरोसा बढ़ सकता है।

हालांकि, इन मांगों पर सरकार की ओर से क्या निर्णय लिया जाएगा, यह आगे की बातचीत और संबंधित नीतिगत प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

कैशलेस इलाज और सामाजिक सुरक्षा की मांग

NHM संविदा कर्मचारियों ने केवल नियमितीकरण और वेतन संबंधी मुद्दे ही नहीं उठाए, बल्कि स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं की भी मांग की है।

कर्मचारियों की मांगों में 10 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा शामिल है। उनका कहना है कि बीमारी या किसी गंभीर चिकित्सा आवश्यकता के दौरान कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े, इसके लिए बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।

इसके साथ ही महंगाई भत्ता (DA), कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), मकान किराया भत्ता (HRA) और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है। कर्मचारियों के अनुसार, बढ़ती महंगाई के बीच वेतन के साथ अन्य भत्ते और सामाजिक सुरक्षा लाभ भी महत्वपूर्ण हैं।

इन सुविधाओं के माध्यम से कर्मचारियों को आर्थिक स्थिरता मिल सकती है और सेवानिवृत्ति या सेवा समाप्ति के बाद की परिस्थितियों में भी कुछ सुरक्षा प्राप्त हो सकती है। कर्मचारी संगठन चाहता है कि इन मुद्दों पर स्पष्ट नीति बनाई जाए, ताकि संविदा कर्मियों को अपने अधिकारों को लेकर अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

स्थानांतरण नीति लागू करने की भी उठी मांग

आंदोलन के दौरान गैर-जनपदीय स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग भी सामने आई। कर्मचारियों का कहना है कि स्थानांतरण से संबंधित स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था होने से उन्हें अपनी सेवा संबंधी परिस्थितियों को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।

कर्मचारी चाहते हैं कि स्थानांतरण की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत संचालित हो और कर्मचारियों की व्यावहारिक जरूरतों पर भी विचार किया जाए। इस मांग को भी ज्ञापन में शामिल किया गया है।

इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों ने सेवा अवधि के दौरान किसी कर्मी की मृत्यु होने की स्थिति में उसके परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग उठाई। उनका कहना है कि किसी कर्मचारी के असामयिक निधन से परिवार के सामने आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। ऐसे में आश्रित परिवार को सहायता देने के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए।

यह मांग कर्मचारियों के परिवारों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी हुई है। संगठन चाहता है कि इस विषय पर भी सरकार सकारात्मक रुख अपनाए और संबंधित नियमों के तहत उपयुक्त प्रावधानों पर विचार करे।

अन्य कर्मचारी संगठनों ने भी दिया समर्थन

NHM संविदा कर्मचारियों के आंदोलन को कई अन्य कर्मचारी संगठनों का समर्थन मिलने की बात सामने आई है। आंदोलन के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी विरोध जताकर मांगों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित की गई।

इस समर्थन से कर्मचारियों के आंदोलन को व्यापक स्वरूप मिला। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी मांगें केवल वेतन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें सेवा सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, सामाजिक संरक्षण और भविष्य की स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि वे स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपनी मांगों के समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सरकार का ध्यान लंबे समय से लंबित समस्याओं की ओर आकर्षित करना और बातचीत के माध्यम से समाधान प्राप्त करना है।

12 अक्टूबर से लखनऊ में आंदोलन की तैयारी

तीन दिवसीय धरना समाप्त होने के बाद अब कर्मचारियों की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है। संगठन ने दो दिन की समय-सीमा देते हुए चेतावनी दी है कि मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं होने की स्थिति में 12 अक्टूबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।

अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान आंदोलन के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है। यदि कर्मचारी प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार हड़ताल शुरू करते हैं, तो इसका प्रभाव NHM के अंतर्गत संचालित सेवाओं पर पड़ने की आशंका रहेगी। हालांकि, वास्तविक प्रभाव कर्मचारियों की भागीदारी, आंदोलन के स्वरूप और संबंधित स्वास्थ्य इकाइयों की व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा।

फिलहाल कर्मचारी सरकार से बातचीत और मांगों पर ठोस पहल की उम्मीद कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सरकार उनकी मांगों पर क्या रुख अपनाती है और प्रस्तावित हड़ताल को टालने के लिए कोई कदम उठाया जाता है या नहीं।

कर्मचारियों को फैसले का इंतजार

उरई में तीन दिनों तक चला धरना समाप्त होने के बाद NHM संविदा कर्मचारियों ने अपने आंदोलन की अगली रणनीति स्पष्ट कर दी है। नियमितीकरण, समान काम-समान वेतन, वेतन वृद्धि, कैशलेस इलाज, विभिन्न भत्तों, ग्रेच्युटी, स्थानांतरण नीति और मृतक कर्मचारी के आश्रित को नौकरी देने जैसी मांगों पर कर्मचारी समाधान चाहते हैं।

अब सरकार के सामने कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने और आगे की स्थिति स्पष्ट करने का अवसर है। वहीं, संविदा कर्मचारियों की निगाहें आगामी निर्णय पर टिकी हैं। यदि वार्ता या नीतिगत स्तर पर कोई सकारात्मक पहल होती है, तो आंदोलन को लेकर आगे की स्थिति बदल सकती है। अन्यथा, कर्मचारियों की चेतावनी के अनुसार 12 अक्टूबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होने की संभावना बनी हुई है।

फिलहाल NHM संविदा कर्मचारियों का तीन दिवसीय धरना समाप्त हो चुका है, लेकिन उनकी मांगों का समाधान और आंदोलन का अगला चरण सरकार के रुख पर निर्भर करेगा।

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उरई में NHM संविदा कर्मचारियों का तीन दिवसीय धरना समाप्त, मांगें पूरी न होने पर 12 अक्टूबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 11, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता जालौन

उरई, जालौन। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे तीन दिवसीय धरना-प्रदर्शन को शनिवार दोपहर दो बजे समाप्त कर दिया। उरई स्थित मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय परिसर में आयोजित इस आंदोलन के समापन से पहले कर्मचारियों ने रैली निकालकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सीएमओ के माध्यम से भेजा गया।

धरना समाप्त करने के साथ ही कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार को दो दिन का समय देते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 12 अक्टूबर से राजधानी लखनऊ में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। कर्मचारियों के इस ऐलान से स्वास्थ्य विभाग में हलचल बढ़ने की संभावना है। यदि प्रस्तावित हड़ताल शुरू होती है, तो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।

तीन दिनों तक जारी रहा विरोध प्रदर्शन

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सीएमओ कार्यालय परिसर में लगातार तीन दिनों तक धरना-प्रदर्शन किया। आंदोलन में शामिल कर्मचारियों ने सरकार से सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान करने और लंबे समय से उठाई जा रही मांगों पर ठोस निर्णय लेने की अपील की।

कर्मचारियों का कहना है कि वे कई वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारियों के समान सुविधाएं और सेवा सुरक्षा नहीं मिल पा रही हैं। इसी असमानता को दूर करने के उद्देश्य से कर्मचारी संगठन आंदोलन कर रहे हैं।

शनिवार को धरने के अंतिम दिन कर्मचारियों ने रैली निकालकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। रैली के माध्यम से उन्होंने सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की गई।

कर्मचारियों ने साफ किया कि धरना समाप्त करने का अर्थ आंदोलन से पीछे हटना नहीं है। उनके अनुसार, सरकार को मांगों पर विचार करने का अवसर दिया गया है। यदि निर्धारित समय के भीतर कोई ठोस पहल नहीं होती है, तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर और व्यापक किया जाएगा।

नियमितीकरण और समान काम-समान वेतन की प्रमुख मांग

NHM संविदा कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग सेवा का नियमितीकरण है। कर्मचारी चाहते हैं कि लंबे समय से विभाग में कार्य कर रहे संविदा कर्मियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रभावी नीति बनाई जाए। उनका कहना है कि वर्षों तक लगातार सेवाएं देने के बाद भी भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहना कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय है।

इसके अलावा कर्मचारियों ने समान काम-समान वेतन की मांग भी प्रमुखता से उठाई। उनका तर्क है कि स्वास्थ्य सेवाओं में जिम्मेदारियों का निर्वहन करने वाले कर्मचारियों को उनके काम और दायित्वों के अनुरूप वेतन एवं सुविधाएं मिलनी चाहिए।

वेतन वृद्धि भी आंदोलन की प्रमुख मांगों में शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वेतन व्यवस्था में सुधार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि बेहतर वेतन और सेवा सुरक्षा मिलने से कर्मचारियों का मनोबल मजबूत होगा तथा वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन अधिक स्थिरता के साथ कर सकेंगे।

एक लाख से अधिक कर्मचारियों के भविष्य का सवाल

कर्मचारी संगठन के अनुसार, उत्तर प्रदेश में एक लाख से अधिक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी पिछले 15 से 18 वर्षों से विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दे रहे हैं। इन कर्मचारियों की भूमिका स्वास्थ्य विभाग के अलग-अलग कार्यक्रमों और संस्थानों में महत्वपूर्ण बताई जाती है।

संगठन का कहना है कि लंबे समय से काम करने के बावजूद संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान सभी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इसी वजह से कर्मचारी अपने अधिकारों, सेवा शर्तों और भविष्य की सुरक्षा को लेकर लगातार मांग उठाते रहे हैं।

कर्मचारियों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाए रखने के लिए मानव संसाधन का सुरक्षित और संतुष्ट होना भी जरूरी है। यदि कर्मचारियों को नौकरी की स्थिरता, उचित पारिश्रमिक और सामाजिक सुरक्षा मिलती है, तो इससे कार्यस्थल पर उनका भरोसा बढ़ सकता है।

हालांकि, इन मांगों पर सरकार की ओर से क्या निर्णय लिया जाएगा, यह आगे की बातचीत और संबंधित नीतिगत प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

कैशलेस इलाज और सामाजिक सुरक्षा की मांग

NHM संविदा कर्मचारियों ने केवल नियमितीकरण और वेतन संबंधी मुद्दे ही नहीं उठाए, बल्कि स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं की भी मांग की है।

कर्मचारियों की मांगों में 10 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा शामिल है। उनका कहना है कि बीमारी या किसी गंभीर चिकित्सा आवश्यकता के दौरान कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े, इसके लिए बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।

इसके साथ ही महंगाई भत्ता (DA), कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), मकान किराया भत्ता (HRA) और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है। कर्मचारियों के अनुसार, बढ़ती महंगाई के बीच वेतन के साथ अन्य भत्ते और सामाजिक सुरक्षा लाभ भी महत्वपूर्ण हैं।

इन सुविधाओं के माध्यम से कर्मचारियों को आर्थिक स्थिरता मिल सकती है और सेवानिवृत्ति या सेवा समाप्ति के बाद की परिस्थितियों में भी कुछ सुरक्षा प्राप्त हो सकती है। कर्मचारी संगठन चाहता है कि इन मुद्दों पर स्पष्ट नीति बनाई जाए, ताकि संविदा कर्मियों को अपने अधिकारों को लेकर अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

स्थानांतरण नीति लागू करने की भी उठी मांग

आंदोलन के दौरान गैर-जनपदीय स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग भी सामने आई। कर्मचारियों का कहना है कि स्थानांतरण से संबंधित स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था होने से उन्हें अपनी सेवा संबंधी परिस्थितियों को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।

कर्मचारी चाहते हैं कि स्थानांतरण की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत संचालित हो और कर्मचारियों की व्यावहारिक जरूरतों पर भी विचार किया जाए। इस मांग को भी ज्ञापन में शामिल किया गया है।

इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों ने सेवा अवधि के दौरान किसी कर्मी की मृत्यु होने की स्थिति में उसके परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग उठाई। उनका कहना है कि किसी कर्मचारी के असामयिक निधन से परिवार के सामने आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। ऐसे में आश्रित परिवार को सहायता देने के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए।

यह मांग कर्मचारियों के परिवारों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी हुई है। संगठन चाहता है कि इस विषय पर भी सरकार सकारात्मक रुख अपनाए और संबंधित नियमों के तहत उपयुक्त प्रावधानों पर विचार करे।

अन्य कर्मचारी संगठनों ने भी दिया समर्थन

NHM संविदा कर्मचारियों के आंदोलन को कई अन्य कर्मचारी संगठनों का समर्थन मिलने की बात सामने आई है। आंदोलन के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी विरोध जताकर मांगों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित की गई।

इस समर्थन से कर्मचारियों के आंदोलन को व्यापक स्वरूप मिला। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी मांगें केवल वेतन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें सेवा सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, सामाजिक संरक्षण और भविष्य की स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि वे स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपनी मांगों के समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सरकार का ध्यान लंबे समय से लंबित समस्याओं की ओर आकर्षित करना और बातचीत के माध्यम से समाधान प्राप्त करना है।

12 अक्टूबर से लखनऊ में आंदोलन की तैयारी

तीन दिवसीय धरना समाप्त होने के बाद अब कर्मचारियों की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है। संगठन ने दो दिन की समय-सीमा देते हुए चेतावनी दी है कि मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं होने की स्थिति में 12 अक्टूबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।

अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान आंदोलन के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है। यदि कर्मचारी प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार हड़ताल शुरू करते हैं, तो इसका प्रभाव NHM के अंतर्गत संचालित सेवाओं पर पड़ने की आशंका रहेगी। हालांकि, वास्तविक प्रभाव कर्मचारियों की भागीदारी, आंदोलन के स्वरूप और संबंधित स्वास्थ्य इकाइयों की व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा।

फिलहाल कर्मचारी सरकार से बातचीत और मांगों पर ठोस पहल की उम्मीद कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सरकार उनकी मांगों पर क्या रुख अपनाती है और प्रस्तावित हड़ताल को टालने के लिए कोई कदम उठाया जाता है या नहीं।

कर्मचारियों को फैसले का इंतजार

उरई में तीन दिनों तक चला धरना समाप्त होने के बाद NHM संविदा कर्मचारियों ने अपने आंदोलन की अगली रणनीति स्पष्ट कर दी है। नियमितीकरण, समान काम-समान वेतन, वेतन वृद्धि, कैशलेस इलाज, विभिन्न भत्तों, ग्रेच्युटी, स्थानांतरण नीति और मृतक कर्मचारी के आश्रित को नौकरी देने जैसी मांगों पर कर्मचारी समाधान चाहते हैं।

अब सरकार के सामने कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने और आगे की स्थिति स्पष्ट करने का अवसर है। वहीं, संविदा कर्मचारियों की निगाहें आगामी निर्णय पर टिकी हैं। यदि वार्ता या नीतिगत स्तर पर कोई सकारात्मक पहल होती है, तो आंदोलन को लेकर आगे की स्थिति बदल सकती है। अन्यथा, कर्मचारियों की चेतावनी के अनुसार 12 अक्टूबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होने की संभावना बनी हुई है।

फिलहाल NHM संविदा कर्मचारियों का तीन दिवसीय धरना समाप्त हो चुका है, लेकिन उनकी मांगों का समाधान और आंदोलन का अगला चरण सरकार के रुख पर निर्भर करेगा।