ओडिशा के देब्रीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य पहुंचे राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति, इको-टूरिज्म और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने पर दिया जोर

0

सुदाम बाबू स्टेट ब्यूरो ओडिशा

हिट एंड हॉट न्यूज़

भुवनेश्वर, 10 अक्टूबर 2026। ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने अपनी पत्नी एवं प्रथम महिला जयश्री कंभमपति के साथ शनिवार को देब्रीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, वन्यजीवों और पर्यटन की संभावनाओं का अवलोकन किया। राज्यपाल ने अभयारण्य में पर्यटकों के लिए विकसित की गई सुविधाओं, आधारभूत ढांचे और जैव विविधता के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

इस दौरे ने ओडिशा में प्रकृति आधारित पर्यटन को आगे बढ़ाने और देश के भीतर पर्यटन स्थलों को लोकप्रिय बनाने की संभावनाओं को प्रमुखता से सामने रखा। राज्यपाल के दौरे का मुख्य संदेश यह रहा कि प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा करते हुए पर्यटन का विकास किया जाए, ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल सकें।

प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों के लिए खास है देब्रीगढ़

पश्चिमी ओडिशा में स्थित देब्रीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य राज्य के प्रमुख प्राकृतिक आकर्षणों में गिना जाता है। घने जंगलों, विविध वन्यजीवों और हिराकुंड जलाशय के आसपास फैले प्राकृतिक दृश्यों के कारण यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष महत्व रखता है।

दौरे के दौरान राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने अभयारण्य के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण किया और वन्यजीवों को देखने का अनुभव प्राप्त किया। उन्होंने यहां के प्राकृतिक वातावरण और पर्यटकों को बेहतर अनुभव देने के लिए विकसित की गई सुविधाओं की सराहना की।

देब्रीगढ़ की खासियत यह है कि यहां जंगल, वन्यजीव और जलाशय से जुड़े प्राकृतिक दृश्य एक साथ देखने को मिलते हैं। यही वजह है कि यह स्थान उन पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है, जो शहरों की भीड़ से दूर प्रकृति के करीब समय बिताना चाहते हैं।

हालांकि, वन्यजीव अभयारण्यों में पर्यटन को बढ़ावा देते समय पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ जंगलों, वन्यजीवों के आवास और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव पड़ सकता है। ऐसे में पर्यटन गतिविधियों का संचालन निर्धारित नियमों और संरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुसार होना चाहिए।

संरक्षण और पर्यटक सुविधाओं के बीच संतुलन जरूरी

राज्यपाल ने अभयारण्य में विकसित बुनियादी सुविधाओं और वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। किसी भी प्राकृतिक पर्यटन स्थल की सफलता के लिए आवश्यक है कि वहां आने वाले लोगों को सुविधाजनक अनुभव मिले और साथ ही प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।

पर्यटकों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं होने से परिवारों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और वन्यजीवों में रुचि रखने वाले लोगों को ऐसे स्थानों तक पहुंचने में आसानी होती है। इससे प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर भी मिलता है।

इको-टूरिज्म सामान्य पर्यटन से अलग है। इसमें केवल घूमने-फिरने या मनोरंजन पर ध्यान नहीं दिया जाता, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय संस्कृति के सम्मान और प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल को प्राथमिकता दी जाती है।

देब्रीगढ़ जैसे क्षेत्रों में पर्यटकों को वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने, जंगल में शोर नहीं करने, कचरा नहीं फैलाने और निर्धारित मार्गों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इन छोटे-छोटे कदमों से वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार और उनके आवास को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।

हिराकुंड जलाशय से बढ़ती है पर्यटन की संभावनाएं

देब्रीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य संबलपुर और बरगढ़ जिलों के क्षेत्र में स्थित है। हिराकुंड जलाशय के निकट होने के कारण इसका प्राकृतिक आकर्षण और बढ़ जाता है। यहां आने वाले पर्यटक वन्यजीवों के साथ पश्चिमी ओडिशा के प्राकृतिक परिदृश्यों का अनुभव भी कर सकते हैं।

पश्चिमी ओडिशा में जंगलों, जलाशयों, सांस्कृतिक स्थलों और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थानों की मौजूदगी पर्यटन विकास के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध कराती है। यदि इन स्थानों को बेहतर परिवहन सुविधाओं और व्यवस्थित पर्यटन योजनाओं के माध्यम से जोड़ा जाए, तो पर्यटक एक ही यात्रा में क्षेत्र के कई आकर्षणों का आनंद ले सकते हैं।

देब्रीगढ़ में पर्यटन का विस्तार क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा के महत्व को समझने का अवसर भी प्रदान करता है। जंगल अनेक जीव-जंतुओं का आश्रय होते हैं और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा केवल वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि मानव जीवन और स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए भी जरूरी है।

प्रकृति आधारित पर्यटन के माध्यम से लोगों को जैव विविधता, वन संरक्षण और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी जा सकती है।

भारतीय पर्यटन स्थलों को देखने की अपील

राज्यपाल के दौरे का एक महत्वपूर्ण संदेश देश के भीतर पर्यटन को प्रोत्साहित करना भी रहा। उन्होंने लोगों को भारत के विभिन्न पर्यटन स्थलों की यात्रा करने के लिए प्रेरित किया, ताकि देश की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विविधता को करीब से समझा जा सके।

भारत में हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र, समुद्र तट, राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, ऐतिहासिक स्मारक, धार्मिक स्थल और ग्रामीण पर्यटन केंद्र मौजूद हैं। इन स्थानों की यात्रा लोगों को देश की भौगोलिक विविधता, परंपराओं और स्थानीय जीवनशैली से परिचित कराती है।

घरेलू पर्यटन का आर्थिक महत्व भी काफी बड़ा है। जब लोग किसी पर्यटन स्थल पर पहुंचते हैं, तो वे परिवहन, होटल, भोजन, स्थानीय उत्पादों और अन्य सेवाओं पर खर्च करते हैं। इससे छोटे कारोबारियों, दुकानदारों, वाहन चालकों और पर्यटन सेवाओं से जुड़े लोगों को आय के अवसर मिल सकते हैं।

ओडिशा में समुद्र तटों, मंदिरों, झीलों, जंगलों और वन्यजीव क्षेत्रों की विविधता मौजूद है। देब्रीगढ़ जैसे गंतव्य राज्य को प्रकृति आधारित पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में योगदान दे सकते हैं।

स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के अवसर

पर्यटन के विकास से आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को भी लाभ पहुंच सकता है। स्थानीय निवासी पर्यटकों के लिए आवास, भोजन, परिवहन, मार्गदर्शन और क्षेत्रीय उत्पादों से जुड़ी सेवाओं में भागीदारी कर सकते हैं।

यदि पर्यटन योजनाओं में स्थानीय समुदायों को उचित स्थान दिया जाए, तो उन्हें आय के वैकल्पिक साधन मिल सकते हैं। इससे छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।

स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र के जंगलों, वन्यजीवों और सांस्कृतिक परंपराओं का अच्छा ज्ञान होता है। इस जानकारी का जिम्मेदारी से उपयोग पर्यटकों के अनुभव को अधिक उपयोगी बना सकता है। इसके लिए प्रशिक्षण, रोजगार के समान अवसर और पर्यटन विभाग तथा संरक्षण एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

हालांकि, पर्यटन से होने वाला आर्थिक लाभ पर्यावरण की कीमत पर नहीं मिलना चाहिए। कचरे का उचित प्रबंधन, जल संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग और वन्यजीवों के आवास की सुरक्षा पर्यटन योजनाओं का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए।

क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकता है इको-टूरिज्म

देब्रीगढ़ में पर्यटन की संभावनाएं पश्चिमी ओडिशा के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। यदि इस क्षेत्र को जिम्मेदार पर्यटन के रूप में विकसित किया जाता है, तो इससे परिवहन, आतिथ्य सेवाओं, स्थानीय हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों को प्रोत्साहन मिल सकता है।

पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए केवल प्रचार पर्याप्त नहीं है। पर्यटकों की सुरक्षा, सुविधाओं की गुणवत्ता, प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

स्थानीय आकर्षणों को जोड़कर पर्यटन मार्ग विकसित करना, पर्यावरण संबंधी जागरूकता बढ़ाना और यात्रियों को जिम्मेदार व्यवहार के लिए प्रेरित करना उपयोगी कदम हो सकते हैं।

इसके साथ ही, पर्यटन गतिविधियों की निगरानी और पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि बढ़ती पर्यटक संख्या से अभयारण्य की जैव विविधता प्रभावित न हो।

राज्यपाल के दौरे से मिला जिम्मेदार पर्यटन का संदेश

डॉ. हरि बाबू कंभमपति और प्रथम महिला जयश्री कंभमपति का देब्रीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य दौरा ओडिशा की प्राकृतिक विरासत और पर्यटन विकास की संभावनाओं को रेखांकित करता है। राज्यपाल ने यहां की प्राकृतिक सुंदरता, पर्यटक सुविधाओं और संरक्षण संबंधी पहलों की सराहना की। उनके कार्यक्रम के अनुसार, राज्यपाल का देब्रीगढ़ में रात्रि विश्राम भी प्रस्तावित था।

इस दौरे से यह संदेश सामने आया कि भारत के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को पहचान दिलाने के साथ-साथ उनके संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। पर्यटन तभी दीर्घकालिक रूप से सफल हो सकता है, जब उससे स्थानीय समुदायों को लाभ मिले और प्राकृतिक पर्यावरण सुरक्षित रहे।

देब्रीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य अपनी हरियाली, वन्यजीवों और हिराकुंड जलाशय के निकट स्थित होने के कारण ओडिशा के पर्यटन मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आने वाले समय में योजनाबद्ध विकास, जनभागीदारी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण के माध्यम से यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों के लिए और आकर्षक बन सकता है।

निष्कर्ष: देब्रीगढ़ का विकास केवल एक पर्यटन स्थल को लोकप्रिय बनाने तक सीमित नहीं है। यह प्रकृति संरक्षण, स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय विकास को एक साथ आगे बढ़ाने का अवसर है। यदि पर्यटन और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखा गया, तो देब्रीगढ़ ओडिशा में टिकाऊ पर्यटन का एक उल्लेखनीय उदाहरण बन सकता है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें

ताज़ा खबरें • ब्रेकिंग न्यूज़ • नेशनल और इंटरनेशनल अपडेट

ओडिशा के देब्रीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य पहुंचे राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति, इको-टूरिज्म और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने पर दिया जोर

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 11, 2026

सुदाम बाबू स्टेट ब्यूरो ओडिशा

हिट एंड हॉट न्यूज़

भुवनेश्वर, 10 अक्टूबर 2026। ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने अपनी पत्नी एवं प्रथम महिला जयश्री कंभमपति के साथ शनिवार को देब्रीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, वन्यजीवों और पर्यटन की संभावनाओं का अवलोकन किया। राज्यपाल ने अभयारण्य में पर्यटकों के लिए विकसित की गई सुविधाओं, आधारभूत ढांचे और जैव विविधता के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

इस दौरे ने ओडिशा में प्रकृति आधारित पर्यटन को आगे बढ़ाने और देश के भीतर पर्यटन स्थलों को लोकप्रिय बनाने की संभावनाओं को प्रमुखता से सामने रखा। राज्यपाल के दौरे का मुख्य संदेश यह रहा कि प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा करते हुए पर्यटन का विकास किया जाए, ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल सकें।

प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों के लिए खास है देब्रीगढ़

पश्चिमी ओडिशा में स्थित देब्रीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य राज्य के प्रमुख प्राकृतिक आकर्षणों में गिना जाता है। घने जंगलों, विविध वन्यजीवों और हिराकुंड जलाशय के आसपास फैले प्राकृतिक दृश्यों के कारण यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष महत्व रखता है।

दौरे के दौरान राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने अभयारण्य के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण किया और वन्यजीवों को देखने का अनुभव प्राप्त किया। उन्होंने यहां के प्राकृतिक वातावरण और पर्यटकों को बेहतर अनुभव देने के लिए विकसित की गई सुविधाओं की सराहना की।

देब्रीगढ़ की खासियत यह है कि यहां जंगल, वन्यजीव और जलाशय से जुड़े प्राकृतिक दृश्य एक साथ देखने को मिलते हैं। यही वजह है कि यह स्थान उन पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है, जो शहरों की भीड़ से दूर प्रकृति के करीब समय बिताना चाहते हैं।

हालांकि, वन्यजीव अभयारण्यों में पर्यटन को बढ़ावा देते समय पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ जंगलों, वन्यजीवों के आवास और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव पड़ सकता है। ऐसे में पर्यटन गतिविधियों का संचालन निर्धारित नियमों और संरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुसार होना चाहिए।

संरक्षण और पर्यटक सुविधाओं के बीच संतुलन जरूरी

राज्यपाल ने अभयारण्य में विकसित बुनियादी सुविधाओं और वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। किसी भी प्राकृतिक पर्यटन स्थल की सफलता के लिए आवश्यक है कि वहां आने वाले लोगों को सुविधाजनक अनुभव मिले और साथ ही प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।

पर्यटकों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं होने से परिवारों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और वन्यजीवों में रुचि रखने वाले लोगों को ऐसे स्थानों तक पहुंचने में आसानी होती है। इससे प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर भी मिलता है।

इको-टूरिज्म सामान्य पर्यटन से अलग है। इसमें केवल घूमने-फिरने या मनोरंजन पर ध्यान नहीं दिया जाता, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय संस्कृति के सम्मान और प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल को प्राथमिकता दी जाती है।

देब्रीगढ़ जैसे क्षेत्रों में पर्यटकों को वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने, जंगल में शोर नहीं करने, कचरा नहीं फैलाने और निर्धारित मार्गों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इन छोटे-छोटे कदमों से वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार और उनके आवास को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।

हिराकुंड जलाशय से बढ़ती है पर्यटन की संभावनाएं

देब्रीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य संबलपुर और बरगढ़ जिलों के क्षेत्र में स्थित है। हिराकुंड जलाशय के निकट होने के कारण इसका प्राकृतिक आकर्षण और बढ़ जाता है। यहां आने वाले पर्यटक वन्यजीवों के साथ पश्चिमी ओडिशा के प्राकृतिक परिदृश्यों का अनुभव भी कर सकते हैं।

पश्चिमी ओडिशा में जंगलों, जलाशयों, सांस्कृतिक स्थलों और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थानों की मौजूदगी पर्यटन विकास के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध कराती है। यदि इन स्थानों को बेहतर परिवहन सुविधाओं और व्यवस्थित पर्यटन योजनाओं के माध्यम से जोड़ा जाए, तो पर्यटक एक ही यात्रा में क्षेत्र के कई आकर्षणों का आनंद ले सकते हैं।

देब्रीगढ़ में पर्यटन का विस्तार क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा के महत्व को समझने का अवसर भी प्रदान करता है। जंगल अनेक जीव-जंतुओं का आश्रय होते हैं और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा केवल वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि मानव जीवन और स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए भी जरूरी है।

प्रकृति आधारित पर्यटन के माध्यम से लोगों को जैव विविधता, वन संरक्षण और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी जा सकती है।

भारतीय पर्यटन स्थलों को देखने की अपील

राज्यपाल के दौरे का एक महत्वपूर्ण संदेश देश के भीतर पर्यटन को प्रोत्साहित करना भी रहा। उन्होंने लोगों को भारत के विभिन्न पर्यटन स्थलों की यात्रा करने के लिए प्रेरित किया, ताकि देश की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विविधता को करीब से समझा जा सके।

भारत में हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र, समुद्र तट, राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, ऐतिहासिक स्मारक, धार्मिक स्थल और ग्रामीण पर्यटन केंद्र मौजूद हैं। इन स्थानों की यात्रा लोगों को देश की भौगोलिक विविधता, परंपराओं और स्थानीय जीवनशैली से परिचित कराती है।

घरेलू पर्यटन का आर्थिक महत्व भी काफी बड़ा है। जब लोग किसी पर्यटन स्थल पर पहुंचते हैं, तो वे परिवहन, होटल, भोजन, स्थानीय उत्पादों और अन्य सेवाओं पर खर्च करते हैं। इससे छोटे कारोबारियों, दुकानदारों, वाहन चालकों और पर्यटन सेवाओं से जुड़े लोगों को आय के अवसर मिल सकते हैं।

ओडिशा में समुद्र तटों, मंदिरों, झीलों, जंगलों और वन्यजीव क्षेत्रों की विविधता मौजूद है। देब्रीगढ़ जैसे गंतव्य राज्य को प्रकृति आधारित पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में योगदान दे सकते हैं।

स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के अवसर

पर्यटन के विकास से आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को भी लाभ पहुंच सकता है। स्थानीय निवासी पर्यटकों के लिए आवास, भोजन, परिवहन, मार्गदर्शन और क्षेत्रीय उत्पादों से जुड़ी सेवाओं में भागीदारी कर सकते हैं।

यदि पर्यटन योजनाओं में स्थानीय समुदायों को उचित स्थान दिया जाए, तो उन्हें आय के वैकल्पिक साधन मिल सकते हैं। इससे छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।

स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र के जंगलों, वन्यजीवों और सांस्कृतिक परंपराओं का अच्छा ज्ञान होता है। इस जानकारी का जिम्मेदारी से उपयोग पर्यटकों के अनुभव को अधिक उपयोगी बना सकता है। इसके लिए प्रशिक्षण, रोजगार के समान अवसर और पर्यटन विभाग तथा संरक्षण एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

हालांकि, पर्यटन से होने वाला आर्थिक लाभ पर्यावरण की कीमत पर नहीं मिलना चाहिए। कचरे का उचित प्रबंधन, जल संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग और वन्यजीवों के आवास की सुरक्षा पर्यटन योजनाओं का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए।

क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकता है इको-टूरिज्म

देब्रीगढ़ में पर्यटन की संभावनाएं पश्चिमी ओडिशा के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। यदि इस क्षेत्र को जिम्मेदार पर्यटन के रूप में विकसित किया जाता है, तो इससे परिवहन, आतिथ्य सेवाओं, स्थानीय हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों को प्रोत्साहन मिल सकता है।

पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए केवल प्रचार पर्याप्त नहीं है। पर्यटकों की सुरक्षा, सुविधाओं की गुणवत्ता, प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

स्थानीय आकर्षणों को जोड़कर पर्यटन मार्ग विकसित करना, पर्यावरण संबंधी जागरूकता बढ़ाना और यात्रियों को जिम्मेदार व्यवहार के लिए प्रेरित करना उपयोगी कदम हो सकते हैं।

इसके साथ ही, पर्यटन गतिविधियों की निगरानी और पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि बढ़ती पर्यटक संख्या से अभयारण्य की जैव विविधता प्रभावित न हो।

राज्यपाल के दौरे से मिला जिम्मेदार पर्यटन का संदेश

डॉ. हरि बाबू कंभमपति और प्रथम महिला जयश्री कंभमपति का देब्रीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य दौरा ओडिशा की प्राकृतिक विरासत और पर्यटन विकास की संभावनाओं को रेखांकित करता है। राज्यपाल ने यहां की प्राकृतिक सुंदरता, पर्यटक सुविधाओं और संरक्षण संबंधी पहलों की सराहना की। उनके कार्यक्रम के अनुसार, राज्यपाल का देब्रीगढ़ में रात्रि विश्राम भी प्रस्तावित था।

इस दौरे से यह संदेश सामने आया कि भारत के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को पहचान दिलाने के साथ-साथ उनके संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। पर्यटन तभी दीर्घकालिक रूप से सफल हो सकता है, जब उससे स्थानीय समुदायों को लाभ मिले और प्राकृतिक पर्यावरण सुरक्षित रहे।

देब्रीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य अपनी हरियाली, वन्यजीवों और हिराकुंड जलाशय के निकट स्थित होने के कारण ओडिशा के पर्यटन मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आने वाले समय में योजनाबद्ध विकास, जनभागीदारी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण के माध्यम से यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों के लिए और आकर्षक बन सकता है।

निष्कर्ष: देब्रीगढ़ का विकास केवल एक पर्यटन स्थल को लोकप्रिय बनाने तक सीमित नहीं है। यह प्रकृति संरक्षण, स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय विकास को एक साथ आगे बढ़ाने का अवसर है। यदि पर्यटन और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखा गया, तो देब्रीगढ़ ओडिशा में टिकाऊ पर्यटन का एक उल्लेखनीय उदाहरण बन सकता है।