बरेली में NHM संविदा कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार जारी, तीन दिन से धरने पर बैठे कर्मचारियों को अब तक नहीं मिला ठोस आश्वासन
अमरेश त्रिपाठी
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात
बरेली, उत्तर प्रदेश। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर बरेली में आंदोलन तेज कर दिया है। संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के आह्वान पर कर्मचारियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन करते हुए पूर्ण कार्य बहिष्कार किया। कर्मचारियों का कहना है कि वे लगातार तीन दिनों से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अभी तक संबंधित अधिकारियों की ओर से ऐसा कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है, जिससे उनकी समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद दिखाई दे।

इस आंदोलन के केंद्र में नौकरी की स्थिरता, उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांगें हैं। कर्मचारियों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को संचालित करने में संविदा कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद उनकी सेवा संबंधी समस्याओं का लंबे समय से समाधान नहीं हो पाया है। इसी को लेकर कर्मचारियों ने एकजुट होकर शासन और स्वास्थ्य विभाग का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है।
नियमितीकरण और समान वेतन की मांग पर अड़े कर्मचारी
बरेली में आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अपनी प्रमुख मांगों को स्पष्ट रूप से सामने रखा। उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में लंबे समय से सेवाएं देने वाले संविदा कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नियमितीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
कर्मचारियों ने नियमित पदों पर कार्यरत कर्मचारियों की तरह ग्रेड पे, वेतन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई। उनका तर्क है कि जब संविदा कर्मचारियों से विभागीय जिम्मेदारियों के अनुरूप काम लिया जाता है, तो उनके पारिश्रमिक और सुविधाओं के विषय पर भी उचित विचार किया जाना चाहिए।
आंदोलनकारियों ने समान कार्य के लिए समान वेतन की व्यवस्था लागू करने पर विशेष जोर दिया। उनके मुताबिक, वेतन संबंधी असमानताओं को दूर करने से कर्मचारियों में भरोसा बढ़ेगा और वे बेहतर परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियां निभा सकेंगे।
सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी उठाई आवाज
संविदा कर्मचारियों की मांगें केवल नियमितीकरण और वेतन तक सीमित नहीं हैं। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं को भी अपने आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया।
कर्मचारियों ने भविष्य निधि यानी कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), महंगाई भत्ता (DA), स्वास्थ्य बीमा और आयुष्मान योजना के अंतर्गत लाभ दिए जाने की मांग की। उनका कहना है कि नौकरी के दौरान आर्थिक सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं मिलना कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
उनके अनुसार, बीमारी अथवा किसी अप्रत्याशित परिस्थिति में स्वास्थ्य बीमा और दूसरी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं कर्मचारियों तथा उनके परिवारों को राहत प्रदान कर सकती हैं। इसलिए इन सुविधाओं को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए, ताकि पात्र कर्मचारियों को उनके अधिकारों और उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार लाभ मिल सके।
प्रदर्शन में आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम करने वाले कर्मचारियों की समस्याएं भी उठाई गईं। कर्मचारियों ने ऐसे कर्मियों को डीएचएस में समायोजित करने की मांग रखी। इस मुद्दे को लेकर भी शासन स्तर पर निर्णय लिए जाने की अपेक्षा जताई गई।
तीन दिनों से धरने पर बैठे कर्मचारी, समाधान का इंतजार
कर्मचारियों के अनुसार, सीएमओ कार्यालय पर उनका धरना लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अपनी मांगों को लेकर वे शांतिपूर्ण तरीके से अधिकारियों और सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
हालांकि, अब तक ठोस आश्वासन नहीं मिलने से कर्मचारियों में असंतोष बना हुआ है। उनका मानना है कि केवल मांगों को सुनना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनके समाधान के लिए स्पष्ट समयसीमा और व्यावहारिक कदम भी सामने आने चाहिए।
कार्य बहिष्कार के फैसले के माध्यम से कर्मचारियों ने अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। आंदोलन का उद्देश्य अपनी सेवा शर्तों में सुधार, आर्थिक सुरक्षा और भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता के विषय में संबंधित विभाग का ध्यान खींचना है।
स्वास्थ्य सेवाओं में संविदा कर्मचारियों की भूमिका को देखते हुए इस तरह के आंदोलन का प्रभाव भी महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, बरेली में आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं पर इसके वास्तविक प्रभाव के संबंध में उपलब्ध विवरण में कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं दिया गया है।
विभिन्न संगठनों ने आंदोलन को दिया समर्थन
धरना-प्रदर्शन में बरेली के विभिन्न संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लेकर संविदा कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया। इस दौरान वक्ताओं ने कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं पर विचार रखे और उनकी मांगों को उचित मंच तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम की जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष श्याम सिंह ने संभाली। वहीं, संघ के जिला महामंत्री अविनाश त्रिपाठी ने कर्मचारियों से आंदोलन में एकजुट होकर भाग लेने और पूर्ण कार्य बहिष्कार के आह्वान का पालन करने का आग्रह किया।
आयुष मेडिकल एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के प्रदेश महासचिव डॉ. आशीष गुप्ता ने भी धरना स्थल पर कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को उठाया। उन्होंने आंदोलन के दौरान संविदा कर्मियों की समस्याओं पर ध्यान देने की आवश्यकता को प्रमुखता से सामने रखा।
आंदोलन में अलग-अलग संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति से कर्मचारियों की मांगों को सामूहिक रूप से उठाने का प्रयास किया गया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों से सकारात्मक पहल की अपेक्षा जताई।
कई पदाधिकारियों और कर्मचारियों की रही मौजूदगी
इस धरना-प्रदर्शन में संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष तथा उत्तर प्रदेश दंत चिकित्सा संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री डॉ. हरजिंदर सिंह शामिल हुए। इनके साथ मंडल अध्यक्ष डॉ. विश्व दीपक पांडे, मंडल संयोजक प्रतीक, जिला संयोजक शिवेश तिवारी, मंडल उपाध्यक्ष सत्येंद्र यादव और सुनील चौबे ने भी सहभागिता की।
इसके अतिरिक्त जिला उपाध्यक्ष मुजीब अली, महिला जिला उपाध्यक्ष सीमा, शुभांजलि, अतुल सागर, राम अवतार, विजय, अरुण कुमार, आतिफ मसूद और डॉ. शारिक सहित अन्य लोगों ने आंदोलन में भाग लिया।
जिला मंत्री साक्षी के साथ अनिल, राजवीर, शैलेंद्र और कुलदीप समेत कई कर्मचारी तथा पदाधिकारी धरना-प्रदर्शन में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर संघ के मीडिया प्रभारी पुनीत सक्सेना ने आंदोलन में सहयोग करने वाले सभी साथियों के प्रति आभार जताया।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
बरेली में जारी इस आंदोलन के दौरान कर्मचारियों ने कई महत्वपूर्ण मांगें सामने रखीं। इनमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण, नियमित कर्मचारियों के समान ग्रेड पे और वेतन, समान कार्य के लिए समान वेतन तथा सेवा संबंधी सुविधाओं में सुधार प्रमुख हैं।
इसके अलावा ईपीएफ, महंगाई भत्ता, स्वास्थ्य बीमा और आयुष्मान योजना का लाभ उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल है। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को डीएचएस में समायोजित करने का मुद्दा भी आंदोलनकारियों की मांगों में प्रमुखता से शामिल रहा।
कर्मचारियों का कहना है कि इन विषयों पर स्पष्ट निर्णय होने से उनकी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मजबूत हो सकती है। साथ ही, भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता कम करने में भी मदद मिल सकती है।
शासन के फैसले पर टिकी निगाहें
बरेली में तीन दिनों से जारी धरना-प्रदर्शन के बाद अब कर्मचारियों की निगाहें शासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर टिकी हैं। आंदोलनकारी चाहते हैं कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए और समाधान की दिशा में ठोस पहल की जाए।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार कर्मचारियों को उनकी मांगों के संबंध में कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। आगे आंदोलन किस दिशा में बढ़ेगा और शासन इस मामले में क्या कदम उठाएगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने संविदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों, वेतन व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रश्नों को फिर से चर्चा में ला दिया है। कर्मचारियों की अपेक्षा है कि उनकी समस्याओं को केवल आंदोलन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि संबंधित स्तर पर विचार-विमर्श करके ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे उनकी मांगों और विभागीय व्यवस्थाओं के बीच संतुलन स्थापित हो सके। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी और शासन उनकी मांगों पर कब तक कोई स्पष्ट निर्णय लेते हैं।