जालौन: मेले में बिछड़े ढाई साल के मासूम को पुलिस ने परिजनों से मिलाया, मिशन शक्ति टीम की तत्परता से लौटी परिवार की खुशियां
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
रेंढर (जालौन)। उत्तर प्रदेश के जालौन जनपद में पुलिस की सतर्कता, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का सराहनीय उदाहरण सामने आया है। रेंढर थाना क्षेत्र के नावली माता मंदिर में आयोजित मेले के दौरान परिजनों से बिछड़े करीब ढाई वर्ष के एक मासूम बच्चे को पुलिस की मिशन शक्ति एवं एंटी रोमियो टीम ने सकुशल खोजकर उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया। भीड़भाड़ वाले मेले में अपनों से दूर हुए बच्चे को सुरक्षित वापस पाकर परिजनों ने राहत की सांस ली और पुलिसकर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

पुलिस टीम की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित किया कि सार्वजनिक आयोजनों के दौरान पुलिस की मुस्तैदी और संवेदनशील व्यवहार आम लोगों के लिए कितना महत्वपूर्ण है। मेले में मौजूद लोगों के बीच जब मासूम अपने परिजनों से बिछड़ गया, तब पुलिसकर्मियों ने बिना देर किए उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और परिवार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभाली।
मेले की भीड़ में परिजनों से बिछड़ गया मासूम
नावली माता मंदिर परिसर में मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और अन्य लोगों की आवाजाही बनी हुई थी। ऐसे आयोजनों में परिवार के साथ आए छोटे बच्चों की सुरक्षा विशेष सावधानी की मांग करती है। इसी दौरान करीब ढाई साल का एक बच्चा अपने परिजनों से अलग हो गया। कम उम्र होने के कारण बच्चा अपने परिवार के सदस्यों को तलाशने में असमर्थ था और अकेला होने पर रोने लगा।
बच्चे को इस स्थिति में देखकर वहां मौजूद लोगों का ध्यान उसकी ओर गया। इसी बीच मंदिर परिसर में ड्यूटी कर रही थाना रेंढर की मिशन शक्ति एवं एंटी रोमियो टीम की नजर भी मासूम पर पड़ी। पुलिसकर्मियों ने स्थिति की गंभीरता को समझा और तत्काल बच्चे को अपने संरक्षण में ले लिया।
पुलिस टीम के लिए उस समय सबसे जरूरी काम बच्चे को सुरक्षित रखना और उसके माता-पिता या अन्य परिजनों का पता लगाना था। टीम ने पूरी सावधानी के साथ आगे की कार्रवाई शुरू की, ताकि बच्चा किसी प्रकार की परेशानी में न पड़े।
मिशन शक्ति टीम ने दिखाई तत्परता
मेले जैसे सार्वजनिक स्थान पर किसी छोटे बच्चे का परिवार से बिछड़ जाना चिंताजनक स्थिति पैदा कर सकता है। ऐसे में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया बच्चे की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम होती है। नावली माता मंदिर में तैनात पुलिसकर्मियों ने भी इसी जिम्मेदारी का परिचय दिया।
मासूम को अपने संरक्षण में लेने के बाद टीम ने उसे सहज रखने का प्रयास किया और उसके परिजनों की तलाश शुरू कर दी। पुलिसकर्मियों ने उपलब्ध जानकारी के आधार पर परिवार तक पहुंचने के लिए प्रयास किए। उनकी सतर्कता और सूझबूझ के चलते बच्चे के परिजनों का पता लगाने में सफलता मिली।
इस पूरी कार्रवाई में पुलिस टीम ने बच्चे की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। ढाई साल की उम्र में बच्चा अपनी बात स्पष्ट रूप से बताने या स्वयं अपने घरवालों तक पहुंचने में सक्षम नहीं होता। इसलिए ऐसे मामलों में पुलिस की संवेदनशीलता, धैर्य और जिम्मेदारी की भूमिका और भी बढ़ जाती है।
मिशन शक्ति टीम ने समय रहते आवश्यक कदम उठाकर स्थिति को संभाला और बच्चे को सुरक्षित उसके परिवार से मिलाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई की।
मां गीता के सुपुर्द किया गया बच्चा
पुलिस की ओर से किए गए प्रयासों के बाद मासूम के परिजनों की पहचान हो गई। इसके पश्चात बच्चे को उसकी मां गीता और अन्य परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। लंबे समय तक बच्चे के बिछड़ने की आशंका से परेशान परिवार के लिए उसका सुरक्षित मिल जाना बड़ी राहत लेकर आया।
बच्चे को सकुशल अपने पास पाकर परिजनों ने पुलिस टीम के प्रति आभार जताया। परिवार के लिए यह किसी बड़ी चिंता के दूर होने जैसा क्षण था। पुलिसकर्मियों की तत्परता के कारण मासूम को सुरक्षित उसके अपनों तक पहुंचाया जा सका।
इस घटना में किसी बड़ी अनहोनी की जानकारी सामने नहीं आई। पुलिस की समय पर सक्रियता ने परिवार की चिंता कम करने के साथ ही मेले में ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी और उपयोगिता को भी रेखांकित किया।
इन पुलिसकर्मियों की रही अहम भूमिका
नावली माता मंदिर में बिछड़े बच्चे को उसके परिजनों से मिलाने के इस सराहनीय कार्य में थाना रेंढर की मिशन शक्ति एवं एंटी रोमियो टीम के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस कार्रवाई में मिशन शक्ति टीम प्रभारी वरिष्ठ उपनिरीक्षक राम शंकर कटियार, उपनिरीक्षक राम खिलाड़ी, उपनिरीक्षक धर्मवीर सिंह, कांस्टेबल असद खान, कांस्टेबल निलेश और महिला कांस्टेबल राखी शामिल रहीं।
टीम के सदस्यों ने अपनी ड्यूटी के दौरान बच्चे की स्थिति पर ध्यान दिया और उसे सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाने के लिए आवश्यक प्रयास किए। पुलिसकर्मियों के इसी समन्वय और सक्रियता से परिवार को अपना बच्चा वापस मिल सका।
स्थानीय स्तर पर पुलिस की इस पहल को सराहनीय कार्य के रूप में देखा जा रहा है। इस घटना से यह संदेश भी मिलता है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ पुलिस की सामाजिक जिम्मेदारी में जरूरतमंदों की सहायता करना और संकट में फंसे लोगों को राहत पहुंचाना भी शामिल है।
सार्वजनिक मेलों में बच्चों की सुरक्षा बेहद जरूरी
धार्मिक मेलों, मंदिर परिसरों और अन्य सार्वजनिक आयोजनों में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रहती है। भीड़ के बीच छोटे बच्चों का कुछ समय के लिए अपने परिजनों से अलग हो जाना परिवारों के लिए चिंता का कारण बन सकता है। इसलिए ऐसे स्थानों पर अभिभावकों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है।
छोटे बच्चों को भीड़ में अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। संभव हो तो उनका हाथ पकड़कर चलना चाहिए और उन्हें परिवार के किसी जिम्मेदार सदस्य की निगरानी में रखना चाहिए। बच्चों को उनके अभिभावकों का नाम और संपर्क नंबर याद कराने या कपड़े की जेब में सुरक्षित संपर्क जानकारी रखने जैसे छोटे उपाय भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।
यदि किसी मेले में बच्चा बिछड़ जाए, तो घबराकर इधर-उधर भटकने के बजाय नजदीकी पुलिसकर्मी, सहायता केंद्र या आयोजन स्थल पर तैनात सुरक्षा दल से तुरंत संपर्क करना चाहिए। इसी तरह यदि किसी व्यक्ति को कोई बच्चा अकेला या परेशान दिखाई दे, तो उसे सुरक्षित तरीके से पुलिस या अधिकृत सहायता दल तक पहुंचाने में सहयोग करना चाहिए।
नावली माता मंदिर में हुई यह घटना इन सावधानियों के महत्व को भी सामने लाती है। हालांकि यहां पुलिस टीम की सक्रियता से बच्चा सुरक्षित अपने परिवार तक पहुंच गया, लेकिन अभिभावकों की सतर्कता और पुलिस के साथ सहयोग से ऐसी परिस्थितियों में जोखिम को कम किया जा सकता है।
पुलिस की संवेदनशील कार्यशैली का उदाहरण
रेंढर थाना क्षेत्र की इस घटना में मिशन शक्ति एवं एंटी रोमियो टीम की भूमिका केवल नियमित ड्यूटी तक सीमित नहीं रही, बल्कि पुलिसकर्मियों ने एक परेशान परिवार की मदद करके मानवीय संवेदनशीलता का भी परिचय दिया। मेले में बिछड़े मासूम को सुरक्षित संरक्षण देना, उसके परिजनों की तलाश करना और अंततः उसे मां गीता के सुपुर्द करना इस कार्रवाई के प्रमुख पहलू रहे।
पुलिस की ऐसी पहल आम जनता में सुरक्षा व्यवस्था के प्रति भरोसा मजबूत करने में सहायक होती है। जब पुलिसकर्मी किसी संकटग्रस्त व्यक्ति की मदद के लिए तत्परता दिखाते हैं, तो उनकी भूमिका कानून-व्यवस्था बनाए रखने से आगे बढ़कर जनसेवा के रूप में भी सामने आती है।
नावली माता मंदिर में ड्यूटी कर रही रेंढर पुलिस की टीम ने समय पर कार्रवाई करके एक परिवार की चिंता दूर की। करीब ढाई साल के मासूम की सुरक्षित घर वापसी इस बात का उदाहरण बनी कि सार्वजनिक स्थानों पर सतर्क पुलिस व्यवस्था और जिम्मेदार कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष: जालौन के नावली माता मंदिर में मेले के दौरान बिछड़े मासूम को परिजनों से मिलाने वाली मिशन शक्ति टीम की कार्रवाई सराहनीय है। वरिष्ठ उपनिरीक्षक राम शंकर कटियार के नेतृत्व में पुलिसकर्मियों ने तत्परता और संवेदनशीलता दिखाते हुए बच्चे को उसकी मां गीता और अन्य परिजनों तक पहुंचाया। पुलिस के इस गुड वर्क से परिवार ने राहत की सांस ली और आमजन की सुरक्षा में पुलिस की सक्रिय भूमिका एक बार फिर सामने आई।
