जालौन में मैट्रिमोनियल साइट के नाम पर लाखों की ठगी, साइबर पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार

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देव पटेल

हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता कालपी जालौन

जालौन | 29 अक्टूबर 2026

उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में शादी का रिश्ता तलाश रही युवतियों को निशाना बनाकर ऑनलाइन ठगी करने वाले एक गिरोह का साइबर थाना पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य मैट्रिमोनियल वेबसाइटों पर शादी के लिए प्रोफाइल बनाकर युवतियों से संपर्क करते थे। विश्वास जीतने के बाद आरोपी परिवार में बीमारी या किसी दूसरी परेशानी का हवाला देकर उनसे रुपये मंगवाते थे। इस तरीके से लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, मुहर और कथित रूप से फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इसके अलावा पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक स्विफ्ट डिजायर कार भी बरामद की है। मामले में मंगल सिंह नाम का एक अन्य आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।

शादी का भरोसा दिलाकर बनाते थे ठगी का शिकार

प्रारंभिक पुलिस जानकारी के अनुसार, गिरोह के सदस्य ऑनलाइन वैवाहिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके ऐसे लोगों से संपर्क करते थे, जो अपने लिए जीवनसाथी की तलाश कर रहे थे। आरोपी शादी डॉट कॉम और जीवनसाथी डॉट कॉम जैसी वेबसाइटों के माध्यम से युवतियों तक पहुंचते थे। इसके बाद बातचीत का सिलसिला शुरू करके धीरे-धीरे उनका विश्वास हासिल करने की कोशिश करते थे।

शादी जैसे महत्वपूर्ण रिश्ते से जुड़ी उम्मीदों का फायदा उठाकर आरोपी खुद को भरोसेमंद व्यक्ति के रूप में पेश करते थे। बातचीत आगे बढ़ने पर वे अपने परिवार और निजी परिस्थितियों के बारे में जानकारी साझा करते हुए भावनात्मक जुड़ाव बनाने का प्रयास करते थे। पुलिस के अनुसार, इसी विश्वास का इस्तेमाल बाद में पैसों की मांग करने के लिए किया जाता था।

इस प्रकार की ठगी में शुरुआती बातचीत सामान्य दिखाई दे सकती है। आरोपी वैवाहिक संबंध को आगे बढ़ाने की बात करते हैं, लेकिन कुछ समय बाद अचानक आर्थिक परेशानी सामने आने का दावा करने लगते हैं। जालौन में सामने आए मामले में भी परिवार के किसी सदस्य की बीमारी का बहाना बनाकर ऑनलाइन रकम मंगवाने की बात कही गई है।

बीमारी का बहाना बनाकर मांगते थे पैसे

पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य युवतियों से बातचीत के दौरान परिवार में बीमारी या किसी अन्य मजबूरी का हवाला देते थे। इसके बाद उपचार अथवा जरूरत से जुड़ा खर्च बताकर आर्थिक मदद मांगी जाती थी। शादी की बातचीत के कारण जब सामने वाला व्यक्ति आरोपी पर भरोसा कर लेता था, तो उसके लिए इस तरह की मांग पर संदेह करना मुश्किल हो सकता था।

आरोपियों का कथित उद्देश्य इसी भावनात्मक विश्वास का फायदा उठाकर रुपये हासिल करना था। ऑनलाइन माध्यम से पैसे प्राप्त करने के बाद पीड़ितों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। हालांकि, प्रत्येक पीड़ित से कितनी रकम ली गई और ठगी की पूरी प्रक्रिया में किन-किन खातों या माध्यमों का इस्तेमाल किया गया, इसकी विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

यह घटना बताती है कि इंटरनेट पर शादी के लिए किसी व्यक्ति से संपर्क करना अपने आप में उसकी पहचान और इरादों की पुष्टि नहीं करता। आकर्षक प्रोफाइल, अच्छी नौकरी का दावा या परिवार से जुड़ी भावनात्मक बातें किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान का प्रमाण नहीं होती हैं।

साइबर पुलिस की कार्रवाई में तीन आरोपी गिरफ्तार

मामले की जानकारी मिलने के बाद जालौन साइबर थाना पुलिस ने जांच और कार्रवाई की। पुलिस ने कथित गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उनके पास मौजूद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य सामान की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी की घटनाओं को किस तरह अंजाम दिया जाता था।

पुलिस की बरामदगी में छह मोबाइल फोन, 13 सिम कार्ड और सात एटीएम कार्ड शामिल हैं। इसके अतिरिक्त दो मुहर तथा फर्जी बताए जा रहे दस्तावेज भी मिले हैं। एक स्विफ्ट डिजायर कार भी बरामद की गई है।

इन वस्तुओं की बरामदगी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मोबाइल फोन और सिम कार्ड से आरोपियों के संपर्कों तथा संभावित पीड़ितों के बारे में जानकारी मिल सकती है। वहीं, एटीएम कार्ड और दस्तावेजों की जांच से वित्तीय लेनदेन और कथित पहचान संबंधी अनियमितताओं के पहलुओं को समझने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, बरामद सामान का इस्तेमाल किस घटना में और किस प्रकार किया गया, इसकी पुष्टि जांच और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर होगी। आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई पुलिस की जांच के निष्कर्षों के अनुसार की जाएगी।

NCRP पोर्टल पर पांच शिकायतें, 66 लाख रुपये से अधिक की ठगी

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल यानी NCRP पर दर्ज शिकायतें हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पोर्टल पर दर्ज पांच शिकायतों में कुल 66 लाख 4 हजार 881 रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है।

यह रकम काफी बड़ी है और मामले की गंभीरता को दर्शाती है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि शिकायतों में दर्ज राशि और जांच में अंतिम रूप से प्रमाणित नुकसान अलग-अलग हो सकते हैं। पुलिस की जांच में यह पता लगाया जाना बाकी हो सकता है कि प्रत्येक शिकायत किस घटना से संबंधित है, रकम किन माध्यमों से भेजी गई और आरोपियों के बीच धन का बंटवारा किस तरह हुआ।

जांच के दौरान डिजिटल लेनदेन, बैंक खातों, मोबाइल फोन में उपलब्ध जानकारी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण हो सकती है। इन जानकारियों के आधार पर पुलिस कथित ठगी की घटनाओं के बीच संबंध स्थापित करने और संभावित अन्य पीड़ितों का पता लगाने का प्रयास कर सकती है।

यदि किसी व्यक्ति ने इसी तरह की धोखाधड़ी का सामना किया है, तो उसके लिए संबंधित डिजिटल भुगतान के रिकॉर्ड, बातचीत के संदेश और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखना उपयोगी होगा। ऐसी जानकारी जांच में मदद कर सकती है।

मंगल सिंह की तलाश जारी

पुलिस के अनुसार, इस मामले में मंगल सिंह नाम का एक आरोपी अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए तलाश की जा रही है। फरार आरोपी की भूमिका और गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ उसके कथित संबंधों को लेकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि गिरोह ने कितने लोगों को निशाना बनाया, क्या अन्य जिलों में भी इस तरह की घटनाएं हुईं और बरामद मोबाइल फोन तथा सिम कार्ड से कितने संपर्कों का पता चलता है। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़े दूसरे तथ्यों का खुलासा होने की संभावना है।

फिलहाल, गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका, बरामद दस्तावेजों की प्रामाणिकता और कथित वित्तीय लेनदेन की कड़ियों की जांच की जा रही है। इस मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होंगे।

मैट्रिमोनियल वेबसाइट इस्तेमाल करते समय कैसे रहें सतर्क?

जालौन का यह मामला ऑनलाइन वैवाहिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए सावधानी बरतने की जरूरत को सामने लाता है। शादी के लिए किसी से बातचीत शुरू करने के बाद उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है। केवल प्रोफाइल या फोन पर हुई बातचीत के आधार पर किसी व्यक्ति को पूरी तरह विश्वसनीय नहीं मानना चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति पहली बार संपर्क करने के कुछ समय बाद ही बीमारी, दुर्घटना या पारिवारिक संकट का हवाला देकर पैसे मांगता है, तो जल्दबाजी में भुगतान करने से बचना चाहिए। विशेष रूप से तब, जब सामने वाले व्यक्ति की पहचान की पुष्टि न हुई हो या वह वीडियो कॉल, प्रत्यक्ष मुलाकात अथवा स्वतंत्र सत्यापन से बच रहा हो।

बैंक खाते, एटीएम कार्ड का विवरण, ओटीपी, यूपीआई पिन और अन्य गोपनीय वित्तीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। किसी संदिग्ध प्रोफाइल या आर्थिक मांग की स्थिति में परिवार के विश्वसनीय सदस्यों से सलाह लेना भी उपयोगी हो सकता है।

यदि ऑनलाइन ठगी हो जाए, तो जल्द से जल्द बैंक या संबंधित भुगतान सेवा को सूचना देनी चाहिए और भारत में साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

निष्कर्ष

जालौन में मैट्रिमोनियल वेबसाइटों के जरिए कथित ठगी के इस मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और बड़ी संख्या में मोबाइल तथा वित्तीय सामग्री की बरामदगी पुलिस जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। NCRP पर दर्ज पांच शिकायतों में 66 लाख 4 हजार 881 रुपये की कथित ठगी का उल्लेख मामले की गंभीरता को दर्शाता है। वहीं, मंगल सिंह की तलाश और डिजिटल साक्ष्यों की जांच आगे की कार्रवाई में अहम होगी।

यह घटना एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि जीवनसाथी की तलाश करते समय भावनात्मक विश्वास के साथ-साथ पहचान का सत्यापन और आर्थिक सावधानी भी जरूरी है। ऑनलाइन रिश्ते की शुरुआत में दिखाई गई समझदारी संभावित धोखाधड़ी से बचाव में मदद कर सकती है।

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