जालौन: सीएम युवा उद्यमी योजना के ऋण के लिए छह महीने से परेशान महिला, बैंक प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप

0

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

कालपी, जालौन | 29 अक्टूबर 2026

उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान चला रही है। इस योजना का उद्देश्य पात्र लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। हालांकि, जालौन जिले की कालपी तहसील के ग्राम मंगरौल की रहने वाली अर्चना देवी ने योजना के तहत ऋण प्राप्त करने में देरी और बैंक स्तर पर कथित लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। महिला का आरोप है कि आवेदन करने के छह महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद उन्हें टेंट हाउस का व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण नहीं मिल सका है।

पीड़िता ने मामले में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के बाद बैंक प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शिकायत का समाधान करने के बजाय बैंक की ओर से ऐसा जवाब देकर प्रकरण बंद कर दिया गया, जिससे उनकी समस्या का वास्तविक समाधान नहीं हुआ। अब महिला ने मुख्यमंत्री, उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय और भारतीय रिजर्व बैंक के संबंधित शिकायत निवारण तंत्र तक अपनी बात पहुंचाने की तैयारी की है।

अप्रैल में किया था ऋण के लिए आवेदन

मंगरौल गांव निवासी अर्चना देवी ने स्वरोजगार शुरू करने की योजना बनाते हुए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के अंतर्गत टेंट हाउस खोलने के लिए आवेदन किया था। उन्होंने उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की कागजीपुरा शाखा, कालपी में अप्रैल 2026 में ऋण के लिए आवेदन जमा कराया था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उनके आवेदन का क्रमांक 2526341654719 है। महिला का उद्देश्य ऋण की सहायता से टेंट हाउस का कारोबार शुरू करना और अपने परिवार की आय बढ़ाना है। लेकिन आवेदन जमा होने के बाद भी उन्हें ऋण स्वीकृति को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।

अर्चना देवी के मुताबिक, इस मामले में उनके पति कई बार बैंक शाखा पहुंचे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से आवेदन की स्थिति जानने और प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिला। परिवार का आरोप है कि बार-बार बैंक के चक्कर लगाने के बावजूद मामले में ठोस प्रगति नहीं हुई।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी दर्ज कराई शिकायत

बैंक स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होने के बाद अर्चना देवी ने 16 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 पर शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत का पंजीकरण क्रमांक 92616500043074 बताया गया है।

महिला का आरोप है कि शिकायत के निस्तारण में बैंक प्रबंधन की ओर से क्रेडिट गारंटी कवरेज उपलब्ध नहीं होने का उल्लेख किया गया। उनके अनुसार, इस आधार पर शिकायत को निस्तारित दिखा दिया गया, जबकि मूल समस्या यानी ऋण आवेदन पर निर्णय नहीं होने की स्थिति बनी रही।

पीड़िता का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने का उद्देश्य उनके आवेदन पर नियमानुसार विचार कराना और बैंक से स्पष्ट जवाब प्राप्त करना था। लेकिन शिकायत बंद होने के बाद भी उन्हें ऋण नहीं मिला। इसी वजह से उन्होंने निस्तारण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग करने का निर्णय लिया है।

हालांकि, शिकायत के निस्तारण से संबंधित पूरा रिकॉर्ड और बैंक का लिखित पक्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न होने के कारण इस बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है कि शिकायत का निस्तारण किस आधार पर और किन दस्तावेजों के परीक्षण के बाद किया गया।

क्रेडिट गारंटी कवरेज को लेकर उठे सवाल

इस प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण सवाल मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के अंतर्गत ऋण और क्रेडिट गारंटी की व्यवस्था से जुड़ा है। अर्चना देवी का आरोप है कि गारंटी कवरेज का हवाला देकर उनकी शिकायत का समाधान दिखाना उचित नहीं है।

योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को निर्धारित शर्तों के अनुसार शुरुआती चरण में पांच लाख रुपये तक का ऋण बिना संपार्श्विक सुरक्षा यानी कोलेटरल के उपलब्ध कराने की व्यवस्था बताई जाती है। इस प्रकार के ऋणों में क्रेडिट गारंटी तंत्र का उद्देश्य बैंक को ऋण संबंधी जोखिम से सुरक्षा प्रदान करना होता है।

सीजीएफएमयू और सीजीटीएमएसई जैसी व्यवस्थाएं पात्र ऋणों के लिए क्रेडिट गारंटी उपलब्ध कराने से संबंधित हैं। हालांकि, किसी विशेष आवेदन पर इन व्यवस्थाओं की लागू होने वाली शर्तें, कवरेज की उपलब्धता और बैंक की प्रक्रिया संबंधित योजना के दिशा-निर्देशों तथा ऋण की पात्रता पर निर्भर करती हैं।

इसलिए केवल क्रेडिट गारंटी कवरेज का उल्लेख सामने आने से यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि बैंक ने नियमों का उल्लंघन किया है। इसी तरह, बिना संबंधित अभिलेखों की जांच किए बैंक की कार्रवाई को पूरी तरह सही भी नहीं ठहराया जा सकता। मामले में आवेदन की स्थिति, बैंक द्वारा दर्ज आपत्तियों और लागू दिशा-निर्देशों की समीक्षा जरूरी है।

सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए भटकना क्यों?

अर्चना देवी का मामला सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और लाभार्थियों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। स्वरोजगार के लिए ऋण मांगने वाले छोटे आवेदकों के लिए आवेदन की स्थिति, आवश्यक दस्तावेजों और संभावित कमियों की स्पष्ट जानकारी महत्वपूर्ण होती है।

यदि किसी आवेदन में दस्तावेजों की कमी है, पात्रता संबंधी समस्या है या किसी अन्य कारण से ऋण स्वीकृत नहीं किया जा सकता, तो आवेदक को कारण स्पष्ट रूप से बताना और लागू प्रक्रिया के अनुसार आगे का रास्ता समझाना जरूरी है। इससे लाभार्थी अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगाने से बच सकते हैं।

महिला का कहना है कि उनके पति बैंक शाखा के अलावा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की मुख्य शाखा, जो उरई में दीपशिखा होटल के पीछे स्थित बताई गई है, तथा विकास भवन के पास स्थित जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र के कार्यालय में भी कई बार जा चुके हैं। इसके बावजूद परिवार को अब तक संतोषजनक समाधान नहीं मिलने का आरोप है।

उनकी मांग है कि संबंधित अधिकारी आवेदन की स्थिति की समीक्षा करें और यह स्पष्ट करें कि ऋण प्रक्रिया किस स्तर पर लंबित है। यदि कोई कमी है, तो उसकी जानकारी लिखित रूप में दी जाए, ताकि उसे दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

बैंक प्रबंधक ने टिप्पणी करने से किया इनकार

मामले में उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की कागजीपुरा शाखा, कालपी के प्रबंधक विकास से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने इस प्रकरण पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

बैंक प्रबंधक की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं होने के कारण ऋण आवेदन में देरी की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। बैंक के रिकॉर्ड, आवेदन की वर्तमान स्थिति और संबंधित अधिकारियों के लिखित जवाब सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

जिला उद्योग केंद्र के सीएम युवा फेलो ने बताया नियमों के अनुरूप

इस मामले में जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र, उरई के सीएम युवा फेलो शशिकांत बबेले का पक्ष भी सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने शिकायत के निस्तारण को सही ठहराते हुए इसे बैंक के नियमों के अनुकूल बताया।

हालांकि, बैंक प्रबंधक की ओर से विस्तृत जवाब उपलब्ध नहीं है और शिकायत के निस्तारण से संबंधित सभी दस्तावेज भी सामने नहीं आए हैं। ऐसे में दोनों पक्षों के तर्कों का निष्पक्ष मूल्यांकन करने के लिए संबंधित दिशा-निर्देशों और आवेदन से जुड़े अभिलेखों की जांच आवश्यक है।

मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों से न्याय की उम्मीद

अर्चना देवी ने कहा है कि वह अपनी समस्या को लेकर मुख्यमंत्री, लखनऊ स्थित उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय और भारतीय रिजर्व बैंक के संबंधित शिकायत निवारण तंत्र तक पत्र भेजकर शिकायत करेंगी। उनका उद्देश्य अपने आवेदन पर नियमानुसार निर्णय प्राप्त करना और शिकायत के निस्तारण की प्रक्रिया की समीक्षा कराना है।

इस प्रकरण में अब मुख्य सवाल यह है कि अप्रैल में जमा किए गए आवेदन पर छह महीने से अधिक समय तक निर्णय क्यों नहीं हो सका और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत के बाद भी महिला की समस्या का समाधान क्यों नहीं हुआ।

यदि आवेदन में कोई तकनीकी या पात्रता संबंधी बाधा है, तो संबंधित बैंक और विभाग को उसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं, यदि शिकायत के निस्तारण में किसी प्रकार की त्रुटि हुई है, तो सक्षम अधिकारी नियमानुसार उसकी समीक्षा कर सकते हैं।

फिलहाल अर्चना देवी को ऋण मिलने और उनके टेंट हाउस व्यवसाय की शुरुआत को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अब देखना होगा कि संबंधित बैंक और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं तथा महिला के आवेदन पर नियमानुसार कोई ठोस निर्णय लिया जाता है या नहीं।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें