जालौन पुलिस की डिजिटल पहल: ‘भरोसा सॉफ्टवेयर’ शुरू, अब ऑनलाइन दर्ज होंगी शिकायतें
देव पटेल
हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता कालपी जालौन
जालौन | 29 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में पुलिस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक नई पहल की गई है। पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत ने ‘भरोसा सॉफ्टवेयर’ का फीता काटकर शुभारंभ किया। इस नई व्यवस्था के माध्यम से अब पुलिस कार्यालयों और थानों में आने वाले फरियादियों की शिकायतों को डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जाएगा। इसका उद्देश्य शिकायतों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करना और लोगों को उनकी शिकायत पर हुई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराना है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद शिकायत लेकर पुलिस कार्यालय पहुंचने वाले लोगों को एक विशेष पर्ची भी दी जाएगी। इसे ‘भरोसा पर्ची’ नाम दिया गया है। इस पर्ची पर शिकायत से जुड़ी आवश्यक जानकारी दर्ज होगी, जिससे फरियादी भविष्य में अपनी शिकायत की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। पुलिस की इस पहल को शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
एसपी सुरेश चंद्र रावत ने किया सॉफ्टवेयर का शुभारंभ
जालौन पुलिस द्वारा शुरू की गई इस व्यवस्था का उद्घाटन पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत ने किया। कार्यक्रम के दौरान ‘भरोसा सॉफ्टवेयर’ को पुलिस कार्यालयों में शिकायतों के पंजीकरण और उनकी निगरानी के लिए उपयोग में लाने की पहल की गई।
पुलिस विभाग में शिकायतों का सही रिकॉर्ड रखना और उन पर की गई कार्रवाई की जानकारी सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। कई बार शिकायतकर्ता को यह जानने के लिए दोबारा पुलिस कार्यालय जाना पड़ता है कि उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई। नई डिजिटल व्यवस्था इसी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायक हो सकती है।
सॉफ्टवेयर के माध्यम से शिकायत दर्ज होने के बाद उसका विवरण पोर्टल पर उपलब्ध रहेगा। इससे संबंधित अधिकारियों को शिकायतों की जानकारी प्राप्त करने और निस्तारण की प्रक्रिया पर नजर रखने में सुविधा मिलेगी।
शिकायत दर्ज होते ही मिलेगी ‘भरोसा पर्ची’
इस पहल की प्रमुख विशेषता शिकायतकर्ताओं को दी जाने वाली ‘भरोसा पर्ची’ है। जब कोई व्यक्ति पुलिस कार्यालय या थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराएगा, तो उसे एक पर्ची उपलब्ध कराई जाएगी। इस पर 10 अंकों का विशिष्ट शिकायत नंबर अंकित रहेगा।
यह नंबर शिकायत की पहचान के रूप में काम करेगा। इसकी सहायता से संबंधित शिकायत को रिकॉर्ड में ढूंढना और उसकी वर्तमान स्थिति का पता लगाना आसान हो सकेगा।
पर्ची पर जन शिकायत प्रकोष्ठ के प्रभारी का सीयूजी (CUG) मोबाइल नंबर भी दर्ज रहेगा। इससे शिकायतकर्ता को संबंधित प्रकोष्ठ से संपर्क करने में सुविधा मिल सकती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ता को यह भरोसा दिलाना भी है कि उसकी समस्या का रिकॉर्ड तैयार किया गया है और उस पर होने वाली कार्रवाई की निगरानी की जा सकती है।
नाम और मोबाइल नंबर से जान सकेंगे शिकायत की स्थिति
भरोसा सॉफ्टवेयर के तहत फरियादियों को अपनी शिकायत की प्रगति जानने की सुविधा देने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए शिकायतकर्ता अपने नाम और मोबाइल नंबर के माध्यम से शिकायत की स्थिति का पता लगा सकेंगे।
पहले शिकायत के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए लोगों को संबंधित पुलिस कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ सकते थे। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से इस प्रक्रिया को सरल बनाने में मदद मिल सकती है।
शिकायत की स्थिति जानने की सुविधा से लोगों को यह समझने में आसानी होगी कि उनकी समस्या किस स्तर पर है और उस पर आगे की कार्रवाई की क्या स्थिति है। हालांकि, शिकायत की जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार संचालित होगी।
इस सुविधा का लाभ विशेष रूप से उन लोगों को मिल सकता है, जिन्हें किसी कारणवश बार-बार पुलिस कार्यालय पहुंचने में परेशानी होती है। डिजिटल माध्यम से जानकारी प्राप्त करने की सुविधा समय और मेहनत दोनों बचाने में सहायक हो सकती है।
जांच अधिकारियों को पोर्टल पर दर्ज करनी होगी निस्तारण आख्या
नई व्यवस्था में संबंधित जांच अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। शिकायत पर कार्रवाई करने वाले अधिकारी को पोर्टल पर उसके निस्तारण से संबंधित आख्या दर्ज करनी होगी।
इससे शिकायत के रिकॉर्ड में कार्रवाई का विवरण उपलब्ध रखने में मदद मिलेगी। अधिकारी द्वारा दर्ज की गई जानकारी के आधार पर संबंधित स्तर पर शिकायत की प्रगति को देखा जा सकेगा।
डिजिटल रिकॉर्ड होने से शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करने की संभावना बढ़ेगी। साथ ही, संबंधित अधिकारियों के लिए शिकायतों से जुड़े विवरण को सुरक्षित रखना और आवश्यकता पड़ने पर उसकी समीक्षा करना आसान हो सकता है।
इस व्यवस्था से पुलिस प्रशासन को यह समझने में भी सहायता मिल सकती है कि कौन-सी शिकायतें लंबित हैं और किन मामलों में कार्रवाई पूरी की जा चुकी है। इससे शिकायत प्रबंधन की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, सॉफ्टवेयर के प्रभावी संचालन के लिए यह आवश्यक होगा कि शिकायतों से संबंधित जानकारी समय पर दर्ज की जाए और रिकॉर्ड को नियमित रूप से अपडेट रखा जाए।
पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश
किसी भी पुलिस व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है। जब कोई व्यक्ति अपनी समस्या लेकर पुलिस के पास पहुंचता है, तो वह चाहता है कि उसकी शिकायत को गंभीरता से सुना जाए और नियमानुसार कार्रवाई हो।
भरोसा सॉफ्टवेयर इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर शुरू की गई पहल है। शिकायतों का डिजिटल पंजीकरण, विशिष्ट नंबर के माध्यम से उनकी पहचान और निस्तारण की आख्या दर्ज करने जैसी सुविधाएं जवाबदेही को मजबूत करने में सहायक हो सकती हैं।
इस प्रणाली के जरिए शिकायतों से संबंधित जानकारी एक व्यवस्थित रिकॉर्ड में रखी जा सकेगी। इससे अधिकारियों को शिकायतों की स्थिति की समीक्षा करने और आवश्यकतानुसार कार्रवाई की निगरानी करने में सुविधा मिलेगी।
इसके अलावा, शिकायतकर्ता के पास विशिष्ट शिकायत नंबर और संबंधित प्रकोष्ठ का संपर्क विवरण होने से वह अपनी समस्या के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए अधिक स्पष्ट तरीके से संपर्क कर सकेगा।
हालांकि, किसी भी डिजिटल व्यवस्था की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई कितनी प्रभावी ढंग से होती है। तकनीक शिकायत प्रबंधन को बेहतर बना सकती है, लेकिन शिकायतों का निष्पक्ष और नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित करना अधिकारियों की जिम्मेदारी बनी रहेगी।
जिले के सभी संबंधित पुलिस कार्यालयों में लागू होगी व्यवस्था
जालौन पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, भरोसा सॉफ्टवेयर की व्यवस्था पुलिस अधीक्षक कार्यालय, क्षेत्राधिकारी कार्यालयों और जनपद के सभी थानों में लागू की जाएगी।
इससे जिले के अलग-अलग पुलिस कार्यालयों में शिकायत दर्ज कराने वाले लोगों को एक समान डिजिटल प्रक्रिया उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। व्यवस्था का दायरा व्यापक होने से शिकायतों के रिकॉर्ड और निगरानी को अधिक संगठित बनाने में सहायता मिल सकती है।
थानों और अन्य पुलिस कार्यालयों में शिकायत दर्ज कराने आने वाले लोगों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि उनकी शिकायत का पंजीकरण हुआ है और उसका विशिष्ट नंबर क्या है। इसलिए शिकायतकर्ताओं को दी जाने वाली पर्ची इस पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
पुलिस कर्मियों को भी सॉफ्टवेयर के उपयोग, शिकायतों का सही विवरण दर्ज करने और निस्तारण आख्या अपडेट करने की प्रक्रिया का पालन करना होगा, ताकि डिजिटल रिकॉर्ड उपयोगी और विश्वसनीय बना रहे।
जनता और पुलिस के बीच विश्वास मजबूत करने की पहल
जालौन में भरोसा सॉफ्टवेयर की शुरुआत को पुलिस सेवाओं में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में एक अहम कदम माना जा सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना, शिकायतकर्ता को उसकी शिकायत की पहचान उपलब्ध कराना और कार्रवाई की स्थिति जानने में सुविधा देना है।
यदि इस प्रणाली का नियमित और प्रभावी संचालन होता है, तो इससे शिकायतों के रिकॉर्ड को बेहतर ढंग से संभालने तथा अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, लोगों को अपनी शिकायत के संबंध में जानकारी प्राप्त करने का एक व्यवस्थित माध्यम भी मिलेगा।
पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल से जालौन जिले में शिकायत प्रबंधन को अधिक पारदर्शी बनाने की उम्मीद है। अब इस व्यवस्था की प्रभावशीलता इस बात से तय होगी कि डिजिटल रिकॉर्ड को कितनी नियमितता से अपडेट किया जाता है और शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई कितनी तत्परता से पूरी होती है।
निष्कर्ष: जालौन पुलिस का ‘भरोसा सॉफ्टवेयर’ शिकायतों के पंजीकरण और निगरानी को डिजिटल स्वरूप देने की पहल है। 10 अंकों के विशिष्ट शिकायत नंबर वाली भरोसा पर्ची, नाम और मोबाइल नंबर से स्थिति जानने की सुविधा तथा पोर्टल पर निस्तारण आख्या दर्ज करने की व्यवस्था के जरिए पुलिस और आम नागरिकों के बीच संवाद को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया गया है।
