गाज़ा और सीरिया पर हमले: ट्रंप ने नेतन्याहू को फोन कर जताई नाराज़गी

22 जुलाई 2025, वाशिंगटन — अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में गाज़ा और सीरिया में हुई इज़राइली हवाई हमलों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सीधे फोन कर इन दोनों घटनाओं पर अपनी नाराज़गी व्यक्त की और उनसे इन परिस्थितियों को “सुधारने” की मांग की। व्हाइट हाउस ने इस कॉल की पुष्टि करते हुए बताया कि ट्रंप हमलों से चौंक गए थे।
गाज़ा में स्थित एकमात्र कैथोलिक चर्च पर गुरुवार को हुए हमले ने ट्रंप को बेहद आहत किया। इस पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने नेतन्याहू से बात की और इज़राइली नेता से यह सुनिश्चित करने को कहा कि इसे एक ‘त्रुटि’ के रूप में मान्यता दी जाए। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने सार्वजनिक बयान में हमले को गलती बताया।
वहीं, सीरिया की राजधानी दमिश्क पर हुए इज़राइली हवाई हमलों से भी ट्रंप हैरान थे। यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिका सीरिया में स्थिरता लाने के प्रयासों में जुटा है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया, “राष्ट्रपति ट्रंप और बिबी नेतन्याहू के बीच कार्यसंबंध अच्छा है और वे नियमित बातचीत में रहते हैं, लेकिन इन हमलों से राष्ट्रपति पूरी तरह से चौंक गए थे।”
प्रेस सचिव के अनुसार, दोनों घटनाओं पर ट्रंप ने तत्काल नेतन्याहू को फोन किया और उनसे इन परिस्थितियों को सुधारने की मांग की। हालांकि ट्रंप और नेतन्याहू के संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं, फिर भी CNN की रिपोर्ट बताती है कि दोनों नेताओं के बीच का व्यक्तिगत रिश्ता समय-समय पर तनावपूर्ण रहा है। इस साल की गर्मियों में ईरान के खिलाफ साझा हवाई अभियान के दौरान दोनों नेताओं ने करीबी सहयोग किया, लेकिन निजी स्तर पर संबंधों में तनाव बना रहा।
लेविट ने यह भी बताया कि सीरिया में अमेरिका की कूटनीतिक पहलें जारी हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जो नई सीरियाई सरकार का समर्थन कर रहे हैं और प्रतिबंधों को हटाने की दिशा में प्रयासरत हैं, इस पहल का नेतृत्व कर रहे हैं। वर्तमान में सीरिया के नए राष्ट्रपति अहमद अल-शराआ एक पूर्व विद्रोही नेता हैं, जिन्हें अमेरिका का समर्थन प्राप्त है।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप को उम्मीद थी कि नेतन्याहू की हालिया वाशिंगटन यात्रा के दौरान गाज़ा में संघर्षविराम की दिशा में प्रगति होगी। हालांकि हवाई हमलों ने इस प्रक्रिया पर नकारात्मक असर डाला है और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
निष्कर्ष:
डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के रिश्ते चाहे कितने भी मजबूत क्यों न हों, हाल के इज़राइली हमलों ने एक बार फिर अमेरिका और इज़राइल के बीच के कूटनीतिक समीकरणों को चुनौती दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नेतन्याहू इन स्थितियों को कैसे “सुधारते” हैं और क्षेत्र में स्थिरता की दिशा में क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
