अखिलेश यादव का भाजपा पर बड़ा हमला: “विदाई समारोह में न जाना भी एक संकेत”

नई दिल्ली, 23 जुलाई (2025):
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और चुनाव आयोग पर तीखा वार किया। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के विदाई कार्यक्रम में विपक्ष की ओर से औपचारिक रूप से उपस्थित न होने को लेकर उठे सवालों के बीच अखिलेश यादव ने इसे “असली लोकतंत्र की सेहत का आईना” बताया और भाजपा नेताओं से धनखड़ के स्वास्थ्य की जानकारी लेने का आग्रह किया।
मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा, “अब जनता को भाजपा से कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। अगर ये समारोह वास्तव में विदाई के लिए था, तो हम सबको मिलकर उपराष्ट्रपति जी का हालचाल जानना चाहिए। यह केवल अनुपस्थिति नहीं, बल्कि एक संदेश भी है।”
अखिलेश यादव ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के तहत मतदाता सूची में हो रहे बदलावों को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने इसे एक राजनीतिक चाल बताते हुए कहा कि यह भाजपा को चुनाव में बढ़त दिलाने की साजिश है।
उन्होंने जोर देकर कहा, “आप उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची की हालत देखिए, तो आपको चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली खुद समझ आ जाएगी। मतदाताओं को मतदान से वंचित करना अब एक नई रणनीति बन गई है। बिहार में जो कुछ हो रहा है, वह चुनावी हेराफेरी की तैयारी लगती है।”
सपा नेता ने यह भी कहा कि बिहार की मतदाता सूची में सुधार के नाम पर बड़े पैमाने पर बदलाव किए जा रहे हैं, जो संदेहास्पद हैं। उन्होंने आरोप लगाया, “जब राज्य में लगभग 8 करोड़ वोटर हैं, तो इस स्तर का रिवीजन इतनी जल्दी क्यों? उन्हें पता है कि इस बार की लड़ाई वे हारने वाले हैं। तेजस्वी यादव, कांग्रेस और INDIA गठबंधन इस बार उन्हें सत्ता से बाहर करेंगे। जनता भी चाहती है कि अब बदलाव हो, और मुख्यमंत्री की कुर्सी भी खाली हो।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब संसद का मानसून सत्र मतदाता सूची संशोधन को लेकर गहमागहमी से भर गया है। सोमवार और मंगलवार दोनों दिन लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के भारी विरोध के कारण कार्यवाही बाधित रही। अंततः दोनों सदनों की कार्यवाही 23 जुलाई तक स्थगित कर दी गई।
लोकसभा की बैठक जैसे ही सोमवार को दोपहर 12 बजे शुरू हुई, कुछ ही मिनटों में इसे स्थगित करना पड़ा। दोपहर 2 बजे दोबारा शुरू होने पर भी विपक्ष का विरोध जारी रहा।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “सरकार चर्चा के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन विपक्ष केवल नारेबाजी कर रहा है। वे मुद्दों पर संवाद नहीं चाहते, सिर्फ शोर-शराबा कर रहे हैं।”
निष्कर्ष:
अखिलेश यादव की इस प्रेस वार्ता से यह स्पष्ट होता है कि विपक्ष मतदाता सूची संशोधन को लेकर पूरी तरह सतर्क है और इसे आगामी चुनावों के लिए एक निर्णायक मोड़ मानता है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।
