फ़रवरी 14, 2026

बिहार में मतदाता सूची की विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया पर CPI (ML) का दावा

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नई दिल्ली, 22 अगस्त: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बताया कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन [CPI (ML) Liberation] ने बिहार में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया के दौरान दो दावे और आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं।

निर्वाचन आयोग की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 1 अगस्त से 22 अगस्त (शाम 3 बजे तक) की अवधि में CPI (ML) लिबरेशन ही एकमात्र राजनीतिक दल रहा जिसने इस प्रक्रिया में अपने दावे प्रस्तुत किए।

जनता से दावे और आपत्तियाँ

राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 1,60,813 बूथ लेवल एजेंट (BLA) जनता से दावे (Form-6) और आपत्तियाँ (Form-7) प्राप्त कर सकते हैं। ये एजेंट खुद भी आपत्तियाँ दर्ज कर सकते हैं, लेकिन उन्हें निर्धारित प्रपत्र और घोषणा पत्र के साथ ही प्रस्तुत करना आवश्यक है। सामान्य शिकायतें बिना प्रपत्र और घोषणा पत्र के मान्य नहीं होंगी।

अब तक की स्थिति

  • निर्वाचन आयोग को अब तक 84,305 दावे और आपत्तियाँ सीधे मतदाताओं से मिली हैं।
  • इनमें से 6,092 मामलों का निपटारा सिर्फ पिछले सात दिनों में किया गया है।
  • इसके अतिरिक्त, 2,63,257 Form-6 + घोषणा पत्र प्राप्त हुए हैं, जो 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए मतदाताओं के पंजीकरण से संबंधित हैं।

नियम और प्रक्रिया

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि 1 अगस्त 2025 को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से किसी भी नाम को तब तक नहीं हटाया जा सकता जब तक कि ERO/AERO द्वारा सुनवाई कर “स्पीकिंग ऑर्डर” पारित न कर दिया जाए। इस आदेश से पहले संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाएगा।

सूची से बाहर हुए नाम और उनके कारण जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO)/जिला मजिस्ट्रेट (DM) की वेबसाइटों तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। इन सूचियों को EPIC नंबर से खोजा जा सकता है। जिन व्यक्तियों के नाम हटाए गए हैं, वे आधार कार्ड की प्रति के साथ अपने दावे जमा कर सकते हैं।

बिहार में SIR की पृष्ठभूमि

बिहार में विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया 24 जून 2025 से शुरू हुई थी। इस दौरान लगभग 65 लाख मतदाताओं को अयोग्य पाया गया और उनके नाम 1 अगस्त को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए।


✍️ यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि बिहार में मतदाता सूची की पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग कितनी सख्ती से प्रक्रिया का पालन कर रहा है। CPI (ML) लिबरेशन द्वारा उठाए गए कदम इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी को भी दर्शाते हैं।


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