फ़रवरी 12, 2026

वीडियो गेम और ईस्पोर्ट्स पर इमैनुएल मैक्रों की सोच: समर्थन, सवाल और संतुलन

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डिजिटल दौर में वीडियो गेम और ईस्पोर्ट्स केवल शौक या समय बिताने का साधन नहीं रहे। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इस बदलाव को अच्छी तरह समझते हैं। हाल के समय में उन्होंने गेमिंग समुदाय को लेकर फैली कुछ भ्रांतियों को संबोधित करते हुए यह स्पष्ट किया कि उनका दृष्टिकोण न तो विरोध का है और न ही अंध-समर्थन का—बल्कि संतुलन का है।

ईस्पोर्ट्स और फ्रांस की नई वैश्विक छवि

मैक्रों मानते हैं कि ईस्पोर्ट्स आज देशों की “सॉफ्ट पावर” का हिस्सा बन चुका है। इसी सोच के तहत फ्रांस में कई प्रोफेशनल ईस्पोर्ट्स टीमों और खिलाड़ियों को सरकारी स्तर पर पहचान मिली। Sandfall जैसे संगठनों को सम्मानित करना और Karmine Corp, Team Vitality, Gentle Mates जैसी फ्रांसीसी टीमों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर आगे बढ़ाने का प्रयास इसी दिशा का संकेत है।
उनका दीर्घकालिक सपना एक ऐसी राष्ट्रीय ईस्पोर्ट्स व्यवस्था विकसित करना है, जिससे फ्रांस की डिजिटल प्रतिभा वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़ी हो सके।

आर्थिक इंजन और सांस्कृतिक प्रभाव

राष्ट्रपति का मानना है कि गेमिंग इंडस्ट्री सिर्फ मनोरंजन उद्योग नहीं, बल्कि रोजगार, स्टार्टअप और रचनात्मक अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ है। फ्रांस की कई गेम डेवलपमेंट कंपनियां, स्टूडियो और ईस्पोर्ट्स टीमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। यह न केवल आर्थिक लाभ ला रही हैं, बल्कि आधुनिक युवा संस्कृति को भी आकार दे रही हैं।

बच्चों और युवाओं को लेकर चिंता

समर्थन के साथ-साथ मैक्रों ने कुछ गंभीर प्रश्न भी सामने रखे हैं। उनका कहना है कि अगर नियंत्रण न हो, तो अत्यधिक गेमिंग बच्चों और किशोरों के लिए नुकसानदेह बन सकती है।

  • कई परिवार यह महसूस कर रहे हैं कि बच्चों की दिनचर्या गेमिंग के इर्द-गिर्द सिमटती जा रही है।
  • आयु-सीमा के नियमों के बावजूद वयस्कों के लिए बने गेम अक्सर कम उम्र के बच्चे खेल लेते हैं।

ये मुद्दे केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े सवाल भी हैं। इसलिए मैक्रों उद्योग की प्रगति के साथ जिम्मेदारी पर भी जोर देते हैं।

तरक्की के साथ जिम्मेदारी

मैक्रों का दृष्टिकोण यह साफ करता है कि किसी भी उभरते सांस्कृतिक उद्योग को बिना नियम और सामाजिक समझ के आगे बढ़ाना सही नहीं है। ईस्पोर्ट्स फ्रांस को नई पहचान दे सकता है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि युवा पीढ़ी संतुलित जीवन, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी रहे।

वैश्विक संदर्भ में सवाल

यह चर्चा सिर्फ फ्रांस तक सीमित नहीं है। दुनिया भर में सरकारें अब यह सोचने पर मजबूर हैं कि गेमिंग और ईस्पोर्ट्स को कैसे बढ़ावा दिया जाए, बिना इसके सामाजिक प्रभावों की अनदेखी किए।
असली सवाल यही है—क्या हम वीडियो गेम को केवल मुनाफे और प्रतिस्पर्धा के चश्मे से देखेंगे, या इसे जिम्मेदारी और सामाजिक संतुलन के साथ आगे बढ़ाएंगे?


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