आजम खान की रिहाई के बाद बड़ा सियासी और कानूनी मोड़, जेल से बाहर आते ही ED ने लिया हिरासत में; कपिल सिब्बल के सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी की चर्चा
महिपाल सिंह संवाददाता
हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता रामपुर
रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की जेल से रिहाई के दिन रामपुर में ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी। लंबे समय से जेल में बंद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की रिहाई की उम्मीद के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम जिला कारागार रामपुर पहुंच गई। इसके बाद घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जेल से बाहर आने के तुरंत बाद आजम खान को ईडी ने हिरासत में ले लिया, जबकि उनके बेटे अब्दुल्ला आजम रिहा होकर घर रवाना हो गए। Jagran +2

इस घटनाक्रम ने आजम खान की रिहाई का इंतजार कर रहे समर्थकों को हैरान कर दिया। जेल के बाहर बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद थे। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई थी। ईडी की कार्रवाई के बाद समर्थकों ने विरोध में नारेबाजी भी की।
हाईकोर्ट से जमानत के बाद भी नहीं मिली पूरी राहत
दरअसल, आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दो पैनकार्ड से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से 29 अक्टूबर 2026 को बड़ी राहत मिली थी। अदालत ने दोनों की सजा पर रोक लगाते हुए जमानत मंजूर कर ली थी। इसके बाद रामपुर में दोनों की जेल से रिहाई की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।
शुक्रवार को जमानत की शर्तों को पूरा करने के लिए निर्धारित धनराशि और जमानतियों से संबंधित औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद अदालत की ओर से रिहाई परवाने जारी किए गए। शनिवार को परिवार और समर्थकों को उम्मीद थी कि आजम खान और उनके बेटे लंबे समय बाद जेल से बाहर आएंगे।
लेकिन रिहाई की प्रक्रिया पूरी होने के बीच ईडी की टीम के पहुंचने से पूरा घटनाक्रम बदल गया। Amar Ujala Hindi News Live +2
रामपुर जिला कारागार पहुंची ईडी की टीम
शनिवार शाम रामपुर जिला कारागार के आसपास अचानक सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों की टीम केंद्रीय सुरक्षा बलों और पुलिस की मौजूदगी में जेल परिसर पहुंची।
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, टीम में कई अधिकारी शामिल थे और उसके साथ भारी सुरक्षा बल भी मौजूद था। शुरुआती दौर में ईडी अधिकारियों ने मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया। अधिकारियों की चुप्पी के कारण जेल के बाहर मौजूद लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
कुछ समय बाद स्पष्ट हुआ कि ईडी की कार्रवाई केवल संभावित पूछताछ तक सीमित नहीं है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एजेंसी आजम खान को हिरासत में लेने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के साथ पहुंची थी।
इस दौरान जेल के बाहर पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती रही। प्रशासन की प्राथमिकता भीड़ को नियंत्रित रखने और किसी अप्रिय स्थिति से बचने की थी। The New Indian Express +2
रिहाई के तुरंत बाद ईडी ने लिया हिरासत में
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि आजम खान जेल से बाहर तो आए, लेकिन उन्हें सामान्य रूप से अपने घर जाने का अवसर नहीं मिला। ईडी की टीम ने उन्हें हिरासत में लेकर अपने साथ रवाना कर दिया।
वहीं, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को जेल से रिहाई मिल गई और वह अपने घर के लिए रवाना हो गए। इस तरह एक ही परिवार के दो सदस्यों की रिहाई का घटनाक्रम अलग-अलग दिशा में चला गया।
जेल के बाहर मौजूद समाजवादी पार्टी के समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने ईडी की कार्रवाई का विरोध किया। समर्थकों ने नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। अचानक हुए इस घटनाक्रम से रामपुर जिला कारागार के बाहर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया।
आजम खान की रिहाई का इंतजार कर रहे समर्थकों के लिए यह अप्रत्याशित घटनाक्रम था। उन्हें उम्मीद थी कि जमानत मिलने के बाद आजम खान सीधे अपने परिवार और समर्थकों के बीच पहुंचेंगे, लेकिन ईडी की कार्रवाई ने इस उम्मीद को फिलहाल बदल दिया। Amar Ujala Hindi News Live +2
मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़ा है ईडी का मामला
आजम खान के खिलाफ ईडी की कार्रवाई का संबंध रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच से बताया जा रहा है।
ईडी इस मामले में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से संबंधित आर्थिक गतिविधियों की जांच कर रही है। जांच एजेंसी की ओर से आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय के निर्माण और उससे जुड़े खर्चों में बड़ी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं।
एजेंसी की जांच में विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च, निर्माण सामग्री की खरीद, ठेकेदारों से जुड़े लेनदेन और धन के स्रोतों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
ईडी के अनुसार, विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल किए गए धन और उपलब्ध वित्तीय रिकॉर्ड के बीच अंतर सामने आया है। एजेंसी ने कथित तौर पर लगभग 416 करोड़ रुपये के अस्पष्ट खर्च को लेकर जांच की है।
इसके अलावा, 28 अक्टूबर को ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत विश्वविद्यालय की जमीन और भवनों से संबंधित संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने की कार्रवाई की थी। इस संपत्ति का मूल्यांकन लगभग 426.46 करोड़ रुपये बताया गया है।
हालांकि, जांच एजेंसी के आरोपों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। मामले में संबंधित पक्षों का पक्ष और अदालत में होने वाली सुनवाई भी महत्वपूर्ण होगी। NewsDrum +2
कपिल सिब्बल के सुप्रीम कोर्ट जाने की चर्चा
ईडी की कार्रवाई के बाद इस मामले में कानूनी लड़ाई तेज होने के संकेत भी मिल रहे हैं। रामपुर से प्राप्त स्थानीय रिपोर्टर की जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल इस कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं।
रिपोर्टर से मिली जानकारी में दावा किया गया है कि आजम खान की ओर से ईडी की कार्रवाई को असंवैधानिक बताते हुए तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जा सकती है।
बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, कपिल सिब्बल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने या अदालत में तत्काल सुनवाई की मांग किए जाने की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आजम खान की कानूनी टीम इस मामले में कौन-सा रास्ता अपनाती है और सुप्रीम कोर्ट में कोई नई याचिका दाखिल होती है या नहीं।
इस मामले में एक बात स्पष्ट है कि हाईकोर्ट से मिली जमानत और ईडी की अलग जांच दो अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। एक मामले में जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं होता कि किसी दूसरे मामले में चल रही वैधानिक कार्रवाई अपने आप समाप्त हो जाएगी।
गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेशी की तैयारी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईडी आजम खान को धनशोधन निवारण अधिनियम से संबंधित मामले में गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेश करने की तैयारी में है। एजेंसी अदालत से पूछताछ के लिए रिमांड की मांग कर सकती है।
इस संबंध में 1 नवंबर 2026 को अदालत में पेशी की संभावना बताई गई है। हालांकि, आगे की कार्रवाई और पूछताछ की अवधि का निर्णय संबंधित अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा।
ईडी की जांच का दायरा विश्वविद्यालय से जुड़े वित्तीय लेनदेन और कथित अनियमितताओं तक फैला हुआ है। इसलिए आने वाले दिनों में इस मामले में कई महत्वपूर्ण कानूनी और प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। NDTV +2
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल
आजम खान की रिहाई और उसके तुरंत बाद ईडी की कार्रवाई ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी नई चर्चा छेड़ दी है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता के रूप में आजम खान का रामपुर और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से राजनीतिक प्रभाव रहा है।
उनकी रिहाई को लेकर समर्थकों में उत्साह था, लेकिन ईडी की कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को एक बार फिर गर्म कर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की अगली प्रतिक्रिया पर भी लोगों की नजरें रहेंगी।
आने वाले समय में इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी बढ़ने की संभावना है। हालांकि, किसी भी राजनीतिक आरोप या दावे का मूल्यांकन संबंधित तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
अब आगे क्या होगा?
रामपुर में हुए इस घटनाक्रम के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल सामने हैं। क्या ईडी को अदालत से आजम खान की रिमांड मिलेगी? क्या उनकी कानूनी टीम इस कार्रवाई को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगी? विश्वविद्यालय से जुड़े वित्तीय मामले में जांच एजेंसी को आगे क्या तथ्य मिलेंगे?
इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकते हैं।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 31 अक्टूबर 2026 को आजम खान की रिहाई का दिन उनके लिए एक नई कानूनी चुनौती लेकर आया। एक तरफ दो पैनकार्ड मामले में हाईकोर्ट से जमानत मिली, वहीं दूसरी तरफ जेल से बाहर आते ही ईडी ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
रामपुर से शुरू हुआ यह घटनाक्रम अब गाजियाबाद की विशेष अदालत और संभावित रूप से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है। पूरे प्रदेश की निगाहें अब इस मामले की अगली सुनवाई और जांच एजेंसी की कार्रवाई पर टिकी हैं।
रिपोर्ट: महिपाल सिंह, संवाददाता रामपुर
प्रकाशन तिथि: 31 अक्टूबर 2026
