जालौन ड्रग्स फैक्ट्री कांड में बड़ी कार्रवाई, एक दरोगा समेत तीन पुलिसकर्मी निलंबित; 300 करोड़ की ड्रग्स बरामदगी से मचा हड़कंप
देव पटेल
हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता कालपी जालौन
जालौन। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में गुलाब जल बनाने की आड़ में संचालित हो रही कथित ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा होने के बाद पुलिस विभाग में बड़ी कार्रवाई की गई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत ने डकोर कोतवाली में तैनात एक उपनिरीक्षक समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में हल्का प्रभारी दरोगा प्रेम पाल, हेड कांस्टेबल राजेश पाल और कांस्टेबल अंकित शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है।

दरअसल, डकोर कोतवाली क्षेत्र के ऐरी रमपुरा गांव के खेतों में पिछले करीब पांच महीने से गुलाब जल बनाने के नाम पर एक गुप्त प्रयोगशाला संचालित की जा रही थी। यहां कथित तौर पर मेफेड्रोन नामक प्रतिबंधित मादक पदार्थ तैयार किया जा रहा था। इस अवैध गतिविधि की भनक स्थानीय स्तर पर नहीं लगने और इतनी बड़ी फैक्ट्री के लंबे समय तक संचालित होने के बाद अब संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
DRI और यूपी एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में हुआ खुलासा
ऐरी रमपुरा गांव में चल रही इस कथित ड्रग्स फैक्ट्री का पर्दाफाश राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) और उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) की संयुक्त कार्रवाई में हुआ। जांच एजेंसियों को इस अवैध कारोबार के संबंध में शुरुआती सुराग मुंबई में मिली जानकारी के आधार पर प्राप्त हुए थे।
बताया गया है कि मुंबई निवासी इंजीनियर संतोष गावड़े जालौन में तैयार किए जा रहे एक पदार्थ की जांच कराने के लिए मुंबई की एक प्रयोगशाला पहुंचा था। वहां जांच प्रक्रिया के दौरान कुछ संदिग्ध जानकारियां सामने आईं। इसके बाद DRI ने मामले की पड़ताल शुरू की। संतोष गावड़े से पूछताछ और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच एजेंसियों को जालौन के ऐरी रमपुरा गांव में संचालित गुप्त प्रयोगशाला का पता चला।
जानकारी की पुष्टि होने के बाद 29 अक्टूबर को DRI और यूपी एटीएस की संयुक्त टीम ने गांव में छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान खेत में बनाई गई कथित ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा हुआ। जांच एजेंसियों को वहां बड़ी मात्रा में तैयार और अर्धनिर्मित मादक पदार्थ के साथ रासायनिक सामग्री तथा उपकरण मिले।
1102.88 किलोग्राम मादक पदार्थ बरामद
छापेमारी के दौरान जांच टीम ने कुल 1102.88 किलोग्राम मादक पदार्थ, अर्धनिर्मित ड्रग्स और विभिन्न प्रकार के कच्चे रसायन बरामद किए। इसके अलावा फैक्ट्री में इस्तेमाल किए जा रहे उपकरण भी जब्त किए गए हैं।
जांच एजेंसियों के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, बरामद मादक पदार्थ, रसायनों और उपकरणों की कुल कीमत करीब 300 करोड़ रुपये बताई गई है। इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित मादक पदार्थ मिलने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों के लिए भी यह जानकारी चौंकाने वाली रही, क्योंकि उन्हें बताया गया था कि खेत में गुलाब जल बनाने का कारोबार चल रहा है।
इस कार्रवाई ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में किराए पर ली गई जमीन और वहां संचालित होने वाली संदिग्ध व्यावसायिक गतिविधियों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दो आरोपियों को किया गया गिरफ्तार
संयुक्त कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसियों ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें महाराष्ट्र के रहने वाले संतोष गावड़े और हमीरपुर जिले के निवासी हेमंत कुशवाहा शामिल हैं।
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, हमीरपुर जिले के गोहांड क्षेत्र के निवासी हेमंत कुशवाहा ने ऐरी रमपुरा गांव के रहने वाले शैलेंद्र पाल से एक बीघा जमीन किराए पर ली थी। जमीन का सालाना किराया एक लाख रुपये निर्धारित किया गया था। बताया गया है कि किराए के रूप में करीब 32 हजार रुपये का भुगतान भी किया जा चुका था।
इसी जमीन पर लगभग पांच महीने पहले गुप्त प्रयोगशाला स्थापित की गई थी। आरोपियों ने स्थानीय लोगों के सामने अपनी गतिविधियों को सामान्य दिखाने के लिए गुलाब जल बनाने का काम शुरू करने की बात कही थी। इसी बहाने वहां होने वाली गतिविधियों पर संदेह कम हुआ और कथित तौर पर लंबे समय तक यह काम चलता रहा।
पुलिसकर्मियों की भूमिका पर उठे सवाल, एसपी ने लिया एक्शन
ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि आखिर एक गांव में करीब पांच महीने से इतनी बड़ी अवैध गतिविधि चलती रही और स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?
मामले की गंभीरता को देखते हुए जालौन के पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत ने विभागीय स्तर पर कार्रवाई करते हुए डकोर कोतवाली में तैनात तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। इनमें हल्का प्रभारी उपनिरीक्षक प्रेम पाल, हेड कांस्टेबल राजेश पाल और कांस्टेबल अंकित के नाम शामिल हैं।
इस कार्रवाई को स्थानीय पुलिस की जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, तीनों पुलिसकर्मियों की भूमिका और उनके खिलाफ विभागीय जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
यह भी महत्वपूर्ण है कि निलंबन को किसी आपराधिक संलिप्तता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। संबंधित पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी और संभावित लापरवाही का निर्धारण जांच के बाद ही होगा।
पांच महीने तक कैसे चलता रहा कथित अवैध कारोबार?
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि ऐरी रमपुरा जैसे ग्रामीण क्षेत्र में कथित तौर पर पांच महीने तक इतनी बड़ी प्रयोगशाला संचालित होती रही। जमीन किराए पर लेने से लेकर उपकरण स्थापित करने और मादक पदार्थ तैयार करने तक की गतिविधियों को लेकर अब कई सवाल सामने आ रहे हैं।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल थे। तैयार किए जा रहे मेफेड्रोन की आपूर्ति कहां की जानी थी, इसके पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा था और आरोपियों के संपर्क किन लोगों से थे, इन सभी पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इसके अलावा यह भी पता लगाया जाना जरूरी है कि बरामद सामग्री का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था और इस कारोबार से जुड़े अन्य ठिकाने कहां-कहां मौजूद हैं।
ग्रामीणों को गुलाब जल के कारोबार की दी गई थी जानकारी
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, खेत में काम करने वाले लोगों और आसपास के ग्रामीणों को बताया गया था कि यहां गुलाब जल तैयार किया जाता है। इसी वजह से कथित फैक्ट्री की वास्तविक गतिविधियों को लेकर लोगों को जानकारी नहीं हो सकी।
हालांकि, जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद पूरे मामले की परतें खुलने लगी हैं। गांव में हुई छापेमारी और करोड़ों रुपये की बरामदगी ने स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी चर्चा शुरू कर दी है।
आगे की जांच पर टिकी निगाहें
जालौन में सामने आया यह मामला केवल एक अवैध फैक्ट्री के खुलासे तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े संभावित नेटवर्क, आर्थिक लेन-देन और स्थानीय स्तर पर निगरानी की जिम्मेदारी जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू भी जांच के दायरे में हैं।
DRI और यूपी एटीएस की कार्रवाई में दो आरोपियों की गिरफ्तारी तथा भारी मात्रा में मादक पदार्थ की बरामदगी के बाद अब आगे की जांच से कई अहम जानकारियां सामने आने की उम्मीद है। वहीं, पुलिस अधीक्षक की ओर से एक दरोगा और दो अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने के बाद विभागीय जवाबदेही का मुद्दा भी चर्चा में है।
फिलहाल पूरे मामले में जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और पुलिस विभाग की विभागीय जांच पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। करीब 300 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत वाली बरामदगी ने जालौन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।
