सुजौली के विद्यालय में वन विभाग ने चलाया जागरूकता अभियान, बच्चों को सिखाए वन्यजीवों से सुरक्षित रहने के तरीके
कमलेश कुमार
हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता बहराइच
जंगल और आबादी के आसपास वन्यजीवों की मौजूदगी पर बरतें सतर्कता, रेंजर नीरज श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को दिए महत्वपूर्ण सुरक्षा सुझाव

सुजौली (बहराइच), 05 नवंबर 2026।
मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से वन विभाग की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में गुरुवार को सुजौली क्षेत्र के टपरा बाजार स्थित फूलमती शिक्षण सेवा संस्थान में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने विद्यालय के छात्र-छात्राओं को वन्यजीवों के व्यवहार, उनके प्राकृतिक आवास और जंगल के आसपास सुरक्षित रहने के जरूरी उपायों की जानकारी दी।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को यह समझाना था कि जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों और वन्यजीवों के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक है। अधिकारियों ने बताया कि थोड़ी सी सावधानी और सही जानकारी अपनाकर कई अप्रिय घटनाओं से बचा जा सकता है। बच्चों को विशेष रूप से वन्यजीव दिखाई देने की स्थिति में क्या करना चाहिए और किन गतिविधियों से दूरी बनाए रखनी चाहिए, इसके बारे में विस्तार से समझाया गया।
वन अधिकारियों ने विद्यालय पहुंचकर बच्चों को किया जागरूक
फूलमती शिक्षण सेवा संस्थान, टपरा बाजार, सुजौली के पकड़िया बाबा रोड स्थित विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में बगुलहिया रेंज के रेंजर नीरज श्रीवास्तव तथा सुजौली वन दरोगा अनिल कुमार ने सहभागिता की। दोनों अधिकारियों ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए मानव-वन्यजीव संघर्ष के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि जंगल वन्यजीवों का प्राकृतिक निवास स्थान है। भोजन, पानी और सुरक्षित वातावरण की तलाश में कई बार जंगली जानवर जंगल से सटे ग्रामीण इलाकों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में लोगों को घबराहट या जल्दबाजी में कोई ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए, जिससे उनके लिए खतरा पैदा हो।
अधिकारियों ने बच्चों को बताया कि वन्यजीवों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ करना, उनके नजदीक जाकर तस्वीर लेने की कोशिश करना या उन्हें परेशान करना बिल्कुल उचित नहीं है। इस तरह का व्यवहार मनुष्य और वन्यजीव दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
वन्यजीव दिखाई देने पर अपनाएं ये सावधानियां
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने विद्यार्थियों को कई महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय बताए। उन्होंने कहा कि जंगल, खेतों या गांव के आसपास किसी जंगली जानवर के दिखाई देने पर सबसे पहले शांत रहना चाहिए और उससे पर्याप्त दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
बच्चों को समझाया गया कि वन्यजीवों के सामने शोर मचाने, उन्हें घेरने, पत्थर फेंकने या उनके रास्ते में बाधा डालने से बचना चाहिए। यदि कोई वन्यजीव आसपास दिखाई देता है तो उसके पास जाने के बजाय सुरक्षित स्थान पर पहुंचना चाहिए और इसकी सूचना वन विभाग को देनी चाहिए।
इसके अलावा अधिकारियों ने रात के समय अनावश्यक रूप से अकेले बाहर न निकलने की सलाह दी। विशेषकर जंगल से सटे इलाकों और झाड़ियों वाले रास्तों पर आते-जाते समय सतर्क रहने की बात कही गई। बच्चों को यह भी बताया गया कि किसी संदिग्ध गतिविधि या वन्यजीव की मौजूदगी की जानकारी मिलने पर अपने परिवार के सदस्यों और संबंधित विभाग को अवगत कराएं।
मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा जरूरी
कार्यक्रम में अधिकारियों ने विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण का महत्व भी समझाया। उन्होंने कहा कि प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में प्रत्येक जीव की अपनी भूमिका होती है। वन्यजीव पर्यावरण और जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए उनके प्रति संवेदनशीलता रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को केवल वन विभाग के प्रयासों से पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसके लिए स्थानीय नागरिकों, ग्रामीणों, किसानों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की भागीदारी भी जरूरी है। जब लोगों को वन्यजीवों के व्यवहार और सुरक्षा से जुड़े नियमों की सही जानकारी होगी, तभी ऐसी घटनाओं को कम करने में प्रभावी मदद मिल सकेगी।
अधिकारियों ने बच्चों को संदेश दिया कि वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाना किसी समस्या का समाधान नहीं है। इसके बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए संबंधित विभाग को सूचना देना ही सबसे उचित कदम है।
बच्चों को जागरूक बनाना अभियान का महत्वपूर्ण उद्देश्य
वन विभाग की इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को जागरूक करना भी रहा। बच्चे अपने परिवार और आसपास के लोगों तक सीखी हुई जानकारियां पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि विद्यार्थी स्वयं सावधानियों को समझेंगे तो वे घर के सदस्यों और ग्रामीण समुदाय को भी इसके प्रति जागरूक कर सकेंगे।
विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को बताया गया कि जंगल और इंसानी बस्तियों के बीच रहने वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है। वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना और उनके साथ अनावश्यक टकराव से बचना दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।
विद्यालय प्रबंधन ने वन विभाग के अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों के लिए केवल जानकारी का माध्यम नहीं हैं, बल्कि उन्हें सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक भी बनाते हैं।
विद्यालय परिवार ने वन विभाग की पहल को सराहा
इस जागरूकता कार्यक्रम के अवसर पर विद्यालय प्रबंधन से अनुरुद्ध कुमार, प्रधानाचार्य उमेश कुमार भारती तथा विद्यालय के समस्त शिक्षकगण मौजूद रहे। सभी ने वन विभाग की इस पहल की प्रशंसा की और कहा कि वर्तमान समय में मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रति जागरूकता बेहद आवश्यक है।
विद्यालय परिवार के सदस्यों ने माना कि ग्रामीण और वन क्षेत्र से जुड़े इलाकों में रहने वाले बच्चों को वन्यजीवों से सुरक्षा संबंधी जानकारी देना समय की जरूरत है। इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी, वन्यजीव संरक्षण की भावना और आपात परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की समझ विकसित करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को यह संदेश दिया गया कि वन्यजीव हमारे पर्यावरण के अभिन्न अंग हैं और उनका संरक्षण करना सभी का दायित्व है। साथ ही अपनी तथा दूसरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग द्वारा बताए गए नियमों का पालन करना चाहिए।
जागरूकता से कम हो सकता है मानव-वन्यजीव संघर्ष
सुजौली क्षेत्र में आयोजित यह कार्यक्रम वन्यजीव संरक्षण और जनसुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। वन विभाग की ओर से विद्यालय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास सराहनीय है। ऐसे आयोजनों से बच्चों को छोटी उम्र से ही प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने और सुरक्षित व्यवहार अपनाने की प्रेरणा मिलती है।
कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि मनुष्य और वन्यजीव एक ही प्राकृतिक व्यवस्था का हिस्सा हैं। दोनों के बीच टकराव की स्थिति से बचने के लिए सतर्कता, जागरूकता और आपसी जिम्मेदारी जरूरी है। यदि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें और वन्यजीवों की मौजूदगी की सूचना समय पर दें, तो मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
फूलमती शिक्षण सेवा संस्थान में आयोजित इस अभियान ने विद्यार्थियों को यह महत्वपूर्ण सीख दी कि वन्यजीवों से डरने या उन्हें नुकसान पहुंचाने के बजाय समझदारी और सावधानी के साथ व्यवहार करना चाहिए। यही सोच मानव सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण को भी मजबूत बनाएगी।
