दो साल से सबमर्सिबल मोटर गायब, सामुदायिक शौचालय की व्यवस्था बदहाल; सीटें टूटीं, बिजली भी गुल
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
मंगरौल स्टैंड के पास बने सामुदायिक शौचालय की अंदरूनी हालत खराब, महिला केयर टेकर ने खोली अव्यवस्थाओं की पोल; शिकायत के बावजूद नहीं हुआ समाधान

मंगरौल। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने और लोगों को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इन सुविधाओं के निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, ताकि ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं को स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय की सुविधा मिल सके। लेकिन मंगरौल स्टैंड के पास स्थित सामुदायिक शौचालय की मौजूदा स्थिति सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और रखरखाव पर सवाल खड़े कर रही है। यहां सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शौचालय में पानी, बिजली और साफ-सफाई जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं भी ठीक ढंग से उपलब्ध नहीं हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस सामुदायिक शौचालय में पिछले करीब दो वर्षों से सबमर्सिबल मोटर नहीं है। इसके चलते पानी की नियमित आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित है। शौचालय का इस्तेमाल करने आने वाले लोगों को पानी की व्यवस्था स्वयं करनी पड़ती है। कई बार पानी दूर से लाना पड़ता है, जिससे लोगों को काफी असुविधा होती है। इस समस्या के कारण ग्रामीणों का सामुदायिक शौचालय की ओर जाना कम हो गया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कुछ ग्रामीण आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।
महिला केयर टेकर ने बताई शौचालय की वास्तविक स्थिति
सामुदायिक शौचालय की देखरेख की जिम्मेदारी संभाल रहीं महिला केयर टेकर सत्तो देवी ने वहां व्याप्त समस्याओं को सामने रखा है। उनका कहना है कि लगभग दो साल से सबमर्सिबल मोटर उपलब्ध नहीं है, जिसकी वजह से शौचालय में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इसके अलावा बिजली की व्यवस्था भी खराब पड़ी है। शौचालय परिसर में लगाए गए एलईडी बल्ब भी गायब हो चुके हैं। शाम होते ही पूरा परिसर अंधेरे में डूब जाता है।
केयर टेकर के अनुसार, शौचालय के अंदर की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। कई सीटें अपनी जगह से धंस गई हैं और उनकी हालत ऐसी हो चुकी है कि बिना मरम्मत के उनका उपयोग करना मुश्किल है। शौचालय की आवश्यक सुविधाओं के लगातार खराब रहने से यहां आने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
सत्तो देवी का कहना है कि उन्होंने इन समस्याओं के बारे में संबंधित ग्राम प्रधान को पहले ही जानकारी दी थी। इसके बावजूद लंबे समय तक कोई ठोस सुधार नहीं कराया गया। शिकायत के बाद भी व्यवस्था में बदलाव नहीं होने से शौचालय की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
बाहर रंगाई-पुताई, अंदर बुनियादी सुविधाओं का अभाव
इस सामुदायिक शौचालय की एक और हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। हाल ही में भवन की रंगाई-पुताई कराई गई है, जिससे बाहर से देखने पर शौचालय की इमारत साफ-सुथरी और आकर्षक दिखाई देती है। लेकिन जैसे ही कोई अंदर की स्थिति देखता है, वहां की अव्यवस्थाएं साफ नजर आने लगती हैं।
बाहर की दीवारों पर रंग-रोगन होने के बावजूद अंदर पानी की सुविधा नहीं है। बिजली की व्यवस्था बंद है और शौचालय की सीटें भी खराब हालत में हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि केवल भवन की सुंदरता बढ़ाने से स्वच्छता व्यवस्था कैसे दुरुस्त हो सकती है, जबकि लोगों को जरूरी सुविधाएं ही नहीं मिल रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी सामुदायिक शौचालय की उपयोगिता उसकी इमारत की रंगाई-पुताई से नहीं, बल्कि पानी, बिजली, साफ-सफाई और सुरक्षित उपयोग की व्यवस्था से तय होती है। यदि इन बुनियादी जरूरतों की अनदेखी होती रही तो सरकारी धन से तैयार किया गया भवन ग्रामीणों के किसी काम का नहीं रह जाएगा।
दो साल से मोटर गायब होने पर उठ रहे सवाल
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, मरम्मत के उद्देश्य से सबमर्सिबल मोटर निकाले जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, मोटर को निकाले जाने और उसके बाद उसे दोबारा स्थापित नहीं किए जाने के संबंध में स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। यदि मरम्मत के लिए मोटर निकाली गई थी तो इतने लंबे समय तक जलापूर्ति बहाल क्यों नहीं हो सकी, यह जांच का विषय है।
ग्रामीणों का मानना है कि संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को इस पूरे मामले की जानकारी लेकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शौचालय में पानी की आपूर्ति कब तक शुरू होगी। साथ ही खराब विद्युत व्यवस्था और क्षतिग्रस्त सीटों की भी मरम्मत कराई जानी चाहिए।
खुले में शौच जाने को मजबूर ग्रामीण
सामुदायिक शौचालय का निर्माण ग्रामीणों को बेहतर स्वच्छता सुविधाएं देने के उद्देश्य से किया गया था। खासकर महिलाओं और बुजुर्गों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ऐसे सार्वजनिक शौचालयों की अहम भूमिका मानी जाती है। लेकिन जब शौचालय में पानी और बिजली जैसी आवश्यक सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हों, तो उसका उपयोग करना मुश्किल हो जाता है।
मंगरौल स्टैंड के आसपास रहने वाले लोगों को इसी समस्या से जूझना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय के अनुपयोगी बने रहने से खुले में शौच जाने की मजबूरी खत्म नहीं हो पा रही है। इससे स्वच्छता अभियान के उद्देश्यों पर भी असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द आवश्यक कार्रवाई करेगा।
भूरे द्विवेदी ने व्यवस्था सुधारने की उठाई मांग
सामुदायिक शौचालय के आसपास रहने वाले ग्रामीण भूरे द्विवेदी ने इस समस्या पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि शौचालय की सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर दिया जाए तो ग्रामीणों को काफी राहत मिल सकती है। पानी, बिजली और खराब सीटों की मरम्मत होने के बाद लोग इस सुविधा का नियमित इस्तेमाल कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि लाखों रुपये खर्च करके बनाए गए सामुदायिक शौचालय का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब ग्रामीणों को इसका वास्तविक लाभ मिले। भवन का निर्माण कराने के बाद उसकी देखरेख और नियमित मरम्मत की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि समय रहते कमियों को दूर कर दिया जाए तो यह शौचालय गांव के लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
जितेंद्र पाल ने प्राथमिकता से समाधान का दिया भरोसा
इस संबंध में औपचारिक रूप से प्रधानी का काम देख रहे जितेंद्र पाल ने बताया कि सामुदायिक शौचालय से जुड़ी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर कराया जाएगा। उन्होंने व्यवस्था में सुधार कराने का भरोसा दिलाया है।
वहीं, महेवा के खंड विकास अधिकारी अरुण कुमार सिंह ने भी ग्रामीणों की समस्या को प्राथमिकता से निस्तारित कराने का आश्वासन दिया है। उनके इस भरोसे के बाद ग्रामीणों को उम्मीद जगी है कि लंबे समय से चली आ रही परेशानी का जल्द समाधान हो सकेगा।
अब कार्रवाई का इंतजार कर रहे ग्रामीण
मंगरौल स्टैंड के पास स्थित सामुदायिक शौचालय की बदहाली ने रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब दो वर्षों से सबमर्सिबल मोटर के अभाव, बिजली व्यवस्था ठप होने, एलईडी बल्ब गायब होने और सीटों के क्षतिग्रस्त होने जैसी समस्याएं बताती हैं कि भवन की नियमित देखरेख की जरूरत है।
अब ग्रामीणों की निगाहें ग्राम पंचायत और विकासखंड प्रशासन पर टिकी हैं। लोगों की मांग है कि शौचालय में जल्द से जल्द पानी की आपूर्ति बहाल कराई जाए, विद्युत व्यवस्था ठीक की जाए, खराब सीटों की मरम्मत हो और परिसर में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
साथ ही, यह भी स्पष्ट किया जाए कि दो वर्षों से सबमर्सिबल मोटर क्यों उपलब्ध नहीं है और इसकी मरम्मत अथवा पुनर्स्थापना में इतनी देरी कैसे हुई। ग्रामीण चाहते हैं कि केवल आश्वासन तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि मौके पर वास्तविक सुधार दिखाई दे। तभी लाखों रुपये की लागत से निर्मित सामुदायिक शौचालय अपने उद्देश्य को पूरा कर सकेगा और ग्रामीणों को खुले में शौच की मजबूरी से राहत मिल पाएगी।
