बहराइच: सुजौली क्षेत्र की सड़क के बीचोंबीच बना विशाल गड्ढा बना हादसों को न्योता, रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही पर मंडरा रहा खतरा

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कृष्ण कुमार

हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता बहराइच

क्रासर : सुजौली, त्रिलोकी गौढ़ी, श्रीरामपुरवा, टिलवा और खैरीपुरवा समेत कई गांवों को जोड़ने वाले मार्ग की बदहाल स्थिति से ग्रामीण परेशान; जिम्मेदार विभाग की अनदेखी से कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा, ग्रामीणों ने सड़क की तत्काल मरम्मत कराने की उठाई मांग।

बहराइच। जिले के थाना सुजौली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सड़क की बदहाल स्थिति इन दिनों स्थानीय ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। सुजौली से त्रिलोकी गौढ़ी, श्रीरामपुरवा, टिलवा, खैरीपुरवा सहित आसपास के कई गांवों को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग के बीचोंबीच एक बड़ा गड्ढा बन गया है। सड़क पर मौजूद यह गड्ढा राहगीरों और वाहन चालकों के लिए लगातार खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद सड़क की मरम्मत को लेकर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मार्ग से प्रतिदिन लगभग तीन से चार हजार लोगों का आवागमन होता है। सुबह से लेकर देर शाम तक दोपहिया वाहन, चारपहिया वाहन, साइकिल सवार और पैदल राहगीर इसी रास्ते से गुजरते हैं। आसपास के गांवों के लोगों के लिए यह सड़क आवागमन का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में सड़क के बीचोंबीच बना विशाल गड्ढा किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।

सड़क के बीच बना गड्ढा बना परेशानी का कारण

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गड्ढे के कारण वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रास्ते से गुजरते समय चालक को अचानक अपनी गति कम करनी पड़ती है और गड्ढे से बचने के लिए वाहन को दूसरी तरफ मोड़ना पड़ता है। इस दौरान सामने से आने वाले वाहनों के साथ टक्कर होने की आशंका बनी रहती है।

विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह रास्ता काफी जोखिम भरा हो गया है। यदि किसी वाहन चालक का ध्यान कुछ क्षण के लिए भी सड़क से हट जाए तो वह गड्ढे की चपेट में आ सकता है। रात के समय समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि पर्याप्त रोशनी नहीं होने पर दूर से गड्ढे की गहराई और स्थिति का सही अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है।

हजारों लोगों की रोजाना आवाजाही, फिर भी मरम्मत का इंतजार

सुजौली और आसपास के गांवों के लोगों के लिए यह मार्ग केवल एक सड़क नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की आवश्यकताओं से जुड़ा महत्वपूर्ण रास्ता है। ग्रामीण इसी मार्ग से बाजार, विद्यालय, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरी कामों के लिए आते-जाते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिदिन तीन से चार हजार लोगों की आवाजाही होने के बावजूद सड़क की ऐसी स्थिति बनी रहना चिंता का विषय है। सड़क पर बने गड्ढे के कारण लोगों को अपनी यात्रा के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। कई बार वाहन चालकों को रास्ता बदलकर निकलने का प्रयास करना पड़ता है, जिससे आवागमन भी प्रभावित होता है।

ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो किसी दिन गंभीर दुर्घटना हो सकती है। लोगों को आशंका है कि किसी बड़े हादसे के बाद ही संबंधित विभाग की नींद खुलेगी।

स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी बढ़ी परेशानी

इस मार्ग से प्रतिदिन स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों का भी आवागमन होता है। सड़क की खराब स्थिति के कारण इन सभी को विशेष परेशानी झेलनी पड़ रही है। बच्चों को विद्यालय जाने और वापस लौटने के दौरान इस रास्ते से गुजरना पड़ता है।

वहीं, बुजुर्गों और मरीजों को लेकर आने-जाने वाले वाहनों के लिए भी सड़क का यह हिस्सा परेशानी पैदा कर रहा है। आपातकालीन स्थिति में किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाने के दौरान खराब सड़क के कारण यात्रा में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मरम्मत में देरी करना आम जनता की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही साबित हो सकती है।

रात के अंधेरे में दुर्घटना की आशंका अधिक

दिन के समय वाहन चालक किसी तरह गड्ढे को देखकर बचने का प्रयास कर लेते हैं, लेकिन रात के समय स्थिति ज्यादा खतरनाक हो जाती है। अंधेरे में गड्ढा स्पष्ट दिखाई नहीं देने के कारण दोपहिया वाहन चालकों और साइकिल सवारों के लिए जोखिम बढ़ जाता है।

यदि सामने से कोई बड़ा वाहन आ रहा हो तो छोटे वाहन चालकों के सामने रास्ता चुनने की समस्या पैदा हो सकती है। ऐसे में अचानक वाहन मोड़ना भी दुर्घटना का कारण बन सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक सड़क की स्थायी मरम्मत नहीं होती, तब तक कम से कम गड्ढे के आसपास चेतावनी संकेत और अस्थायी सुरक्षा व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि राहगीरों को पहले से खतरे की जानकारी मिल सके।

संबंधित विभाग की जिम्मेदारी पर उठ रहे सवाल

सड़क की इस स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस मार्ग से रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं, उसकी नियमित देखरेख और समय-समय पर मरम्मत होना बेहद जरूरी है।

सड़क पर इतना बड़ा गड्ढा बन जाना इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि मार्ग की स्थिति का समय रहते निरीक्षण किया जाना चाहिए। यदि किसी सड़क पर लगातार वाहनों का आवागमन हो रहा है तो उसकी सुरक्षा को प्राथमिकता देना प्रशासन और संबंधित निर्माण विभाग की जिम्मेदारी है।

हालांकि, इस मामले में संबंधित विभाग की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया या मरम्मत कार्य की पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की मांग

स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों से इस समस्या का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सड़क पर बने बड़े गड्ढे को केवल मिट्टी या अस्थायी सामग्री डालकर छोड़ना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इसकी गुणवत्ता के साथ स्थायी मरम्मत कराई जानी चाहिए।

ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क का निरीक्षण करें और गड्ढे की वास्तविक स्थिति का आकलन करें। इसके बाद जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू कराया जाए। साथ ही, जब तक सड़क पूरी तरह ठीक नहीं हो जाती, तब तक वहां चेतावनी बोर्ड और आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए जाएं।

हादसे से पहले जागे प्रशासन, सुरक्षित आवागमन की उम्मीद

सुजौली से जुड़े गांवों के लोगों का कहना है कि सड़क पर बना यह गड्ढा किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही वाले मार्ग पर इस तरह की समस्या को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।

ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन किसी अप्रिय घटना का इंतजार किए बिना तत्काल कदम उठाए। सड़क की मरम्मत होने से न केवल वाहन चालकों को राहत मिलेगी, बल्कि स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों का आवागमन भी सुरक्षित हो सकेगा।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग ग्रामीणों की इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और सड़क की मरम्मत के लिए कब तक ठोस कदम उठाते हैं। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि उनकी आवाज जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचेगी और जल्द ही इस महत्वपूर्ण मार्ग को गड्ढामुक्त बनाकर आवागमन के लिए सुरक्षित किया जाएगा।

स्थानीय लोगों की मांग स्पष्ट है—बड़ा हादसा होने से पहले सड़क की मरम्मत कराई जाए, ताकि आम जनता सुरक्षित तरीके से अपने गंतव्य तक पहुंच सके।

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