बाराबंकी में विसर्जन से लौट रहे श्रद्धालुओं से कथित मारपीट का वीडियो वायरल, दरोगा पर कार्रवाई की मांग; दोपहर 1 बजे प्रदर्शन की चेतावनी

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अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के देवा क्षेत्र में मूर्ति विसर्जन के बाद लौट रहे श्रद्धालुओं के साथ पुलिसकर्मी द्वारा कथित दुर्व्यवहार किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद बढ़ गया है। बजरंग दल के पदाधिकारियों ने उपनिरीक्षक बीके शर्मा पर श्रद्धालुओं के साथ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए पुलिस प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय तक संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो कार्यकर्ता दोपहर एक बजे प्रदर्शन करेंगे।

इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। संगठन के पदाधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित अधिकारियों को घटना का वीडियो भेजकर पूरे प्रकरण की जानकारी दी है। उनकी मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

विसर्जन के बाद पानी से बाहर निकल रहे थे श्रद्धालु

प्राप्त जानकारी के अनुसार, देवा क्षेत्र में मूर्ति विसर्जन के बाद श्रद्धालु पानी से बाहर निकलकर अपने घरों की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान कथित तौर पर पुलिसकर्मी और श्रद्धालुओं के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। बजरंग दल के पदाधिकारियों का आरोप है कि उपनिरीक्षक बीके शर्मा ने एक श्रद्धालु के साथ मारपीट की।

सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो को लेकर संगठन का दावा है कि उसमें पानी से बाहर निकल रहे श्रद्धालुओं के बीच एक पुलिसकर्मी थप्पड़ और लात मारते हुए दिखाई दे रहा है। इस दृश्य को लेकर संगठन ने पुलिस के आचरण पर सवाल उठाए हैं।

हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि, घटना की पूरी पृष्ठभूमि और विवाद शुरू होने के वास्तविक कारणों की जानकारी सामने आना अभी आवश्यक है। वीडियो के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच से ही घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

अखिलेश राजपूत ने लगाए गंभीर आरोप

बजरंग दल के जिला विद्यार्थी संपर्क प्रमुख अखिलेश राजपूत के अनुसार, श्रद्धालु मूर्ति विसर्जन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद पानी से बाहर निकल रहे थे। इसी दौरान कथित रूप से उनके साथ मारपीट की गई।

अखिलेश राजपूत का आरोप है कि उन्होंने मौके पर हस्तक्षेप करते हुए उपनिरीक्षक को ऐसा करने से रोकने का प्रयास किया, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। संगठन की ओर से यह भी दावा किया गया है कि घटनास्थल पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने भी संबंधित उपनिरीक्षक को ऐसा व्यवहार नहीं करने के लिए कहा था।

इन आरोपों के सामने आने के बाद संगठन ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए पुलिस प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की है। उसका कहना है कि धार्मिक आयोजन में शामिल होकर लौट रहे लोगों के साथ किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार नहीं होना चाहिए।

दूसरी ओर, मामले में संबंधित पुलिसकर्मी का पक्ष, पुलिस प्रशासन की विस्तृत प्रतिक्रिया और घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों की पुष्टि होना बाकी है। इसलिए आरोपों और वास्तविक तथ्यों के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाई गई शिकायत

घटना का वीडियो सामने आने के बाद बजरंग दल के पदाधिकारियों ने मामले को पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाया। संगठन की ओर से पुलिस अधीक्षक समेत अन्य संबंधित अधिकारियों को वीडियो भेजकर शिकायत की गई और कार्रवाई की मांग रखी गई।

पदाधिकारियों का कहना है कि मामले में समय रहते उचित कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि घटना की निष्पक्ष जांच हो सके और लोगों का पुलिस प्रशासन पर विश्वास बना रहे। उनका यह भी कहना है कि किसी भी पुलिसकर्मी से कानून के अनुरूप आचरण की अपेक्षा की जाती है और शिकायत मिलने पर उसकी जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।

इस प्रकरण में पुलिस प्रशासन की ओर से जांच या कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक रूप से क्या निर्णय लिया गया है, इसकी पुष्टि आवश्यक है। फिलहाल संगठन की ओर से कार्रवाई की मांग लगातार उठाई जा रही है।

दोपहर 12 बजे तक कार्रवाई की मांग

बजरंग दल के पदाधिकारियों के मुताबिक, इस मुद्दे पर थाना प्रभारी अजय कुमार त्रिपाठी से भी बातचीत हुई है। संगठन का दावा है कि बातचीत के दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया कि उपनिरीक्षक बीके शर्मा को अगले दिन दोपहर 12 बजे तक लाइन हाजिर कर दिया जाएगा।

इसी कथित आश्वासन के आधार पर संगठन ने कार्रवाई के लिए समयसीमा तय की है। पदाधिकारियों का कहना है कि निर्धारित समय तक संबंधित पुलिसकर्मी के विरुद्ध कदम उठाया जाना चाहिए।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि लाइन हाजिर किया जाना अपने आप में किसी आरोप को साबित करने या अंतिम दोष निर्धारण के समान नहीं होता। यह प्रशासनिक व्यवस्था के तहत उठाया जाने वाला कदम हो सकता है। घटना की वास्तविकता और जिम्मेदारी तय करने के लिए तथ्यों की जांच तथा संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना आवश्यक है।

कार्रवाई नहीं हुई तो दोपहर एक बजे प्रदर्शन की चेतावनी

विश्व हिंदू परिषद के विभाग संगठन मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि दोपहर 12 बजे तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है, तो बजरंग दल के कार्यकर्ता दोपहर एक बजे प्रदर्शन करेंगे।

संगठन की इस घोषणा के बाद स्थानीय प्रशासन के सामने मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट करने और शिकायत पर उचित निर्णय लेने की चुनौती है। पदाधिकारियों ने कहा है कि उनकी मांग का उद्देश्य कथित दुर्व्यवहार के मामले में जवाबदेही सुनिश्चित कराना है।

प्रदर्शन की चेतावनी के बीच यह भी महत्वपूर्ण होगा कि मामले का समाधान बातचीत, निष्पक्ष जांच और कानून के अनुरूप कार्रवाई के माध्यम से निकाला जाए। किसी भी विरोध प्रदर्शन के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखना और आम लोगों को परेशानी से बचाना भी जरूरी है।

धार्मिक आयोजनों में पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

मूर्ति विसर्जन जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान पुलिस की जिम्मेदारी काफी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं, इसलिए यातायात नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और लोगों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल रहता है।

कई बार भीड़ को नियंत्रित करने या सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिस और नागरिकों के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसी परिस्थितियों में संयमित व्यवहार, स्पष्ट संवाद और नियमों के अनुसार कार्रवाई करना आवश्यक है।

यदि किसी पुलिसकर्मी के विरुद्ध दुर्व्यवहार या मारपीट की शिकायत मिलती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। वहीं, जांच के दौरान संबंधित पुलिसकर्मी का पक्ष भी सुना जाना चाहिए, ताकि सभी तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय लिया जा सके।

बाराबंकी के देवा क्षेत्र का यह मामला भी इसी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। वायरल वीडियो और संगठन की शिकायत के आधार पर पुलिस प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वह घटना की परिस्थितियों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाए।

निष्पक्ष जांच से स्पष्ट होगी घटना की सच्चाई

फिलहाल इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यह है कि विसर्जन के बाद श्रद्धालुओं के साथ वास्तव में क्या हुआ और विवाद किन परिस्थितियों में शुरू हुआ। वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले दृश्यों की पुष्टि, मौके पर मौजूद लोगों के बयान और संबंधित पुलिसकर्मियों का पक्ष जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

बजरंग दल ने उपनिरीक्षक बीके शर्मा को लाइन हाजिर करने की मांग करते हुए दोपहर 12 बजे तक कार्रवाई का समय दिया है। संगठन ने इसके बाद दोपहर एक बजे प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अंतिम निर्णय और कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

अब सबकी नजर पुलिस प्रशासन के अगले कदम पर है। मामले में निष्पक्ष जांच, तथ्यों पर आधारित निर्णय और कानून के अनुरूप कार्रवाई से ही विवाद का समाधान निकल सकता है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था दोनों बनी रहें तथा किसी भी शिकायत को गंभीरता से लेकर उसका उचित निस्तारण किया जाए।

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बाराबंकी में विसर्जन से लौट रहे श्रद्धालुओं से कथित मारपीट का वीडियो वायरल, दरोगा पर कार्रवाई की मांग; दोपहर 1 बजे प्रदर्शन की चेतावनी

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 21, 2026

अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के देवा क्षेत्र में मूर्ति विसर्जन के बाद लौट रहे श्रद्धालुओं के साथ पुलिसकर्मी द्वारा कथित दुर्व्यवहार किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद बढ़ गया है। बजरंग दल के पदाधिकारियों ने उपनिरीक्षक बीके शर्मा पर श्रद्धालुओं के साथ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए पुलिस प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय तक संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो कार्यकर्ता दोपहर एक बजे प्रदर्शन करेंगे।

इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। संगठन के पदाधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित अधिकारियों को घटना का वीडियो भेजकर पूरे प्रकरण की जानकारी दी है। उनकी मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

विसर्जन के बाद पानी से बाहर निकल रहे थे श्रद्धालु

प्राप्त जानकारी के अनुसार, देवा क्षेत्र में मूर्ति विसर्जन के बाद श्रद्धालु पानी से बाहर निकलकर अपने घरों की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान कथित तौर पर पुलिसकर्मी और श्रद्धालुओं के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। बजरंग दल के पदाधिकारियों का आरोप है कि उपनिरीक्षक बीके शर्मा ने एक श्रद्धालु के साथ मारपीट की।

सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो को लेकर संगठन का दावा है कि उसमें पानी से बाहर निकल रहे श्रद्धालुओं के बीच एक पुलिसकर्मी थप्पड़ और लात मारते हुए दिखाई दे रहा है। इस दृश्य को लेकर संगठन ने पुलिस के आचरण पर सवाल उठाए हैं।

हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि, घटना की पूरी पृष्ठभूमि और विवाद शुरू होने के वास्तविक कारणों की जानकारी सामने आना अभी आवश्यक है। वीडियो के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच से ही घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

अखिलेश राजपूत ने लगाए गंभीर आरोप

बजरंग दल के जिला विद्यार्थी संपर्क प्रमुख अखिलेश राजपूत के अनुसार, श्रद्धालु मूर्ति विसर्जन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद पानी से बाहर निकल रहे थे। इसी दौरान कथित रूप से उनके साथ मारपीट की गई।

अखिलेश राजपूत का आरोप है कि उन्होंने मौके पर हस्तक्षेप करते हुए उपनिरीक्षक को ऐसा करने से रोकने का प्रयास किया, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। संगठन की ओर से यह भी दावा किया गया है कि घटनास्थल पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने भी संबंधित उपनिरीक्षक को ऐसा व्यवहार नहीं करने के लिए कहा था।

इन आरोपों के सामने आने के बाद संगठन ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए पुलिस प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की है। उसका कहना है कि धार्मिक आयोजन में शामिल होकर लौट रहे लोगों के साथ किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार नहीं होना चाहिए।

दूसरी ओर, मामले में संबंधित पुलिसकर्मी का पक्ष, पुलिस प्रशासन की विस्तृत प्रतिक्रिया और घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों की पुष्टि होना बाकी है। इसलिए आरोपों और वास्तविक तथ्यों के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाई गई शिकायत

घटना का वीडियो सामने आने के बाद बजरंग दल के पदाधिकारियों ने मामले को पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाया। संगठन की ओर से पुलिस अधीक्षक समेत अन्य संबंधित अधिकारियों को वीडियो भेजकर शिकायत की गई और कार्रवाई की मांग रखी गई।

पदाधिकारियों का कहना है कि मामले में समय रहते उचित कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि घटना की निष्पक्ष जांच हो सके और लोगों का पुलिस प्रशासन पर विश्वास बना रहे। उनका यह भी कहना है कि किसी भी पुलिसकर्मी से कानून के अनुरूप आचरण की अपेक्षा की जाती है और शिकायत मिलने पर उसकी जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।

इस प्रकरण में पुलिस प्रशासन की ओर से जांच या कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक रूप से क्या निर्णय लिया गया है, इसकी पुष्टि आवश्यक है। फिलहाल संगठन की ओर से कार्रवाई की मांग लगातार उठाई जा रही है।

दोपहर 12 बजे तक कार्रवाई की मांग

बजरंग दल के पदाधिकारियों के मुताबिक, इस मुद्दे पर थाना प्रभारी अजय कुमार त्रिपाठी से भी बातचीत हुई है। संगठन का दावा है कि बातचीत के दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया कि उपनिरीक्षक बीके शर्मा को अगले दिन दोपहर 12 बजे तक लाइन हाजिर कर दिया जाएगा।

इसी कथित आश्वासन के आधार पर संगठन ने कार्रवाई के लिए समयसीमा तय की है। पदाधिकारियों का कहना है कि निर्धारित समय तक संबंधित पुलिसकर्मी के विरुद्ध कदम उठाया जाना चाहिए।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि लाइन हाजिर किया जाना अपने आप में किसी आरोप को साबित करने या अंतिम दोष निर्धारण के समान नहीं होता। यह प्रशासनिक व्यवस्था के तहत उठाया जाने वाला कदम हो सकता है। घटना की वास्तविकता और जिम्मेदारी तय करने के लिए तथ्यों की जांच तथा संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना आवश्यक है।

कार्रवाई नहीं हुई तो दोपहर एक बजे प्रदर्शन की चेतावनी

विश्व हिंदू परिषद के विभाग संगठन मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि दोपहर 12 बजे तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है, तो बजरंग दल के कार्यकर्ता दोपहर एक बजे प्रदर्शन करेंगे।

संगठन की इस घोषणा के बाद स्थानीय प्रशासन के सामने मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट करने और शिकायत पर उचित निर्णय लेने की चुनौती है। पदाधिकारियों ने कहा है कि उनकी मांग का उद्देश्य कथित दुर्व्यवहार के मामले में जवाबदेही सुनिश्चित कराना है।

प्रदर्शन की चेतावनी के बीच यह भी महत्वपूर्ण होगा कि मामले का समाधान बातचीत, निष्पक्ष जांच और कानून के अनुरूप कार्रवाई के माध्यम से निकाला जाए। किसी भी विरोध प्रदर्शन के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखना और आम लोगों को परेशानी से बचाना भी जरूरी है।

धार्मिक आयोजनों में पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

मूर्ति विसर्जन जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान पुलिस की जिम्मेदारी काफी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं, इसलिए यातायात नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और लोगों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल रहता है।

कई बार भीड़ को नियंत्रित करने या सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिस और नागरिकों के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसी परिस्थितियों में संयमित व्यवहार, स्पष्ट संवाद और नियमों के अनुसार कार्रवाई करना आवश्यक है।

यदि किसी पुलिसकर्मी के विरुद्ध दुर्व्यवहार या मारपीट की शिकायत मिलती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। वहीं, जांच के दौरान संबंधित पुलिसकर्मी का पक्ष भी सुना जाना चाहिए, ताकि सभी तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय लिया जा सके।

बाराबंकी के देवा क्षेत्र का यह मामला भी इसी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। वायरल वीडियो और संगठन की शिकायत के आधार पर पुलिस प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वह घटना की परिस्थितियों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाए।

निष्पक्ष जांच से स्पष्ट होगी घटना की सच्चाई

फिलहाल इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यह है कि विसर्जन के बाद श्रद्धालुओं के साथ वास्तव में क्या हुआ और विवाद किन परिस्थितियों में शुरू हुआ। वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले दृश्यों की पुष्टि, मौके पर मौजूद लोगों के बयान और संबंधित पुलिसकर्मियों का पक्ष जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

बजरंग दल ने उपनिरीक्षक बीके शर्मा को लाइन हाजिर करने की मांग करते हुए दोपहर 12 बजे तक कार्रवाई का समय दिया है। संगठन ने इसके बाद दोपहर एक बजे प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अंतिम निर्णय और कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

अब सबकी नजर पुलिस प्रशासन के अगले कदम पर है। मामले में निष्पक्ष जांच, तथ्यों पर आधारित निर्णय और कानून के अनुरूप कार्रवाई से ही विवाद का समाधान निकल सकता है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था दोनों बनी रहें तथा किसी भी शिकायत को गंभीरता से लेकर उसका उचित निस्तारण किया जाए।