जालौन जिला अस्पताल में CMS पर महिला ICTC काउंसलर ने लगाए गंभीर आरोप, मरीज की रिपोर्ट और OPD रजिस्टर छीनने का दावा
देव पटेल
हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता कालपी जालौन
जालौन, उत्तर प्रदेश | 24 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश के जालौन जनपद स्थित उरई जिला अस्पताल में एक महिला ICTC काउंसलर और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) के बीच विवाद का मामला सामने आया है। महिला काउंसलर ने अस्पताल के CMS जे.जे. राम पर मानसिक प्रताड़ना, धमकी देने, कार्यस्थल खाली कराने का दबाव बनाने और अपने कार्य में हस्तक्षेप करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि अस्पताल में HIV पॉजिटिव मरीज से संबंधित रिपोर्ट और OPD रजिस्टर भी उनसे छीन लिया गया।

इस घटना के बाद जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली, कर्मचारियों के साथ व्यवहार और मरीजों से संबंधित संवेदनशील दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पीड़ित महिला काउंसलर ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अस्पताल परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालने और CMS के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने की मांग उठाई है।
हालांकि, महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में CMS का पक्ष और प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जिला अस्पताल में कार्यस्थल को लेकर विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला उरई स्थित जिला अस्पताल का है, जहां महिला ICTC काउंसलर मरीजों को परामर्श देने और निर्धारित स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित कार्य करती हैं।
महिला काउंसलर का आरोप है कि अस्पताल के CMS जे.जे. राम के साथ उनका विवाद हुआ, जिसके बाद उनके कार्य करने के तरीके और अस्पताल में उपलब्ध स्थान को लेकर समस्याएं उत्पन्न होने लगीं।
महिला का कहना है कि वह अपने निर्धारित कार्यस्थल पर नियमित रूप से काउंसलिंग का काम कर रही थीं, लेकिन CMS की ओर से उन्हें वहां से हटाने और कमरा खाली कराने का दबाव बनाया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जिससे उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। महिला के मुताबिक, कार्यस्थल पर लगातार दबाव बनाए जाने के कारण उनके लिए सामान्य रूप से काम करना मुश्किल हो गया।
महिला काउंसलर ने इस पूरे घटनाक्रम को अनुचित बताते हुए जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
HIV पॉजिटिव मरीज की रिपोर्ट और OPD रजिस्टर छीनने का आरोप
इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू HIV पॉजिटिव मरीज से संबंधित दस्तावेजों को लेकर सामने आया है।
महिला ICTC काउंसलर ने आरोप लगाया है कि CMS जे.जे. राम ने उनसे HIV पॉजिटिव मरीज की रिपोर्ट और OPD रजिस्टर छीन लिया।
महिला के अनुसार, मरीज से संबंधित रिपोर्ट और रजिस्टर उनके कार्य से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज थे। इन दस्तावेजों को लेकर हुई कथित घटना ने उन्हें परेशान किया और उन्होंने इसे अपने काम में हस्तक्षेप बताया।
HIV से संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं में मरीजों की गोपनीयता और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में मरीज की पहचान, रिपोर्ट और स्वास्थ्य संबंधी विवरणों को सुरक्षित रखना आवश्यक है।
हालांकि, महिला के आरोपों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दस्तावेजों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया या उन्हें किस परिस्थिति में लिया गया। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कथित रूप से छीने गए दस्तावेजों की स्थिति क्या है और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए अस्पताल में निर्धारित व्यवस्था का पालन किया गया या नहीं।
मानसिक प्रताड़ना और धमकी देने का आरोप
महिला काउंसलर ने CMS पर मानसिक प्रताड़ना देने और धमकी देने का भी आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि अस्पताल में काम करते समय उन्हें ऐसे व्यवहार का सामना करना पड़ा, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान हुईं। महिला के मुताबिक, CMS द्वारा उनके ऊपर दबाव बनाया गया और उन्हें कार्यस्थल छोड़ने के लिए कहा गया।
महिला ने आरोप लगाया कि उनके साथ किए गए व्यवहार से उनकी कार्यक्षमता और मानसिक स्थिति प्रभावित हुई।
अस्पताल जैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान में कर्मचारियों के बीच संवाद, सहयोग और सम्मानजनक व्यवहार आवश्यक माना जाता है। विशेष रूप से ऐसे विभागों में, जहां मरीजों को संवेदनशील स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दिया जाता है, कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित कार्य वातावरण महत्वपूर्ण होता है।
यदि महिला द्वारा लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों को मामले की गंभीरता के अनुसार उचित कदम उठाने की आवश्यकता होगी।
फिलहाल, आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच आवश्यक है।
पुलिस बुलाकर काउंसलिंग कार्य को फर्जी बताने का आरोप
महिला ICTC काउंसलर ने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान पुलिस को बुलाया गया और उनके काउंसलिंग कार्य को फर्जी बताया गया।
महिला के अनुसार, उनके कार्य को लेकर सवाल उठाए गए और इस तरह की स्थिति पैदा की गई, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस बुलाने के बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। महिला का कहना है कि उनके काम को लेकर लगाए गए आरोपों के कारण उन्हें मानसिक दबाव झेलना पड़ा।
इस घटनाक्रम को लेकर यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि पुलिस को किस परिस्थिति में बुलाया गया था, वहां मौजूद अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की और महिला के कार्य संबंधी आरोपों की जांच किस आधार पर की गई।
यदि किसी कर्मचारी के कार्य पर सवाल उठते हैं, तो उसकी जांच निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत की जानी चाहिए। वहीं, किसी भी कर्मचारी के साथ अनुचित व्यवहार या दबाव की शिकायत सामने आने पर उसका निष्पक्ष परीक्षण भी जरूरी है।
दूसरी जगह बैठने की व्यवस्था नहीं करने का आरोप
महिला काउंसलर ने CMS पर एक अन्य गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें कार्यस्थल से हटाने का दबाव तो बनाया गया, लेकिन दूसरी जगह बैठने की व्यवस्था नहीं की गई।
महिला का कहना है कि अस्पताल में काउंसलिंग का कार्य जारी रखने के लिए उन्हें उचित स्थान उपलब्ध नहीं कराया गया।
ICTC काउंसलिंग सेवाओं में मरीजों को व्यक्तिगत और संवेदनशील स्वास्थ्य संबंधी जानकारी साझा करनी पड़ सकती है। ऐसे में काउंसलिंग के लिए उपयुक्त स्थान, गोपनीयता और व्यवस्थित वातावरण की आवश्यकता होती है।
यदि किसी कर्मचारी को प्रशासनिक कारणों से स्थानांतरित किया जाता है, तो उसके कार्य की प्रकृति के अनुरूप वैकल्पिक व्यवस्था करना महत्वपूर्ण होता है।
महिला ने इसी मुद्दे को अपनी शिकायत का हिस्सा बनाते हुए प्रशासन से अस्पताल में बैठने की उचित व्यवस्था कराने की मांग की है।
जिलाधिकारी से शिकायत करने की कही बात
महिला ICTC काउंसलर ने इस मामले में जिलाधिकारी से शिकायत करने की बात कही है।
उन्होंने CMS जे.जे. राम के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जांच कराने और अपने साथ हुए कथित व्यवहार पर कार्रवाई की मांग उठाई है।
महिला का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अस्पताल में उनके साथ किस प्रकार का व्यवहार किया गया और मरीज से संबंधित दस्तावेजों को लेकर क्या घटना हुई।
जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत किए जाने की बात सामने आने के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच और संबंधित अधिकारियों के बयान महत्वपूर्ण होंगे।
हालांकि, शिकायत औपचारिक रूप से दर्ज हुई है या नहीं, इस संबंध में अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
CCTV फुटेज की जांच कराने की मांग
महिला काउंसलर ने घटना से संबंधित CCTV फुटेज की जांच कराने की मांग की है।
उनका मानना है कि अस्पताल परिसर में लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग से घटना के दौरान हुई गतिविधियों की जानकारी मिल सकती है।
महिला ने मांग की है कि संबंधित स्थानों की CCTV फुटेज सुरक्षित रखी जाए और जांच के दौरान उसका परीक्षण किया जाए।
यदि घटना के समय कैमरे सक्रिय थे और रिकॉर्डिंग उपलब्ध है, तो उससे विवाद की परिस्थितियों को समझने में सहायता मिल सकती है।
हालांकि, CCTV फुटेज में क्या दर्ज है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। जांच के दौरान उपलब्ध रिकॉर्डिंग, कर्मचारियों के बयान और अन्य संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया जाना आवश्यक होगा।
मरीजों की गोपनीयता और स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल
इस मामले में HIV पॉजिटिव मरीज की रिपोर्ट और OPD रजिस्टर का उल्लेख होने के कारण मरीजों की गोपनीयता का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है।
ICTC सेवाओं के अंतर्गत मरीजों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और परामर्श उपलब्ध कराया जाता है। इस प्रक्रिया में व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार का विशेष महत्व होता है।
अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी है कि मरीजों से संबंधित दस्तावेजों का सुरक्षित रखरखाव हो और अधिकृत कर्मचारियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार काम करने की सुविधा मिले।
यदि दस्तावेजों को लेकर किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न होता है, तो उसकी जांच अस्पताल के निर्धारित नियमों और मरीजों की गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए की जानी चाहिए।
इस मामले में भी यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि रिपोर्ट और OPD रजिस्टर को लेकर वास्तव में क्या हुआ तथा संबंधित दस्तावेजों की सुरक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की गई।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
महिला ICTC काउंसलर ने पूरे मामले की जांच कराए जाने की मांग की है।
उनकी प्रमुख मांगों में CMS पर लगाए गए आरोपों की जांच, CCTV फुटेज का परीक्षण, मरीज से संबंधित दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट करना और अस्पताल में उचित कार्यस्थल उपलब्ध कराना शामिल है।
महिला का कहना है कि उनके साथ हुए कथित व्यवहार पर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए और मामले में उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
इस विवाद के सामने आने के बाद जिला अस्पताल प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। अस्पताल में कर्मचारियों के बीच विवादों का समाधान निर्धारित नियमों के तहत किया जाना चाहिए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
साथ ही, मरीजों की गोपनीयता और कर्मचारियों के सम्मानजनक कार्य वातावरण को सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
प्रशासनिक जांच से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
उरई जिला अस्पताल में महिला ICTC काउंसलर और CMS के बीच सामने आए विवाद को लेकर अब निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।
महिला द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई से पहले शिकायत, उपलब्ध साक्ष्य, CCTV फुटेज और संबंधित पक्षों के बयान का परीक्षण किया जाना जरूरी है।
जांच के माध्यम से यह स्पष्ट किया जा सकता है कि महिला काउंसलर के साथ कथित मानसिक प्रताड़ना और धमकी की घटना हुई या नहीं, मरीज की रिपोर्ट तथा OPD रजिस्टर को लेकर क्या परिस्थितियां थीं और कार्यस्थल की व्यवस्था में किस प्रकार की समस्या उत्पन्न हुई।
फिलहाल, महिला काउंसलर ने जिलाधिकारी से शिकायत करने, CCTV फुटेज की जांच कराने और CMS के विरुद्ध कार्रवाई की मांग उठाई है।
जालौन के उरई जिला अस्पताल से जुड़े इस मामले में प्रशासनिक जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक बयान सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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