विकास कार्यों में देरी पर डीएम समीर सख्त, 15 दिसंबर तक पूरी होंगी प्राथमिकता वाली परियोजनाएं
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले निर्माण कार्यों की समीक्षा में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को दिए समयबद्धता के निर्देश, 90 प्रतिशत से अधिक पूर्ण परियोजनाओं को जल्द विभागों के सुपुर्द करने पर जोर, धीमी गति से चल रहे कार्यों के लिए तैयार होगी विशेष कार्ययोजना

उरई (जालौन)। जनपद में सरकारी निर्माण कार्यों की धीमी रफ्तार और विकास परियोजनाओं में हो रही देरी को लेकर जिलाधिकारी समीर ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्ट्रेट सभागार में एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा कराया जाए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के निर्माण में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा और प्रत्येक कार्य की प्रगति पर लगातार नजर रखी जाएगी।
जिलाधिकारी ने विशेष रूप से उन परियोजनाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए, जिनका निर्माण 90 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है। ऐसी सभी परियोजनाओं को 15 दिसंबर 2026 तक हर हाल में पूर्ण कराकर संबंधित विभागों को हस्तांतरित करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निर्माण पूरा होने के बाद भवनों और सरकारी परिसंपत्तियों का उपयोग शुरू होना चाहिए, जिससे जनता को सुविधाओं का लाभ मिल सके और सरकारी धन से तैयार कराए गए कार्यों का उद्देश्य पूरा हो।
धीमी प्रगति वाली परियोजनाओं पर डीएम की नाराजगी
समीक्षा बैठक में विभिन्न निर्माण परियोजनाओं की प्रगति का विभागवार आकलन किया गया। इस दौरान कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं में अपेक्षित गति नहीं मिलने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि निर्माण कार्यों में लापरवाही और समयसीमा की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में डायट जालौन के निर्माण कार्य की प्रगति महज 14 प्रतिशत सामने आई। वहीं राजकीय हाईस्कूल खारका के उच्चीकरण कार्य की स्थिति शून्य पाई गई। मुख्यमंत्री अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालय की निर्माण प्रगति भी केवल 5.5 प्रतिशत दर्ज की गई। इन आंकड़ों को देखते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से कार्यों में तेजी लाने और निर्धारित समय के अनुसार निर्माण पूरा कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं की प्रगति अपेक्षा से काफी कम है, उनके लिए अलग से कार्ययोजना तैयार की जाए। निर्माण में आने वाली समस्याओं की पहचान कर उनका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि योजनाओं का क्रियान्वयन केवल कागजों पर आगे बढ़ता हुआ दिखाई न दे, बल्कि धरातल पर भी काम की गति स्पष्ट नजर आए।
15 दिसंबर तक पूर्ण होंगी प्राथमिकता वाली परियोजनाएं
जिलाधिकारी ने बैठक में स्पष्ट किया कि निर्माणाधीन परियोजनाओं को पूरा कराने के लिए समयसीमा निर्धारित करना जरूरी है। विशेषकर जिन योजनाओं का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, उन्हें लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि 90 प्रतिशत से अधिक पूर्ण परियोजनाओं को चिह्नित करके उनकी शेष कार्यवाही तत्काल पूरी कराई जाए। निर्माण से संबंधित छोटे-मोटे कार्य, आवश्यक औपचारिकताएं और हस्तांतरण की प्रक्रिया समय से पूरी कराई जाए, ताकि भवनों का इस्तेमाल शुरू हो सके।
डीएम ने कहा कि कई बार भवनों का निर्माण पूरा होने के बाद भी विभागीय हस्तांतरण में देरी होती है, जिससे तैयार परिसंपत्तियों का उपयोग नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति से बचने के लिए निर्माण एजेंसियों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजनाओं की पूर्णता के साथ-साथ उनके लोकार्पण और शिलान्यास से संबंधित प्रक्रियाओं को भी निर्धारित समय पर पूरा कराया जाए। विकास योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचाने के लिए निर्माण, हस्तांतरण और उपयोग की सभी प्रक्रियाएं व्यवस्थित ढंग से संचालित होनी चाहिए।
जल निगम की समस्याओं का तत्काल समाधान करने के निर्देश
बैठक में जल निगम नगरीय और जल निगम ग्रामीण की विभिन्न परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी परियोजना में तकनीकी समस्या, विभागीय समन्वय की कमी अथवा अन्य कारणों से काम प्रभावित हो रहा है, तो उसकी जानकारी तत्काल उच्च अधिकारियों को दी जाए। समस्याओं को लंबे समय तक लंबित रखने के बजाय संबंधित विभागों के साथ बैठक करके उनका समाधान निकाला जाए।
डीएम ने अधिकारियों से कहा कि विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए सभी विभागों को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी। एक विभाग की लापरवाही या देरी के कारण दूसरे विभाग का काम प्रभावित नहीं होना चाहिए।
उन्होंने निर्माण एजेंसियों को भी निर्देश दिए कि परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति से प्रशासन को अवगत कराएं और कार्यों में तेजी लाने के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री कम्पोजिट विद्यालय मरोड़ा की गुणवत्ता जांच होगी
जिलाधिकारी ने मरोड़ा स्थित मुख्यमंत्री कम्पोजिट विद्यालय के निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी भवनों का निर्माण केवल समय पर पूरा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।
विद्यालयों जैसे महत्वपूर्ण भवनों में निर्माण सामग्री, कार्य की मजबूती और अन्य तकनीकी मानकों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। किसी भी प्रकार की कमी सामने आने पर उसे दूर कराने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी की होगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माण कार्यों का निरीक्षण करते समय गुणवत्ता से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करें। भवन तैयार होने के बाद उसकी उपयोगिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
राज्य कर भवन और सद्भाव मंडप का हस्तांतरण जल्द
समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने राज्य कर भवन, सद्भाव मंडप और मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय की परियोजनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इन भवनों का निर्माण कार्य पूरा कराकर जल्द से जल्द संबंधित विभागों को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए।
डीएम ने कहा कि सरकारी भवनों का निर्माण जनता की सुविधाओं और प्रशासनिक कार्यों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कराया जाता है। इसलिए निर्माण पूरा होने के बाद उन्हें लंबे समय तक खाली या हस्तांतरण की प्रतीक्षा में नहीं रखा जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिन परियोजनाओं में निर्माण संबंधी कार्य पूरे हो चुके हैं, वहां शेष औपचारिकताओं को प्राथमिकता से निपटाया जाए। भवनों को संबंधित विभागों के सुपुर्द करके उनके संचालन की प्रक्रिया शुरू कराई जाए।
निर्माण स्थलों का निरीक्षण करें अधिकारी
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को केवल कार्यालय में बैठकर प्रगति रिपोर्ट देखने तक सीमित नहीं रहने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए निर्माण स्थलों का नियमित निरीक्षण किया जाना चाहिए।
निरीक्षण के दौरान यह देखा जाए कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हो रहा है या नहीं। कार्य की गति, गुणवत्ता, उपलब्ध संसाधनों और श्रमिकों की स्थिति का भी आकलन किया जाए।
उन्होंने कहा कि कागजी रिपोर्ट और मौके की वास्तविक स्थिति में अंतर मिलने पर संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही तय की जाएगी। इसलिए सभी विभाग समय-समय पर स्थलीय निरीक्षण करें और निरीक्षण के आधार पर आवश्यक सुधार कराएं।
डीएम ने भूमि उपलब्धता, बजट संबंधी समस्याओं और तकनीकी स्वीकृति में आने वाली बाधाओं को भी प्राथमिकता से दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग आपसी तालमेल से समस्याओं का समाधान करें, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित न हो।
नियमित समीक्षा से तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनपद में चल रही विकास परियोजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी। जिन कार्यों में तेजी दिखाई देगी, उन्हें निर्धारित समय पर पूरा कराने के लिए आवश्यक सहयोग दिया जाएगा। वहीं धीमी प्रगति वाली परियोजनाओं में जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में समयबद्धता, गुणवत्ता और पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण हैं। सरकारी योजनाओं के लिए उपलब्ध धनराशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप होना चाहिए। निर्माण कार्यों में देरी होने से न केवल लागत और समय प्रभावित होते हैं, बल्कि जनता को मिलने वाली सुविधाएं भी बाधित होती हैं।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजनाओं की प्रगति पर लगातार नजर रखें और किसी भी समस्या की जानकारी समय रहते प्रशासन को दें। उन्होंने दोहराया कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी एचएन प्रसाद, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग अमित सक्सेना सहित विभिन्न विभागों के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रशासन का लक्ष्य है कि निर्माणाधीन विकास परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा कराकर सरकारी भवनों और सुविधाओं का उपयोग शुरू कराया जाए, जिससे जनपद के विकास कार्यों को गति मिले और आमजन को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।
