उरई तहसील में लाखों का वाटर कूलर बना शोपीस, ठंडे पानी के लिए परेशान हो रहे फरियादी
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
नगर पालिका परिषद उरई ने तहसील परिसर में आमजन की सुविधा के लिए लगवाया था फ्रीजर, जिम्मेदारों की उदासीनता से नहीं मिल रहा पेयजल सुविधा का लाभ, दूर-दराज से आने वाले लोगों को उठानी पड़ रही परेशानी

उरई (जालौन)। जिला मुख्यालय उरई के नवनिर्मित तहसील परिसर में लोगों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया वाटर कूलर इन दिनों अपनी उपयोगिता खोता नजर आ रहा है। नगर पालिका परिषद उरई की ओर से सरकारी कार्यालय में आने वाले फरियादियों और आम नागरिकों को ठंडा पानी उपलब्ध कराने के लिए लगवाया गया फ्रीजर अब केवल परिसर की शोभा बढ़ाने तक सीमित रह गया है। लाखों रुपये खर्च कर तैयार की गई पेयजल सुविधा का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। भीषण गर्मी हो या सामान्य मौसम, तहसील पहुंचने वाले लोगों को पानी की जरूरत पूरी करने के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
तहसील परिसर ऐसा स्थान है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपने जरूरी कामकाज के लिए पहुंचते हैं। कोई जमीन से जुड़े विवाद का समाधान कराने आता है, तो कोई आय, जाति, निवास और अन्य प्रमाणपत्रों के लिए अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाता है। ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों को कई बार अपने काम के सिलसिले में घंटों परिसर में इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा का उपलब्ध होना बेहद जरूरी माना जाता है। लेकिन यहां स्थापित फ्रीजर के काम नहीं करने से लोगों की उम्मीदों पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है।
सरकारी सुविधा होने के बावजूद लोगों को नहीं मिल रही राहत
नगर पालिका परिषद उरई द्वारा तहसील परिसर में फ्रीजर लगवाने का उद्देश्य स्पष्ट रूप से आम नागरिकों को सुविधा प्रदान करना था। सरकारी कार्यालयों में आने वाले लोगों को स्वच्छ और ठंडा पानी उपलब्ध कराने के लिए ऐसी व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है। खासकर उन लोगों के लिए, जो दूरस्थ गांवों से जिला मुख्यालय पहुंचते हैं और अपने काम के लिए काफी समय तक कार्यालयों में रुकते हैं।
लेकिन वर्तमान स्थिति में यह सुविधा लोगों के किसी काम नहीं आ रही है। परिसर में वाटर कूलर मौजूद होने के बावजूद उससे पानी मिलने की व्यवस्था प्रभावी नहीं दिखाई दे रही है। इससे लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिए दूसरे विकल्प तलाशने पड़ते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सार्वजनिक उपयोग के लिए कोई उपकरण स्थापित किया जाता है, तो उसकी नियमित देखभाल और संचालन की जिम्मेदारी भी संबंधित विभाग को निभानी चाहिए। केवल मशीन लगवा देना पर्याप्त नहीं है। उसका चालू रहना और लोगों को सुविधा मिलना ही सरकारी व्यवस्था की वास्तविक सफलता है।
दूर-दराज से आने वाले फरियादियों को उठानी पड़ रही परेशानी
उरई तहसील में आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग राजस्व संबंधी कामकाज के लिए पहुंचते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को तहसील तक पहुंचने में समय और मेहनत दोनों लगते हैं। कई लोग सुबह घर से निकलकर कार्यालय पहुंचते हैं और फिर संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों से मिलने के लिए इंतजार करते हैं।
ऐसी परिस्थितियों में पेयजल की सुविधा उनके लिए बेहद जरूरी हो जाती है। यदि परिसर में लगा वाटर कूलर ही काम नहीं कर रहा है, तो लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। इससे न केवल उनकी परेशानी बढ़ती है, बल्कि सरकारी कार्यालय में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठते हैं।
विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ आने वाले लोगों के लिए पानी की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। कार्यालय परिसर में पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें अतिरिक्त असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
लाखों रुपये खर्च, लेकिन रखरखाव पर सवाल
सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण और स्थापना पर सरकारी धन खर्च किया जाता है। इसका उद्देश्य नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना होता है। लेकिन यदि किसी सुविधा को स्थापित करने के बाद उसके रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जाता, तो वह धीरे-धीरे अनुपयोगी बन जाती है।
तहसील परिसर में लगे फ्रीजर की स्थिति भी इसी तरह की समस्या की ओर संकेत करती है। मशीन मौजूद है, लेकिन उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इस व्यवस्था को चालू रखने के लिए जिम्मेदार विभाग की ओर से क्या प्रयास किए जा रहे हैं।
यदि वाटर कूलर में तकनीकी खराबी है, तो उसकी मरम्मत कराना आवश्यक है। वहीं, यदि बिजली, पानी की आपूर्ति या अन्य किसी कारण से मशीन बंद है, तो समस्या का समाधान संबंधित जिम्मेदारों को प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए।
सरकारी संसाधनों का सही उपयोग तभी संभव है, जब स्थापना के साथ-साथ उनकी नियमित निगरानी भी की जाए। अन्यथा जनहित में तैयार की गई सुविधाएं धीरे-धीरे निष्प्रभावी होती चली जाती हैं।
तहसील में रोजाना पहुंचते हैं विभिन्न कार्यों के लिए लोग
तहसील परिसर में केवल राजस्व संबंधी मामलों के लिए ही लोग नहीं आते, बल्कि विभिन्न प्रमाणपत्रों, जमीन की पैमाइश, नामांतरण, शिकायतों और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए भी नागरिकों की आवाजाही बनी रहती है।
कई बार लोगों को संबंधित अधिकारी से मिलने के लिए एक से अधिक बार कार्यालय पहुंचना पड़ता है। ऐसे में परिसर में बैठने, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं का व्यवस्थित होना प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
लोगों का मानना है कि सरकारी कार्यालयों में आने वाले नागरिकों को कम से कम बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान नहीं होना चाहिए। जब तहसील परिसर में ही वाटर कूलर लगाया गया है, तो उसका नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
जिम्मेदार विभाग को करना चाहिए समस्या का समाधान
तहसील परिसर में बंद पड़े फ्रीजर को लेकर संबंधित विभाग को स्थिति का निरीक्षण करना चाहिए। सबसे पहले यह पता लगाया जाना जरूरी है कि मशीन किस वजह से काम नहीं कर रही है। इसके बाद आवश्यक मरम्मत, बिजली और पानी की व्यवस्था सुनिश्चित कर उसे दोबारा चालू कराया जा सकता है।
यदि मशीन लंबे समय से बंद है, तो उसकी तकनीकी स्थिति का परीक्षण भी कराया जाना चाहिए। जरूरत पड़ने पर संबंधित विभाग को उपकरण की मरम्मत या आवश्यक बदलाव कराने चाहिए, ताकि लोगों को दोबारा पेयजल सुविधा मिल सके।
इसके साथ ही परिसर में पानी की उपलब्धता की नियमित जांच और रखरखाव की व्यवस्था भी बनाई जानी चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए वाटर कूलर की निगरानी के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका निर्धारित करना भी उपयोगी हो सकता है।
जनहित की सुविधा को चालू कराने की मांग
तहसील आने वाले लोगों की परेशानी को देखते हुए फ्रीजर को जल्द चालू कराने की जरूरत महसूस की जा रही है। लोगों का कहना है कि सरकारी कार्यालय में आने वाले नागरिकों को पानी जैसी आवश्यक सुविधा के लिए परेशान नहीं होना चाहिए।
नगर पालिका परिषद उरई द्वारा स्थापित इस व्यवस्था का उद्देश्य जनसुविधा था। इसलिए इसकी उपयोगिता बनाए रखना भी संबंधित जिम्मेदारों का दायित्व है। यदि मशीन खराब है, तो उसे ठीक कराया जाए और यदि संचालन में कोई दूसरी बाधा है, तो उसका समाधान किया जाए।
सार्वजनिक सुविधाओं की नियमित देखभाल से ही सरकारी योजनाओं और संसाधनों का वास्तविक लाभ आम नागरिकों तक पहुंच सकता है। तहसील परिसर में वाटर कूलर का चालू होना भी इसी दिशा में एक आवश्यक कदम होगा।
अब जिम्मेदारों की कार्रवाई का इंतजार
नवनिर्मित तहसील परिसर में स्थापित फ्रीजर का बंद रहना आमजन के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। सरकारी धन से तैयार की गई सुविधा का उपयोग नहीं होना व्यवस्था की निगरानी और रखरखाव पर सवाल खड़े करता है।
अब देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और पेयजल सुविधा को बहाल करने के लिए कब तक कदम उठाते हैं। यदि समय रहते फ्रीजर को चालू करा दिया जाता है, तो तहसील आने वाले फरियादियों और नागरिकों को राहत मिल सकती है।
आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासनिक व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में तहसील परिसर में बंद पड़े वाटर कूलर को चालू कराना और उसकी नियमित देखभाल सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि लोगों को सरकारी कार्यालय में अपने काम के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं के लिए भी भटकना न पड़े।
