जालौन में डीएम का स्कूल पर औचक छापा, लंबे समय से गैरहाजिर तीन शिक्षक निलंबित होंगे
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
प्रधानाध्यापक समेत तीन शिक्षकों पर कार्रवाई के निर्देश, खंड शिक्षा अधिकारी को भी चेतावनी; विद्यालय को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की पहल

जालौन, 04 नवंबर 2026। जनपद में सरकारी विद्यालयों की शैक्षिक व्यवस्था को बेहतर बनाने और शिक्षकों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में जिलाधिकारी समीर ने मान्यवर कांशीराम कॉलोनी स्थित उच्चीकृत प्राथमिक विद्यालय का अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान विद्यालय में शिक्षकों की उपस्थिति, बच्चों की पढ़ाई, शैक्षिक गतिविधियों और उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया गया। निरीक्षण में लंबे समय से अवकाश पर चल रहे प्रधानाध्यापक सहित तीन शिक्षकों का मामला सामने आने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और संबंधित शिक्षकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
डीएम की इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में जिम्मेदारी और नियमित उपस्थिति को लेकर स्पष्ट संदेश गया है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई की व्यवस्था किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। शिक्षकों की अनुपस्थिति का सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है, इसलिए इस तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
कक्षाओं में पहुंचकर बच्चों से जानी पढ़ाई की स्थिति
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी केवल कार्यालय या विद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सीधे कक्षा छह, सात और आठ में पहुंचे। यहां उन्होंने विद्यार्थियों से बातचीत की और उनकी पढ़ाई से संबंधित सवाल पूछकर शैक्षिक स्तर को समझने का प्रयास किया। बच्चों से विभिन्न विषयों के बारे में जानकारी ली गई, जिससे विद्यालय में संचालित शिक्षण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।
जिलाधिकारी ने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन करने और शिक्षकों द्वारा दिए गए कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों में समझने, सीखने और आगे बढ़ने की क्षमता विकसित करना भी आवश्यक है।
उन्होंने विद्यालय के शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट किया कि प्रत्येक विद्यार्थी को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। बच्चों की पढ़ाई में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी।
लंबे समय से अनुपस्थित तीन शिक्षकों पर कार्रवाई
औचक निरीक्षण के दौरान प्रधानाध्यापक अल्पना गुप्ता, सहायक अध्यापक शोभा गुप्ता और सहायक अध्यापक दीपशिखा के लंबे समय से अवकाश पर रहने का मामला सामने आया। विद्यालय में शिक्षकों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित न होने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जाहिर की।
उन्होंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विकास चौधरी को तीनों शिक्षकों के विरुद्ध नियमानुसार तत्काल निलंबन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए। प्रशासन का मानना है कि विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति बेहद जरूरी है, क्योंकि शिक्षक ही बच्चों के ज्ञान, अनुशासन और भविष्य निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में नियुक्त शिक्षकों का दायित्व है कि वे निर्धारित समय पर उपस्थित होकर अपने शिक्षण कार्यों का निर्वहन करें। बिना उचित व्यवस्था के लंबे समय तक अनुपस्थित रहने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। इस तरह की स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
खंड शिक्षा अधिकारी को भी मिली चेतावनी
निरीक्षण के दौरान शिक्षकों की अनुपस्थिति के साथ-साथ विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठे। जिलाधिकारी ने खंड शिक्षा अधिकारी प्रीति राजपूत द्वारा अपने क्षेत्र में प्रभावी पर्यवेक्षण नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई।
उन्होंने संबंधित अधिकारी को चेतावनी जारी करने के निर्देश देते हुए कहा कि विद्यालयों की नियमित निगरानी करना शिक्षा विभाग के अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि किसी विद्यालय में शिक्षक लंबे समय तक अनुपस्थित रहते हैं और इसकी जानकारी समय रहते उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचती, तो यह निगरानी व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है।
डीएम ने निर्देश दिया कि खंड शिक्षा अधिकारी अपने क्षेत्र के सभी विद्यालयों का नियमित निरीक्षण करें। शिक्षकों की उपस्थिति, विद्यार्थियों की संख्या, पढ़ाई की गुणवत्ता और विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं की लगातार समीक्षा की जाए। किसी भी तरह की अनियमितता मिलने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
यूनिफॉर्म में नहीं मिले कुछ विद्यार्थी
विद्यालय के निरीक्षण के दौरान कुछ बच्चे निर्धारित स्कूल यूनिफॉर्म में नहीं पहुंचे थे। इस पर जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बच्चों की नियमित स्कूल उपस्थिति और निर्धारित यूनिफॉर्म के महत्व के बारे में जागरूक किया जाए। अभिभावकों को समझाया जाए कि विद्यालय की निर्धारित पोशाक बच्चों में समानता, अनुशासन और विद्यालय के प्रति जुड़ाव की भावना विकसित करने में सहायक होती है।
डीएम ने यह भी कहा कि बच्चों को स्कूल भेजने के साथ-साथ उनकी पढ़ाई और विद्यालय से जुड़ी आवश्यकताओं पर भी अभिभावकों को ध्यान देना चाहिए। शिक्षा विभाग को अभिभावकों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने की जरूरत है, ताकि विद्यालय और परिवार मिलकर बच्चों के भविष्य को मजबूत बना सकें।
दिव्यांग छात्रा श्रुति की पढ़ाई का भी लिया जायजा
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने विद्यालय में अध्ययनरत विशेष आवश्यकता वाली छात्रा श्रुति की शैक्षिक प्रगति पर भी ध्यान दिया। उन्होंने छात्रा से बातचीत की और उसकी पढ़ाई के बारे में जानकारी प्राप्त की।
इस दौरान श्रुति अपनी नोटबुक में एक, दो और तीन लिखकर अभ्यास करती हुई मिली। जिलाधिकारी ने उसकी पढ़ाई को देखा और संबंधित शिक्षकों को निर्देश दिया कि विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों को उनकी जरूरत के अनुसार शिक्षण सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने का समान अवसर मिलना चाहिए। दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाई के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए विद्यालय में आवश्यक सहयोग और अनुकूल वातावरण तैयार किया जाना चाहिए।
ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शिक्षकों को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा। उनकी सीखने की क्षमता और व्यक्तिगत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शिक्षण गतिविधियां संचालित की जानी चाहिए।
मॉडल स्कूल के रूप में विकसित होगा विद्यालय
जिलाधिकारी ने विद्यालय को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में भी ऐसी सुविधाएं और शैक्षिक वातावरण होना चाहिए, जहां बच्चे बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकें और उनका सर्वांगीण विकास हो।
इसके लिए शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, नियमित कक्षाएं, विद्यालय परिसर की स्वच्छता, अनुशासन और बच्चों की सक्रिय भागीदारी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विद्यालय की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए। बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और अन्य शैक्षिक कार्यक्रमों में भी भाग लेने के अवसर मिलने चाहिए।
डीएम ने स्पष्ट किया कि किसी विद्यालय को मॉडल स्कूल बनाने का उद्देश्य केवल उसकी बाहरी व्यवस्था सुधारना नहीं, बल्कि वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सीखने का माहौल उपलब्ध कराना होना चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय
जिलाधिकारी समीर ने निरीक्षण के दौरान कहा कि सरकारी विद्यालयों की जिम्मेदारी केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं है। विभागीय अधिकारियों को भी अपने दायित्वों का नियमित रूप से पालन करना होगा। विद्यालयों की निगरानी, शिक्षकों की उपस्थिति और विद्यार्थियों की शैक्षिक प्रगति पर लगातार नजर रखनी जरूरी है।
उन्होंने निर्देश दिया कि अधिकारी समय-समय पर स्कूलों का निरीक्षण करें और सामने आने वाली समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर कराएं। विद्यालयों में शिक्षण कार्य बाधित नहीं होना चाहिए और बच्चों को निर्धारित समय के अनुसार पढ़ाई का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
इस औचक निरीक्षण के दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विकास चौधरी, खंड शिक्षा अधिकारी प्रीति राजपूत सहित संबंधित शिक्षक एवं विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
जालौन में जिलाधिकारी की इस कार्रवाई को सरकारी विद्यालयों में अनुशासन, शिक्षकों की जवाबदेही और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब संबंधित विभागीय अधिकारियों के सामने विद्यालयों की नियमित निगरानी और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
