झींझक में छत से गिरकर युवक की मौत, कानपुर ले जाते समय रास्ते में थमी सांस

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कानपुर देहात। झींझक कस्बे के अब्दुल कलाम नगर में मंगलवार देर रात एक दर्दनाक हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। घर की छत पर सो रहे 30 वर्षीय राजेश अचानक नीचे आंगन में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन उन्हें बेहतर उपचार के लिए कानपुर ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में उनकी हालत बिगड़ गई और उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में मातम छा गया।

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खाना खाने के बाद छत पर सोने गए थे राजेश

बताया गया कि अब्दुल कलाम नगर निवासी राजेश पुताई का काम करते थे और इसी मेहनत-मजदूरी से अपने परिवार का खर्च चलाते थे। मंगलवार रात रोज की तरह खाना खाने के बाद वह घर की छत पर सोने के लिए चले गए। देर रात किसी समय उनकी नींद खुली।

परिजनों के मुताबिक, रात के समय छत पर पर्याप्त रोशनी नहीं थी। इसी दौरान उठते समय उनका पैर फिसल गया और वह छत के खुले हिस्से से नीचे आंगन में जा गिरे। अचानक गिरने की आवाज सुनकर घर के लोग घबरा गए और तत्काल मौके पर पहुंचे।

गंभीर चोट लगने से बिगड़ी हालत

छत से गिरने के कारण राजेश के सिर सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। परिजनों ने बिना देर किए उन्हें उपचार दिलाने की कोशिश शुरू की। हादसे के बाद घर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

राजेश की हालत गंभीर देखते हुए परिवार के लोगों ने उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए कानपुर ले जाने का निर्णय लिया। बुधवार सुबह उन्हें कानपुर ले जाया जा रहा था। परिजन उम्मीद लगाए हुए थे कि वहां उपचार मिलने के बाद उनकी हालत में सुधार होगा, लेकिन रास्ते में ही उनकी तबीयत अचानक और बिगड़ गई।

कुछ ही देर बाद राजेश की सांसें थम गईं। उनकी मौत की खबर सुनकर परिजन स्तब्ध रह गए। जिस परिवार में कुछ समय पहले तक सामान्य दिनचर्या चल रही थी, वहां अचानक चीख-पुकार मच गई।

पत्नी और दो बेटियों पर टूटा दुखों का पहाड़

राजेश की मौत से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके पीछे पत्नी आशा देवी, मां कलावती और दो बेटियां सेजल तथा काजल हैं। बड़ी बेटी सेजल की उम्र 11 वर्ष और छोटी बेटी काजल की उम्र पांच वर्ष बताई गई है।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। राजेश परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को संभालते थे। उनकी असमय मौत से परिवार के सामने भावनात्मक संकट के साथ-साथ भविष्य को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।

मोहल्ले के लोगों के अनुसार राजेश मेहनती स्वभाव के थे और पुताई का काम करके परिवार का पालन-पोषण करते थे। हादसे की खबर फैलने के बाद आसपास के लोग भी परिवार को सांत्वना देने के लिए उनके घर पहुंचने लगे।

छत की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस हादसे के बाद घर की छतों पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। परिजनों के अनुसार छत के खुले हिस्से में सुरक्षा जाल या पर्याप्त सुरक्षा अवरोध नहीं लगा था। रात के समय अंधेरे में इसी खुले हिस्से से राजेश नीचे गिर गए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि घरों की छतों पर यदि पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा व्यवस्था हो तो इस तरह की दुर्घटनाओं की आशंका को कम किया जा सकता है। खासकर उन घरों में जहां लोग गर्मी के मौसम में छत पर सोते हैं, वहां मुंडेर, रेलिंग अथवा अन्य सुरक्षा इंतजामों पर ध्यान देना जरूरी है।

हालांकि इस घटना में वास्तव में गिरने की परिस्थितियां क्या थीं, इसकी पुष्टि संबंधित स्तर पर जांच के बाद ही पूरी तरह हो सकेगी। फिलहाल परिवार के लिए यह हादसा अपूरणीय क्षति बन गया है।

एक हादसे ने उजाड़ दिया परिवार का सहारा

राजेश की मौत महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उनके परिवार के लिए जीवन बदल देने वाली घटना है। पत्नी ने अपने जीवनसाथी को खो दिया, मां से उनका बेटा छिन गया और दोनों मासूम बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया।

मंगलवार रात तक परिवार को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही घंटों में उनके घर में ऐसा दुख आ जाएगा। छत पर सोने गए राजेश के साथ हुआ हादसा सुबह तक परिवार के लिए ऐसी खबर में बदल गया, जिसने सभी को झकझोर दिया।

परिजनों की आंखों के सामने अब राजेश की यादें हैं और उनके सहारे चलने वाला परिवार अचानक संकट में आ गया है। आसपास के लोगों ने प्रशासन और समाज से ऐसे परिवारों की मुश्किल घड़ी में मदद करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।

सुरक्षा को लेकर बरतनी होगी सावधानी

झींझक की इस घटना ने एक बार फिर घर की छतों पर सुरक्षा उपायों की जरूरत को सामने ला दिया है। रात में छत पर जाने वाले लोगों के लिए पर्याप्त रोशनी, मजबूत मुंडेर और खुले स्थानों पर सुरक्षा अवरोध होना जरूरी है। बच्चों और बुजुर्गों के साथ-साथ रात में सोने वाले अन्य लोगों के लिए भी छत की सुरक्षित व्यवस्था महत्वपूर्ण है।

स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि छोटी-सी लापरवाही कई बार गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए घर की छत पर मौजूद खुले हिस्सों और कमजोर सुरक्षा व्यवस्था को समय रहते दुरुस्त किया जाना चाहिए।

फिलहाल अब्दुल कलाम नगर में राजेश की मौत के बाद शोक का माहौल है। परिवार अपने जवान सदस्य को खोने के सदमे से गुजर रहा है। दो बेटियों और पत्नी की ओर देखते हुए परिजनों की चिंता और बढ़ गई है। एक सामान्य रात अचानक पूरे परिवार के जीवन में ऐसा दुख छोड़ गई, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

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