कोंच में सुतली बम से हादसा, रोगन निकालने के दौरान 12 वर्षीय बच्चा झुलसा; सीएचसी में कराया गया उपचार
देव पटेल
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
कोंच, जालौन (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कोंच नगर में पटाखे के साथ छेड़छाड़ करना एक बच्चे के लिए हादसे का कारण बन गया। सोमवार देर रात करीब 10 बजे सुतली बम से रोगन निकालने की कोशिश के दौरान अचानक विस्फोट हो गया। इसकी चपेट में आने से 12 वर्षीय बच्चा झुलस गया। घटना में उसके हाथ में जलने की चोट आई। हादसे के बाद परिवार के लोग घबरा गए और बच्चे को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कोंच ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसका उपचार किया।

इस घटना ने एक बार फिर घरों में लंबे समय तक रखे रहने वाले पटाखों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। त्योहारों के दौरान खरीदे गए पटाखों को बाद में इस्तेमाल करने या उनके भीतर मौजूद सामग्री निकालने की कोशिश करना खतरनाक साबित हो सकता है। खासकर बच्चों के हाथों में इस तरह की आतिशबाजी पहुंचने पर दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।
जयप्रकाश नगर में देर रात हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोंच नगर के मोहल्ला जयप्रकाश नगर निवासी अंशुल यादव (12 वर्ष), पुत्र हयात सिंह, के घर में पिछले वर्ष दीपावली के दौरान लाए गए पटाखों में से एक सुतली बम रखा हुआ था। सोमवार की रात करीब 10 बजे अंशुल उस पुराने पटाखे को लेकर उसमें से रोगन निकालने का प्रयास कर रहा था।
इसी दौरान अचानक सुतली बम चल गया। पटाखे के अचानक फटने से बच्चा उसकी चपेट में आ गया और उसका हाथ झुलस गया। घटना इतनी अचानक हुई कि परिवार के लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। घर में मौजूद परिजनों के बीच अफरा-तफरी मच गई।
हादसे के बाद परिवार ने बच्चे को तत्काल चिकित्सकीय सहायता दिलाने का निर्णय लिया और उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोंच पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने उसकी चोट का उपचार किया। घटना से संबंधित उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बच्चे के हाथ में जलने की चोट आई है। उसकी चोट की गंभीरता और आगे की स्वास्थ्य स्थिति के संबंध में अतिरिक्त जानकारी सामने नहीं आई है।
पुराने पटाखे बन सकते हैं दुर्घटना की वजह
दीपावली या अन्य त्योहारों पर कई परिवार आतिशबाजी के लिए पटाखे खरीदते हैं। कभी-कभी इस्तेमाल नहीं हो पाने के कारण कुछ पटाखे घरों में ही रखे रह जाते हैं। समय बीतने के बाद ऐसे पटाखों को सामान्य वस्तु समझना या उनके साथ प्रयोग करने की कोशिश करना गंभीर खतरे को आमंत्रित कर सकता है।
कोंच की यह घटना इसी तरह की लापरवाही के संभावित परिणामों को सामने लाती है। पटाखे के भीतर मौजूद सामग्री को निकालने, उसे खोलने या उसकी बनावट को समझने के लिए छेड़छाड़ करना सुरक्षित नहीं है। पटाखा बाहर से सामान्य दिखाई दे सकता है, लेकिन उसके भीतर मौजूद विस्फोटक सामग्री अप्रत्याशित तरीके से प्रतिक्रिया कर सकती है।
विशेष रूप से बच्चों में जिज्ञासा अधिक होती है। वे कई बार किसी वस्तु के अंदर क्या है, यह जानने के लिए उसके साथ प्रयोग करने लगते हैं। ऐसे में माता-पिता और अभिभावकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे बच्चों को पटाखों से होने वाले संभावित खतरों के बारे में सरल भाषा में समझाएं और उन्हें ऐसी वस्तुओं से दूर रखें।
बच्चों की सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी
बच्चों की सुरक्षा के लिए केवल त्योहार के समय ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष सतर्कता बरतना आवश्यक है। घर में रखे पुराने पटाखे, माचिस, लाइटर और अन्य ज्वलनशील वस्तुएं बच्चों की पहुंच से दूर रखी जानी चाहिए। किसी भी पटाखे को खोलने या उसके अंदर की सामग्री निकालने की अनुमति बच्चों को नहीं दी जानी चाहिए।
अभिभावकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों को पुराने पटाखे खिलौने की तरह इस्तेमाल करने के लिए न दिए जाएं। यदि घर में पिछले त्योहारों के पटाखे बचे हुए हैं, तो उन्हें सामान्य घरेलू कचरे में फेंकने या खुद खोलकर निष्क्रिय करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसे मामलों में स्थानीय अग्निशमन विभाग या संबंधित प्रशासन से सुरक्षित निस्तारण के बारे में जानकारी लेना उचित है।
बच्चों को यह समझाना भी जरूरी है कि पटाखा नहीं फूटने पर उसके पास जाकर उसे दोबारा जलाने या उसके साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इसी प्रकार किसी पटाखे को हाथ में पकड़कर उसके अंदर की सामग्री निकालना बेहद जोखिम भरा काम है।
दुर्घटना होने पर तुरंत लें चिकित्सकीय सहायता
पटाखे से जलने या चोट लगने की स्थिति में समय पर प्राथमिक सहायता और चिकित्सकीय उपचार महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी व्यक्ति का हाथ या शरीर का कोई हिस्सा जल जाता है, तो प्रभावित स्थान को ठंडे बहते पानी के नीचे लगभग 20 मिनट तक रखा जा सकता है। बर्फ, टूथपेस्ट, तेल या घरेलू लेप लगाने से बचना चाहिए। यदि चोट गंभीर हो, त्वचा अधिक प्रभावित हुई हो या विस्फोट के कारण दूसरी चोट लगी हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
आंखों में चोट, सांस लेने में परेशानी या गहरी जलन की स्थिति में तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना आवश्यक है। बच्चों के मामले में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और चोट को मामूली समझकर उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए।
कोंच में हुई घटना के बाद परिवार ने बच्चे को अस्पताल पहुंचाकर उपचार कराया। यह कदम ऐसी परिस्थितियों में समय पर चिकित्सा सहायता की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
त्योहारों के बाद भी सतर्कता जरूरी
अक्सर दीपावली के बाद घरों में बचे पटाखों को लेकर लोग लापरवाह हो जाते हैं। उन्हें लंबे समय तक किसी डिब्बे, अलमारी या दूसरे स्थान पर रख दिया जाता है। बाद में जब बच्चे उन्हें देखते हैं, तो वे उनके साथ खेलने या उन्हें खोलने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में छोटी-सी असावधानी भी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
माता-पिता को घर में मौजूद आतिशबाजी की नियमित जांच करने के बजाय सुरक्षित निस्तारण को प्राथमिकता देनी चाहिए और बच्चों को इन वस्तुओं से पूरी तरह दूर रखना चाहिए। किसी भी पटाखे की सुरक्षा का अनुमान केवल उसके बाहरी स्वरूप या उसकी उम्र के आधार पर नहीं लगाया जा सकता।
स्थानीय स्तर पर भी बच्चों को सुरक्षित व्यवहार के प्रति जागरूक करने की जरूरत है। स्कूलों, परिवारों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से पटाखों के खतरों तथा दुर्घटना की स्थिति में उठाए जाने वाले कदमों के बारे में जानकारी दी जा सकती है।
लापरवाही से बचना ही सबसे बड़ा बचाव
कोंच के जयप्रकाश नगर में हुआ यह हादसा परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। 12 वर्षीय अंशुल यादव पुराने सुतली बम से रोगन निकालने का प्रयास कर रहा था, तभी अचानक पटाखा चल गया और उसका हाथ झुलस गया। परिजन उसे उपचार के लिए सीएचसी कोंच लेकर पहुंचे।
घटना स्पष्ट करती है कि पटाखों के साथ किसी भी प्रकार का प्रयोग करना बच्चों के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है। अभिभावकों को चाहिए कि वे घर में रखे पुराने पटाखों को बच्चों की पहुंच से दूर रखें, उन्हें आतिशबाजी के साथ छेड़छाड़ न करने दें और सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन कराएं।
थोड़ी-सी सावधानी बड़े हादसे को रोक सकती है। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि परिवार त्योहारों के बाद बची आतिशबाजी को भी गंभीरता से लें और किसी दुर्घटना की स्थिति में बिना देर किए उचित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएं।