कुठौंद सीएचसी में प्रसव के बाद 22 वर्षीय महिला की मौत, परिजनों ने अस्पताल में किया हंगामा; इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
प्रसव के कुछ देर बाद बिगड़ी सरिता की हालत, उरई मेडिकल कॉलेज ले जाते समय रास्ते में तोड़ा दम; नवजात शिशु सुरक्षित, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

उरई (जालौन)। जिले के कुठौंद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के बाद एक 22 वर्षीय महिला की मौत का मामला सामने आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। नवजात शिशु को जन्म देने के कुछ ही समय बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई। चिकित्सकों ने गंभीर हालत देखते हुए उसे बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज उरई रेफर कर दिया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में मातम छा गया। वहीं, महिला के मायके और ससुराल पक्ष के लोगों ने अस्पताल पहुंचकर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया और जमकर नाराजगी जताई।
इस घटना के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी है। फिलहाल महिला की मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट और स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही चल सकेगा।
प्रसव के बाद अचानक बिगड़ने लगी महिला की तबीयत
जानकारी के अनुसार, कुठौंद थाना क्षेत्र के कुठौंद नगर निवासी विकास की 22 वर्षीय पत्नी सरिता को सोमवार की सुबह प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुठौंद में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में चिकित्सकीय देखरेख के दौरान उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया। बताया जा रहा है कि प्रसव के बाद शुरुआती कुछ समय में उनकी हालत सामान्य नहीं रही और धीरे-धीरे तबीयत बिगड़ने लगी।
परिजनों के अनुसार, बच्चे के जन्म के बाद सरिता की स्थिति लगातार खराब होती चली गई। उनकी हालत को लेकर परिवार के लोग चिंतित हो उठे। जब स्थिति गंभीर होने लगी तो चिकित्सकों ने उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन उन्हें लेकर उरई की ओर रवाना हुए, लेकिन दुर्भाग्यवश रास्ते में ही सरिता ने दम तोड़ दिया।
महिला की मौत की खबर मिलते ही परिवार के लोगों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस घर में नवजात के जन्म से खुशियां आने की उम्मीद थी, वहां कुछ ही देर में मातम पसर गया। नवजात शिशु के सुरक्षित होने की जानकारी दी गई है।
पिछले साल हुई थी सरिता की शादी
मृतका सरिता के पारिवारिक जीवन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, उनकी शादी पिछले वर्ष ही कुठौंद नगर निवासी विकास के साथ हुई थी। उनका मायका माधौगढ़ कोतवाली क्षेत्र के बिजदुआ गांव में है। परिवार में नए सदस्य के आगमन को लेकर दोनों पक्षों में खुशी का माहौल था, लेकिन प्रसव के बाद हुई इस दुखद घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया।
सरिता की मौत की जानकारी मिलते ही मायके पक्ष के लोग भी कुठौंद सीएचसी पहुंच गए। अस्पताल परिसर में मौजूद परिजनों ने चिकित्सकीय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यदि समय रहते उचित उपचार और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जातीं तो शायद महिला की जान बचाई जा सकती थी।
परिजनों ने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर लगाए आरोप
महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में उपचार के दौरान लापरवाही बरते जाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि प्रसव के बाद जब सरिता की तबीयत बिगड़ने लगी तो समय पर आवश्यक चिकित्सकीय सहायता नहीं मिली। परिवार के लोगों ने आरोप लगाया कि गंभीर स्थिति होने के बावजूद उचित उपचार और निगरानी में कमी रही।
परिजनों की नाराजगी के चलते अस्पताल परिसर में हंगामे जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और लोगों को शांत कराने का प्रयास किया। पुलिस की मौजूदगी में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
हालांकि, परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि महिला की हालत बिगड़ने के पीछे कौन-से चिकित्सकीय कारण जिम्मेदार थे और अस्पताल में उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सा प्रक्रियाओं का पालन हुआ था या नहीं।
प्रभारी चिकित्सक ने बताई पूरी घटनाक्रम की जानकारी
इस मामले में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुठौंद के प्रभारी चिकित्सक डॉ. कुलदीप कुमार ने बताया कि सरिता को सोमवार सुबह लगभग 5:30 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सुबह करीब 6 बजे उनका प्रसव हुआ। चिकित्सक के अनुसार, प्रसव के लगभग आधे घंटे बाद महिला की स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज उरई रेफर कर दिया गया था।
डॉ. कुलदीप कुमार ने बताया कि महिला की हालत गंभीर थी और उनका हीमोग्लोबिन स्तर कम था। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र भेजने का निर्णय लिया गया।
चिकित्सक के इस बयान के बाद मामले में कई महत्वपूर्ण सवाल भी सामने आए हैं। महिला की हालत प्रसव से पहले कैसी थी, भर्ती के समय कौन-कौन सी जांच की गई थीं, प्रसव के बाद स्वास्थ्य में गिरावट के क्या संकेत मिले और रेफर करने से पहले किस प्रकार का उपचार दिया गया, इन सभी बिंदुओं की जांच आवश्यक मानी जा रही है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगी मौत की वजह
घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से महिला की मौत के चिकित्सकीय कारणों को समझने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं, चिकित्सकीय रिकॉर्ड, प्रसव के दौरान की गई निगरानी और रेफर किए जाने की प्रक्रिया की जांच किया जाना भी महत्वपूर्ण होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रसव के बाद महिलाओं की स्थिति पर लगातार नजर रखना बेहद जरूरी होता है। कई बार प्रसव के बाद रक्तस्राव, गंभीर एनीमिया, रक्तचाप में बदलाव या अन्य चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है। ऐसे मामलों में समय पर पहचान, आवश्यक उपचार और जरूरत पड़ने पर तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना महत्वपूर्ण होता है।
हालांकि, सरिता की मौत का कारण इनमें से कोई जटिलता थी या कुछ और, इसका निष्कर्ष बिना चिकित्सकीय जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के निकालना उचित नहीं होगा।
स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही पर उठे सवाल
कुठौंद सीएचसी में हुई इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव के लिए निर्भर रहती हैं। ऐसे में अस्पतालों में प्रशिक्षित स्टाफ, आवश्यक जांच सुविधाएं, आपातकालीन उपचार और समय पर रेफरल व्यवस्था का मजबूत होना बेहद जरूरी है।
इस घटना के बाद लोगों की निगाहें स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। परिजन चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
फिलहाल नवजात शिशु सुरक्षित बताया जा रहा है, जबकि सरिता की असमय मौत से परिवार में शोक का माहौल है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और स्वास्थ्य विभाग की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की जान किन परिस्थितियों में गई और उपचार के दौरान किसी प्रकार की चिकित्सकीय चूक हुई थी या नहीं।
