शहीद नायक अरविंद सिंह सेंगर की स्मृति में गांव में बनेगा शहीद स्मृति गेट? पत्नी राधा देवी ने डीएम से लगाई गुहार

0

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

क्रासर- वर्ष 1989 में श्रीलंका में ऑपरेशन पवन के दौरान देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए थे नायक अरविंद सिंह सेंगर, पति के सर्वोच्च बलिदान को स्थायी पहचान दिलाने के लिए पत्नी ने उठाई मांग।

उरई (जालौन)। देश की सीमाओं की सुरक्षा और मातृभूमि की आन-बान एवं शान के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। ऐसे ही वीर सपूतों में जनपद जालौन के ग्राम जगतपुरा अहीर निवासी शहीद नायक अरविंद सिंह सेंगर का नाम भी सम्मान के साथ लिया जाता है। वर्ष 1989 में श्रीलंका में चलाए गए ऑपरेशन पवन के दौरान देश सेवा करते हुए उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। अब उनकी स्मृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने और गांव में उनके सम्मान को स्थायी पहचान दिलाने के उद्देश्य से उनकी पत्नी राधा देवी ने महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर गांव में शहीद स्मृति गेट का निर्माण कराए जाने की मांग की है।

शहीद की पत्नी की इस मांग के पीछे केवल एक निर्माण कार्य कराने की इच्छा नहीं, बल्कि अपने पति के अदम्य साहस, देशभक्ति और सर्वोच्च बलिदान को हमेशा जीवित रखने की भावना जुड़ी हुई है। उनका मानना है कि गांव के प्रवेश मार्ग पर यदि शहीद के नाम से स्मृति द्वार बनाया जाता है तो यह न केवल उनके पति के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी, बल्कि गांव की पहचान भी एक वीर सैनिक के नाम से स्थापित होगी।

4 राजपूत रेजीमेंट में तैनात थे शहीद अरविंद सिंह सेंगर

जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में राधा देवी ने बताया कि उनके पति स्वर्गीय नायक अरविंद सिंह सेंगर मूल रूप से जनपद जालौन की तहसील जालौन के ग्राम जगतपुरा अहीर के निवासी थे। वह भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 4 राजपूत रेजीमेंट में अपनी सेवाएं दे रहे थे। सेना में रहते हुए उन्होंने देश की सुरक्षा और राष्ट्र की संप्रभुता को सर्वोपरि रखा।

सेना के जवानों का जीवन अनुशासन, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक होता है। नायक अरविंद सिंह सेंगर ने भी अपने सैनिक धर्म का निर्वहन करते हुए देश के प्रति अटूट निष्ठा दिखाई। वर्ष 1989 में श्रीलंका में चलाए गए ऑपरेशन पवन के दौरान वह शहीद हो गए। उनका बलिदान भारतीय सेना के साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण की गौरवशाली परंपरा का हिस्सा है।

ऑपरेशन पवन के दौरान दिया था सर्वोच्च बलिदान

श्रीलंका में वर्ष 1987 से भारतीय शांति सेना (आईपीकेएफ) की तैनाती की गई थी। इसी अभियान के अंतर्गत ऑपरेशन पवन चलाया गया था। इस दौरान भारतीय सैनिकों को कठिन परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ा। अभियान में कई भारतीय जवानों ने देश सेवा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी।

इसी अभियान के दौरान नायक अरविंद सिंह सेंगर भी शहीद हुए थे। उनका बलिदान इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सैनिक अपने कर्तव्य के प्रति कितने समर्पित रहते हैं। उनके जैसे वीर जवानों की बदौलत देश की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनी रहती है और नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं।

पत्नी ने डीएम से की स्मृति द्वार बनवाने की मांग

अपने पति की स्मृतियों को संजोने के उद्देश्य से राधा देवी ने जिलाधिकारी के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है। इसमें उन्होंने मांग की है कि ग्राम जगतपुरा अहीर में शहीद नायक अरविंद सिंह सेंगर के नाम पर एक भव्य स्मृति गेट का निर्माण कराया जाए।

उनका कहना है कि गांव में प्रवेश करते समय लोगों की नजर जब शहीद के नाम से बने स्मृति द्वार पर पड़ेगी तो उन्हें देश की रक्षा में दिए गए उनके योगदान की याद आएगी। गांव के बच्चे, युवा और नई पीढ़ी भी यह जान सकेगी कि इसी मिट्टी में जन्मे एक वीर सपूत ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था।

राधा देवी की मांग है कि संबंधित विभाग के माध्यम से इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाए और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर स्मृति द्वार के निर्माण की दिशा में कदम उठाए जाएं।

आने वाली पीढ़ियों के लिए बनेगा प्रेरणा का प्रतीक

शहीदों की स्मृतियों को सार्वजनिक स्थलों पर संरक्षित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी मानी जाती है। गांवों में शहीदों के नाम पर स्मृति द्वार, स्मारक और अन्य सम्मानजनक संरचनाएं स्थापित होने से स्थानीय इतिहास को भी पहचान मिलती है।

ग्राम जगतपुरा अहीर में नायक अरविंद सिंह सेंगर के नाम पर स्मृति गेट बनने से ग्रामीणों को अपने वीर सपूत पर गर्व करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही युवाओं में सेना में भर्ती होने, राष्ट्रसेवा करने और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने की भावना को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

ऐसे स्मृति स्थल केवल ईंट-पत्थर से बनी संरचनाएं नहीं होते, बल्कि वे त्याग, साहस, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की जीवंत निशानी बन जाते हैं। जब किसी गांव के प्रवेश द्वार पर शहीद का नाम अंकित होता है तो वह आने-जाने वाले लोगों को उस वीर सैनिक के योगदान से परिचित कराता है।

शहीद परिवार के सम्मान से जुड़ा है मामला

देश की रक्षा में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले सैनिकों के परिवार भी सम्मान और संवेदनशीलता के पात्र हैं। शहीद की पत्नी राधा देवी द्वारा उठाई गई यह मांग इसी भावना से जुड़ी हुई है। पति के बलिदान की यादों को सार्वजनिक पहचान दिलाने के लिए उन्होंने प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखी है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे परिवार हैं, जिनके सदस्य सेना और अन्य सुरक्षा बलों में सेवा करते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं। ऐसे परिवारों की मांगों पर प्रशासनिक स्तर पर सकारात्मक पहल होने से समाज में भी अच्छा संदेश जाता है।

राधा देवी को उम्मीद है कि जिलाधिकारी उनके प्रार्थना पत्र पर उचित संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देंगे। हालांकि, स्मृति गेट के निर्माण को लेकर प्रशासन की ओर से किसी निर्णय या स्वीकृति की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

प्रशासनिक पहल का इंतजार

अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की ओर लगी हैं। यदि ग्राम जगतपुरा अहीर में शहीद नायक अरविंद सिंह सेंगर के नाम से स्मृति द्वार का निर्माण कराया जाता है तो यह उनके बलिदान को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

यह मांग केवल एक परिवार की भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव के गौरव, क्षेत्र की पहचान और देश के लिए बलिदान देने वाले सैनिकों के सम्मान से भी जुड़ी है। शहीद अरविंद सिंह सेंगर ने वर्ष 1989 में श्रीलंका में ऑपरेशन पवन के दौरान अपने प्राणों का बलिदान देकर राष्ट्रसेवा की मिसाल कायम की थी।

उनकी पत्नी राधा देवी की इच्छा है कि उनके पति का नाम और उनका योगदान हमेशा याद रखा जाए। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मांग पर क्या निर्णय लेता है और शहीद की स्मृति में गांव में सम्मान द्वार बनाने की दिशा में कब तक पहल होती है।

शहीद नायक अरविंद सिंह सेंगर का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को हमेशा यह संदेश देता रहेगा कि राष्ट्र की सेवा और मातृभूमि की रक्षा से बड़ा कोई कर्तव्य नहीं है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें