नेतन्याहू की पोस्ट से फिर चर्चा में आई 2018 की इजरायल-‘कतर’ गुप्त मुलाकात
यरुशलम। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर एक पुरानी खबर की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “Reminder for those who forgot” यानी “जो लोग भूल गए हैं, उनके लिए याद दिला दूं।” इस पोस्ट के साथ साझा की गई खबर अगस्त 2018 की है, जिसमें तत्कालीन इजरायली रक्षा मंत्री अविगदोर लिबरमैन और कतर के तत्कालीन विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी के बीच साइप्रस में हुई कथित गुप्त मुलाकात का उल्लेख था।

नेतन्याहू की इस पोस्ट ने पुराने घटनाक्रम को एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा में ला दिया है। हालांकि, पोस्ट में उस पुरानी घटना के संदर्भ को विस्तार से नहीं बताया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह संपर्क मुख्य रूप से गाजा पट्टी में तनाव कम करने, मानवीय स्थिति और संभावित दीर्घकालिक व्यवस्था से जुड़े प्रयासों की पृष्ठभूमि में हुआ था।
2018 में क्या हुआ था?
अगस्त 2018 में इजरायली मीडिया वाला न्यूज ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2018 के अंत में साइप्रस में अविगदोर लिबरमैन और कतर के विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी के बीच एक गोपनीय बैठक हुई थी।
उस समय लिबरमैन इजरायल के रक्षा मंत्री थे और साइप्रस में ग्रीस तथा साइप्रस के रक्षा मंत्रियों के साथ बैठक के लिए गए थे। इसी यात्रा के दौरान कथित तौर पर कतर के वरिष्ठ अधिकारी से संपर्क हुआ। रिपोर्ट में कहा गया कि बैठक गाजा में संभावित व्यवस्था और वहां की मानवीय परिस्थितियों से जुड़े प्रयासों की पृष्ठभूमि में हुई थी।
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि उस समय इजरायल और कतर के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं थे। इसके बावजूद गाजा से जुड़े मुद्दों पर कतर की भूमिका बढ़ रही थी।
पहले सामने आई थी अलग जानकारी
इस घटनाक्रम को लेकर शुरुआत में एक दूसरी रिपोर्ट भी सामने आई थी। द टाइम्स ऑफ इजरायल ने 17 अगस्त 2018 को रिपोर्ट किया था कि लिबरमैन ने साइप्रस में कतर के गाजा दूत मोहम्मद अल-एम्मादी से मुलाकात की थी। उस रिपोर्ट में गाजा की मानवीय स्थिति, युद्धविराम और इजरायली नागरिकों तथा मारे गए सैनिकों के शवों की वापसी से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया था।
इसके कुछ दिनों बाद सामने आई वाला की रिपोर्ट ने दावा किया कि मुलाकात वास्तव में कतर के गाजा दूत से नहीं बल्कि कतर के विदेश मंत्री अल-थानी से हुई थी। इस रिपोर्ट में एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी के हवाले से बताया गया कि इतनी उच्चस्तरीय मुलाकात के लिए साइप्रस जैसे तीसरे देश का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।
लिबरमैन के कार्यालय ने उस समय मंत्री की बैठकों पर टिप्पणी करने से इनकार किया था। इसलिए बैठक से संबंधित सार्वजनिक जानकारी मुख्य रूप से मीडिया रिपोर्टों और अधिकारियों के हवाले पर आधारित रही।
गाजा संकट था बातचीत का प्रमुख संदर्भ
2018 में गाजा पट्टी में तनाव लगातार बना हुआ था। इजरायल और हमास के बीच कई दौर की हिंसा के बीच मिस्र और संयुक्त राष्ट्र भी तनाव कम करने के प्रयासों में शामिल थे।
कतर इस प्रक्रिया में एक अलग भूमिका निभा रहा था। वह गाजा में मानवीय और पुनर्निर्माण परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता देता था और उसके प्रतिनिधि गाजा से संबंधित मुद्दों पर विभिन्न पक्षों से संपर्क करते थे। उस समय कतर की भूमिका को लेकर क्षेत्रीय राजनीति में मतभेद भी थे।
रिपोर्टों के अनुसार, संभावित व्यवस्था में गाजा की मानवीय स्थिति सुधारने, बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट और आर्थिक सहायता जैसे मुद्दे शामिल थे। साथ ही लंबे समय के युद्धविराम की संभावना पर भी चर्चा चल रही थी।
साइप्रस क्यों बना महत्वपूर्ण स्थान?
उस समय साइप्रस को गाजा से संबंधित संभावित समुद्री संपर्क के संदर्भ में भी चर्चा में लाया गया था। कुछ प्रस्तावों में साइप्रस के जरिए गाजा के लिए समुद्री परिवहन व्यवस्था की संभावना पर विचार किया गया था।
इजरायली रिपोर्टों में बताया गया था कि लिबरमैन ने साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस अनास्तासियादेस से मुलाकात के दौरान गाजा के लिए समुद्री व्यवस्था से जुड़े विचारों पर चर्चा की थी। प्रस्तावित व्यवस्था में सुरक्षा नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय निगरानी जैसे मुद्दे भी शामिल थे।
हालांकि, इन विचारों को तत्काल किसी स्थायी समाधान के रूप में लागू नहीं किया गया। उस समय गाजा को लेकर मिस्र, संयुक्त राष्ट्र, इजरायल, हमास और कतर समेत कई पक्षों के बीच अलग-अलग स्तर पर बातचीत चल रही थी।
कतर की भूमिका पर विवाद
कतर की गाजा नीति उस समय भी विवाद का विषय थी। एक तरफ वह गाजा में मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण के लिए धन उपलब्ध करा रहा था, वहीं दूसरी तरफ इजरायल तथा क्षेत्र के कुछ अन्य देशों की कतर के हमास के साथ संबंधों को लेकर अपनी चिंताएं थीं।
2018 में मुलाकात की खबर सामने आने के बाद भी कतर के विदेश मंत्रालय ने फिलिस्तीनी मुद्दे पर अपनी घोषित स्थिति दोहराई थी। मंत्रालय ने गाजा से संबंधित अपनी मध्यस्थता को फिलिस्तीनी पक्ष की सहमति से जुड़ा बताया था।
इससे यह स्पष्ट होता है कि उस समय कतर की भूमिका केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह गाजा से संबंधित कूटनीतिक प्रयासों में भी शामिल था।
नेतन्याहू की मौजूदा पोस्ट का संदर्भ
अब वर्षों बाद नेतन्याहू द्वारा इस खबर की तस्वीर साझा किए जाने से 2018 की यह घटना फिर चर्चा में आ गई है। उनकी पोस्ट में केवल यह संदेश दिया गया कि लोगों को इस पुराने घटनाक्रम को याद रखना चाहिए।
पोस्ट के साथ दिखाई गई खबर में मुख्य विषय लिबरमैन और कतर के विदेश मंत्री के बीच कथित गुप्त बैठक है। खबर में यह भी बताया गया था कि बैठक उस समय गाजा में तनाव कम करने और संभावित व्यवस्था से संबंधित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की पृष्ठभूमि में हुई थी।
यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि पुरानी मीडिया रिपोर्ट में दर्ज घटना और वर्तमान राजनीतिक संदर्भ में उस घटना की व्याख्या दो अलग बातें हैं। उपलब्ध रिपोर्टें बैठक और उसके संदर्भ के बारे में जानकारी देती हैं, लेकिन नेतन्याहू की वर्तमान पोस्ट इस पुराने घटनाक्रम को किस विशेष राजनीतिक संदेश के लिए इस्तेमाल कर रही है, यह पोस्ट में विस्तार से स्पष्ट नहीं किया गया है।
उस समय की इजरायली नीति का व्यापक संदर्भ
2018 में गाजा को लेकर इजरायल की नीति में सुरक्षा चिंताओं के साथ-साथ मानवीय और आर्थिक पहलू भी महत्वपूर्ण थे। गाजा में खराब होती परिस्थितियों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण की जरूरत लगातार उठ रही थी।
इसी अवधि में मिस्र और संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से भी संघर्षविराम तथा व्यवस्था कायम करने के प्रयास किए जा रहे थे। कतर संभावित आर्थिक सहायता देने वाले प्रमुख देशों में शामिल था।
इसलिए लिबरमैन और कतर के वरिष्ठ अधिकारी के बीच कथित बैठक को उस समय चल रही व्यापक कूटनीतिक गतिविधियों के हिस्से के रूप में देखा गया था।
आज क्यों महत्वपूर्ण है यह पुरानी खबर?
मध्य-पूर्व की राजनीति में पुराने फैसलों और संपर्कों का इस्तेमाल अक्सर वर्तमान घटनाओं के संदर्भ में किया जाता है। 2018 की यह खबर भी इसी वजह से दोबारा ध्यान आकर्षित कर रही है।
नेतन्याहू की पोस्ट ने एक पुराने दस्तावेजी मीडिया रिपोर्ट को सामने रखकर उस दौर के इजरायल-कतर संपर्क की ओर ध्यान खींचा है। लेकिन किसी भी राजनीतिक दावे का मूल्यांकन करते समय उस समय की परिस्थितियों, संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों और स्वतंत्र रिपोर्टों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
निष्कर्ष रूप में, 2018 में साइप्रस में लिबरमैन और कतर के विदेश मंत्री के बीच कथित मुलाकात गाजा में तनाव कम करने और संभावित व्यवस्था से जुड़ी उस समय की कूटनीतिक गतिविधियों का हिस्सा थी। इस घटना की रिपोर्ट पहले ही इजरायली मीडिया में प्रकाशित हो चुकी थी। सितंबर 2026 में नेतन्याहू द्वारा उसी खबर की तस्वीर साझा किए जाने के बाद यह पुराना घटनाक्रम फिर सार्वजनिक बहस में आया है।