परासन में अवैध खनन का विरोध करने पर किसान को बंदूक के दम पर धमकाने का आरोप, डीएम से लगाई न्याय की गुहार
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
किसानों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की
खनन ठेकेदारों पर खेतों में खड़ी सब्जियां और फसलें नष्ट करने, मारपीट व जान से मारने की धमकी देने के आरोप

उरई (जालौन), 28 अक्टूबर 2026। जनपद जालौन के परासन गांव में कथित अवैध खनन और किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। ग्रामीण किसानों ने खनन से जुड़े ठेकेदारों और उनके कर्मचारियों पर खेतों में लगी सब्जियों को भारी मशीनों से नष्ट करने, विरोध करने पर धमकाने तथा पुलिस के माध्यम से झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का दावा है कि खनन गतिविधियों के कारण उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है और विरोध करने पर उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है।
इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, कथित अवैध खनन पर रोक लगाने, फसलों को हुए नुकसान का आकलन कराकर मुआवजा दिलाने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं ने अपने आरोपों के समर्थन में कुछ वीडियो और फोटो भी ज्ञापन के साथ संलग्न किए हैं।
नदी किनारे सब्जियों की खेती से चलता है परिवार का खर्च
जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, शिकायत करने वाले किसान ग्राम अलमौरी डेरा परासन के निवासी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके परिवार लंबे समय से नदी किनारे स्थित जमीन पर सब्जियों की खेती करके अपनी आजीविका चलाते हैं। खेती से होने वाली आमदनी से ही परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होती हैं।
किसानों का आरोप है कि परासन खंड संख्या 4032/15 से संबंधित खनन गतिविधियों के दौरान भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। शिकायत में खंड संचालक मेसर्स सलोनी इंटरप्राइजेज का नाम लेते हुए आरोप लगाया गया है कि खनन कार्य से जुड़े लोगों द्वारा किसानों की सब्जियों और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, खेतों में तैयार हो रही फसलें नष्ट होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि खेती में बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च करने के बाद जब फसल तैयार होती है, तब उसे नुकसान पहुंचने से परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।
हालांकि, फसलों को हुए वास्तविक नुकसान की राशि और कथित खनन गतिविधियों की वैधानिक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इन बिंदुओं पर संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
निर्धारित सीमा से बाहर खनन करने का भी आरोप
शिकायतकर्ता किसानों ने आरोप लगाया है कि खनन कार्य निर्धारित सीमांकन के बाहर तक किया जा रहा है। उनके अनुसार, यदि खनन निर्धारित क्षेत्र से बाहर होता है तो आसपास के खेतों और खेती योग्य जमीन पर उसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने पर आपत्ति जताई, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें कथित तौर पर दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ा। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि खनन क्षेत्र का राजस्व और खनन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में स्थलीय निरीक्षण कराया जाए।
उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि स्वीकृत खनन क्षेत्र, सीमांकन और मौके पर हो रही गतिविधियों का मिलान किया जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि खनन निर्धारित नियमों और सीमाओं के अनुरूप हो रहा है या नहीं।
यदि जांच के दौरान निर्धारित क्षेत्र से बाहर खनन अथवा अन्य अनियमितताएं सामने आती हैं, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई किए जाने की मांग ग्रामीणों ने की है।
26 अक्टूबर की घटना का जिक्र, किसान को बंदूक दिखाकर धमकाने का आरोप
शिकायती पत्र में 26 अक्टूबर 2026 को हुई एक कथित घटना का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। किसानों के अनुसार, उस दिन कठोरा पुत्र शिवराम अपनी सब्जियों की बारी में काम कर रहे थे। इसी दौरान खनन कार्य से जुड़े बताए गए शेर सिंह पुत्र अमर सिंह के साथ उनका विवाद होने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि शेर सिंह ने कथित तौर पर कठोरा के सीने पर बंदूक लगाकर उन्हें धमकाया। आरोप के मुताबिक, किसान को वहां से चले जाने के लिए कहा गया और दोबारा विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई।
इस घटना के सामने आने के बाद ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि खेतों में काम करने के दौरान यदि उन्हें सुरक्षा का भरोसा नहीं मिलेगा, तो उनके लिए खेती करना और अपने परिवारों का भरण-पोषण करना मुश्किल हो जाएगा।
हालांकि, बंदूक दिखाकर धमकाने की घटना के संबंध में संबंधित पक्षों का जवाब, पुलिस की आधिकारिक पुष्टि और किसी प्राथमिकी या अन्य कानूनी कार्रवाई का विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन आरोपों की सत्यता का निर्धारण संबंधित अधिकारियों की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
पुलिस की भूमिका पर भी ग्रामीणों ने उठाए सवाल
किसानों ने अपनी शिकायत में स्थानीय पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें पुलिस के माध्यम से झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि स्थानीय स्तर पर उन्हें अपेक्षित सहायता नहीं मिल रही है और खनन से जुड़े लोगों को कथित रूप से संरक्षण दिया जा रहा है।
इन आरोपों के मद्देनजर किसानों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच ऐसी होनी चाहिए, जिसमें किसानों की शिकायतों के साथ-साथ खनन कार्य से संबंधित अभिलेखों, घटनास्थल की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों को भी ध्यान में रखा जाए।
पुलिस की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की भी स्वतंत्र जांच आवश्यक होगी। संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाए गए हैं, इसकी जानकारी सामने आने पर ही प्रशासनिक कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
वीडियो और फोटो के साथ सौंपा शिकायती पत्र
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को दिए गए ज्ञापन के साथ वीडियो और फोटो संलग्न करने की बात कही है। किसानों को उम्मीद है कि इन सामग्रियों की जांच से घटनास्थल की स्थिति, फसलों को हुए संभावित नुकसान और खनन गतिविधियों से जुड़े तथ्यों को समझने में मदद मिलेगी।
शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से आग्रह किया है कि उपलब्ध वीडियो और फोटो की जांच कराई जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएं। साथ ही, मौके का निरीक्षण करके यह पता लगाया जाए कि किसानों की जमीन और फसलों को किस प्रकार नुकसान पहुंचा है।
ग्रामीणों की मांग है कि जांच के दौरान किसी भी पक्ष के दबाव में आए बिना सभी तथ्यों को निष्पक्षता से परखा जाए। उनका कहना है कि दोष सिद्ध होने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
किसानों ने मुआवजा और सुरक्षा की मांग की
शिकायती पत्र में किसानों ने मुख्य रूप से चार मांगें रखी हैं। पहली, कथित अवैध खनन की निष्पक्ष जांच कराकर नियमों के उल्लंघन पर रोक लगाई जाए। दूसरी, खेतों और सब्जियों को हुए नुकसान का आकलन कराकर पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाए। तीसरी, बंदूक दिखाकर धमकाने और अन्य आरोपों की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। चौथी, किसानों को सुरक्षा प्रदान करते हुए उनकी आजीविका और खेती की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि वे मेहनत करके अपने परिवारों का पालन-पोषण करते हैं। ऐसे में फसलें नष्ट होने और विरोध करने पर धमकियां मिलने के आरोपों ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने प्रशासन से समयबद्ध कार्रवाई कर न्याय दिलाने की अपील की है।
ज्ञापन सौंपने वालों में सत्यप्रकाश निषाद, गोविंद नारायण, रामहेत, प्रमोद, दशाराम, गयाप्रसाद, महादेव, प्रकाश, धर्मेंद्र, हरीकिशन, कढोरे, शिवनारायण और रामकुमार सहित अन्य किसान शामिल रहे।
प्रशासनिक जांच से स्पष्ट होगी मामले की वास्तविक स्थिति
परासन गांव से जुड़ा यह मामला किसानों की आजीविका, खनन गतिविधियों के नियमन और ग्रामीणों की सुरक्षा से संबंधित गंभीर सवाल उठाता है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए खनन क्षेत्र का निरीक्षण, सीमांकन की जांच, फसलों के नुकसान का आकलन और कथित धमकी की घटना से जुड़े साक्ष्यों का परीक्षण महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल, ग्रामीणों की ओर से जिलाधिकारी को शिकायत सौंपकर कार्रवाई की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में प्रशासन, खनन विभाग और पुलिस की ओर से आधिकारिक जांच या कार्रवाई का विवरण उपलब्ध होने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब किसानों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन उनकी शिकायत पर संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराएगा और तथ्यों के आधार पर उचित कदम उठाएगा। ग्रामीणों की मांग है कि खेती योग्य जमीन को नुकसान से बचाया जाए, खनन संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित हो और शिकायत करने वाले किसानों को बिना किसी भय के अपनी आजीविका चलाने का अवसर मिले।
