PM SVANidhi योजना ने बदली लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की तस्वीर: 76.95 लाख लाभार्थियों को ₹18,475 करोड़ से अधिक के ऋण, आय में औसतन 20% बढ़ोतरी
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प्रस्तावना
देश के छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) योजना लगातार सकारात्मक परिणाम दे रही है। यह योजना केवल ऋण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे कारोबारियों को आत्मनिर्भर बनाने, उनकी आय बढ़ाने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
राज्यसभा में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री तोखन साहू द्वारा दिए गए लिखित उत्तर के अनुसार, 12 जुलाई 2026 तक देशभर में 76.95 लाख स्ट्रीट वेंडर्स को 1.15 करोड़ से अधिक ऋण वितरित किए जा चुके हैं। इन ऋणों की कुल राशि ₹18,475 करोड़ से अधिक है। योजना के तहत लाभार्थियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह पहल छोटे व्यापारियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है।
क्या है प्रधानमंत्री स्वनिधि (PM SVANidhi) योजना?
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की शुरुआत वर्ष 2020 में उन रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की सहायता के लिए की गई थी, जिनकी आजीविका कोविड-19 महामारी के दौरान गंभीर रूप से प्रभावित हुई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे छोटे व्यापारियों को बिना किसी बड़ी जमानत के आसान शर्तों पर कार्यशील पूंजी (Working Capital) उपलब्ध कराना है ताकि वे अपना कारोबार दोबारा शुरू कर सकें और उसे आगे बढ़ा सकें।
योजना की विशेषता यह है कि समय पर ऋण चुकाने वाले लाभार्थियों को अगली बार अधिक राशि का ऋण लेने की सुविधा भी मिलती है। साथ ही डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और समय पर पुनर्भुगतान करने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाता है।
76.95 लाख स्ट्रीट वेंडर्स को मिला लाभ
सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 12 जुलाई 2026 तक देशभर में 76.95 लाख स्ट्रीट वेंडर्स इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। इन लाभार्थियों को 1.15 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत और वितरित किए गए हैं।
अब तक वितरित कुल ऋण राशि ₹18,475 करोड़ से अधिक पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि योजना का दायरा लगातार बढ़ रहा है और अधिक से अधिक छोटे व्यापारी औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जुड़ रहे हैं।
तीन चरणों में मिलता है कार्यशील पूंजी ऋण
PM SVANidhi योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
योजना के तहत उपलब्ध ऋण इस प्रकार हैं—
- पहला ऋण: ₹15,000 तक
- दूसरा ऋण: ₹25,000 तक
- तीसरा ऋण: ₹50,000 तक
यदि लाभार्थी समय पर पहली किश्त का भुगतान कर देता है, तो उसे अगली बार अधिक राशि का ऋण लेने का अवसर मिलता है। इससे छोटे व्यापारियों को अपने व्यवसाय का विस्तार करने में सहायता मिलती है।
दूसरी और तीसरी ऋण किश्त का भी बढ़ा दायरा
सरकार के अनुसार—
- 29.71 लाख स्ट्रीट वेंडर्स दूसरी ऋण किश्त प्राप्त कर चुके हैं।
- 8.49 लाख लाभार्थियों को तीसरी ऋण किश्त भी उपलब्ध कराई जा चुकी है।
यह दर्शाता है कि बड़ी संख्या में लाभार्थी समय पर ऋण का पुनर्भुगतान कर रहे हैं और योजना का लाभ लगातार आगे बढ़ाकर प्राप्त कर रहे हैं।
‘स्वनिधि से समृद्धि’ पहल से सामाजिक सुरक्षा का विस्तार
PM SVANidhi योजना के साथ ‘स्वनिधि से समृद्धि’ (Svanidhi se Samriddhi) अभियान भी संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं बल्कि लाभार्थियों और उनके परिवारों को विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना भी है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार—
- 50.63 लाख लाभार्थियों को इस पहल से जोड़ा गया।
- इनके साथ 1.06 करोड़ परिवार के सदस्य भी विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
इन योजनाओं में स्वास्थ्य, बीमा, पेंशन, खाद्य सुरक्षा, जनधन खाते और अन्य सरकारी सुविधाएं शामिल हैं। इससे छोटे व्यापारियों के परिवारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मजबूत हुई है।
व्यापारिक आय में औसतन 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी
योजना पर किए गए अध्ययन में यह सामने आया है कि PM SVANidhi के लाभार्थियों की वार्षिक व्यापारिक आय में औसतन 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
यह वृद्धि कई कारणों से संभव हुई—
- पर्याप्त कार्यशील पूंजी मिलने से कारोबार नियमित हुआ।
- समय पर सामान खरीदने की क्षमता बढ़ी।
- ग्राहकों की मांग पूरी करने में आसानी हुई।
- डिजिटल भुगतान अपनाने से बिक्री के अवसर बढ़े।
- औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने के कारण भविष्य में अन्य वित्तीय सेवाओं तक पहुंच आसान हुई।
यह परिणाम इस योजना की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
डिजिटल भुगतान को भी मिल रहा बढ़ावा
PM SVANidhi योजना केवल ऋण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। सरकार ने इसे डिजिटल अर्थव्यवस्था से भी जोड़ा है।
लाभार्थियों को डिजिटल लेनदेन अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। यूपीआई, क्यूआर कोड और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों का उपयोग करने वाले विक्रेताओं को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाती है।
इससे—
- नकदी पर निर्भरता कम होती है।
- लेनदेन का रिकॉर्ड तैयार होता है।
- भविष्य में बैंकिंग सुविधाएं प्राप्त करना आसान बनता है।
- ग्राहकों को भुगतान में सुविधा मिलती है।
छोटे कारोबारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?
देश में लाखों परिवार अपनी आजीविका रेहड़ी-पटरी और छोटे व्यापार पर निर्भर हैं। पहले इन व्यापारियों को पूंजी की आवश्यकता होने पर निजी साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर पैसा लेना पड़ता था।
PM SVANidhi योजना ने इस समस्या का समाधान किया है। अब पात्र स्ट्रीट वेंडर्स को संस्थागत ऋण उपलब्ध हो रहा है, जिससे—
- ऊंचे ब्याज से राहत मिली।
- कारोबार में निवेश बढ़ा।
- आय में सुधार हुआ।
- वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला।
- आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती मिली।
औपचारिक अर्थव्यवस्था से जुड़ रहे हैं स्ट्रीट वेंडर्स
योजना का एक बड़ा लाभ यह भी है कि पहले जो स्ट्रीट वेंडर्स औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से दूर थे, वे अब बैंक खातों, डिजिटल भुगतान और सरकारी योजनाओं से जुड़ रहे हैं।
इससे भविष्य में उन्हें अन्य वित्तीय उत्पादों, बीमा, पेंशन और सरकारी सहायता योजनाओं का लाभ प्राप्त करने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का लक्ष्य केवल ऋण वितरण नहीं बल्कि छोटे व्यापारियों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। इसी उद्देश्य से योजना में आर्थिक सहायता के साथ सामाजिक सुरक्षा, डिजिटल सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन को भी शामिल किया गया है।
योजना के माध्यम से छोटे व्यवसायों को मजबूत कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे रोजगार सृजन और शहरी आजीविका को भी बल मिल रहा है।
निष्कर्ष
PM SVANidhi योजना देश के लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा बनकर उभरी है। 12 जुलाई 2026 तक 76.95 लाख लाभार्थियों को ₹18,475 करोड़ से अधिक के 1.15 करोड़ ऋण प्रदान किए जाना इसकी व्यापक सफलता को दर्शाता है। दूसरी और तीसरी ऋण किश्त प्राप्त करने वाले लाखों लाभार्थियों की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि योजना पर लोगों का विश्वास मजबूत हुआ है।
इसके साथ ही ‘स्वनिधि से समृद्धि’ पहल के माध्यम से करोड़ों लोगों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना और लाभार्थियों की व्यापारिक आय में औसतन 20 प्रतिशत वृद्धि दर्ज होना इस योजना की प्रभावशीलता को और अधिक मजबूत बनाता है। आने वाले वर्षों में यदि इसी गति से योजना का विस्तार जारी रहता है, तो यह देश के छोटे व्यापारियों को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।