प्रयागराज में गंगा-यमुना का बढ़ा जलस्तर, बाढ़ के बीच भी जल रही अखंड ज्योति; माघ मेला क्षेत्र में चारों ओर पानी

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प्रयागराज, 3 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश समेत उत्तराखंड और बिहार के कई इलाकों में लगातार…

प्रयागराज, 3 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश समेत उत्तराखंड और बिहार के कई इलाकों में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति को गंभीर बना दिया है। प्रयागराज में भी गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर के कारण संगम क्षेत्र, नदी किनारे के इलाकों और निचले स्थानों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई है।

प्रयागराज की पहचान गंगा, यमुना और पौराणिक रूप से सरस्वती के संगम से जुड़ी है। संगम क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से देशभर में विशेष महत्व रखता है। सामान्य दिनों में जहां यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही, पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां दिखाई देती हैं, वहीं इस समय बढ़े जलस्तर ने पूरे इलाके का स्वरूप बदल दिया है।

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गंगा-यमुना के बढ़ते पानी से बढ़ी चिंता

प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार दोनों नदियों के जलस्तर को लेकर प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। कुछ निगरानी केंद्रों पर पानी बढ़ने की स्थिति सामने आई है, जबकि कुछ स्थानों पर इसमें कमी भी दर्ज की गई है। इसके बावजूद निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है।

नदी का पानी बढ़ने से तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर सड़कें और रास्ते पानी से प्रभावित हुए हैं। कुछ निचले आवासीय क्षेत्रों में भी पानी पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों की चिंता लगातार बढ़ रही है।

प्रशासन ने संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राहत और बचाव संबंधी तैयारियां सक्रिय रखी हैं। निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने तथा परिस्थिति बिगड़ने पर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की सलाह दी जा रही है।

शास्त्री पुल के आसपास बदला नजारा

गंगा-यमुना के बढ़ते पानी का असर प्रयागराज के प्रमुख नदी किनारे वाले क्षेत्रों पर भी दिखाई दे रहा है। शास्त्री पुल के आसपास का क्षेत्र भी बाढ़ के पानी से प्रभावित नजर आ रहा है। जहां सामान्य समय में लोगों की आवाजाही और नदी के सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं, वहां अब पानी का विस्तार चिंता का कारण बना हुआ है।

संगम क्षेत्र की ओर जाने वाले कई रास्तों और निचले हिस्सों में पानी पहुंचने से सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। बाढ़ का पानी केवल प्राकृतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के कई हिस्सों में भी इसका असर देखा जा रहा है।

माघ मेला क्षेत्र में पानी ही पानी

प्रयागराज का माघ मेला धार्मिक आस्था और विशाल अस्थायी शिविरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और संगम तट पर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। प्रशासन द्वारा मेले के दौरान टेंट, सड़क, बिजली, पानी, स्वच्छता और सुरक्षा जैसी सुविधाओं की व्यापक व्यवस्था की जाती है।

लेकिन इस समय बढ़ते नदी जलस्तर ने मेला क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। रिपोर्ट में दिखाई गई तस्वीरों में माघ मेला क्षेत्र का बड़ा हिस्सा पानी से घिरा नजर आता है। जहां कभी टेंट और धार्मिक गतिविधियों का माहौल रहता है, वहां अब बाढ़ का पानी दिखाई दे रहा है।

यह दृश्य प्रयागराज में नदी के बढ़ते प्रभाव को साफ तौर पर सामने रखता है। संगम और आसपास के रेतीले इलाकों का बड़ा हिस्सा जलमग्न होने से सामान्य आवाजाही भी प्रभावित हुई है।

बाढ़ के बीच चर्चा में आई अखंड ज्योति

इस पूरी बाढ़ की स्थिति के बीच प्रयागराज के संगम क्षेत्र से आस्था से जुड़ी एक तस्वीर लोगों का ध्यान खींच रही है। झूंसी पुल के नीचे स्थित एक मचाननुमा आश्रम के आसपास बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। मचान का निचला हिस्सा और आसपास का क्षेत्र पानी से घिरा हुआ है, लेकिन ऊंचाई पर स्थापित कांच से सुरक्षित स्थान में रखी अखंड ज्योति अब भी प्रज्वलित बताई जा रही है।

यह अखंड ज्योति देवरहा बाबा की परंपरा से जुड़े संत रामदास महाराज के आश्रम से संबंधित बताई गई है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार इस ज्योति की सेवा लंबे समय से की जा रही है और बाढ़ के समय भी इसकी देखभाल के लिए नाव के जरिए मचान तक पहुंचा जाता है।

ऊंचाई पर सुरक्षित स्थान में जलती यह ज्योति बाढ़ से घिरे वातावरण में अलग ही दृश्य प्रस्तुत कर रही है। चारों ओर पानी और उसके बीच लगातार प्रकाशित लौ लोगों के लिए धार्मिक आस्था और विश्वास का प्रतीक बन गई है।

करीब दो दशक से जुड़ी है ज्योति की परंपरा

इस आश्रम और अखंड ज्योति से जुड़ी जानकारी के अनुसार इसकी परंपरा लगभग दो दशक पुरानी बताई जाती है। माघ मेला समाप्त होने के बाद जहां अधिकांश अस्थायी शिविर हटा दिए जाते हैं, वहीं यह मचाननुमा आश्रम पूरे वर्ष मौजूद रहता है।

अखंड ज्योति को ऊंचाई पर स्थापित करने की व्यवस्था के कारण बाढ़ का पानी आसपास पहुंचने के बावजूद लौ सुरक्षित रहने की संभावना बनी रहती है। रिपोर्टों में बताया गया है कि इसे कांच से सुरक्षित मंच में रखा गया है। यही वजह है कि जलभराव के बीच भी ज्योति दिखाई दे रही है।

धार्मिक मान्यता के स्तर पर इस ज्योति को मानवता, समाज और देश के कल्याण की कामना से जोड़ा जाता है। ऐसी आस्था लोगों को कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद और सकारात्मकता का संदेश देती है।

प्रशासन के सामने चुनौती

प्रयागराज में बाढ़ की स्थिति केवल धार्मिक स्थलों और मेला क्षेत्र तक सीमित नहीं है। नदी किनारे बसे आवासीय इलाकों, सड़कों और अन्य निचले क्षेत्रों में पानी पहुंचने से प्रशासन के सामने राहत एवं सुरक्षा की चुनौती बढ़ गई है।

बाढ़ के दौरान सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा होती है। संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी, जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और राहत सामग्री उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए अहम कार्य हैं। राज्य के कई अन्य जिलों में भी भारी बारिश और नदियों के उफान के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है।

आस्था और प्राकृतिक संकट का अनोखा दृश्य

प्रयागराज की मौजूदा तस्वीर एक ओर प्रकृति की ताकत को दिखाती है तो दूसरी ओर लोगों की आस्था और धैर्य को भी सामने लाती है। गंगा और यमुना का बढ़ता पानी जहां तटीय क्षेत्रों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, वहीं बाढ़ के बीच जलती अखंड ज्योति लोगों के लिए विश्वास का दृश्य प्रस्तुत कर रही है।

हालांकि ऐसी परिस्थितियों में धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना जरूरी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से जाने के बजाय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना और सुरक्षित स्थानों पर रहना ही सबसे महत्वपूर्ण है।

फिलहाल प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर पर निगरानी जारी है। आने वाले समय में नदियों के जलस्तर और बारिश की स्थिति के आधार पर बाढ़ का प्रभाव कम या अधिक हो सकता है। संगम नगरी के लोगों के लिए यह समय सतर्क रहने का है, जबकि बाढ़ के बीच दिखाई दे रही अखंड ज्योति कठिन परिस्थितियों में उम्मीद और विश्वास की एक मार्मिक तस्वीर बनकर सामने आई है।

नोट: जलस्तर और बाढ़ की स्थिति तेजी से बदल सकती है, इसलिए स्थानीय प्रशासन की ताजा सूचनाओं को प्राथमिकता देना उचित है।

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