रायबरेली में सदस्यता अभियान को लेकर सपा छात्रसभा और एबीवीपी आमने-सामने, विवाद के बाद बढ़ा तनाव

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रविकांत पाण्डेय

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ रायबरेली

रायबरेली, 17 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश के रायबरेली में फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज के बाहर छात्र संगठनों के सदस्यता अभियान को लेकर गुरुवार को विवाद सामने आया। समाजवादी छात्रसभा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े कार्यकर्ताओं के आमने-सामने आने के बाद स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई। शुरुआती विवाद सदस्यता अभियान के लिए लगाए गए बैनर और काउंटर को लेकर बताया जा रहा है। इसके बाद कहासुनी, नारेबाजी और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों से बातचीत की और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

छात्रसभा ने शुरू किया था सदस्यता एवं जागरूकता अभियान

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक समाजवादी छात्रसभा की ओर से फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में छात्र-नौजवान पीडीए जागरूकता एवं सदस्यता अभियान चलाया जा रहा था। इस अभियान का नेतृत्व समाजवादी छात्रसभा के जिला अध्यक्ष शुभम लोहिया ने किया। एक दिन पहले जारी रिपोर्ट में बताया गया था कि अभियान के दौरान छात्रों से शिक्षा, रोजगार, शुल्क और छात्रहित से जुड़े विषयों पर संवाद किया गया तथा कई छात्र-छात्राओं ने संगठन की सदस्यता ली।

समाजवादी छात्रसभा की ओर से इस अभियान को छात्रों और युवाओं के बीच संवाद बढ़ाने की गतिविधि के रूप में प्रस्तुत किया गया। संगठन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि छात्र मुद्दों पर युवाओं की भागीदारी बढ़ाना अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।

बैनर को लेकर शुरू हुई कहासुनी

गुरुवार को कॉलेज के बाहर लगाए गए सदस्यता अभियान के बैनर को लेकर दोनों छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद की स्थिति बनी। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने अभियान के लिए लगाए गए काउंटर और बैनर का विरोध किया। इसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी हुई और मामला आगे बढ़ गया।

विवाद के दौरान धक्का-मुक्की और नारेबाजी की स्थिति बनने की भी रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, घटना के अलग-अलग पहलुओं को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग हैं। इसलिए पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच और उपलब्ध वीडियो फुटेज तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।

दोनों पक्षों ने लगाए आरोप

समाजवादी छात्रसभा से जुड़े लोगों की ओर से आरोप लगाया गया कि उनके सदस्यता अभियान में बाधा डाली गई और कार्यकर्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार तथा धक्का-मुक्की की गई। संगठन से जुड़े लोगों ने घटना पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की।

दूसरी ओर, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने भी समाजवादी छात्रसभा से जुड़े लोगों पर अभद्रता का आरोप लगाया और मामले में कार्रवाई की मांग की। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने विवाद के बाद कॉलेज गेट के बाहर धरना भी दिया।

इस प्रकार घटना को लेकर दोनों संगठनों के आरोप एक-दूसरे से अलग हैं। किसी भी आरोप की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही मानी जा सकती है।

पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में बढ़ा मामला

विवाद की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार सीओ आशीष निगम, सिटी मजिस्ट्रेट राम अवतार और एसडीएम सदर गौतम सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे तथा दोनों पक्षों से बातचीत कर माहौल शांत कराने का प्रयास किया।

अधिकारियों की मौजूदगी में प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया गया। कुछ समय के लिए कॉलेज के मुख्य गेट और आसपास के मार्ग पर गतिविधियां प्रभावित हुईं। प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी तरह की स्थिति को आगे बढ़ने से रोकना रही।

सपा जिलाध्यक्ष और कोतवाल के बीच भी हुई तीखी बहस

विवाद के दौरान समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र यादव और शहर कोतवाली प्रभारी शिव शंकर सिंह के बीच भी तीखी बहस होने की खबर सामने आई। इस घटनाक्रम ने मामले को और राजनीतिक रूप दे दिया। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में दोनों के बीच तीखी नोकझोंक का उल्लेख किया गया है।

मामले के बढ़ने के बाद पुलिस प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की।

एसपी कार्यालय तक पहुंचा विवाद

कॉलेज के बाहर हुए विवाद के बाद मामला पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक भी पहुंचा। रिपोर्टों के अनुसार समाजवादी पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने एसपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और पुलिस की कार्रवाई को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। इसी दौरान दोनों पक्षों के लोगों के फिर आमने-सामने आने की स्थिति बनी।

इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि कॉलेज परिसर के बाहर शुरू हुआ विवाद कुछ समय में व्यापक राजनीतिक टकराव का रूप लेने लगा। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी।

वीडियो फुटेज की जांच से सामने आ सकता है घटनाक्रम

घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया और अन्य सार्वजनिक माध्यमों पर सामने आने की बात कही जा रही है। ऐसे वीडियो मामले की जांच में उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन किसी वीडियो की प्रामाणिकता, उसका पूरा संदर्भ और रिकॉर्डिंग का क्रम जांच के बाद ही निर्धारित किया जा सकता है।

पुलिस द्वारा उपलब्ध वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटनास्थल से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद की शुरुआत किस परिस्थिति में हुई और धक्का-मुक्की या कथित अभद्रता के लिए कौन जिम्मेदार था।

छात्र राजनीति में बढ़ी गतिविधियां

रायबरेली की घटना ऐसे समय सामने आई है जब समाजवादी छात्रसभा प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र-नौजवान पीडीए जागरूकता एवं सदस्यता अभियान चला रही है। समाजवादी पार्टी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में 15 सितंबर 2026 से सदस्यता अभियान शुरू किया गया है।

दूसरी ओर, एबीवीपी भी विभिन्न जिलों में अपना सदस्यता अभियान चला रहा है। ऐसे में कॉलेज परिसरों और उनके आसपास छात्र संगठनों की राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। रायबरेली की घटना ने इसी पृष्ठभूमि में छात्र राजनीति और कॉलेज परिसर में अनुशासन को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती

कॉलेजों में छात्र संगठनों की गतिविधियां लोकतांत्रिक भागीदारी का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन किसी भी अभियान या विरोध के दौरान कानून-व्यवस्था और संस्थागत नियमों का पालन जरूरी है। रायबरेली की घटना में भी प्रशासन के सामने यही चुनौती रही कि दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव को समय रहते नियंत्रित किया जाए।

कॉलेज प्रशासन और पुलिस की भूमिका इस मामले में महत्वपूर्ण है। यदि किसी पक्ष की ओर से नियमों का उल्लंघन या आपराधिक कृत्य सामने आता है तो जांच के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

निष्कर्ष

रायबरेली के फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज के बाहर सदस्यता अभियान को लेकर हुआ विवाद अब जांच का विषय है। समाजवादी छात्रसभा ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी और अभियान में बाधा डालने के आरोप लगाए हैं, जबकि एबीवीपी की ओर से भी अभद्रता के आरोप लगाए गए हैं। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के जरिए होनी बाकी है।

फिलहाल प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखने की कोशिश की है। घटना से जुड़े वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ने की उम्मीद है। कॉलेज परिसर में छात्र संगठनों की गतिविधियों के बीच शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना सभी पक्षों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। मामले में आगे होने वाली पुलिस कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष से ही विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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