कुंडा में राजा भैया की पारंपरिक शस्त्र पूजा, 500 से अधिक लाइसेंसी असलहों के बीच वैदिक मंत्रों से हुआ अनुष्ठान

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अंशुमान द्विवेदी

हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता प्रतापगढ़

प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश। विजयादशमी के पावन अवसर पर प्रतापगढ़ जिले के कुंडा स्थित बेंती कोठी में पारंपरिक शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया। इस दौरान जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की। आयोजन में 500 से अधिक लाइसेंसी असलहों को एक साथ व्यवस्थित तरीके से सजाया गया। पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई। इस अवसर पर राजा भैया के समर्थकों, शुभचिंतकों और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी देखने को मिली।

विजयादशमी के मौके पर आयोजित यह कार्यक्रम धार्मिक आस्था, पारिवारिक परंपरा और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के कारण चर्चा में रहा। पूजा के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया। अनुष्ठान पूरा होने के बाद आरती की गई और उपस्थित लोगों को प्रसाद वितरित किया गया।

पारंपरिक भारतीय वेशभूषा में पहुंचे राजा भैया

बेंती कोठी में आयोजित कार्यक्रम में राजा भैया भारतीय पारंपरिक परिधान में नजर आए। उन्होंने केसरिया साफा, धोती और कुर्ता धारण किया था। उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक भी कार्यक्रम में शामिल हुए। आयोजन स्थल पर विभिन्न लोगों के लाइसेंसी शस्त्र निर्धारित व्यवस्था के अनुसार रखे गए थे।

पूजा की शुरुआत धार्मिक विधि-विधान के साथ हुई। पुरोहितों ने मंत्रोच्चार करते हुए शस्त्रों का पूजन कराया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया और विजयादशमी की शुभकामनाएं एक-दूसरे को दीं।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, राजा भैया ने अपने परिवार के आठ शस्त्रों का पूजन किया। वहीं, अन्य शस्त्र उनके समर्थकों के लाइसेंसी असलहे बताए गए। पूजा संपन्न होने के बाद आरती और प्रसाद वितरण की प्रक्रिया पूरी की गई।

कार्यक्रम में पारंपरिक परिधान और धार्मिक अनुष्ठान विशेष आकर्षण रहे। बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने आयोजन को महत्वपूर्ण बना दिया।

दूसरे साल भी समर्थकों के साथ आयोजित हुआ कार्यक्रम

विजयादशमी पर राजा भैया द्वारा समर्थकों के साथ शस्त्र पूजन किए जाने का यह लगातार दूसरा वर्ष बताया गया है। आयोजन में प्रतापगढ़ के विभिन्न इलाकों के अलावा दूसरे क्षेत्रों और राज्यों से भी समर्थकों के पहुंचने की जानकारी सामने आई।

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने राजा भैया से मुलाकात की और उन्हें दशहरा पर्व की बधाई दी। इस दौरान बेंती कोठी में काफी चहल-पहल रही। समर्थकों के बीच पारंपरिक पूजा को लेकर उत्साह दिखाई दिया।

शस्त्र पूजन भारतीय समाज की उन परंपराओं में शामिल है, जिनमें साधनों, उपकरणों और शस्त्रों के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। विजयादशमी के अवसर पर इस परंपरा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। इसी मान्यता के अनुरूप बेंती कोठी में भी अनुष्ठान संपन्न कराया गया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लाइसेंसी असलहों का एक साथ प्रदर्शित होना भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। हालांकि, आयोजन का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शस्त्र पूजन करना बताया गया।

सनातन परंपराओं से जुड़ने का दिया संदेश

पूजा संपन्न होने के बाद राजा भैया ने उपस्थित समर्थकों को संबोधित किया। उन्होंने शस्त्र पूजन को भारतीय सनातन संस्कृति और प्राचीन परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण अनुष्ठान बताया। उनके अनुसार, विजयादशमी का पर्व सत्य की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है।

मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि दशहरे के अवसर पर शस्त्र पूजन की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। उनके परिवार में भी इस धार्मिक परंपरा का पालन किया जाता रहा है।

राजा भैया ने भारतीय संस्कृति की विरासत को सुरक्षित रखने और नई पीढ़ी को उससे परिचित कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि त्योहार केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं होते, बल्कि इनके माध्यम से समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से भी जुड़ा रहता है।

उनकी बातों में पारिवारिक परंपराओं को आगे बढ़ाने और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिखाई दिया।

युवाओं से भारतीय पारंपरिक पहनावे को अपनाने की अपील

कार्यक्रम के दौरान राजा भैया ने भारतीय पारंपरिक वेशभूषा के महत्व पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के बीच धोती-कुर्ता पहनने का चलन पहले की तुलना में कम होता नजर आ रहा है। ऐसे में पारंपरिक भारतीय पहनावे को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।

उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और अन्य विशेष अवसरों पर धोती-कुर्ता जैसे पारंपरिक वस्त्र पहनने को प्राथमिकता दें। उनके अनुसार, भारतीय परिधान हमारी सांस्कृतिक पहचान और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

राजा भैया ने इस बात पर भी जोर दिया कि परंपराओं को जीवित रखने के लिए केवल उनके बारे में चर्चा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और जीवनशैली में भी स्थान देना चाहिए।

कार्यक्रम में शामिल कई लोग पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे थे। इस कारण धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ भारतीय पहनावे को लेकर दिया गया संदेश भी चर्चा में रहा।

विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की क्या है मान्यता?

हिंदू धार्मिक परंपराओं में विजयादशमी को विशेष महत्व दिया गया है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत, धर्म की स्थापना और सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में दशहरे के दिन शस्त्रों, औजारों, वाहनों और आजीविका से जुड़े उपकरणों की पूजा करने की परंपरा प्रचलित है।

शस्त्र पूजन की परंपरा को शक्ति, साहस, कर्तव्य और जिम्मेदारी के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। ऐतिहासिक रूप से विभिन्न समुदायों और राजपरिवारों में विशेष अवसरों पर शस्त्रों का पूजन किए जाने की परंपरा रही है।

आधुनिक समय में भी अनेक स्थानों पर विजयादशमी के दिन लोग अपने कार्यक्षेत्र से जुड़े उपकरणों और साधनों का पूजन करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अनुष्ठान के माध्यम से लोग अपने कार्यों में सफलता, सुरक्षा और समृद्धि की कामना करते हैं।

कुंडा के बेंती कोठी में आयोजित कार्यक्रम भी इसी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा से जुड़ा रहा। यहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न कराई गई और उपस्थित लोगों ने धार्मिक रीति-रिवाजों में भाग लिया।

बेंती कोठी का आयोजन बना चर्चा का विषय

प्रतापगढ़ जिले के कुंडा में आयोजित राजा भैया का शस्त्र पूजन विजयादशमी के अवसर पर चर्चा का प्रमुख विषय रहा। कार्यक्रम में 500 से अधिक लाइसेंसी असलहों को सजाए जाने, पारंपरिक वेशभूषा और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न होने ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ परिवार की पुरानी परंपराओं और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश भी सामने आया। राजा भैया ने अपने संबोधन में शस्त्र पूजन की ऐतिहासिक परंपरा का उल्लेख करते हुए युवाओं को भारतीय पहनावे और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहने की अपील की।

कार्यक्रम का समापन पूजा-अर्चना, आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं।

कुल मिलाकर, कुंडा की बेंती कोठी में आयोजित यह शस्त्र पूजन धार्मिक मान्यताओं, पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को केंद्र में रखने वाला आयोजन रहा। विजयादशमी के अवसर पर इसके माध्यम से भारतीय परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने और पारंपरिक वेशभूषा को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया।

रिपोर्ट: प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश

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कुंडा में राजा भैया की पारंपरिक शस्त्र पूजा, 500 से अधिक लाइसेंसी असलहों के बीच वैदिक मंत्रों से हुआ अनुष्ठान

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 21, 2026

अंशुमान द्विवेदी

हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता प्रतापगढ़

प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश। विजयादशमी के पावन अवसर पर प्रतापगढ़ जिले के कुंडा स्थित बेंती कोठी में पारंपरिक शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया। इस दौरान जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की। आयोजन में 500 से अधिक लाइसेंसी असलहों को एक साथ व्यवस्थित तरीके से सजाया गया। पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई। इस अवसर पर राजा भैया के समर्थकों, शुभचिंतकों और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी देखने को मिली।

विजयादशमी के मौके पर आयोजित यह कार्यक्रम धार्मिक आस्था, पारिवारिक परंपरा और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के कारण चर्चा में रहा। पूजा के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया। अनुष्ठान पूरा होने के बाद आरती की गई और उपस्थित लोगों को प्रसाद वितरित किया गया।

पारंपरिक भारतीय वेशभूषा में पहुंचे राजा भैया

बेंती कोठी में आयोजित कार्यक्रम में राजा भैया भारतीय पारंपरिक परिधान में नजर आए। उन्होंने केसरिया साफा, धोती और कुर्ता धारण किया था। उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक भी कार्यक्रम में शामिल हुए। आयोजन स्थल पर विभिन्न लोगों के लाइसेंसी शस्त्र निर्धारित व्यवस्था के अनुसार रखे गए थे।

पूजा की शुरुआत धार्मिक विधि-विधान के साथ हुई। पुरोहितों ने मंत्रोच्चार करते हुए शस्त्रों का पूजन कराया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया और विजयादशमी की शुभकामनाएं एक-दूसरे को दीं।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, राजा भैया ने अपने परिवार के आठ शस्त्रों का पूजन किया। वहीं, अन्य शस्त्र उनके समर्थकों के लाइसेंसी असलहे बताए गए। पूजा संपन्न होने के बाद आरती और प्रसाद वितरण की प्रक्रिया पूरी की गई।

कार्यक्रम में पारंपरिक परिधान और धार्मिक अनुष्ठान विशेष आकर्षण रहे। बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने आयोजन को महत्वपूर्ण बना दिया।

दूसरे साल भी समर्थकों के साथ आयोजित हुआ कार्यक्रम

विजयादशमी पर राजा भैया द्वारा समर्थकों के साथ शस्त्र पूजन किए जाने का यह लगातार दूसरा वर्ष बताया गया है। आयोजन में प्रतापगढ़ के विभिन्न इलाकों के अलावा दूसरे क्षेत्रों और राज्यों से भी समर्थकों के पहुंचने की जानकारी सामने आई।

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने राजा भैया से मुलाकात की और उन्हें दशहरा पर्व की बधाई दी। इस दौरान बेंती कोठी में काफी चहल-पहल रही। समर्थकों के बीच पारंपरिक पूजा को लेकर उत्साह दिखाई दिया।

शस्त्र पूजन भारतीय समाज की उन परंपराओं में शामिल है, जिनमें साधनों, उपकरणों और शस्त्रों के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। विजयादशमी के अवसर पर इस परंपरा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। इसी मान्यता के अनुरूप बेंती कोठी में भी अनुष्ठान संपन्न कराया गया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लाइसेंसी असलहों का एक साथ प्रदर्शित होना भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। हालांकि, आयोजन का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शस्त्र पूजन करना बताया गया।

सनातन परंपराओं से जुड़ने का दिया संदेश

पूजा संपन्न होने के बाद राजा भैया ने उपस्थित समर्थकों को संबोधित किया। उन्होंने शस्त्र पूजन को भारतीय सनातन संस्कृति और प्राचीन परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण अनुष्ठान बताया। उनके अनुसार, विजयादशमी का पर्व सत्य की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है।

मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि दशहरे के अवसर पर शस्त्र पूजन की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। उनके परिवार में भी इस धार्मिक परंपरा का पालन किया जाता रहा है।

राजा भैया ने भारतीय संस्कृति की विरासत को सुरक्षित रखने और नई पीढ़ी को उससे परिचित कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि त्योहार केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं होते, बल्कि इनके माध्यम से समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से भी जुड़ा रहता है।

उनकी बातों में पारिवारिक परंपराओं को आगे बढ़ाने और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिखाई दिया।

युवाओं से भारतीय पारंपरिक पहनावे को अपनाने की अपील

कार्यक्रम के दौरान राजा भैया ने भारतीय पारंपरिक वेशभूषा के महत्व पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के बीच धोती-कुर्ता पहनने का चलन पहले की तुलना में कम होता नजर आ रहा है। ऐसे में पारंपरिक भारतीय पहनावे को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।

उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और अन्य विशेष अवसरों पर धोती-कुर्ता जैसे पारंपरिक वस्त्र पहनने को प्राथमिकता दें। उनके अनुसार, भारतीय परिधान हमारी सांस्कृतिक पहचान और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

राजा भैया ने इस बात पर भी जोर दिया कि परंपराओं को जीवित रखने के लिए केवल उनके बारे में चर्चा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और जीवनशैली में भी स्थान देना चाहिए।

कार्यक्रम में शामिल कई लोग पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे थे। इस कारण धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ भारतीय पहनावे को लेकर दिया गया संदेश भी चर्चा में रहा।

विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की क्या है मान्यता?

हिंदू धार्मिक परंपराओं में विजयादशमी को विशेष महत्व दिया गया है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत, धर्म की स्थापना और सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में दशहरे के दिन शस्त्रों, औजारों, वाहनों और आजीविका से जुड़े उपकरणों की पूजा करने की परंपरा प्रचलित है।

शस्त्र पूजन की परंपरा को शक्ति, साहस, कर्तव्य और जिम्मेदारी के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। ऐतिहासिक रूप से विभिन्न समुदायों और राजपरिवारों में विशेष अवसरों पर शस्त्रों का पूजन किए जाने की परंपरा रही है।

आधुनिक समय में भी अनेक स्थानों पर विजयादशमी के दिन लोग अपने कार्यक्षेत्र से जुड़े उपकरणों और साधनों का पूजन करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अनुष्ठान के माध्यम से लोग अपने कार्यों में सफलता, सुरक्षा और समृद्धि की कामना करते हैं।

कुंडा के बेंती कोठी में आयोजित कार्यक्रम भी इसी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा से जुड़ा रहा। यहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न कराई गई और उपस्थित लोगों ने धार्मिक रीति-रिवाजों में भाग लिया।

बेंती कोठी का आयोजन बना चर्चा का विषय

प्रतापगढ़ जिले के कुंडा में आयोजित राजा भैया का शस्त्र पूजन विजयादशमी के अवसर पर चर्चा का प्रमुख विषय रहा। कार्यक्रम में 500 से अधिक लाइसेंसी असलहों को सजाए जाने, पारंपरिक वेशभूषा और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न होने ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ परिवार की पुरानी परंपराओं और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश भी सामने आया। राजा भैया ने अपने संबोधन में शस्त्र पूजन की ऐतिहासिक परंपरा का उल्लेख करते हुए युवाओं को भारतीय पहनावे और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहने की अपील की।

कार्यक्रम का समापन पूजा-अर्चना, आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं।

कुल मिलाकर, कुंडा की बेंती कोठी में आयोजित यह शस्त्र पूजन धार्मिक मान्यताओं, पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को केंद्र में रखने वाला आयोजन रहा। विजयादशमी के अवसर पर इसके माध्यम से भारतीय परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने और पारंपरिक वेशभूषा को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया।

रिपोर्ट: प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश