रामपुर रज़ा लाइब्रेरी में ‘द वर्ल्ड इज़ पोएट्री’ प्रदर्शनी का शुभारंभ, यासीन ख़ान की कला में दिखा कविता और संस्कृति का अनूठा संगम

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महिपाल सिंह

हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता रामपुर

रामपुर, उत्तर प्रदेश | 15 अक्टूबर 2026।

रामपुर की ऐतिहासिक रज़ा लाइब्रेरी एवं म्यूज़ियम में गुरुवार को कला, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत का सुंदर संगम देखने को मिला। यहां ‘द वर्ल्ड इज़ पोएट्री’ (The World Is Poetry) नामक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन मुरादाबाद मंडल की मंडलायुक्त श्रीमती संगीता सिंह (आईएएस) ने किया। लाइब्रेरी के दरबार हॉल में आयोजित यह प्रदर्शनी 15 अक्टूबर से 28 अक्टूबर 2026 तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी। इसका उद्देश्य लोगों को कविता के व्यापक अर्थ से परिचित कराना और यह समझाना है कि साहित्य केवल लिखे गए शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन, प्रकृति, भावनाओं तथा मानवीय अनुभवों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम भी है।

इस आयोजन में साहित्यप्रेमियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, कलाकारों और संस्कृति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए कला तथा साहित्य की दुनिया को करीब से समझने का अवसर उपलब्ध कराया गया है।

कविता और कला के माध्यम से दुनिया को देखने की नई दृष्टि

‘द वर्ल्ड इज़ पोएट्री’ प्रदर्शनी की मूल अवधारणा इस विचार पर आधारित है कि कविता जीवन के हर पहलू में मौजूद है। मनुष्य की भावनाएं, प्रकृति की सुंदरता, कल्पनाओं की उड़ान और समाज के विविध अनुभव किसी न किसी रूप में काव्यात्मक अभिव्यक्ति का हिस्सा बनते हैं। प्रदर्शनी इन्हीं विचारों को कलात्मक माध्यम से सामने लाने का प्रयास करती है।

यहां मिर्ज़ा ग़ालिब, रवीन्द्रनाथ टैगोर, पियर पाओलो पासोलिनी और फर्नांडो पेसोआ जैसे प्रसिद्ध साहित्यिक व्यक्तित्वों के विचारों एवं उद्धरणों को शामिल किया गया है। इन रचनाकारों की साहित्यिक दृष्टि के माध्यम से दर्शकों को भाषा, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं के बीच मौजूद गहरे संबंधों को समझने का अवसर मिलेगा।

प्रदर्शनी यह संदेश देती है कि कविता केवल पढ़ने या सुनने की विधा नहीं है। यह संसार को नए नजरिए से देखने, भावनाओं को महसूस करने और अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों के बीच संवाद स्थापित करने का माध्यम भी है।

रामपुर से पेरिस तक चित्रकार यासीन ख़ान का प्रेरक सफर

इस विशेष प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण भारतीय मूल के चित्रकार यासीन ख़ान की कलात्मक दृष्टि है। चित्रकला, अभिनय और फ्रांसीसी कविता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाले यासीन ख़ान की जीवन यात्रा रामपुर से शुरू होकर मुंबई, इटली और पेरिस तक पहुंची।

यासीन ख़ान का जन्म 20 अगस्त 1943 को उत्तर प्रदेश के रामपुर में राजद्वारा स्थित मस्जिद पीलू में हुआ था। बचपन और शुरुआती जीवन से जुड़ी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि ने उनकी रचनात्मक यात्रा को विशिष्ट दिशा दी। मुंबई में अपने शुरुआती दौर में उन्होंने उर्दू ग़ज़लें प्रकाशित कीं और कई पुरस्कार प्राप्त किए।

वर्ष 1961 में उनकी मुलाकात प्रसिद्ध इतालवी फिल्मकार एवं कवि पियर पाओलो पासोलिनी से हुई। इस परिचय ने उनके कलात्मक जीवन को नई प्रेरणा दी। आगे चलकर एल्सा मोरांते और अल्बेर्तो मोराविया जैसे प्रतिष्ठित साहित्यकारों से उनके संपर्क ने उनकी साहित्यिक एवं रचनात्मक समझ को और व्यापक बनाया।

वर्ष 1973 में पेरिस में रहते हुए यासीन ख़ान ने चित्रकला के माध्यम से कविता को दृश्य रूप में प्रस्तुत करने की विशिष्ट शैली विकसित की। उनकी कलाकृतियों में शब्दों, रंगों, रेखाओं और सजावटी तत्वों का ऐसा संयोजन दिखाई देता है, जो जीवन, प्रेम, कल्पना और अस्तित्व से जुड़े भावों को अभिव्यक्त करता है।

उनकी कला में भारतीय साहित्यिक परंपराओं के साथ यूरोपीय साहित्य और कला की प्रेरणाओं का भी प्रभाव दिखाई देता है। मिर्ज़ा ग़ालिब और रवीन्द्रनाथ टैगोर की संवेदनाओं से लेकर यूरोपीय रचनात्मक विचारों तक, उनकी कलाकृतियां विभिन्न सांस्कृतिक परंपराओं के बीच संवाद स्थापित करती हैं।

यासीन ख़ान की विशेषता यह है कि वे चित्रकला को केवल रंगों और आकृतियों का मेल नहीं मानते, बल्कि उसे कविता की दृश्यात्मक भाषा के रूप में प्रस्तुत करते हैं। उनके कार्यों के माध्यम से दर्शक महसूस कर सकते हैं कि साहित्य और चित्रकला अलग-अलग माध्यम होने के बावजूद एक ही भावना को विभिन्न तरीकों से व्यक्त कर सकते हैं।

मंडलायुक्त संगीता सिंह ने रज़ा लाइब्रेरी की वैश्विक पहचान पर दिया जोर

प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद मंडलायुक्त श्रीमती संगीता सिंह ने रामपुर रज़ा लाइब्रेरी की ऐतिहासिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इस संस्थान को एक जीवंत सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि इसकी पहचान देश और दुनिया में और मजबूत हो सके।

उन्होंने पुस्तकालय तथा रामपुर के सांस्कृतिक विकास को आगे बढ़ाने के लिए कई रचनात्मक सुझाव भी प्रस्तुत किए। इनमें मासिक कला विमर्श, वार्षिक रज़ा आर्ट फेस्टिवल, ‘ट्रेज़र्स ऑफ रज़ा’ कार्यक्रम श्रृंखला, शाम-ए-रामपुर, हेरिटेज ट्रेल्स और ‘रामपुर कन्वर्सेशन्स’ पॉडकास्ट जैसी पहलें शामिल हैं।

मंडलायुक्त ने रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी के सहयोग से ‘रज़ा लाइब्रेरी स्ट्रीट’ विकसित करने तथा विभिन्न संस्थानों के साथ साझेदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। इन प्रयासों से शहर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलने के साथ स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

इस अवसर पर उन्होंने अपनी पुस्तकों ‘वॉकिंग विद विंग्स एंड ए कैमरा’ और ‘फायर इन द सेमिनल ट्री’ को पुस्तकालय के संग्रह में शामिल किए जाने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने यासीन ख़ान की प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कला और कविता को मानवीय अनुभूतियों की प्रभावी अभिव्यक्ति बताया।

जिलाधिकारी ने बताया सांस्कृतिक संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम

कार्यक्रम में जिलाधिकारी श्री अजय कुमार द्विवेदी (आईएएस) ने रामपुर में विश्वस्तरीय पुस्तकालय और प्रतिभाशाली कलाकारों की मौजूदगी को गौरव का विषय बताया। उन्होंने प्रदर्शनी के आयोजन के लिए रज़ा लाइब्रेरी के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की।

जिलाधिकारी ने कहा कि विभिन्न भाषाओं, देशों और संस्कृतियों से जुड़े होने के बावजूद मानवीय भावनाओं में व्यापक समानता पाई जाती है। साहित्य और कला इसी समानता को समझने तथा लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने प्रदर्शनी को साहित्यिक उद्धरणों के संग्रह से आगे बढ़कर विचारों, भावनाओं और कलात्मक अभिव्यक्ति के आपसी संबंधों को समझने का एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उनके अनुसार, इस तरह के आयोजन आमजन को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ रचनात्मक सोच को भी प्रोत्साहित करते हैं।

अरुण कुमार सक्सेना ने जताया आभार

कार्यक्रम के मुख्य समन्वयक एवं वरिष्ठ तकनीकी रेस्टोरर श्री अरुण कुमार सक्सेना ने मंडलायुक्त श्रीमती संगीता सिंह और जिलाधिकारी श्री अजय कुमार द्विवेदी का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने रामपुर में जन्मे चित्रकार यासीन ख़ान की अंतरराष्ट्रीय कलात्मक यात्रा और उनके योगदान को शहर के लिए गर्व का विषय बताया।

श्री सक्सेना ने संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव एवं पुस्तकालय के निदेशक श्री इन्द्रजीत सिंह के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि उनके प्रोत्साहन और स्वीकृति से इस प्रदर्शनी की परिकल्पना को साकार करने में मदद मिली।

उन्होंने कहा कि रज़ा लाइब्रेरी एवं म्यूज़ियम का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण करना नहीं, बल्कि ज्ञान, साहित्य, कला और संस्कृति को आमजन तक पहुंचाना भी है। ‘द वर्ल्ड इज़ पोएट्री’ जैसी पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पुस्तकालय को ऐसा मंच बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जहां ऐतिहासिक संग्रहों के अध्ययन के साथ रचनात्मक विचारों का आदान-प्रदान भी हो सके।

कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती शाज़िया हसन ने किया। इस अवसर पर विद्वतजन, साहित्यप्रेमी, मीडिया प्रतिनिधि और सीआईएसएफ परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।

28 अक्टूबर तक देख सकेंगे प्रदर्शनी

रामपुर रज़ा लाइब्रेरी के दरबार हॉल में लगाई गई यह प्रदर्शनी 28 अक्टूबर 2026 तक आमजन के अवलोकन के लिए उपलब्ध रहेगी। पुस्तकालय की ओर से विद्यार्थियों, शोधार्थियों, कलाकारों और साहित्यप्रेमियों को इसमें शामिल होकर कला एवं कविता के विविध आयामों को समझने के लिए आमंत्रित किया गया है।

‘द वर्ल्ड इज़ पोएट्री’ रामपुर की सांस्कृतिक विरासत को नई रचनात्मक पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह प्रदर्शनी न केवल यासीन ख़ान की कलात्मक यात्रा को सामने लाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कविता और चित्रकला के माध्यम से विभिन्न भाषाओं, देशों और संस्कृतियों के बीच भावनात्मक संबंध स्थापित किए जा सकते हैं। ऐसे आयोजन रामपुर को साहित्य, कला और सांस्कृतिक संवाद के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में योगदान दे सकते हैं।

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रामपुर रज़ा लाइब्रेरी में ‘द वर्ल्ड इज़ पोएट्री’ प्रदर्शनी का शुभारंभ, यासीन ख़ान की कला में दिखा कविता और संस्कृति का अनूठा संगम

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 15, 2026

महिपाल सिंह

हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता रामपुर

रामपुर, उत्तर प्रदेश | 15 अक्टूबर 2026।

रामपुर की ऐतिहासिक रज़ा लाइब्रेरी एवं म्यूज़ियम में गुरुवार को कला, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत का सुंदर संगम देखने को मिला। यहां ‘द वर्ल्ड इज़ पोएट्री’ (The World Is Poetry) नामक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन मुरादाबाद मंडल की मंडलायुक्त श्रीमती संगीता सिंह (आईएएस) ने किया। लाइब्रेरी के दरबार हॉल में आयोजित यह प्रदर्शनी 15 अक्टूबर से 28 अक्टूबर 2026 तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी। इसका उद्देश्य लोगों को कविता के व्यापक अर्थ से परिचित कराना और यह समझाना है कि साहित्य केवल लिखे गए शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन, प्रकृति, भावनाओं तथा मानवीय अनुभवों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम भी है।

इस आयोजन में साहित्यप्रेमियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, कलाकारों और संस्कृति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए कला तथा साहित्य की दुनिया को करीब से समझने का अवसर उपलब्ध कराया गया है।

कविता और कला के माध्यम से दुनिया को देखने की नई दृष्टि

‘द वर्ल्ड इज़ पोएट्री’ प्रदर्शनी की मूल अवधारणा इस विचार पर आधारित है कि कविता जीवन के हर पहलू में मौजूद है। मनुष्य की भावनाएं, प्रकृति की सुंदरता, कल्पनाओं की उड़ान और समाज के विविध अनुभव किसी न किसी रूप में काव्यात्मक अभिव्यक्ति का हिस्सा बनते हैं। प्रदर्शनी इन्हीं विचारों को कलात्मक माध्यम से सामने लाने का प्रयास करती है।

यहां मिर्ज़ा ग़ालिब, रवीन्द्रनाथ टैगोर, पियर पाओलो पासोलिनी और फर्नांडो पेसोआ जैसे प्रसिद्ध साहित्यिक व्यक्तित्वों के विचारों एवं उद्धरणों को शामिल किया गया है। इन रचनाकारों की साहित्यिक दृष्टि के माध्यम से दर्शकों को भाषा, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं के बीच मौजूद गहरे संबंधों को समझने का अवसर मिलेगा।

प्रदर्शनी यह संदेश देती है कि कविता केवल पढ़ने या सुनने की विधा नहीं है। यह संसार को नए नजरिए से देखने, भावनाओं को महसूस करने और अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों के बीच संवाद स्थापित करने का माध्यम भी है।

रामपुर से पेरिस तक चित्रकार यासीन ख़ान का प्रेरक सफर

इस विशेष प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण भारतीय मूल के चित्रकार यासीन ख़ान की कलात्मक दृष्टि है। चित्रकला, अभिनय और फ्रांसीसी कविता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाले यासीन ख़ान की जीवन यात्रा रामपुर से शुरू होकर मुंबई, इटली और पेरिस तक पहुंची।

यासीन ख़ान का जन्म 20 अगस्त 1943 को उत्तर प्रदेश के रामपुर में राजद्वारा स्थित मस्जिद पीलू में हुआ था। बचपन और शुरुआती जीवन से जुड़ी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि ने उनकी रचनात्मक यात्रा को विशिष्ट दिशा दी। मुंबई में अपने शुरुआती दौर में उन्होंने उर्दू ग़ज़लें प्रकाशित कीं और कई पुरस्कार प्राप्त किए।

वर्ष 1961 में उनकी मुलाकात प्रसिद्ध इतालवी फिल्मकार एवं कवि पियर पाओलो पासोलिनी से हुई। इस परिचय ने उनके कलात्मक जीवन को नई प्रेरणा दी। आगे चलकर एल्सा मोरांते और अल्बेर्तो मोराविया जैसे प्रतिष्ठित साहित्यकारों से उनके संपर्क ने उनकी साहित्यिक एवं रचनात्मक समझ को और व्यापक बनाया।

वर्ष 1973 में पेरिस में रहते हुए यासीन ख़ान ने चित्रकला के माध्यम से कविता को दृश्य रूप में प्रस्तुत करने की विशिष्ट शैली विकसित की। उनकी कलाकृतियों में शब्दों, रंगों, रेखाओं और सजावटी तत्वों का ऐसा संयोजन दिखाई देता है, जो जीवन, प्रेम, कल्पना और अस्तित्व से जुड़े भावों को अभिव्यक्त करता है।

उनकी कला में भारतीय साहित्यिक परंपराओं के साथ यूरोपीय साहित्य और कला की प्रेरणाओं का भी प्रभाव दिखाई देता है। मिर्ज़ा ग़ालिब और रवीन्द्रनाथ टैगोर की संवेदनाओं से लेकर यूरोपीय रचनात्मक विचारों तक, उनकी कलाकृतियां विभिन्न सांस्कृतिक परंपराओं के बीच संवाद स्थापित करती हैं।

यासीन ख़ान की विशेषता यह है कि वे चित्रकला को केवल रंगों और आकृतियों का मेल नहीं मानते, बल्कि उसे कविता की दृश्यात्मक भाषा के रूप में प्रस्तुत करते हैं। उनके कार्यों के माध्यम से दर्शक महसूस कर सकते हैं कि साहित्य और चित्रकला अलग-अलग माध्यम होने के बावजूद एक ही भावना को विभिन्न तरीकों से व्यक्त कर सकते हैं।

मंडलायुक्त संगीता सिंह ने रज़ा लाइब्रेरी की वैश्विक पहचान पर दिया जोर

प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद मंडलायुक्त श्रीमती संगीता सिंह ने रामपुर रज़ा लाइब्रेरी की ऐतिहासिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इस संस्थान को एक जीवंत सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि इसकी पहचान देश और दुनिया में और मजबूत हो सके।

उन्होंने पुस्तकालय तथा रामपुर के सांस्कृतिक विकास को आगे बढ़ाने के लिए कई रचनात्मक सुझाव भी प्रस्तुत किए। इनमें मासिक कला विमर्श, वार्षिक रज़ा आर्ट फेस्टिवल, ‘ट्रेज़र्स ऑफ रज़ा’ कार्यक्रम श्रृंखला, शाम-ए-रामपुर, हेरिटेज ट्रेल्स और ‘रामपुर कन्वर्सेशन्स’ पॉडकास्ट जैसी पहलें शामिल हैं।

मंडलायुक्त ने रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी के सहयोग से ‘रज़ा लाइब्रेरी स्ट्रीट’ विकसित करने तथा विभिन्न संस्थानों के साथ साझेदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। इन प्रयासों से शहर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलने के साथ स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

इस अवसर पर उन्होंने अपनी पुस्तकों ‘वॉकिंग विद विंग्स एंड ए कैमरा’ और ‘फायर इन द सेमिनल ट्री’ को पुस्तकालय के संग्रह में शामिल किए जाने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने यासीन ख़ान की प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कला और कविता को मानवीय अनुभूतियों की प्रभावी अभिव्यक्ति बताया।

जिलाधिकारी ने बताया सांस्कृतिक संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम

कार्यक्रम में जिलाधिकारी श्री अजय कुमार द्विवेदी (आईएएस) ने रामपुर में विश्वस्तरीय पुस्तकालय और प्रतिभाशाली कलाकारों की मौजूदगी को गौरव का विषय बताया। उन्होंने प्रदर्शनी के आयोजन के लिए रज़ा लाइब्रेरी के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की।

जिलाधिकारी ने कहा कि विभिन्न भाषाओं, देशों और संस्कृतियों से जुड़े होने के बावजूद मानवीय भावनाओं में व्यापक समानता पाई जाती है। साहित्य और कला इसी समानता को समझने तथा लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने प्रदर्शनी को साहित्यिक उद्धरणों के संग्रह से आगे बढ़कर विचारों, भावनाओं और कलात्मक अभिव्यक्ति के आपसी संबंधों को समझने का एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उनके अनुसार, इस तरह के आयोजन आमजन को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ रचनात्मक सोच को भी प्रोत्साहित करते हैं।

अरुण कुमार सक्सेना ने जताया आभार

कार्यक्रम के मुख्य समन्वयक एवं वरिष्ठ तकनीकी रेस्टोरर श्री अरुण कुमार सक्सेना ने मंडलायुक्त श्रीमती संगीता सिंह और जिलाधिकारी श्री अजय कुमार द्विवेदी का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने रामपुर में जन्मे चित्रकार यासीन ख़ान की अंतरराष्ट्रीय कलात्मक यात्रा और उनके योगदान को शहर के लिए गर्व का विषय बताया।

श्री सक्सेना ने संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव एवं पुस्तकालय के निदेशक श्री इन्द्रजीत सिंह के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि उनके प्रोत्साहन और स्वीकृति से इस प्रदर्शनी की परिकल्पना को साकार करने में मदद मिली।

उन्होंने कहा कि रज़ा लाइब्रेरी एवं म्यूज़ियम का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण करना नहीं, बल्कि ज्ञान, साहित्य, कला और संस्कृति को आमजन तक पहुंचाना भी है। ‘द वर्ल्ड इज़ पोएट्री’ जैसी पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पुस्तकालय को ऐसा मंच बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जहां ऐतिहासिक संग्रहों के अध्ययन के साथ रचनात्मक विचारों का आदान-प्रदान भी हो सके।

कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती शाज़िया हसन ने किया। इस अवसर पर विद्वतजन, साहित्यप्रेमी, मीडिया प्रतिनिधि और सीआईएसएफ परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।

28 अक्टूबर तक देख सकेंगे प्रदर्शनी

रामपुर रज़ा लाइब्रेरी के दरबार हॉल में लगाई गई यह प्रदर्शनी 28 अक्टूबर 2026 तक आमजन के अवलोकन के लिए उपलब्ध रहेगी। पुस्तकालय की ओर से विद्यार्थियों, शोधार्थियों, कलाकारों और साहित्यप्रेमियों को इसमें शामिल होकर कला एवं कविता के विविध आयामों को समझने के लिए आमंत्रित किया गया है।

‘द वर्ल्ड इज़ पोएट्री’ रामपुर की सांस्कृतिक विरासत को नई रचनात्मक पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह प्रदर्शनी न केवल यासीन ख़ान की कलात्मक यात्रा को सामने लाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कविता और चित्रकला के माध्यम से विभिन्न भाषाओं, देशों और संस्कृतियों के बीच भावनात्मक संबंध स्थापित किए जा सकते हैं। ऐसे आयोजन रामपुर को साहित्य, कला और सांस्कृतिक संवाद के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में योगदान दे सकते हैं।