गाजा संकट के बीच UNRWA को लेकर गुटेरेस की चिंता, सदस्य देशों से तत्काल सहयोग की अपील

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न्यूयॉर्क, 25 सितंबर 2026। मध्य पूर्व में जारी अस्थिर परिस्थितियों और फिलिस्तीनी शरणार्थियों की बढ़ती मानवीय जरूरतों के बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान आयोजित एक मंत्रीस्तरीय बैठक में गुटेरेस ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में UNRWA की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन आर्थिक और परिचालन संबंधी दबावों के कारण एजेंसी की काम करने की क्षमता गंभीर संकट में है।

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गुटेरेस ने सदस्य देशों से एजेंसी को राजनीतिक और वित्तीय समर्थन देने की अपील की है। उनका कहना है कि फिलिस्तीनी शरणार्थियों को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, राहत और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में UNRWA की लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे समय में जब गाजा और पश्चिमी तट सहित क्षेत्र के कई हिस्सों में मानवीय जरूरतें बढ़ी हुई हैं, एजेंसी के सामने वित्तीय कमी और संचालन संबंधी बाधाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं।

UNRWA की भूमिका पर जोर

UNRWA की स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1949 में की थी। एजेंसी का कार्य फिलिस्तीनी शरणार्थियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, राहत और सामाजिक सेवाओं सहित विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराना है। वर्तमान में इसके संचालन क्षेत्र गाजा, पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम के अलावा जॉर्डन, लेबनान और सीरिया हैं।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, UNRWA केवल आपातकालीन राहत तक सीमित संस्था नहीं है। इसके माध्यम से लंबे समय से स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों, सामाजिक सहायता और अन्य सेवाओं का संचालन किया जाता रहा है। इसी वजह से गुटेरेस ने इसे क्षेत्र में मानवीय सहायता के साथ-साथ स्थिरता से जुड़ी एक महत्वपूर्ण उपस्थिति के रूप में रेखांकित किया।

25 सितंबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, गुटेरेस ने कहा कि एजेंसी पर असाधारण दबाव है और उसे करीब 10 करोड़ डॉलर की वित्तीय कमी का सामना करना पड़ रहा है। उनके मुताबिक यह स्थिति UNRWA की सेवाओं को प्रभावित कर सकती है और सदस्य देशों की तत्काल भूमिका आवश्यक है।

गाजा में मानवीय जरूरतें बनी हुई हैं

गुटेरेस ने गाजा की परिस्थितियों को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार, सहायता पहुंचने में कुछ सुधार के बावजूद वहां मानवीय स्थिति अभी भी बेहद कठिन बनी हुई है। भोजन, आश्रय और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत के बीच राहत एजेंसियों के लिए लगातार काम करना चुनौतीपूर्ण है।

UNRWA के कार्यवाहक आयुक्त-जनरल क्रिश्चियन सॉन्डर्स के अनुसार, एजेंसी के हजारों कर्मचारी गाजा में लोगों तक सहायता पहुंचाने में लगे हुए हैं। रिपोर्ट में एजेंसी की चिकित्सा सेवाओं और मानवीय सहायता गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही पश्चिमी तट में विस्थापन और मानवीय जरूरतों के बढ़ने की बात सामने आई है।

संयुक्त राष्ट्र से संबंधित पूर्व रिपोर्टों में भी यह बताया गया है कि गाजा में मानवीय सहायता व्यवस्था में UNRWA की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 2025 के एक UNRWA आपातकालीन आकलन में एजेंसी ने गाजा और पश्चिमी तट में बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोगों के लिए सहायता की आवश्यकता रेखांकित की थी।

वित्तीय संकट बनी बड़ी चुनौती

UNRWA के सामने वित्तीय संकट कोई नया विषय नहीं है। एजेंसी लंबे समय से स्वैच्छिक योगदान पर काफी हद तक निर्भर रही है। बढ़ती मानवीय जरूरतों और सीमित वित्तीय संसाधनों के कारण इसके कार्यक्रमों पर दबाव बना है। एजेंसी के आधिकारिक दस्तावेजों में भी कई वर्षों से वित्तीय कमी की समस्या का उल्लेख किया गया है।

गुटेरेस के ताजा बयान में यही वित्तीय चुनौती एक बार फिर प्रमुखता से सामने आई है। उनका संदेश सदस्य देशों से पर्याप्त और निरंतर सहयोग सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। यदि वित्तीय संसाधन सीमित रहते हैं तो शिक्षा, स्वास्थ्य और राहत जैसे कार्यक्रमों को संचालित करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।

UNRWA को लेकर राजनीतिक विवाद भी जारी

UNRWA की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक मतभेद भी बने हुए हैं। इजरायल ने एजेंसी और उसके कुछ कर्मचारियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। 2024 में कुछ प्रमुख पश्चिमी दाता देशों ने आरोपों के बाद UNRWA की फंडिंग अस्थायी रूप से रोक दी थी, हालांकि बाद में कई देशों ने अपने फैसलों में बदलाव किया। इन आरोपों और एजेंसी के संचालन को लेकर जांच तथा सुधार की मांगों के बीच UNRWA ने अपनी जवाबदेही और तटस्थता से संबंधित प्रक्रियाओं पर भी काम किया है।

UNRWA के कार्यवाहक प्रमुख ने बैठक में बताया कि स्वतंत्र तटस्थता समीक्षा की 50 में से 41 सिफारिशें पूरी तरह लागू की जा चुकी हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन में बदलाव का अर्थ उसके संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा निर्धारित मूल जनादेश में बदलाव नहीं है।

पूर्वी यरुशलम में एजेंसी की गतिविधियों पर असर

UNRWA की गतिविधियों पर पश्चिमी तट और विशेष रूप से पूर्वी यरुशलम में भी दबाव की बात सामने आई है। अगस्त 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने पूर्वी यरुशलम स्थित UNRWA के कलंदिया प्रशिक्षण केंद्र में इजरायली अधिकारियों के प्रवेश और वहां किए गए कार्यों पर आपत्ति जताई थी। संयुक्त राष्ट्र के बयान के अनुसार, इससे वहां चल रहे व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई थी।

ताजा बैठक में भी एजेंसी के परिसरों, कर्मचारियों और संचालन को लेकर चिंता व्यक्त की गई। गुटेरेस ने कहा कि मानवीय सहायता से जुड़े संस्थानों को अपना काम करने के लिए आवश्यक परिस्थितियां मिलनी चाहिए।

सदस्य देशों से वित्तीय और राजनीतिक समर्थन की मांग

बैठक में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने UNRWA के भविष्य और फिलिस्तीनी शरणार्थियों को मिलने वाली सेवाओं पर चर्चा की। जॉर्डन, स्पेन और ब्राजील सहित कई देशों के प्रतिनिधियों ने एजेंसी के काम को जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि अलग-अलग देशों के राजनीतिक दृष्टिकोण और UNRWA को लेकर उनकी नीतियां अलग हो सकती हैं, बैठक का प्रमुख मुद्दा एजेंसी की वित्तीय स्थिति और मानवीय सेवाओं की निरंतरता रहा।

संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा UNRWA के जनादेश को पहले भी समर्थन दिया गया है। दिसंबर 2024 में महासभा ने एजेंसी के जनादेश के समर्थन में एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें सदस्य देशों और संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं से उसके कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने में सहयोग की बात कही गई थी।

आगे क्या है चुनौती?

आने वाले समय में UNRWA के सामने तीन प्रमुख चुनौतियां दिखाई दे रही हैं—पर्याप्त वित्तीय संसाधन जुटाना, कर्मचारियों और परिसरों की सुरक्षा तथा उन क्षेत्रों तक मानवीय सहायता पहुंचाना जहां जरूरत सबसे अधिक है। इसके साथ ही एजेंसी को लेकर चल रहे राजनीतिक विवादों और आरोपों के बीच जवाबदेही तथा तटस्थता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण विषय रहेगा।

गुटेरेस की अपील ऐसे समय सामने आई है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र चल रहा है और मध्य पूर्व की स्थिति अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 2026 की उच्चस्तरीय सप्ताह की गतिविधियां 18 से 28 सितंबर तक आयोजित हो रही हैं।

कुल मिलाकर, UNRWA को लेकर मौजूदा बहस केवल एक संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के बजट का विषय नहीं है। इसके केंद्र में उन लाखों फिलिस्तीनी शरणार्थियों तक शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय सहायता पहुंचाने का सवाल भी है जो दशकों से क्षेत्रीय संघर्ष और अस्थिरता के बीच रह रहे हैं। गुटेरेस की ताजा अपील से स्पष्ट है कि एजेंसी के भविष्य, उसके वित्तीय संसाधनों और उसके संचालन को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने महत्वपूर्ण निर्णय और जिम्मेदारियां बनी हुई हैं।

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गाजा संकट के बीच UNRWA को लेकर गुटेरेस की चिंता, सदस्य देशों से तत्काल सहयोग की अपील

लेखक:Editor Anoop Singh | प्रकाशित:सितम्बर 25, 2026

न्यूयॉर्क, 25 सितंबर 2026। मध्य पूर्व में जारी अस्थिर परिस्थितियों और फिलिस्तीनी शरणार्थियों की बढ़ती मानवीय जरूरतों के बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान आयोजित एक मंत्रीस्तरीय बैठक में गुटेरेस ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में UNRWA की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन आर्थिक और परिचालन संबंधी दबावों के कारण एजेंसी की काम करने की क्षमता गंभीर संकट में है।

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गुटेरेस ने सदस्य देशों से एजेंसी को राजनीतिक और वित्तीय समर्थन देने की अपील की है। उनका कहना है कि फिलिस्तीनी शरणार्थियों को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, राहत और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में UNRWA की लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे समय में जब गाजा और पश्चिमी तट सहित क्षेत्र के कई हिस्सों में मानवीय जरूरतें बढ़ी हुई हैं, एजेंसी के सामने वित्तीय कमी और संचालन संबंधी बाधाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं।

UNRWA की भूमिका पर जोर

UNRWA की स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1949 में की थी। एजेंसी का कार्य फिलिस्तीनी शरणार्थियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, राहत और सामाजिक सेवाओं सहित विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराना है। वर्तमान में इसके संचालन क्षेत्र गाजा, पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम के अलावा जॉर्डन, लेबनान और सीरिया हैं।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, UNRWA केवल आपातकालीन राहत तक सीमित संस्था नहीं है। इसके माध्यम से लंबे समय से स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों, सामाजिक सहायता और अन्य सेवाओं का संचालन किया जाता रहा है। इसी वजह से गुटेरेस ने इसे क्षेत्र में मानवीय सहायता के साथ-साथ स्थिरता से जुड़ी एक महत्वपूर्ण उपस्थिति के रूप में रेखांकित किया।

25 सितंबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, गुटेरेस ने कहा कि एजेंसी पर असाधारण दबाव है और उसे करीब 10 करोड़ डॉलर की वित्तीय कमी का सामना करना पड़ रहा है। उनके मुताबिक यह स्थिति UNRWA की सेवाओं को प्रभावित कर सकती है और सदस्य देशों की तत्काल भूमिका आवश्यक है।

गाजा में मानवीय जरूरतें बनी हुई हैं

गुटेरेस ने गाजा की परिस्थितियों को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार, सहायता पहुंचने में कुछ सुधार के बावजूद वहां मानवीय स्थिति अभी भी बेहद कठिन बनी हुई है। भोजन, आश्रय और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत के बीच राहत एजेंसियों के लिए लगातार काम करना चुनौतीपूर्ण है।

UNRWA के कार्यवाहक आयुक्त-जनरल क्रिश्चियन सॉन्डर्स के अनुसार, एजेंसी के हजारों कर्मचारी गाजा में लोगों तक सहायता पहुंचाने में लगे हुए हैं। रिपोर्ट में एजेंसी की चिकित्सा सेवाओं और मानवीय सहायता गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही पश्चिमी तट में विस्थापन और मानवीय जरूरतों के बढ़ने की बात सामने आई है।

संयुक्त राष्ट्र से संबंधित पूर्व रिपोर्टों में भी यह बताया गया है कि गाजा में मानवीय सहायता व्यवस्था में UNRWA की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 2025 के एक UNRWA आपातकालीन आकलन में एजेंसी ने गाजा और पश्चिमी तट में बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोगों के लिए सहायता की आवश्यकता रेखांकित की थी।

वित्तीय संकट बनी बड़ी चुनौती

UNRWA के सामने वित्तीय संकट कोई नया विषय नहीं है। एजेंसी लंबे समय से स्वैच्छिक योगदान पर काफी हद तक निर्भर रही है। बढ़ती मानवीय जरूरतों और सीमित वित्तीय संसाधनों के कारण इसके कार्यक्रमों पर दबाव बना है। एजेंसी के आधिकारिक दस्तावेजों में भी कई वर्षों से वित्तीय कमी की समस्या का उल्लेख किया गया है।

गुटेरेस के ताजा बयान में यही वित्तीय चुनौती एक बार फिर प्रमुखता से सामने आई है। उनका संदेश सदस्य देशों से पर्याप्त और निरंतर सहयोग सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। यदि वित्तीय संसाधन सीमित रहते हैं तो शिक्षा, स्वास्थ्य और राहत जैसे कार्यक्रमों को संचालित करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।

UNRWA को लेकर राजनीतिक विवाद भी जारी

UNRWA की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक मतभेद भी बने हुए हैं। इजरायल ने एजेंसी और उसके कुछ कर्मचारियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। 2024 में कुछ प्रमुख पश्चिमी दाता देशों ने आरोपों के बाद UNRWA की फंडिंग अस्थायी रूप से रोक दी थी, हालांकि बाद में कई देशों ने अपने फैसलों में बदलाव किया। इन आरोपों और एजेंसी के संचालन को लेकर जांच तथा सुधार की मांगों के बीच UNRWA ने अपनी जवाबदेही और तटस्थता से संबंधित प्रक्रियाओं पर भी काम किया है।

UNRWA के कार्यवाहक प्रमुख ने बैठक में बताया कि स्वतंत्र तटस्थता समीक्षा की 50 में से 41 सिफारिशें पूरी तरह लागू की जा चुकी हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन में बदलाव का अर्थ उसके संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा निर्धारित मूल जनादेश में बदलाव नहीं है।

पूर्वी यरुशलम में एजेंसी की गतिविधियों पर असर

UNRWA की गतिविधियों पर पश्चिमी तट और विशेष रूप से पूर्वी यरुशलम में भी दबाव की बात सामने आई है। अगस्त 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने पूर्वी यरुशलम स्थित UNRWA के कलंदिया प्रशिक्षण केंद्र में इजरायली अधिकारियों के प्रवेश और वहां किए गए कार्यों पर आपत्ति जताई थी। संयुक्त राष्ट्र के बयान के अनुसार, इससे वहां चल रहे व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई थी।

ताजा बैठक में भी एजेंसी के परिसरों, कर्मचारियों और संचालन को लेकर चिंता व्यक्त की गई। गुटेरेस ने कहा कि मानवीय सहायता से जुड़े संस्थानों को अपना काम करने के लिए आवश्यक परिस्थितियां मिलनी चाहिए।

सदस्य देशों से वित्तीय और राजनीतिक समर्थन की मांग

बैठक में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने UNRWA के भविष्य और फिलिस्तीनी शरणार्थियों को मिलने वाली सेवाओं पर चर्चा की। जॉर्डन, स्पेन और ब्राजील सहित कई देशों के प्रतिनिधियों ने एजेंसी के काम को जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि अलग-अलग देशों के राजनीतिक दृष्टिकोण और UNRWA को लेकर उनकी नीतियां अलग हो सकती हैं, बैठक का प्रमुख मुद्दा एजेंसी की वित्तीय स्थिति और मानवीय सेवाओं की निरंतरता रहा।

संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा UNRWA के जनादेश को पहले भी समर्थन दिया गया है। दिसंबर 2024 में महासभा ने एजेंसी के जनादेश के समर्थन में एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें सदस्य देशों और संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं से उसके कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने में सहयोग की बात कही गई थी।

आगे क्या है चुनौती?

आने वाले समय में UNRWA के सामने तीन प्रमुख चुनौतियां दिखाई दे रही हैं—पर्याप्त वित्तीय संसाधन जुटाना, कर्मचारियों और परिसरों की सुरक्षा तथा उन क्षेत्रों तक मानवीय सहायता पहुंचाना जहां जरूरत सबसे अधिक है। इसके साथ ही एजेंसी को लेकर चल रहे राजनीतिक विवादों और आरोपों के बीच जवाबदेही तथा तटस्थता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण विषय रहेगा।

गुटेरेस की अपील ऐसे समय सामने आई है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र चल रहा है और मध्य पूर्व की स्थिति अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 2026 की उच्चस्तरीय सप्ताह की गतिविधियां 18 से 28 सितंबर तक आयोजित हो रही हैं।

कुल मिलाकर, UNRWA को लेकर मौजूदा बहस केवल एक संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के बजट का विषय नहीं है। इसके केंद्र में उन लाखों फिलिस्तीनी शरणार्थियों तक शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय सहायता पहुंचाने का सवाल भी है जो दशकों से क्षेत्रीय संघर्ष और अस्थिरता के बीच रह रहे हैं। गुटेरेस की ताजा अपील से स्पष्ट है कि एजेंसी के भविष्य, उसके वित्तीय संसाधनों और उसके संचालन को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने महत्वपूर्ण निर्णय और जिम्मेदारियां बनी हुई हैं।